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  "type": "article",
  "title": "आजमगढ़ के प्रमुख चौराहों पर बदहाल हुए सुंदर फव्वारे, नगर पालिका ने संस्थाओं को नोटिस भेजने की तैयारी की",
  "summary": "आजमगढ़ में पीपीपी मॉडल के तहत सजाए गए चौराहे देखरेख न होने से कचरे और विज्ञापनों के ढेर में तब्दील हो गए हैं, जिसके बाद नगर पालिका ने सर्वे करवाकर जिम्मेदार संस्थाओं को नोटिस जारी करने का फैसला लिया है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर को एक नया और आधुनिक रूप देने के मकसद से प्रमुख चौराहों व तिराहों के सुंदरीकरण का काम शुरू किया गया था। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल का सहारा लिया गया था, जिसके अंतर्गत निजी संस्थाओं और व्यक्तियों के सहयोग से भव्य फव्वारे और आकर्षक कलात्मक ढांचे तैयार कराए गए थे। शुरुआती दिनों में शहर के प्रवेश और मुख्य मार्गों पर बने ये चौराहे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में अब इनकी स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। जिन फव्वारों से कभी पानी की खूबसूरत फुहारें निकलनी चाहिए थीं, वे अब केवल सूखे ढांचे बनकर रह गए हैं और उनमें गंदा पानी तथा कूड़े के ढेर जमा हो रहे हैं।\n\nबावली मोड़ और करतालपुर तिराहे पर पसरी गंदगी और अव्यवस्था\nशहर के सबसे व्यस्त रास्तों में शामिल बावली मोड़ चौराहे की मौजूदा हालत इस प्रशासनिक और प्रबंधकीय लापरवाही की सीधी गवाही देती है। यहां सुंदरीकरण योजना के तहत तैयार किया गया ढांचा और फव्वारा अब धूल की मोटी परतों से पूरी तरह ढका हुआ है। इसके चारों तरफ विभिन्न प्रचार अभियानों के पर्चे, बैनर और पोस्टर चिपका दिए गए हैं, जिसके चलते यह आकर्षक ढांचा अब केवल एक विज्ञापन बोर्ड बनकर सिमट गया है। फव्वारे की मूल खूबसूरती इन पोस्टरों के पीछे पूरी तरह दब चुकी है और इसकी बनावट पहचान में भी नहीं आती।\n\nइसी तरह की खराब स्थिति शहर के करतालपुर तिराहे पर भी देखने को मिल रही है। करतालपुर तिराहे पर स्थापित किए गए मॉडल और फव्वारे के निचले हिस्से में बारिश और नालियों का बदबूदार गंदा पानी भरा हुआ है। पानी की उचित निकासी न होने के कारण यहां जमा यह गंदा पानी न सिर्फ आने-जाने वाले लोगों के लिए भारी दुर्गंध पैदा कर रहा है, बल्कि मच्छरों के पनपने की एक बड़ी वजह भी बन गया है। इससे आसपास के रहवासियों और राहगीरों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।\n\nशहर के अन्य चौराहों पर टूटी दीवारें और गायब लाइटें\nआजमगढ़ के अन्य चौराहों और तिराहों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। रख-रखाव की उचित व्यवस्था न होने से कई जगहों पर चौराहों की सुरक्षात्मक चारदीवारी टूटकर बिखर रही है। फुटपाथ और चौराहों पर लगाई गई खूबसूरत टाइल्स उखड़ चुकी हैं और रात के समय रोशनी बिखेरने वाली सजावटी लाइटें या तो पूरी तरह खराब हो गई हैं या गायब हो चुकी हैं। जिन स्थानों को शहर की पहचान और शान बढ़ाने के लिए विकसित किया गया था, वे आज अनधिकृत होर्डिंग्स और अवैध पोस्टरों के जंगल में तब्दील होकर अपनी पहचान खो चुके हैं।\n\nनगर पालिका ने दोनों जूनियर इंजीनियरों को दिया सर्वे का जिम्मा\nशहर के चौराहों की इस खस्ताहाली को संज्ञान में लेते हुए नगर पालिका प्रशासन ने अब सक्रिय कदम उठाने की बात कही है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार ने स्वीकार किया है कि चौराहों की वर्तमान दशा वास्तव में चिंताजनक और बदहाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर पालिका क्षेत्र के ज्यादातर चौराहों के सुंदरीकरण और निर्माण का काम पीपीपी मॉडल के अंतर्गत अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं, व्यक्तियों अथवा व्यापारिक समूहों को सौंपा गया था। उन्हीं संस्थाओं ने अपने संसाधनों से इनका निर्माण कराया था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नियमित मरम्मत और सफाई न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।\n\nइस समस्या के समाधान के लिए अधिशासी अधिकारी ने नगर पालिका क्षेत्र के दोनों जूनियर इंजीनियरों (जेई) को तुरंत प्रभाव से विस्तृत सर्वेक्षण करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। दोनों इंजीनियरों को मौके पर जाकर हर एक चौराहे की भौतिक स्थिति की विस्तृत जांच करनी होगी। इस सर्वे के दौरान यह दर्ज किया जाएगा कि किस चौराहे पर लाइटें खराब हैं, कहां चारदीवारी टूटी है, किन जगहों से टाइल्स उखड़ी हैं और कहां फव्वारों के भीतर गड्ढे या जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मूल निर्माण के समय लगाई गई सामग्रियों में हुए नुकसान का पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा।\n\nलापरवाह संस्थाओं को जारी होगा नोटिस, मरम्मत की अपील\nअधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार के अनुसार सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट तैयार होते ही संबंधित संस्थाओं और जिम्मेदार व्यक्तियों को नगर पालिका की तरफ से औपचारिक लिखित नोटिस भेजा जाएगा। इस नोटिस के जरिए उन्हें इन चौराहों की तत्काल मरम्मत और रंग-रोगन कराने का निर्देश दिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि चूंकि इन ढांचों का निर्माण उन संस्थाओं ने अपने नाम और प्रतिष्ठा के तहत कराया था, इसलिए इनके दैनिक रख-रखाव और सुरक्षा की व्यावहारिक जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।