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  "title": "अयोध्या राम मंदिर दान गबन कांड: तीन और आरोपियों को राहत नहीं, निचली अदालत से अर्जी खारिज होने पर अब जाएंगे उच्च न्यायालय",
  "summary": "अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की जमानत याचिकाएं खारिज हो गई हैं, जिसके बाद अब वे राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।",
  "content": "अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए दान गबन प्रकरण में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। परिसर में चढ़ावा राशि में हेरफेर करने के आरोप में न्यायिक हिरासत में चल रहे तीन अभियुक्तों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को अदालत से बड़ा झटका लगा है। संबंधित न्यायालय ने 22 सितंबर को दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद तीनों की नियमित जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया। इस अदालती आदेश के सामने आने के बाद अब आरोपियों का कानूनी पक्ष राहत पाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है।\n\nअदालत में दलीलें खारिज, अब उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी\nआरोपियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता कुल शेखर सिंह ने पूरे अदालती घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की तरफ से दाखिल की गई जमानत अर्जियों पर 22 सितंबर को अदालत के समक्ष सुनवाई पूरी हुई थी। अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अपने-अपने तर्क पेश किए, लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। अधिवक्ता कुल शेखर सिंह के अनुसार, निचली अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद वे लोग इन तीनों अभियुक्तों की रिहाई के लिए अब सीधे हाई कोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल करने जा रहे हैं।\n\n \n\nपहले भी तीन अन्य अभियुक्तों को नहीं मिली थी कोई राहत\nइस पूरे प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों को भी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कोई ढील नहीं मिली है। कुल शेखर सिंह ने बताया कि इससे एक दिन पहले, यानी 21 सितंबर 2026 को तीन अन्य आरोपियों अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और राम शंकर मिश्रा की जमानत याचिकाएं भी अदालत द्वारा खारिज कर दी गई थीं। जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और कथित संलिप्तता के चलते अदालत ने इन सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ही रखने का निर्णय सुनाया था।\n\nशेष दो आरोपियों की याचिकाओं पर आज सुनवाई\nइस बड़े गबन कांड में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से छह की याचिकाएं अब तक नामंजूर की जा चुकी हैं। मामले में बचे हुए दो अन्य आरोपियों सुभाष चंद और टिन्नू यादव की जमानत याचिकाओं पर 23 सितंबर को अदालत में सुनवाई तय की गई है। बचाव पक्ष के वकील का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों और पूर्व के फैसलों को देखते हुए इनकी याचिकाएं भी खारिज होना लगभग तय माना जा रहा है। अधिवक्ता के अनुसार, यदि यहां से भी राहत नहीं मिलती है, तो सभी आठों आरोपी संयुक्त रूप से अथवा अलग-अलग अपनी जमानत याचिकाएं हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।\n\nदान में हेरफेर से जुड़ा है पूरा मामला और जांच\nअयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान की धनराशि में सेंधमारी का यह पूरा मामला साल 2026 के दौरान सामने आया था, जिसने पूरे देश में व्यापक हलचल मचा दी थी। प्राथमिक जांच के दौरान यह बात उजागर हुई थी कि मंदिर परिसर में तैनात सेवादारों ने दान में आई बड़ी धनराशि को गायब कर दिया था। जांच एजेंसियों ने छानबीन के दौरान कई सेवादारों के पास से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद की थी, जिसके बाद संदिग्धों की गिरफ्तारी की गई थी। इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी सत्ताधारी बीजेपी पर कड़े राजनीतिक हमले बोले थे।