अयोध्या के दसवें दीपोत्सव से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ का संदेश, जरूरतमंदों की मदद और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित होने वाले दसवें भव्य दीपोत्सव से पूर्व जनता के नाम एक पत्र जारी किया है। उन्होंने नागरिकों से वंचितों के घरों में खुशियां बांटने और स्थानीय कारीगरों के दीये खरीदने का आग्रह किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्य के नागरिकों को संबोधित करते हुए एक विशेष पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने आगामी अयोध्या दीपोत्सव के गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने परिवारों और सगे-संबंधियों के साथ इस अलौकिक उत्सव का साक्षी बनने का आह्वान किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने समाज के समर्थ लोगों से आग्रह किया कि वे अपने आस-पड़ोस के वंचित और जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियां बांटें और स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए दीयों व हस्तशिल्प उत्पादों को खरीदकर उनके स्वावलंबन को सशक्त सहारा दें। सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आस्था से विकास का प्रतीक अयोध्या धाम में आयोजित होने वाले दसवें भव्य दीपोत्सव की महत्ता स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सप्तपुरियों में श्रेष्ठ यह पावन नगरी इस ऐतिहासिक आयोजन के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार, यह आयोजन केवल पारंपरिक दीप प्रज्वलन तक सीमित नहीं है, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और आस्था के माध्यम से विकास की नई राह प्रशस्त करने का एक विराट माध्यम है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि दीप की एक छोटी सी लौ हमें यह सीख देती है कि घने अंधकार के बीच भी प्रकाश की एक किरण जीवन में नई उम्मीद और ऊर्जा भर सकती है। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन के पावन अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इसे भारत के सांस्कृतिक गौरव तथा सनातन चेतना के पुनर्जागरण का पर्व बताया। भरत के त्याग की मिसाल और सत्ता के दायित्व का बोध सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने रामायण के एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 14 वर्षों की लंबी अवधि तक भरत ने समस्त राजसुख का त्याग कर दिया था और प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर अयोध्या के शासन का संचालन किया था। इस ऐतिहासिक उदाहरण का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता का वास्तविक अर्थ निजी अधिकार अथवा शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता के प्रति एक पावन दायित्व का निर्वहन है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का यह दीपोत्सव त्याग, मर्यादा और समर्पण के इन्हीं शाश्वत जीवन-मूल्यों को वैश्विक मंच पर गौरव के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है। सरयू तट की जगमगाहट और अलौकिक आकाशीय प्रस्तुतियां दीपोत्सव के विहंगम दृश्य का वर्णन करते हुए पत्र में बताया गया कि मां सरयू के तट पर सजी अनंत दीपमाला और राम की पैड़ी पर प्रज्वलित होने वाले लाखों दीपों का सौंदर्य ऐसा प्रतीत होता है मानो आकाशगंगा स्वयं धरती पर उतर आई हो। इस भव्य वातावरण में आधुनिक तकनीक का समागम करते हुए ड्रोन के जरिए शानदार आकाशीय प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों की सांस्कृतिक सहभागिता इस पूरे महोत्सव को एक अलौकिक और अविस्मरणीय भव्यता प्रदान करती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग खिंचे चले आते हैं। उत्सव प्रदेश के रूप में नई पहचान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जनसहभागिता और आस्था को प्रगति की शक्ति में बदलकर उत्तर प्रदेश ने अब उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर ली है। उन्होंने विकास की एक स्पष्ट श्रृंखला प्रस्तुत करते हुए कहा कि जहां प्रकाश होता है, वहां स्वतः सुरक्षा का वातावरण बनता है; सुरक्षा की उपस्थिति से निवेश के द्वार खुलते हैं; निवेश आने से समग्र विकास होता है; और विकास के परिणामस्वरूप रोजगार तथा समृद्धि का विस्तार होता है। यही विचार इस उत्सवधर्मिता का मूल आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दीपोत्सव वास्तव में आस्था और अर्थव्यवस्था का एक अनोखा संगम है, जिससे कुम्हारों, मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों, फूल बेचने वालों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के व्यापार में भारी वृद्धि होती है तथा आय के नए अवसर सृजित होते हैं। वंचितों के साथ दीवाली मनाने और स्वच्छता की अपील मुख्यमंत्री ने समाज के प्रत्येक नागरिक से संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोस में कोई ऐसा परिवार है जिसके पास संसाधनों की कमी है, तो लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी दीवाली को भी जगमग करें। उन्होंने जरूरतमंदों को दीये, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट करने का सुझाव देते हुए कहा कि दूसरों के जीवन में