# अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर ओपी राजभर का तीखा हमला, राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर लगाए गंभीर आरोप

> सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के पीडीए नारे पर तंज कसते हुए राज्यसभा टिकट वितरण और डिंपल यादव के पुराने चुनाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-ke-pidie-phormule-para-op-rajbhar-ka-tikha-hamala-rajya-sabha-ummidavaron-ko-lekara-lagae-gnbhira-aropa-41412 · **Language:** Hindi
**Tags:** ओपी राजभर, अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी, एसबीएसपी, राज्यसभा चुनाव, पीडीए फॉर्मूला, उत्तर प्रदेश राजनीति, डिंपल यादव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जहां पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए के सामाजिक समीकरण के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने इस फॉर्मूले पर सीधा हमला बोला है। राजभर ने समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित किए गए राज्यसभा उम्मीदवारों के संदर्भ में पीडीए का एक अलग ही अर्थ बताते हुए दावा किया कि इसमें से वास्तविक सामाजिक वर्ग पूरी तरह नदारद हैं।

## राज्यसभा उम्मीदवारी के जरिए नए अर्थ गढ़ने का दावा
सपा द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए धनराज नथवानी को प्रत्याशी बनाए जाने के कदम को ढाल बनाते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विपक्षी दल अपनी सुविधानुसार समय-समय पर अपने नारों की परिभाषा बदलता रहता है। राजभर के मुताबिक, इस बार के घटनाक्रम में पीडीए के तीन अक्षरों का मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी बन चुका है। उन्होंने कहा कि पहले अक्षर 'पी' से परिवार का प्रतिनिधित्व प्रोफेसर रामगोपाल यादव के रूप में सामने आ गया है, जबकि दूसरे अक्षर 'डी' से धनीराम या दौलतमंद का स्थान धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाकर भर दिया गया है।

राजभर ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि अब केवल तीसरा अक्षर 'ए' बाकी रह गया है। उनके अनुसार, अगर पार्टी अब किसी तीसरे उम्मीदवार के तौर पर किसी अपराधी को तलाश कर मैदान में उतार दे, तो उनका यह पूरा नया समीकरण औपचारिक रूप से मुकम्मल हो जाएगा। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि परिवार और धनकुबेर के नाम तय हो चुके हैं, लिहाजा अब बची हुई औपचारिक घोषणा भी जल्द कर दी जानी चाहिए।

## दलित, पिछड़े और मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर सवाल
एसबीएसपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के मौजूदा राजनीतिक कदमों में मूल पीडीए वर्ग कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पूछा कि इस पूरी प्रक्रिया में ब्राह्मण, पिछड़ा वर्ग, दलित और मुसलमान कहां छूट गए। राजभर का कहना था कि जमीनी स्तर पर जिन वर्गों के नाम पर राजनीति की जा रही है, वे फैसले लेने के मुख्य मंच से पूरी तरह गायब हैं।

इसी क्रम में उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम सांसदों और विधायकों की भूमिका पर भी तीखा प्रहार किया। राजभर ने कहा कि पार्टी के भीतर मौजूद अल्पसंख्यक जनप्रतिनिधियों में अखिलेश यादव से सीधे सवाल पूछने का साहस नहीं दिखता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नेताओं को खुलकर यह बात रखनी चाहिए थी कि रामगोपाल यादव जैसे नेता उन्हीं के समर्थकों के वोट से सदन तक पहुंचते हैं और कार्यकर्ता ही विधायकों को जिताने का काम करते हैं। ऐसे में उच्च सदन में प्रतिनिधित्व पाना अल्पसंख्यक वर्ग का सीधा अधिकार बनता है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के सामने कोई भी आवाज उठाने को तैयार नहीं है।

## कन्नौज उपचुनाव और निर्विरोध निर्वाचन का पुराना प्रसंग
अपने बयानों के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने साल 2012 के चुनावी घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने डिंपल यादव के निर्विरोध सांसद चुने जाने के दौर को याद करते हुए उस समय की चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए। राजभर ने सवाल खड़ा किया कि कन्नौज लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान डिंपल यादव आखिरकार निर्विरोध कैसे जीत पाई थीं।

