# आजमगढ़ में पिता की गोली से ही हुई थी मासूम शौर्य की मौत, अनाथ बच्चियों की परवरिश करेगा पुलिस परिवार

> आजमगढ़ के शंभूपुर कांड में पुलिस ने खुलासा किया है कि नौ वर्षीय शौर्य की जान पिता की गोली से गई थी, साथ ही पुलिसकर्मियों ने दोनों बच्चियों को गोद लेकर उनकी पढ़ाई और भविष्य का खर्च उठाने का फैसला किया है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/azamgarh-men-pita-ki-goli-se-hi-hui-thi-masuma-shaurya-ki-mauta-anatha-bachchiyon-ki-paravarisha-karega-pulisa-parivara-38054 · **Language:** Hindi
**Tags:** आजमगढ़, अहरौला, उत्तर प्रदेश पुलिस, शौर्य हत्याकांड, डॉ अनिल कुमार, फॉरेंसिक रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में अहरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत शंभूपुर गांव में हुए सनसनीखेज हत्याकांड को लेकर पुलिस प्रशासन ने स्थिति साफ करते हुए कई अहम और विस्तृत जानकारियां साझा की हैं। अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने के बाद आरोपी अरविंद अपने तीन नाबालिग बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया था। बाहर तैनात पुलिसकर्मियों और परिवार के सदस्यों ने लगभग 7 घंटे तक लगातार बातचीत की और उससे बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की गुहार लगाई, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी और दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया।

## कमरे के भीतर सात घंटे तक चला तनावपूर्ण गतिरोध
कमरे के अंदर बंद रहने के दौरान अरविंद लगातार अपने ही बच्चों को जान से मारने और उन्हें गोली दागने की धमकियां दे रहा था। बाहर मौजूद परिजनों और पुलिस टीम की तमाम कोशिशों के बावजूद उसका रवैया बेहद आक्रामक बना रहा। इसी गतिरोध के बीच अचानक कमरे के भीतर से गोली चलने की जोरदार आवाज सुनाई दी। कमरे में मौजूद मासूमों की जिंदगी पर तत्काल गंभीर खतरा भांपते हुए एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने बिना देर किए कदम उठाया। इन पुलिस अधिकारियों और जवानों ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को ताक पर रखकर कमरे का मुख्य दरवाजा तोड़ा और अंदर दाखिल हुए।

कमरे के फर्श पर नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने के कारण खून से लथपथ और गंभीर हालत में पड़ा मिला। पुलिसकर्मियों ने फौरन बच्चे को उठाया और तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों के भरसक प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी सांसें थम गईं। राहत की बात यह रही कि उसी कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चियों को पुलिस टीम ने बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

## शौर्य की मौत पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष और फॉरेंसिक साक्ष्य
शौर्य की मौत को लेकर उठ रहे सवालों और चर्चाओं पर आजमगढ़ पुलिस ने वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर अपना आधिकारिक पक्ष रखा है। पोस्टमार्टम जांच के दौरान बच्चे के शरीर पर बने गोली के प्रवेश घाव (एंट्री वुंड) पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉर्चिंग के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। मेडिकल और फॉरेंसिक विज्ञान के नियमों के अनुसार त्वचा पर इस तरह के निशान तभी उभरते हैं जब हथियार बेहद करीब सटाकर या बहुत कम दूरी से चलाया गया हो। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिस दूरी पर कमरे में दाखिल होते समय पुलिस बल खड़ा था, वहां से चलाई गई किसी गोली से इस प्रकार के निशान बनना कतई संभव नहीं है।

इसके अलावा पुलिस ने गोली की ट्रैजेक्टरी यानी उसके शरीर के भीतर जाने की दिशा का भी विस्तृत ब्योरा दिया है। गोली शरीर में तिरछी और नीचे से ऊपर की ओर गई थी। नौ साल के बच्चे की सीमित शारीरिक ऊंचाई को देखते हुए ऐसी दिशा तभी बन सकती है जब कोई व्यक्ति बिल्कुल पास खड़ा होकर नीचे से ऊपर की ओर फायरिंग करे। कमरे से सकुशल बचाई गई 11 वर्षीय बच्ची परी ने भी अपने बयान में इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। परी ने बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके छोटे भाई शौर्य पर गोली चलाई थी और वह लगातार उन सभी को खत्म करने की धमकी दे रहा था।

## आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई और आरोपी की मौत
पुलिस के अनुसार शौर्य को गोली मारने के बाद भी अरविंद का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उसने अंदर घुसी पुलिस टीम पर सीधे जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। ऐसी नाजुक स्थिति में बाकी बची बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पुलिसकर्मियों की आत्मरक्षा के लिए जवानों ने नियंत्रित जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में अरविंद गोली लगने से घायल हुआ। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस प्रशासन ने दोहराया है कि शौर्य की जान पुलिस की किसी गोली से नहीं गई, बल्कि उसके पिता अरविंद द्वारा दागी गई गोली ही उसकी मौत का कारण बनी। घटनास्थल के हालात, बैलिस्टिक विश्लेषण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी बच्ची परी की गवाही ने इस तथ्य को पूरी तरह पुष्ट किया है। मामले में फॉरेंसिक नमूनों की विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रियाएं अभी जारी हैं।

## अनाथ हुई दोनों बच्चियों को गोद लेगा आजमगढ़ पुलिस परिवार
माता-पिता दोनों को एक ही झटके में खो देने वाली दोनों बच्चियों के प्रति आजमगढ़ पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक बड़ा सामाजिक फैसला लिया है। दोनों मासूमों के लालन-पालन, स्कूल की पढ़ाई और उनके पूरे भविष्य की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने का संकल्प जनपद के पुलिस परिवार ने लिया है। एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार ने दोनों अनाथ बच्चियों को कानूनी तौर पर गोद लेने की सार्वजनिक घोषणा की है।

