# आकृति चौधरी एनएसए मामले में सुप्रीम कोर्ट की राहत, क्या सिर्फ नोएडा डीएम मेधा रूपम जिम्मेदार?

> सुप्रीम कोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बहुस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद लिए गए फैसले में गौतमबुद्ध नगर की डीएम को अकेले जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/akriti-chaudhari-nsa-mamale-men-supreme-court-ki-rahata-kya-sirpha-noida-dm-medha-roopam-jimmedara-37091 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, मेधा रूपम, आकृति चौधरी, एनएसए, इलाहाबाद हाईकोर्ट, नोएडा डीएम, उत्तर प्रदेश

गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम को छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत की गई हिरासत के मामले में शीर्ष अदालत से बड़ी मौखिक राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रशासनिक आदेश को जारी करने से पहले कई अधिकारियों की गहन जांच और सहमति शामिल थी, तो केवल जिले की जिलाधिकारी को ही इसका एकमात्र जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता। न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

## हाईकोर्ट के आदेश और वेतन कटौती की चुनौती
इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश से हुई थी। हाईकोर्ट ने छात्रा आकृति चौधरी को एनएसए के तहत हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया था। इसके साथ ही अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया था कि डीएम मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये काटकर पीड़िता आकृति चौधरी को मुआवजे के तौर पर दिए जाएं। व्यक्तिगत वेतन से कटौती और जिम्मेदारी थोपे जाने के इसी निर्देश को डीएम मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर कर चुनौती दी है।

## प्रशासनिक जांच के पांच स्तर और अदालत में दलीलें
शीर्ष अदालत में उत्तर प्रदेश सरकार की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ को पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिरासत में लेने का कदम जिलाधिकारी द्वारा अचानक या सीधे अपने स्तर पर नहीं उठाया गया था। पुलिस तंत्र के भीतर पहले थाना प्रभारी यानी एसएचओ, फिर पुलिस उपायुक्त यानी डीसीपी और उसके बाद पुलिस कमिश्नर के स्तर पर पूरी रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसके अतिरिक्त, कानून के प्रावधानों के अनुरूप गठित सलाहकार बोर्ड ने भी इस पूरे प्रकरण की समीक्षा की थी।

मेधा रूपम की तरफ से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि डीएम के हस्ताक्षर से पहले यह फाइल पांच स्तरों की औपचारिक प्रक्रिया से गुजरी थी। जिलाधिकारी का मुख्य दायित्व प्राप्त कानूनी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेने का था। इन तर्कों पर सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि जब एक फैसला नीचे से ऊपर तक कई अधिकारियों की श्रृंखला से होकर गुजरा हो, तो अकेले डीएम को अलग कर 5 लाख रुपये के जुर्माने का भागीदार बनाना उचित नहीं होगा।

## प्रशासनिक पृष्ठभूमि और मेधा रूपम का सफर
मेधा रूपम गौतमबुद्ध नगर जिले में बतौर पहली महिला जिलाधिकारी के रूप में तैनात हैं। वह वर्ष 2014 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस अधिकारी हैं। मूल रूप से आगरा में जन्मीं मेधा रूपम ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा केरल से पूरी की और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2014 की संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की थी। मौजूदा जिम्मेदारी संभालने से पूर्व उन्होंने उत्तर प्रदेश के मेरठ, बरेली, हापुड़ और कासगंज जनपदों में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर सेवाएं दी हैं।

## इसका आप पर असर
यह अदालती टिप्पणी और आगामी फैसला सरकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही के मानकों को स्पष्ट करता है।

- **प्रशासनिक स्तर पर:** बहुस्तरीय जांच प्रक्रियाओं के तहत पारित आदेशों में व्यक्तिगत अफसरों के वेतन से हर्जाना वसूलने की प्रवृत्ति पर रोक की उम्मीद बंधी है। इससे विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने वाले अधिकारियों के दायित्वों और कानूनी सुरक्षा की सीमा तय होगी।
- **नागरिक अधिकारों पर:** निवारक हिरासत और कड़े कानूनों के तहत की जाने वाली पुलिस रिपोर्टिंग की जवाबदेही पर सख्त निगरानी बढ़ेगी। यदि पूरी प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण साबित होती है तो केवल एक हस्ताक्षरकर्ता पर सारा दोष मढ़ने के बजाय पूरे तंत्र की खामियों की समीक्षा होगी।
- **गौतमबुद्ध नगर में:** स्थानीय प्रशासन का शीर्ष नेतृत्व कानूनी अनिश्चितता से राहत महसूस कर सकता है। इससे जिले में प्रशासनिक कामकाज और कानून व्यवस्था से जुड़े सामान्य फैसलों की गति सुचारू रहेगी।
- **मुआवजा प्रक्रिया पर:** गलत हिरासत के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा राज्य के कोष से दिया जाए या संबंधित अधिकारी के निजी वेतन से, इस पर अंतिम स्थिति साफ होगी। इससे भविष्य में निवारक हिरासत कानून के तहत कानूनी चुनौतियों की रूपरेखा तय होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी विवाद तब उत्पन्न हुआ जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक छात्रा की हिरासत को निरस्त करते हुए प्रशासनिक अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन से हर्जाने का आदेश सुनाया। इस फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी ने शीर्ष अदालत का रुख किया।

- **हिरासत आदेश का निरस्तीकरण:** इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर लगाए गए एनएसए को अनुचित मानकर खारिज कर दिया था। इसके बाद अदालत ने जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये की कटौती कर मुआवजा देने का कड़ा निर्देश जारी किया।
- **प्रशासनिक शृंखला की दलील:** राज्य सरकार और डीएम के वकीलों ने बताया कि यह कदम अकेले डीएम का व्यक्तिगत फैसला नहीं था। स्थानीय पुलिस स्टेशन से लेकर एसीपी, डीसीपी, पुलिस कमिश्नर और सलाहकार बोर्ड की समीक्षा के बाद यह फाइल डीएम तक पहुंची थी।
- **सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा:** शीर्ष अदालत ने पाया कि बहुस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यक्तिगत अधिकारी को दंडित करना न्यायसंगत नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित रख लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट में किस मामले को लेकर सुनवाई चल रही थी?
छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी को एनएसए के तहत हिरासत में लेने और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा डीएम मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये काटने के आदेश के खिलाफ सुनवाई चल रही थी।

### 2. सुप्रीम कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम की भूमिका पर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अगर फैसला कई स्तरों की प्रशासनिक जांच और मंजूरी के बाद लिया गया था, तो सिर्फ डीएम को अलग करके 5 लाख रुपये के जुर्माने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

### 3. डीएम के समक्ष रिपोर्ट किन अधिकारियों के स्तर से होकर पहुंची थी?
अदालत को बताया गया कि यह मामला एसएचओ, डीसीपी, पुलिस कमिश्नर और एनएसए सलाहकार बोर्ड जैसे पांच स्तरों की कानूनी प्रक्रिया से होकर गुजरा था।

### 4. मेधा रूपम कौन हैं?
मेधा रूपम 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की थी और वह वर्तमान में गौतमबुद्ध नगर की पहली महिला डीएम हैं।

### 5. मामले में सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा रुख क्या है?
जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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