अयोध्या में महंत परमहंस दास की 23वीं पुण्यतिथि पर याद आई हाशिम अंसारी संग उनकी अनोखी मिसाल अयोध्या में महंत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इस मौके पर बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने दोनों की पुरानी दोस्ती और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल साझा की। उत्तर प्रदेश के पावन धाम अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन की रीढ़ रहे प्रमुख संत महंत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि अत्यधिक श्रद्धा, सम्मान और गरिमा के साथ मनाई जा रही है। इस पावन अवसर पर आयोजित विशेष श्रद्धांजलि सभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं शामिल होकर पूज्य संत को नमन कर रहे हैं। अयोध्या के समस्त संत समाज, स्थानीय नागरिकों तथा दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं का हुजूम महंत जी के अभूतपूर्व योगदान और उनके जीवन दर्शन को याद करने के लिए उमड़ पड़ा है। इसी श्रद्धांजलि आयोजन के दौरान अयोध्या की ऐतिहासिक सामाजिक समरसता और भाईचारे की एक बेहद खूबसूरत मिसाल भी लोगों के सामने आई है। अदालत की लड़ाई और एक ही रिक्शे की सवारी राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद से जुड़े दशकों पुराने कानूनी विवाद के दौर में महंत रामचंद्र दास परमहंस तथा मुख्य मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी के आपसी रिश्ते मिसाल के रूप में देखे जाते थे। बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार रहे हाशिम अंसारी के सुपुत्र इकबाल अंसारी ने इस मौके पर उस दौर की कई अमूल्य यादें ताजा की हैं। उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि मामले की अदालती सुनवाई के दौरान दोनों मुख्य पक्षकार कई बार एक ही रिक्शे पर सवार होकर कचहरी जाया करते थे। रास्ते भर उनके बीच दोस्ताना बातचीत होती थी और रिक्शे की उस साझा सवारी ने अयोध्या की साझा संस्कृति को पूरी दुनिया के सामने पेश किया था। अदालत के भीतर पैरवी और बाहर गहरा सम्मान न्यायालय के भीतर जहां दोनों दिग्गज अपने-अपने धर्म, समुदाय और आस्था के पक्ष में पूरे जोर-शोर से कानूनी लड़ाई लड़ते थे, वहीं अदालत परिसर से बाहर निकलते ही उनके बीच का संबंध बिल्कुल बदल जाता था। इकबाल अंसारी के अनुसार, दोनों के बीच निजी जीवन में कभी कोई कड़वाहट नहीं आई और उनके बीच हमेशा अदब, तहजीब और आपसी आदर का अटूट रिश्ता बना रहा। हाशिम अंसारी अयोध्या के समस्त साधु-संतों का हृदय से सम्मान करते थे, वहीं महंत रामचंद्र दास परमहंस जी भी हाशिम अंसारी के प्रति अपार स्नेह और सम्मान रखते थे। दोनों का यह आचरण साबित करता है कि विचारों तथा आस्था की लड़ाई अपनी जगह हो सकती है, लेकिन इंसानियत और आपसी भाईचारा सबसे ऊपर रहना चाहिए। गंगा-जमुनी तहजीब और भावी पीढ़ियों के लिए सबक अयोध्या की पावन धरती हमेशा से ही सभी धर्मों, संप्रदायों और विविध मान्यताओं का सम्मान करने वाली रही है। महंत परमहंस दास और हाशिम अंसारी का यह प्रगाढ़ संबंध इसी गंगा-जमुनी तहजीब का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। इकबाल अंसारी ने कहा कि महंत रामचंद्र दास परमहंस जैसे दूरदर्शी और महान संतों के योगदान को अयोध्या तथा समस्त देशवासी आने वाली सदियों तक याद रखेंगे। उनकी 23वीं पुण्यतिथि पर उमड़ी भीड़ और लोगों की श्रद्धा यह संदेश देती है कि सामाजिक समरसता ही समाज की सच्ची शक्ति है। महंत जी की स्मृतियां, उनका त्याग और सामाजिक सद्भाव की यह अमूल्य विरासत सदैव प्रासंगिक बनी रहेगी। इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी देश के नागरिकों को वैचारिक मतभेदों के बावजूद आपसी सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने की प्रेरणा देती है। • अयोध्या में: नगर की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता की परंपरा को बढ़ावा मिलता है। सवाल-जवाब 1. महंत रामचंद्र दास परमहंस कौन थे? महंत रामचंद्र दास परमहंस अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संत और मार्गदर्शक थे। 2. महंत परमहंस दास की कौन सी पुण्यतिथि मनाई जा रही है? अयोध्या में महंत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। 3. हाशिम अंसारी कौन थे? हाशिम अंसारी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मुकदमे में बाबरी मस्जिद के पूर्व मुख्य पक्षकार थे। 4. अदालत जाते समय दोनों पक्षकारों का क्या अनोखा तरीका था? मुकदमे की सुनवाई के दौरान महंत परमहंस दास और हाशिम अंसारी अक्सर एक ही रिक्शे पर बैठकर साथ में अदालत जाते थे। 5. श्रद्धांजलि सभा में कौन से प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर महंत जी को नमन कर रहे हैं। https://trendkia.com/uttar-pradesh/ayodhya-men-mahnta-paramhans-das-ki-23vin-punyatithi-para-yada-ai-hashim-ansari-snga-unaki-anokhi-misala-16614 TrendKia — Har trend, sabse pehle.