\n\nअधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि यदि ये चौराहे साफ-सुथरे और व्यवस्थित रहेंगे तो इससे शहर की छवि तो सुधरेगी ही, साथ ही इन संस्थाओं और उनके पूर्वजों का सम्मान भी समाज में बना रहेगा। इसी वजह से प्रशासन ने संस्थाओं से स्वयं आगे आकर अपने गोद लिए चौराहों का निरीक्षण करने और उन्हें पुन: व्यवस्थित करने की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पालिका के इस सर्वे और नोटिस के बाद चौराहों की सूरत बदलती है या फिर ये फव्वारे लंबे समय तक धूल, गंदगी और विज्ञापनों के तले दबे रहते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nआजमगढ़ शहर के प्रमुख चौराहों पर जमी गंदगी और बदहाल फव्वारों की मरम्मत से स्थानीय नागरिकों को गंदगी व मच्छर जनित बीमारियों से राहत मिल सकती है।\n\n• भारत में: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में रख-रखाव के स्पष्ट नियमों की कमी शहरी संपत्तियों को बर्बाद कर देती है। यदि समय पर जवाबदेही तय न की जाए तो सार्वजनिक स्थान विज्ञापनों और कचरे के अड्डों में बदल जाते हैं।\n• आजमगढ़ में: करतालपुर और बावली मोड़ जैसे प्रमुख चौराहों से गंदा पानी और पोस्टर हटने से आम जनता को बदबू और मच्छरों के प्रकोप से मुक्ति मिलेगी। नगर पालिका के कड़े रुख के बाद जिम्मेदार संस्थाओं द्वारा मरम्मत कराने से शहर की यातायात सुरक्षा और सुंदरता दोनों बेहतर हो सकेंगी।\n• राहगीरों के लिए: चौराहों पर टूटी दीवारें और गायब लाइटें ठीक होने से रात के समय दुर्घटनाओं का जोखिम घटेगा। रोशनी और व्यवस्थित फुटपाथ मिलने से आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित बन सकेगा।\n• नागरिक स्वास्थ्य पर: फव्वारों के गड्ढों में जमा गंदे पानी की निकासी होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा टल जाएगा। मौसमी बुखार और डेंगू-मलेरिया के मामलों में कमी आने से स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआजमगढ़ के प्रमुख चौराहों की यह दुर्दशा पीपीपी मॉडल के तहत निर्माण कराने के बाद नियमित देखरेख और सफाई की स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण पैदा हुई है। निर्माण करने वाली संस्थाओं ने लंबे समय तक इनकी सुध नहीं ली, जिससे ढांचे जर्जर होते चले गए।\n\n• देखरेख का अभाव: चौराहों को सजाने वाली संस्थाओं और समूहों ने निर्माण के बाद इनकी नियमित सफाई और तकनीकी रख-रखाव पर ध्यान नहीं दिया। समय पर मरम्मत न होने के चलते फव्वारे बंद हो गए और संरचनाएं जर्जर होती चली गईं।\n• जल निकासी और कचरा प्रबंधन की विफलता: फव्वारों के गड्ढों से पानी निकालने या बदलने की कोई नियमित व्यवस्था नहीं रखी गई। इसके चलते बारिश और नालियों का गंदा पानी जमा होता गया और आसपास के कचरे ने इसे पूरी तरह ढक लिया।\n• अवैध प्रचार पर निगरानी की कमी: खाली पड़े ढांचों पर बिना रोक-टोक व्यावसायिक पोस्टर और बैनर चिपकाए जाते रहे। नगर पालिका द्वारा पूर्व में सख्त निगरानी न किए जाने से ये सुंदर मॉडल अनधिकृत विज्ञापन बोर्ड में तब्दील हो गए।\n• प्रशासनिक समीक्षा में देरी: निर्माण कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने के लिए समय पर निरीक्षण नहीं किया गया। अब जाकर नगर पालिका ने दोनों जूनियर इंजीनियरों को सर्वे का निर्देश देकर औपचारिक नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आजमगढ़ के चौराहों पर फव्वारे किस मॉडल के तहत बनाए गए थे?\nये फव्वारे और सुंदरीकरण के ढांचे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत निजी संस्थाओं, समूहों और व्यक्तियों के सहयोग से बनाए गए थे।\n\n2. बावली मोड़ चौराहे की वर्तमान स्थिति कैसी है?\nबावली मोड़ पर बना फव्वारा और ढांचा धूल की मोटी परतों से ढका हुआ है और चारों तरफ पर्चे-बैनर चिपकाए जाने के कारण यह महज एक विज्ञापन बोर्ड बन चुका है।\n\n3. करतालपुर तिराहे पर किस प्रकार की समस्या बनी हुई है?\nकरतालपुर तिराहे के फव्वारे के गड्ढे में बदबूदार गंदा पानी जमा है, जिससे गंदगी फैल रही है और मच्छरों के पनपने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है।\n\n4. नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने क्या कदम उठाए हैं?\nअधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार ने नगर पालिका क्षेत्र के दोनों जूनियर इंजीनियरों को चौराहों का विस्तृत सर्वे करने और नुकसान की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।\n\n5. सर्वे के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या करेगा?\nसर्वे रिपोर्ट पूरी होने के बाद निर्माण कराने वाली संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों को लिखित नोटिस भेजकर चौराहों की मरम्मत कराने का निर्देश दिया जाएगा।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-07",
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