आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने लखनऊ में अखिलेश यादव से की मुलाकात, बेटी के साथ सपा में आने के संकेत बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद आंवला के दो बार के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भेंट की, जहां बेटी कीर्ति कश्यप को चुनाव लड़ाने और सपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गईं। भारतीय जनता पार्टी से हाल ही में त्यागपत्र दे चुके आंवला लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को राजधानी लखनऊ पहुंचकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से औपचारिक मुलाकात की। इस राजनीतिक बैठक के दौरान धर्मेंद्र कश्यप के साथ उनकी बेटी कीर्ति कश्यप और बरेली जनपद के कई वरिष्ठ सपा नेता भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम के सामने आते ही सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पूर्व सांसद बहुत जल्द अपनी बेटी के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। बैठक खत्म होने के बाद सपा प्रमुख ने इंटरनेट मीडिया पर दोनों नेताओं की तस्वीर साझा करते हुए इस मुलाकात को एक सकारात्मक शिष्टाचार भेंट करार दिया। पीडीए मुहिम को धार देने और संयुक्त प्रयासों पर मंथन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दोनों नेताओं की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि उत्तर प्रदेश के आंवला संसदीय क्षेत्र से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप से यह एक सौहार्दपूर्ण मित्राचार भेंट रही। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि इस दौरान पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के आंदोलन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत, सक्रिय तथा असरदार बनाने के लिए साझे प्रयासों पर विस्तार से बात हुई। अखिलेश यादव ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा दौर में केवल पीडीए की विचारधारा ही समाज के हर उपेक्षित, पीड़ित और अपमानित व्यक्ति को वास्तविक मान-सम्मान और सुरक्षित भागीदारी दिला सकती है। सपा में शामिल होने और बेटी को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी बरेली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे धर्मेंद्र कश्यप ने हाल ही में सत्तारूढ़ दल से अपनी राहें पूरी तरह अलग कर ली थीं। लखनऊ में हुई इस अहम बैठक के दौरान उन्होंने सपा प्रमुख के सामने अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को आगामी चुनावी दंगल में उतारने और राजनीतिक अवसर उपलब्ध कराने की बात रखी है। सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर बैठक की तस्वीरें सार्वजनिक होने के बाद यह बात साफ मानी जा रही है कि पूर्व सांसद अब समाजवादी पार्टी में अपनी नई सियासी पारी की शुरुआत करेंगे और अपनी बेटी के राजनीतिक सफर को मजबूती देने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। भारतीय जनता पार्टी से अलग होते वक्त धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी पीड़ा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी के भीतर लगातार उनकी उपेक्षा हो रही थी और उनका दम घुटने जैसी स्थिति बन गई थी। पूर्व सांसद का आरोप था कि संगठन के भीतर उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा था और चुनावी मोर्चे पर कुछ लोग उनका साथ देने के बजाय उनके खिलाफ विश्वासघात कर रहे थे। इन्हीं आंतरिक मतभेदों और उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने स्वेच्छा से अपने पद और पार्टी से इस्तीफा देने का कड़ा निर्णय लिया था। लखनऊ पहुंचे बरेली और आंवला के प्रमुख सपा रणनीतिकार इस महत्वपूर्ण मुलाकात को अमलीजामा पहनाने और धर्मेंद्र कश्यप व उनकी बेटी कीर्ति कश्यप को समाजवादी पार्टी के पाले में लाने के लिए बरेली के कई दिग्गज सपा नेता पहले से ही लखनऊ में डटे हुए थे। इनमें समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष शुभेलेश यादव, पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव और पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह बैठक संपन्न हुई। पूर्व राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव ने भी इस बैठक की तस्वीरें अपने निजी सोशल मीडिया हैंडल पर जारी कर इस नए राजनीतिक तालमेल की पुष्टि की। कश्यप बिरादरी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भी पार्टी छोड़ना जारी पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के इस्तीफे का असर अब बरेली और आंवला के स्थानीय संगठनात्मक ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उनके भारतीय जनता पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद कश्यप समाज से जुड़े कई सक्रिय कार्यकर्ताओं और उनके करीबी समर्थकों ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफे देने शुरू कर दिए हैं। कई