बहराइच की पूनम गुप्ता को डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मिला राखी का विशेष रिटर्न गिफ्ट, पत्र भेजकर दी शुभकामनाएं बहराइच निवासी पूनम गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को हाथों से बनी राखी भेजी थी, जिसके जवाब में डिप्टी सीएम ने त्यौहार से पहले स्नेह पत्र भेजकर शुभकामनाएं दीं। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की रहने वाली पूनम गुप्ता इन दिनों अपने एक खास प्रयास के कारण चर्चा का विषय बनी हुई हैं। रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में उन्होंने राज्य के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को अपने हाथों से तैयार की गई एक खूबसूरत राखी भेजी थी। पूरे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद डिप्टी सीएम ने उनकी इस भावना का सम्मान किया और त्यौहार आने से पहले ही उन्हें रिटर्न गिफ्ट के रूप में एक स्नेह पत्र भेजा। इस पत्र को पाकर पूनम गुप्ता बेहद खुश हैं और इसे अपने लिए सबसे अनमोल उपहार मान रही हैं। हाथों से तैयार की थी विशेष राखी पूनम गुप्ता दिल से डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को अपना भाई मानती हैं। उन्होंने इस रक्षाबंधन पर बाजार से राखी खरीदने के बजाय स्वयं अपने हाथों से विशेष राखी तैयार करने का फैसला किया था। अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने 15 अगस्त से ठीक पहले यह रक्षासूत्र डिप्टी सीएम के पते पर भेज दिया था। पूनम का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि राज्य की बड़ी जिम्मेदारियों को संभालने वाले डिप्टी सीएम के पास उनके इस छोटे से उपहार पर ध्यान देने का समय होगा। रक्षाबंधन से पहले मिला खास संदेश पूनम गुप्ता की उम्मीदों से परे, 20 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन पर्व से ठीक पहले उनके पास डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का एक आधिकारिक पत्र पहुंचा। पत्र मिलते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पूनम ने बताया कि अगर यह संदेश त्यौहार बीत जाने के बाद मिलता, तो शायद इसकी खुशी आधी हो जाती। लेकिन रक्षाबंधन से पूर्व ही पत्र भेजकर डिप्टी सीएम ने यह साबित कर दिया कि वे भी दिल से उन्हें अपनी बहन का दर्जा देते हैं और व्यस्तताओं के बीच भी रिश्तों का मान रखते हैं। पत्र में डिप्टी सीएम ने व्यक्त किया आभार डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने अपने स्नेह पत्र में पूनम द्वारा भेजे गए रक्षासूत्र की सराहना की और अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने पत्र के जरिए भाई-बहन के पावन रिश्ते को रेखांकित करते हुए लिखा कि "रक्षाबंधन का यह पर्व भाई-बहन की उस अटूट डोर की याद दिलाता है, जिसे समय और दूरियां कभी कमजोर नहीं कर सकतीं।" इसके साथ ही उन्होंने पूनम के इस अपनेपन को अनमोल बताया और ईश्वर से उनके जीवन में सदैव सुख, समृद्धि, शांति तथा अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मिसाल यह पूरा वाकया बहराइच में लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। एक आम नागरिक द्वारा भेजी गई राखी का इस तरह सम्मानपूर्वक जवाब देना और व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर शुभकामनाएं देना, जनप्रतिनिधि और जनता के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाता है। पूनम गुप्ता का कहना है कि डिप्टी सीएम का यह पत्र उनके जीवन की सबसे यादगार स्मृतियों में से एक बन गया है। इसका आप पर असर यह घटना दर्शाती है कि आम नागरिक किस तरह जनप्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं और सांस्कृतिक पर्वों पर सामाजिक आत्मीयता को बढ़ावा दे सकते हैं। • भारत में: यह प्रसंग दिखाता है कि भारतीय त्योहारों पर नेताओं और जनता के बीच आत्मीय संवाद संभव है। इससे हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक उपहारों को बढ़ावा देने की प्रेरणा मिलती है। • बहराइच में: स्थानीय निवासियों के लिए यह एक सकारात्मक संदेश है कि जिले का कोई नागरिक सीधे राज्य नेतृत्व से जुड़ सका। इससे नागरिकों में जनप्रतिनिधियों के प्रति विश्वास और जुड़ाव मजबूत होता है। सवाल-जवाब 1. पूनम गुप्ता कौन हैं और वे कहाँ की रहने वाली हैं? पूनम गुप्ता उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की रहने वाली हैं, जो अपने हाथों से राखी बनाकर डिप्टी सीएम को भेजने के कारण चर्चा में आईं। 2. पूनम गुप्ता ने किसे राखी भेजी थी? उन्होंने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को अपने हाथों से बनी राखी भेजी थी। 3. डिप्टी सीएम की तरफ से पूनम गुप्ता को क्या रिटर्न गिफ्ट मिला? डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं, आशीर्वाद और स्नेह भरा एक आधिकारिक पत्र भेजा। 4. पूनम गुप्ता ने राखी कब भेजी थी और पत्र कब प्राप्त हुआ? उन्होंने 15 अगस्त से पहले राखी भेजी थी और उन्हें 20 अगस्त को रक्षाबंधन से ठीक पहले डिप्टी सीएम का पत्र प्राप्त हुआ। प्रेरणा और सबक पूनम गुप्ता के प्रयास से सीख मिलती है कि सच्ची भावना और व्यक्तिगत मेहनत का सम्मान हमेशा होता है। • व्यक्तिगत प्रयास का महत्व: बाजार से खरीदी वस्तु के बजाय अपने हाथों से बनी चीज में अधिक संवेदना और अपनापन होता है। • संकोच का त्याग: पद या कद की परवाह किए बिना अपनी सकारात्मक भावनाएं व्यक्त करने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। • समय का सम्मान: त्यौहारी अवसरों पर भेजे गए संदेश सही समय पर पहुँचने पर ही उनका वास्तविक मूल्य और खुशी दोगुनी होती है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/bahraich-ki-poonam-gupta-ko-dipti-siema-brajesh-pathak-se-mila-rakhi-ka-vishesha-ritarna-giphta-patra-bhejakara-di-shubhakamanaen-22856 TrendKia — Har trend, sabse pehle.