अयोध्या में परमहंस आचार्य से मिले चंपत राय, संत समाज ने आलोचकों को चमगादड़ बताकर दिया समर्थन अयोध्या में लंबे समय बाद नजर आए चंपत राय ने जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की, जहां संत समाज ने चंदा चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए उनका बचाव किया। उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में लंबे समय की खामोशी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महासचिव रह चुके विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय अचानक सार्वजनिक स्थल पर देखे गए। वह अपने तीन-चार अनुयायियों के साथ पैदल यात्रा करते हुए तपस्वी छावनी पहुंचे, जहां उन्होंने आश्रम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य के साथ बैठक की। इस अवसर पर जब उपस्थित पत्रकारों ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की, तो चंपत राय ने बिना कोई शब्द बोले केवल अपने हाथ के इशारे से मीडिया कर्मियों को वहां से हटने का संकेत दिया। राम मंदिर निर्माण कार्य और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों को लेकर उठे विवादों के बाद से वे काफी समय से सार्वजनिक मंचों से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन इस अचानक हुई मुलाकात और उस पर आई प्रतिक्रियाओं के कारण यह विषय सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के साथ तेजी से चर्चा में आ गया है। परमहंस आचार्य का विवादित बयान और चमगादड़ वाली उपमा मुलाकात के बाद जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने चंपत राय के पक्ष में खुलकर वक्तव्य जारी किया और मंदिर निर्माण में उनके योगदान की जमकर सराहना की। परमहंस आचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, "श्री चंपत राय जी युग ऋषि हैं, जिनके नेतृत्व में संपूर्ण राम मंदिर का निर्माण हुआ।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि देश भर के सभी सनातनियों के मन में चंपत राय के प्रति अत्यधिक श्रद्धा और सम्मान का भाव है। इसके साथ ही आलोचकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने एक अनोखी उपमा दी। उन्होंने कहा कि समाज में कुछ ऐसे नकारात्मक तत्व मौजूद हैं जिनकी तुलना उल्लू और चमगादड़ से की जा सकती है। जिस तरह उल्लू या चमगादड़ अपनी स्वाभाविक प्रकृति के कारण सूर्य के प्रकाश की महिमा और महत्ता को नहीं समझ सकते, ठीक उसी प्रकार ऐसे लोग चंपत राय के महान कार्यों का मूल्यांकन करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। चंदा चोरी और जमीन सौदों के आरोपों से घिरा रहा कार्यकाल चंपत राय का नाम बीते समय में अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और चंदा चोरी के आरोपों के कारण गहराए विवादों से जुड़ा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जब केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना की थी, तब चंपत राय को इस महत्वपूर्ण ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि, मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही उन पर कई गंभीर आरोप लगे। विपक्षी राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं ने दावा किया था कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों के दामों में महज कुछ ही मिनटों के भीतर करोड़ों रुपये का भारी उछाल देखा गया। आरोपों के अनुसार बहुत कम कीमत पर खरीदी गई जमीनों को कुछ ही पलों बाद ट्रस्ट को अत्यधिक ऊंचे दामों पर बेच दिया गया था। इसके अलावा, देश भर से श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए अरबों रुपये के दान के हिसाब-किताब में पारदर्शिता की कमी और फर्जी रसीदों के इस्तेमाल को लेकर भी ट्रस्ट प्रबंधन पर सवाल उठाए गए थे। इन गंभीर विवादों के सामने आने के बाद उन्हें ट्रस्ट से हटा दिया गया था और उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। राम मंदिर आंदोलन में भूमिका और छवि सुधार की कोशिश विश्व हिंदू परिषद को गहराई से जानने वाले लोगों और संगठन के सहयोगियों का मानना है कि चंपत राय ने बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के कई दशकों तक राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य किया है। वे आंदोलन की शुरुआत से ही इस पूरे अभियान का सबसे प्रमुख और सक्रिय चेहरा रहे हैं। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी इस बात को दोहराया कि वित्तीय गड़बड़ियों और चंदे में धांधली के आरोप लगाने वाले लोग केवल एक पूर्व नियोजित राजनीतिक एजेंडे के तहत राम मंदिर निर्माण कार्य को बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संत समाज हमेशा उन निष्ठावान लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा जिन्होंने अपना जीवन राम लला की सेवा में समर्पित कर दिया है। अयोध्या के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चंपत राय की इस ताजा मौजूदगी और प्रमुख संतों से मिले खुले समर्थन को उनकी छवि को फिर से स्थापित करने और विरोधियों के आरोपों का करारा जवाब देने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसका आप पर असर भारत में: राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी को लेकर जारी विवाद से देश भर के श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित होता है। उत्तर प्रदेश में: अयोध्या के स्थानीय धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चंपत राय की सक्रियता और संत समाज का खुला समर्थन आगामी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। सवाल-जवाब 1. चंपत राय हाल ही में अयोध्या में किससे मिलने पहुंचे थे? चंपत राय अयोध्या में अपने समर्थकों के साथ तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मिलने पहुंचे थे। 2. जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने चंपत राय के आलोचकों के बारे में क्या कहा? परमहंस आचार्य ने आलोचकों की तुलना उल्लू और चमगादड़ से करते हुए कहा कि वे सूर्य की महिमा यानी चंपत राय के योगदान को समझने में असमर्थ हैं। 3. चंपत राय पर पूर्व में क्या आरोप लगे थे? उन पर राम मंदिर ट्रस्ट के लिए जमीन खरीद में अचानक कीमतें बढ़ने और चंदे के वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। 4. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन कब और किसने किया था? सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। https://trendkia.com/uttar-pradesh/ayodhya-men-paramhans-acharya-se-mile-champat-rai-snta-samaja-ne-alochakon-ko-chamagadara-batakara-diya-samarthana-14032 TrendKia — Har trend, sabse pehle.