समर्थकों ने अपने त्यागपत्र के पत्र सोशल मीडिया पर अपलोड किए हैं और पूर्व सांसद के समर्थन में खुलकर खड़े होने का सार्वजनिक ऐलान किया है, जिससे इलाके में विपक्षी खेमे का पलड़ा मजबूत होता दिखाई दे रहा है। इसका आप पर असर आंवला और बरेली क्षेत्र के स्थानीय समीकरणों में इस राजनीतिक बदलाव का सीधा असर देखने को मिलेगा। • उत्तर प्रदेश में: सपा द्वारा गैर-यादव पिछड़े वर्ग के वरिष्ठ नेता को अपने पाले में लाने से रूहेलखंड क्षेत्र में पीडीए सामाजिक गठबंधन का विस्तार होगा। इसके चलते आगामी चुनावों में क्षेत्रीय पिछड़े वोटों की लामबंदी और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगी। • बरेली और आंवला में: पूर्व सांसद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कश्यप समाज के कार्यकर्ताओं की निष्ठा बदलने से स्थानीय स्तर पर बूथ प्रबंधन और संगठन समीकरण बदलेंगे। आम जनता और स्थानीय मतदाताओं को आने वाले दिनों में नए राजनीतिक गठजोड़ और नए उम्मीदवार देखने को मिल सकते हैं। • संगठनात्मक फेरबदल: पूर्व सांसद के समर्थकों के लगातार इस्तीफों से इलाके में सत्तारूढ़ दल को अपने संगठनात्मक ढांचे में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपनी होगी। जमीनी कार्यकर्ताओं के पाला बदलने से क्षेत्रीय संपर्क और स्थानीय जनहित के मुद्दों की पैरवी पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • टिकट और प्रतिनिधित्व: कीर्ति कश्यप को चुनावी मैदान में उतारने की बातचीत से क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की नई राजनीतिक दावेदारी सामने आएगी। इससे स्थानीय स्तर पर टिकट वितरण और नेतृत्व की संरचना में बदलाव आएगा। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक घटनाक्रम पूर्व सांसद के लंबे समय से चल रहे आंतरिक असंतोष और स्थानीय नेतृत्व के साथ उपजे मतभेदों का सीधा परिणाम है। • उपेक्षा और आंतरिक टकराव: पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया कि संगठन में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा था और चुनाव के दौरान अपने ही लोगों द्वारा विश्वासघात किए जाने के कारण उनका दम घुट रहा था। इसी निराशा के चलते उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। • पारिवारिक राजनीतिक भविष्य की तलाश: अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को सक्रिय राजनीति में स्थापित करने और चुनावी टिकट दिलाने के उद्देश्य से पूर्व सांसद को एक मजबूत वैकल्पिक मंच की आवश्यकता थी। • सपा का पीडीए सामाजिक समीकरण: समाजवादी पार्टी लगातार पिछड़े और वंचित तबकों के प्रभावशाली नेताओं को जोड़कर अपने पीडीए आधार को मजबूत कर रही है, जिसके तहत बरेली के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं ने इस मुलाकात की रूपरेखा तैयार की। • समर्थकों का रुख: कश्यप समाज के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव और इस्तीफों की झड़ी ने भी इस नए राजनीतिक गठबंधन की प्रक्रिया को गति प्रदान की। सवाल-जवाब 1. धर्मेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव से कहां और कब मुलाकात की? धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की। 2. मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र कश्यप के साथ कौन उपस्थित था? इस मुलाकात में धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप के साथ सपा के बरेली जिलाध्यक्ष शुभेलेश यादव, पूर्व राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव और पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार मौजूद थे। 3. अखिलेश यादव ने इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर क्या कहा? अखिलेश यादव ने इसे एक मित्राचार भेंट बताया और कहा कि बैठक में पीडीए आंदोलन को अधिक सशक्त और सक्रिय बनाने के लिए संयुक्त प्रयासों पर चर्चा हुई। 4. धर्मेंद्र कश्यप ने बीजेपी से इस्तीफा क्यों दिया था? धर्मेंद्र कश्यप ने कहा था कि पार्टी में उनका दम घुट रहा था, उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा था और चुनावों में कुछ लोग उनके साथ विश्वासघात कर रहे थे। 5. इस बैठक में चुनावी उम्मीदवारी को लेकर क्या चर्चा हुई? धर्मेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव के सामने अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को आगामी चुनाव लड़वाने का विषय रखा है। 6. धर्मेंद्र कश्यप के इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों ने क्या कदम उठाया? उनके इस्तीफे के बाद कश्यप समाज से जुड़े कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी बीजेपी से त्यागपत्र देना शुरू कर दिया है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/aonla-ke-purva-sansada-dharmendra-kashyap-ne-lucknow-men-akhilesh-yadav-se-ki-mulakata-beti-ke-satha-sp-men-ane-ke-snketa-46482 TrendKia — Har trend, sabse pehle.