{
  "type": "article",
  "title": "आजमगढ़ में आक्रामक कुत्तों पर लगेगी लगाम, नगर पालिका ने एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के लिए मांगा 1 करोड़ का फंड",
  "summary": "आजमगढ़ शहर में आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए नगर पालिका ने 1 करोड़ रुपये की लागत से एबीसी सेंटर बनाने की योजना तैयार की है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर में आवारा और आक्रामक कुत्तों के बढ़ते हमलों ने आम नागरिकों का सड़कों पर चलना मुश्किल कर दिया है। जिला अस्पताल में हर दिन रेबीज रोधी टीके लगवाने के लिए दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ नजर आती है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, नगर पालिका परिषद आजमगढ़ ने कुत्तों की आबादी को वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से नियंत्रित करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।\n\nशासन को भेजा गया 1 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रस्ताव\nअधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार ने बताया कि अदालती निर्देशों और सरकारी प्राथमिकताओं का पालन करते हुए आजमगढ़ में एक आधुनिक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी के जरिए शासन को 1 करोड़ रुपये का औपचारिक प्रस्ताव भेजा जा चुका है। न्यायिक आदेशों और जनसुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि चालू माह में ही बजट स्वीकृत हो जाएगा। बजट जारी होते ही सेंटर के निर्माण और जरूरी उपकरणों की स्थापना का काम शुरू कर दिया जाएगा।\n\nसर्वे के आधार पर तय होगी दो-स्तरीय कार्ययोजना\nनगर पालिका प्रशासन ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए एक व्यापक दो-स्तरीय रणनीति बनाई है। इसके तहत सबसे पहले पूरे नगर निकाय क्षेत्र में सघन सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के जरिए आक्रामक, काटने की प्रवृत्ति वाले और गंभीर संक्रामक बीमारियों से पीड़ित कुत्तों की अलग पहचान की जाएगी। ऐसे बीमार और हिंसक कुत्तों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा ताकि आम लोगों को जानलेवा संक्रमण और हमलों से सुरक्षित रखा जा सके।\n\nदूसरी ओर, सर्वे में सामान्य और स्वस्थ पाए जाने वाले कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उनका वैज्ञानिक बंध्याकरण और टीकाकरण किया जाएगा। सर्जरी और देखभाल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, नियमों के अनुसार इन कुत्तों को वापस उसी इलाके में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इससे नए आवारा कुत्तों का जमावड़ा रुक सकेगा और प्रजनन दर पर प्रभावी रोक लगेगी।\n\nएनजीओ और निजी एजेंसियों के जरिए होगा पारदर्शी संचालन\nइस पूरी परियोजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए गैर सरकारी संगठनों, थर्ड पार्टी एजेंसियों और विशेषज्ञ निजी संस्थाओं की सेवाएं ली जाएंगी। पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी और चयनित संस्थाओं को निर्धारित भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का लक्ष्य है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि शासन से फंड मिलते ही जमीनी स्तर पर अभियान शुरू किया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nआजमगढ़ में प्रस्तावित एबीसी सेंटर से शहरवासियों को आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज संक्रमण से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।\n\n• आजमगढ़ में: नगर क्षेत्र में आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियमित टीकाकरण से सड़कों पर राहगीरों की सुरक्षा बढ़ेगी। जिला अस्पताल में डॉग बाइट के मामलों में कमी आएगी और एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए लगने वाली कतारें घटेंगी।\n• स्थानीय निवासियों के लिए: आक्रामक और बीमार कुत्तों की अलग पहचान कर निगरानी की जाएगी, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना सुरक्षित होगा। अगले 10 से 15 दिनों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद वार्ड स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।\n• पारदर्शिता और जवाबदेही: काम में जुटी एजेंसियों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान होने से अभियान बिना रुकावट चलेगा। नागरिकों को अपने मोहल्लों में अनियंत्रित रूप से बढ़ते कुत्तों के झुंड से निजात मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआजमगढ़ शहर में आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं और अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की भारी मांग के चलते यह कदम उठाया गया है।\n\n• डॉग बाइट के बढ़ते मामले: जिला अस्पताल में प्रतिदिन दर्जनों लोग कुत्ते के काटने के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। सड़कों पर खूंखार कुत्तों के कारण आम नागरिकों का आवागमन असुरक्षित हो गया था।\n• अदालती निर्देश और सरकारी प्राथमिकता: उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों और शासन की नीतियों के तहत कुत्तों की आबादी को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करना अनिवार्य है। इसी के अनुपालन में नगर पालिका ने यह परियोजना तैयार की।\n• वैज्ञानिक प्रबंधन की कमी: पूर्व में व्यवस्थित नसबंदी और टीकाकरण अभियान न होने से कुत्तों की प्रजनन दर अनियंत्रित बनी हुई थी। अब 1 करोड़ रुपये के बजट से स्थायी एबीसी सेंटर बनाकर इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान निकाला जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आजमगढ़ में एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए कितनी धनराशि का प्रस्ताव भेजा गया है?\nनगर पालिका परिषद आजमगढ़ ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को 1 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रस्ताव भेजा है।\n\n2. कुत्तों के नियंत्रण के लिए प्रशासन की क्या रणनीति है?\nप्रशासन पहले सघन सर्वे कर बीमार व आक्रामक कुत्तों को अलग करेगा, फिर स्वस्थ कुत्तों का बंध्याकरण व टीकाकरण कर उन्हें उनके मूल स्थान पर छोड़ेगा।\n\n3. इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए क्या समय सीमा तय की गई है?\nप्रशासन का लक्ष्य अगले 10 से 15 दिनों में सभी प्रारंभिक व कागजी औपचारिकताएं पूरी करने का है।\n\n4. एबीसी सेंटर के संचालन में किन संस्थाओं की मदद ली जाएगी?\nइस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया के जरिए गैर सरकारी संगठनों और निजी विशेषज्ञ संस्थाओं को जोड़ा जाएगा, जिन्हें डीबीटी से भुगतान मिलेगा।",
  "url": "https://trendkia.com/uttar-pradesh/azamgarh-men-akramaka-kutton-para-lagegi-lagama-nagara-palika-ne-animal-birth-control-center-ke-lie-manga-1-karora-ka-phnda-37062",
  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-23",
  "tags": [
    "आजमगढ़",
    "नगर पालिका परिषद",
    "आवारा कुत्ते",
    "एनिमल बर्थ कंट्रोल",
    "एंटी रेबीज",
    "बृजेश कुमार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}