राजभर ने आरोप मढ़ते हुए कहा कि उस समय बाहुबलियों और माफिया तत्वों का सहारा लेकर नामांकन दाखिल करने वाले अन्य प्रत्याशियों को कथित तौर पर उठवा लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि विरोधी उम्मीदवारों के पर्चे दबाव बनाकर जबरन वापस करवाए गए थे, जिसके बाद ही वह निर्विरोध निर्वाचन संभव हो सका था।

## पंडितों और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की मांग
सपा की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए राजभर ने टिप्पणी की कि यह दल वास्तव में किसी भी वर्ग का हितैषी नहीं है, चाहे वह अल्पसंख्यक हों, पिछड़े हों, दलित हों या फिर सामान्य वर्ग के नागरिक हों। उन्होंने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि इस समीकरण में 'पी' से पंडित समाज का प्रतिनिधित्व कहां चला गया। राजभर ने कहा कि अगर पार्टी सामाजिक न्याय की बात करती है, तो कम से कम एक पंडित को भी राज्यसभा भेजने का फैसला लिया जाना चाहिए था। उन्होंने दोहराया कि पार्टी का मौजूदा आचरण उसके घोषित सामाजिक नारों के बिल्कुल विपरीत है।

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक बयानबाजी का सीधा असर उत्तर प्रदेश की चुनावी गोलबंदी और सामाजिक समीकरणों पर देखने को मिल सकता है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राजनीतिक दलों के बीच जातिगत समीकरणों को लेकर बहस तेज होगी। इससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो सकती हैं।
- **समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर:** टिकट वितरण और आंतरिक प्रतिनिधित्व को लेकर कार्यकर्ताओं में सवाल खड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में नेतृत्व को सामाजिक संतुलन साबित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।
- **गठबंधन राजनीति पर:** एनडीए और विपक्षी खेमे के बीच जुबानी वार तेज होने से क्षेत्रीय दलों के रुख स्पष्ट होंगे। पिछड़े और दलित मतों को अपने पाले में खींचने की होड़ आने वाले महीनों में और बढ़ेगी।
- **सामान्य मतदाता के लिए:** चुनावी वादों और नारों के बीच वास्तविक नीतिगत मुद्दों के बजाय सामाजिक समीकरणों पर जोर रहेगा। जनता को यह परखने का मौका मिलेगा कि कौन सा दल अपने नारों के प्रति कितना गंभीर है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीतिक तैयारियों और हालिया राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

- **राज्यसभा उम्मीदवारी का फैसला:** समाजवादी पार्टी द्वारा रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी को उच्च सदन भेजने के फैसले ने विरोधी दलों को सीधा मुद्दा दे दिया। विपक्षी नेताओं ने इसे सामाजिक न्याय के बजाय परिवारवाद और पूंजीपतियों की प्राथमिकता के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया।
- **पीडीए रणनीति की काट:** अखिलेश यादव द्वारा गढ़े गए पीडीए समीकरण ने पिछले चुनावों में भाजपा गठबंधन को नुकसान पहुंचाया था। सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दल अब इसी नारे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर इसके प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
- **राजभर की राजनीतिक स्थिति:** एसबीएसपी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर लगातार अति पिछड़ों और वंचितों के प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। सपा के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार करके वे अपनी प्रासंगिकता और जनाधार को मजबूत बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. ओम प्रकाश राजभर ने पीडीए का नया अर्थ क्या बताया है?
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के लिए पीडीए का मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी हो गया है।

### 2. राजभर ने राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि रामगोपाल यादव परिवार का और धनराज नथवानी दौलतमंद का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि तीसरा पद किसी अपराधी के लिए बाकी है।

### 3. सपा के मुस्लिम नेताओं पर राजभर ने क्या आरोप लगाए?
राजभर ने कहा कि सपा के मुस्लिम सांसदों और विधायकों में पार्टी प्रमुख से अपने हक और प्रतिनिधित्व के लिए सवाल करने की हिम्मत नहीं है।

### 4. कन्नौज उपचुनाव को लेकर राजभर ने क्या दावा किया?
उन्होंने आरोप लगाया कि 2012 में डिंपल यादव की निर्विरोध जीत अन्य प्रत्याशियों के पर्चे जबरन वापस करवाकर हासिल की गई थी।

### 5. राजभर ने किस समाज के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाया?
उन्होंने पूछा कि पीडीए फॉर्मूले में ब्राह्मण समाज और पंडितों का प्रतिनिधित्व कहां गायब हो गया है।

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