खुशियों का संचार करना ही दीपोत्सव की असली और सच्ची भावना है। युवाओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वे दीपक की भांति सकारात्मक ऊर्जा आत्मसात करें, हर प्रकार की नकारात्मकता से दूर रहें और अपने परिवेश में स्वच्छता बनाए रखें, क्योंकि स्वच्छता के वातावरण में ही वास्तविक समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही, स्थानीय हुनरमंदों के परिश्रम का सम्मान करते हुए उनके उत्पाद खरीदने पर विशेष बल दिया गया। परिवार सहित अयोध्या आने का खुला आमंत्रण अपने संदेश के समापन में मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से सपरिवार अयोध्या आकर इस अद्वितीय उत्सव का प्रत्यक्षदर्शी बनने की हार्दिक अभिलाषा व्यक्त की। उन्होंने प्रार्थना की कि हर घर में खुशहाली आए, प्रत्येक मन में आपसी सद्भाव और प्रेम बना रहे तथा संपूर्ण राज्य और देश का प्रगति पथ निरंतर प्रशस्त होता रहे। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जयघोष के साथ अपने संदेश को पूर्ण विराम दिया। इसका आप पर असर इस संदेश का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक सरोकारों और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं पर पड़ेगा। • भारत में: देश भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अयोध्या में आयोजित होने वाले दसवें भव्य दीपोत्सव में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण मिला है। इसके साथ ही त्योहारी खरीदारी के दौरान पारंपरिक कारीगरों और मिट्टी के दीये बनाने वालों को प्राथमिकता देने की राष्ट्रव्यापी अपील की गई है। • उत्तर प्रदेश में: राज्य के छोटे व्यापारियों, कुम्हारों, फूल विक्रेताओं और होटल संचालकों के लिए दीपोत्सव के चलते बड़ा व्यावसायिक अवसर तैयार हुआ है। वहीं, आम नागरिकों से अपने पड़ोस के वंचित परिवारों को मिठाई, दीये और वस्त्र देकर उनकी दीवाली रोशन करने का आह्वान किया गया है। • स्थानीय कारीगरों के लिए: मिट्टी के दीये और हस्तशिल्प उत्पाद बेचने वाले ग्रामीण कारीगरों की आय में बढ़ोतरी होगी। सरकारी अपील के बाद स्थानीय बाजारों में पारंपरिक दीयों की मांग बढ़ने की पूरी संभावना है। • पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र: अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में होटल व्यवसाय और परिवहन सेवाओं को उत्सव के दौरान भारी भीड़ से सीधा लाभ मिलेगा। ड्रोन शो और सांस्कृतिक आयोजनों से आगंतुकों के अनुभव में व्यापक विस्तार होगा। ऐसा क्यों हुआ यह संदेश अयोध्या में आयोजित होने वाले दसवें दीपोत्सव की आधिकारिक तैयारियों और इसके व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित करने के लिए जारी किया गया है। • दसवें भव्य आयोजन की पृष्ठभूमि: अयोध्या में दीपोत्सव का यह दसवां संस्करण है, जिसे राज्य सरकार जनभागीदारी और सांस्कृतिक गौरव के महापर्व के रूप में बड़े पैमाने पर मना रही है। इस मील के पत्थर को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर यह संवाद स्थापित किया गया। • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना: उत्सव के माध्यम से कुम्हारों, कारीगरों, फूल उत्पादकों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक संबल प्रदान करने का उद्देश्य निहित है। मुख्यमंत्री ने संदेश के जरिए 'लोकल फॉर वोकल' की अवधारणा को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का प्रयास किया है। • सामाजिक समरसता और कल्याण: त्योहार के अवसर पर समाज के संपन्न और वंचित वर्गों के बीच की दूरी कम करने के लिए यह अपील की गई है। जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान लाना और उन्हें उत्सव का हिस्सा बनाना ही इस संदेश का मुख्य कारण रहा है। सवाल-जवाब 1. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में प्रदेशवासियों से क्या अपील की है? उन्होंने लोगों से परिवार सहित अयोध्या आकर दीपोत्सव देखने, वंचित परिवारों की मदद करने और स्थानीय कारीगरों के दीये खरीदने की अपील की है। 2. अयोध्या में इस वर्ष दीपोत्सव का कौन सा संस्करण आयोजित हो रहा है? अयोध्या धाम में इस बार दसवां भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव आयोजित किया जा रहा है। 3. मुख्यमंत्री ने भरत के प्रसंग का उल्लेख किस संदर्भ में किया? उन्होंने बताया कि भरत ने 14 वर्षों तक राजसुख त्यागकर श्रीराम की चरण पादुकाओं को रखकर शासन किया, जो सिखाता है कि सत्ता अधिकार नहीं बल्कि दायित्व है। 4. दीपोत्सव से स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को क्या लाभ मिलता है? इससे कुम्हारों, फूल विक्रेताओं, होटल संचालकों और छोटे व्यापारियों के लिए आय व रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। 5. मुख्यमंत्री ने युवाओं को क्या विशेष सलाह दी है? उन्होंने युवाओं से सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ने, नकारात्मकता से दूर रहने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/ayodhya-ke-dasaven-deepotsav-se-pahale-cm-yogi-adityanath-ka-sndesha-jaruratamndon-ki-madada-aura-sthaniya-utpadon-ko-barhava-dene-54677 TrendKia — Har trend, sabse pehle.