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  "title": "इलाहाबाद हाई कोर्ट में तलब हुए यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण, आदेश पालन में सुस्ती पर अदालत ने लगाई फटकार",
  "summary": "इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में देरी और सीसीटीवी फुटेज समय पर न देने को लेकर यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण मंगलवार को अदालत में पेश हुए। कोर्ट ने हत्या के मामलों में लंबित जमानत अर्जियों और पुलिस के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई।",
  "content": "इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करने में हो रही लगातार देरी के मामले में उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण मंगलवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उन्हें जस्टिस समीर जैन की बेंच के सामने हाजिर होना पड़ा ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि पुलिस महकमा अदालत के निर्देशों का समय पर अनुपालन करने में क्यों आनाकानी कर रहा है। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की थी कि पुलिस अधिकारियों की इस प्रकार की लापरवाही के चलते हत्या के गंभीर मामलों से जुड़ी जमानत याचिकाएं अदालतों में लंबे समय तक बिना किसी फैसले के लंबित पड़ी रहती हैं।\n\n \n\nसीसीटीवी फुटेज और जांच रिकॉर्ड में देरी पर कड़े सवाल\n सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य रूप से सीसीटीवी फुटेज और अहम जांच रिकॉर्ड समय पर अदालत के समक्ष पेश न किए जाने को लेकर तीखे सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब पुलिस विभाग के लिए तीन दिनों के भीतर अपने निर्देश या जवाब दाखिल करना ही पर्याप्त माना जाएगा। इस दौरान डीजीपी ने अदालत को अवगत कराया कि पुलिस विभाग के सामने आने वाली विभिन्न प्रशासनिक और मैदानी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष समितियों का गठन किया जा चुका है। हालांकि, पुलिस की ओर से सजा दिलाने यानी कनविक्शन रेट के आंकड़े सामने रखे जाने पर अदालत ने असंतोष जताया और कहा कि यह अकेला आंकड़ा मौजूदा व्यवस्था की कमियों और समस्याओं का सही समाधान या जवाब नहीं हो सकता है।\n\n \n\nपुष्पराज सिंह उर्फ बाबलू की जमानत अर्जी से जुड़ा है पूरा घटनाक्रम\n यह पूरा कानूनी मामला पुष्पराज सिंह उर्फ बाबलू नाम के व्यक्ति की जमानत याचिका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। अदालत के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर काउंटर एफिडेविट या जवाब दाखिल नहीं किया गया था। इसी बात को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने पुलिस अधिकारियों के कार्यप्रणाली और उनके समग्र रवैये को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी खुलकर जाहिर की।\n\nइसका आप पर असर\nयह मामला सीधे तौर पर आपराधिक न्याय प्रणाली और पुलिस जवाबदेही से जुड़ा है, जिसका असर न्याय चाहने वाले आम नागरिकों पर पड़ता है।\n\n  - भारत में: अदालती आदेशों के समय पर पालन से आपराधिक मामलों और जमानत याचिकाओं के निपटारे में तेजी आएगी, जिससे विचाराधीन कैदियों को राहत मिलेगी।\n\n  - उत्तर प्रदेश में: पुलिस अधिकारियों द्वारा समय पर दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज पेश करने से आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में बेवजह की देरी पर लगाम लगेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इलाहाबाद हाई कोर्ट में किसे तलब किया गया था?\nउत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण को इलाहाबाद हाई कोर्ट में तलब किया गया था।\n\n2. डीजीपी को अदालत में क्यों पेश होना पड़ा?\nउन्हें अदालती आदेशों के पालन में देरी और समय पर जवाब व दस्तावेज न दाखिल करने के संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया था।\n\n3. यह सुनवाई किस न्यायमूर्ति की बेंच के समक्ष हुई?\nयह सुनवाई जस्टिस समीर जैन की बेंच के सामने हुई।\n\n4. यह मामला किस व्यक्ति की जमानत याचिका से संबंधित है?\nयह मामला पुष्पराज सिंह उर्फ बाबलू की जमानत याचिका से जुड़ा हुआ है।\n\n5. अदालत ने पुलिस को निर्देश दाखिल करने के लिए कितना समय तय किया है?\nअदालत ने कहा है कि अब पुलिस के लिए तीन दिन के भीतर निर्देश दाखिल करना पर्याप्त है।",
  "url": "https://trendkia.com/uttar-pradesh/allahabad-high-court-mein-talab-hue-up-dgp-rajiv-krishna-adesh-palan-mein-sust-par-adalat-ne-lagai-fatkar-25833",
  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-01",
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    "इलाहाबाद हाई कोर्ट",
    "राजीव कृष्ण",
    "यूपी पुलिस",
    "डीजीपी उत्तर प्रदेश",
    "जमानत याचिका",
    "कानूनी कार्रवाई"
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  "site": "TrendKia"
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