\n\nमामले के सार्वजनिक होने और विवाद गहराने के बाद मंदिर प्रबंधन से जुड़े शीर्ष पदाधिकारियों पर भी गाज गिरी थी, जिसके चलते ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से राम मंदिर ट्रस्ट के लिए नए CEO की नियुक्ति की गई है। इस पूरे वित्तीय घोटाले की जांच के लिए गठित SIT ने अपनी जांच प्रक्रिया पूरी कर ली है और 25 सितंबर तक मामले में आरोप पत्र दाखिल किए जाने की पूरी संभावना है।\n\nइसका आप पर असर\nअयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और न्यायिक फैसलों से जुड़े इस मामले का सीधा असर मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़ता है।\n\n• भारत में: देश भर के श्रद्धालुओं के लिए मंदिर ट्रस्टों में पारदर्शिता और सुरक्षा ऑडिट के नियम और कड़े किए जा रहे हैं। इससे लोग अपने दान के सही इस्तेमाल को लेकर अधिक आश्वस्त हो सकेंगे और डिजिटल रसीद प्रणाली का प्रसार बढ़ेगा।\n• अयोध्या में: परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, सेवादारों की निगरानी और नकदी प्रबंधन के नियमों को तुरंत सख्त कर दिया गया है। दर्शन करने आ रहे यात्रियों को चढ़ावा केवल अधिकृत काउंटरों या डिजिटल माध्यमों से जमा कराने की सख्त हिदायत दी जा रही है।\n• आरोपियों के लिए: निचली अदालत से अर्जी खारिज होने के कारण सभी आठ आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। उनके वकीलों को अब राहत पाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी।\n• प्रशासनिक सुधार: मंदिर ट्रस्ट में नए सीईओ की तैनाती के साथ वित्तीय नियंत्रण की प्रक्रिया पूरी तरह बदल चुकी है। 25 सितंबर तक दाखिल होने वाली चार्जशीट के बाद मंदिर प्रबंधन में और भी संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज होने के पीछे वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य और जांच एजेंसी की कड़ी कानूनी कार्रवाई मुख्य वजह है।\n\n• सीधा कारण: मंदिर परिसर में सेवादारों द्वारा दान में मिली नकदी को अवैध रूप से चुराने और उनके पास से भारी मात्रा में धन बरामद होने के कारण यह मामला दर्ज हुआ। गंभीर आरोपों और बरामदगी के चलते अदालत ने आरोपियों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।\n• प्रशासनिक खामियां: शुरुआती दौर में नकदी संग्रह और सेवादारों की सीधी निगरानी के लिए कड़े सुरक्षा तंत्र का अभाव था, जिसका अनुचित लाभ उठाकर अभियुक्तों ने चढ़ावा राशि गायब की। इसी चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों को त्यागपत्र देना पड़ा।\n• एसआईटी जांच और साक्ष्य: विशेष जांच दल द्वारा पूरी की गई पड़ताल में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत सामने आए हैं। 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी के बीच अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखना उचित समझा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किन आरोपियों की जमानत याचिकाएं 22 सितंबर को खारिज हुईं?\nअदालत ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की नियमित जमानत याचिकाएं 22 सितंबर को खारिज कर दीं।\n\n2. निचली अदालत से झटका लगने के बाद बचाव पक्ष का क्या कदम होगा?\nआरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह के अनुसार, वे सभी आरोपियों के लिए अब सीधे हाई कोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल करेंगे।\n\n3. इससे पहले किन आरोपियों की जमानत अर्जी रद्द की गई थी?\n21 सितंबर 2026 को अदालत ने तीन अन्य आरोपियों अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और राम शंकर मिश्रा की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं।\n\n4. बाकी बचे दो आरोपियों की सुनवाई कब होनी है?\nमामले में शामिल दो अन्य आरोपियों सुभाष चंद और टिन्नू यादव की जमानत याचिकाओं पर 23 सितंबर को सुनवाई निर्धारित है।\n\n5. राम मंदिर ट्रस्ट में इस विवाद के बाद क्या प्रशासनिक बदलाव हुए?\nमहासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद मंदिर प्रबंधन के लिए नए सीईओ की नियुक्ति की गई है।\n\n6. एसआईटी इस मामले में अपनी चार्जशीट कब तक दाखिल कर सकती है?\nएसआईटी द्वारा जांच पूरी कर ली गई है और 25 सितंबर तक अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जाने की पूरी उम्मीद है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-23",
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