सहयोग की इस मुहिम में जिले के सभी पुलिसकर्मी स्वेच्छा से आगे आए हैं। एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार अपना पूरा एक महीने का वेतन इन बच्चियों की मदद के लिए देंगे, जबकि आजमगढ़ जिले में तैनात समस्त पुलिसकर्मी अपने एक-एक दिन का वेतन इस कोष में जमा करेंगे। इस पूरी धनराशि को बच्चियों के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि उनके बड़े होने पर उनकी उच्च शिक्षा और जीवन की अन्य जरूरतों में कोई रुकावट न आए।

## इसका आप पर असर
यह घटना घरेलू हिंसा के चरम रूप, बंधक संकट के दौरान पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अनाथ बच्चों के प्रति प्रशासनिक दायित्व का एक संवेदनशील उदाहरण प्रस्तुत करती है।

- **उत्तर प्रदेश में:** घरेलू विवादों या बंधक संकट की स्थितियों में त्वरित पुलिस रेस्क्यू और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच की पारदर्शिता पर बल मिलेगा। इससे जांच प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग को लेकर जनता का भरोसा मजबूत होगा।
- **आजमगढ़ में:** अनाथ हुई दोनों बच्चियों को जिले के पुलिस परिवार द्वारा गोद लिए जाने से उनके भरण-पोषण और स्कूली शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित होगी। स्थानीय स्तर पर पुलिसकर्मियों के वेतन योगदान से तैयार फिक्स्ड डिपॉजिट फंड दोनों बच्चियों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी बनेगा।
- **नागरिक सुरक्षा:** परिवार के भीतर हथियारबंद तनाव या हिंसा की सूचना मिलते ही पुलिस को समय रहते सूचित करना कितना जरूरी है, यह घटना उसकी पुष्टि करती है। समय पर स्थानीय पुलिस या आपातकालीन हेल्पलाइन पर संपर्क करने से ऐसे गंभीर संकटों में जान बचाई जा सकती है।
- **कानूनी व फॉरेंसिक साक्ष्य:** फॉरेंसिक जांच और बैलिस्टिक विश्लेषण यह स्पष्ट करने में निर्णायक साबित होते हैं कि किस गोली से किसकी जान गई। इससे मुठभेड़ या बचाव अभियानों के दौरान उठने वाले कानूनी सवालों का पारदर्शी समाधान मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुखद घटना तब घटी जब आरोपी अरविंद ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों की हत्या करने के बाद अपने ही बच्चों को बंधक बना लिया और पुलिस के साथ कई घंटों तक गतिरोध बना रहा।

- **प्रत्यक्ष कारण:** आरोपी अरविंद ने पत्नी और पुजारियों की जान लेने के बाद खुद को कमरे में बंद कर लिया और पुलिसकर्मियों के आगे आत्मसमर्पण करने के बजाय बच्चों को जान से मारने की चेतावनी देता रहा। सात घंटे की समझाइश विफल होने के बाद उसने कमरे के भीतर से गोली चला दी, जिसने नौ वर्षीय शौर्य की जान ले ली।
- **रेस्क्यू ऑपरेशन का घटनाक्रम:** भीतर से फायरिंग की आवाज सुनते ही बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए एसएसपी अनिल कुमार समेत पुलिस अधिकारियों ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। जब आरोपी ने पुलिस टीम पर भी गोलीबारी जारी रखी, तब आत्मरक्षा और मासूमों की हिफाजत में पुलिस द्वारा की गई जवाबी फायरिंग में आरोपी मारा गया।
- **फॉरेंसिक निष्कर्ष:** पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले ब्लैकनिंग, स्कॉर्चिंग के निशान, गोली की ऊपर जाती दिशा और प्रत्यक्षदर्शी बच्ची परी की गवाही ने साफ किया कि बच्चे को अत्यंत नजदीक से पिता अरविंद ने ही गोली मारी थी। मामले की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट और वैधानिक प्रक्रियाएं अभी विचाराधीन हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. आजमगढ़ के शंभूपुर में यह घटना कहां और कैसे हुई?
यह घटना अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई, जहां आरोपी अरविंद ने पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद अपने तीन बच्चों को कमरे में 7 घंटे तक बंधक बनाए रखा।

### 2. नौ वर्षीय शौर्य की मौत किसकी गोली लगने से हुई?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निशानों, गोली की दिशा और बहन परी के बयान के अनुसार शौर्य की मौत उसके पिता अरविंद द्वारा नजदीक से चलाई गई गोली से हुई।

### 3. पुलिस ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर क्या तथ्य पेश किए?
शौर्य के घाव पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉर्चिंग के निशान मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि गोली बेहद नजदीक से और नीचे से ऊपर की दिशा में चलाई गई थी।

### 4. कमरे से अन्य बच्चों को कैसे बचाया गया?
एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने दरवाजा तोड़कर दो बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला।

### 5. आरोपी अरविंद की मौत कैसे हुई?
अरविंद द्वारा पुलिस टीम पर फायरिंग किए जाने के बाद आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।

### 6. अनाथ हुई बच्चियों के लिए आजमगढ़ पुलिस ने क्या घोषणा की?
एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार ने बच्चियों को गोद लेने की घोषणा की है, जिसके तहत एसएसपी अपनी एक महीने की सैलरी और जिले के पुलिसकर्मी एक दिन का वेतन देकर उनकी एफडी कराएंगे।

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