# बलिया के प्रमोद सर्राफ ने रचा प्रकृति का अनोखा संसार: गिर और दुर्लभ श्याम नस्ल की गायें, सैकड़ों जीव-जंतु और 125 लोगों को रोजगार

> बलिया के व्यवसायी प्रमोद सर्राफ ने अपने परिसर को पशु-पक्षियों और औषधीय पौधों का स्वर्ग बना दिया है, जहां गिर और दुर्लभ श्याम नस्ल की गायों के साथ-साथ 125 लोगों को रोजगार भी मिला है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-06-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/baliya-ke-pramoda-sarrapha-ne-racha-prakriti-ka-anokha-snsara-gira-aura-durlabha-746 · **Language:** Hindi
**Tags:** बलिया, प्रमोद सर्राफ, गौशाला, गिर नस्ल गाय, श्याम नस्ल गाय, प्रकृति प्रेम, विश्व पर्यावरण दिवस, औषधीय पौधे

कुछ लोग अपने जन्मदिन को सिर्फ मनाते हैं और कुछ उसे सही मायनों में जीते हैं। बलिया के प्रमोद सर्राफ दूसरी श्रेणी में आते हैं। एक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ उनकी असली पहचान प्रकृति और पशु-पक्षियों के सच्चे प्रेमी की बन चुकी है। संयोग देखिए कि उनका जन्म 5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस के दिन हुआ था, और जीवन भर वे इसी दिन के मर्म को जीते आए हैं।

## एक व्यवसायी से प्रकृति प्रेमी तक का सफर
डीपी ज्वेलर्स के मालिक प्रमोद सर्राफ बताते हैं कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली। इसी वजह से अब उनके पास पर्याप्त समय रहता है, जिसे वे अपने परिसर को हरियाली और जीव-जंतुओं का सुरक्षित ठिकाना बनाने में लगाते हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति दुर्लभ पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों को देखकर एक अलग सुकून महसूस करता है।

## गिर और दुर्लभ श्याम नस्ल की गायें
उनकी गौशाला में कई नस्लों की गायें पाली जा रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से गिर नस्ल शामिल है। इसके अलावा यहां श्याम नस्ल की गाय भी है, जिसका नाम शायद ही किसी ने सुना हो। इसे बेहद दुर्लभ प्रजाति माना जाता है। प्रमोद बताते हैं कि मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण के पिता नंद जी के पास लाखों गायें थीं, लेकिन जब भी श्रीकृष्ण बीमार पड़ते थे तो इसी नस्ल की गाय की पूंछ के स्पर्श से उनका बुखार या कोई भी बीमारी ठीक हो जाती थी। उसी प्रजाति की गाय आज उनके पास मौजूद है, जिसे उन्होंने विशेष रूप से पूजा-पाठ के लिए रखा है।

## बेसहारा और अंधी गायों की सेवा
प्रमोद सर्राफ अपने सिद्धांतों के पक्के हैं — वे न तो अपनी गाय बेचते हैं और न ही बैल। गौशाला में बछड़ों को भी सुरक्षित रखा गया है। इतना ही नहीं, वे दो अंधी गायों की भी पूरी सेवा करते हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग बोझ समझकर छोड़ देते हैं।

## पक्षियों और जीव-जंतुओं का घर
यहां सिर्फ गायें ही नहीं, बल्कि तरह-तरह के पक्षी और जीव-जंतु भी रहते हैं। प्रमोद ने हंस, लव बर्ड्स, घोड़ा-घोड़ी, काकातुआ और खरगोश जैसे कई जीवों को पाल रखा है। इनसे भले ही कोई आर्थिक लाभ न होता हो, लेकिन एक पशु प्रेमी के नाते इनके साथ रहना उन्हें भीतर से सुख देता है।

## औषधीय पौधों का अनूठा बगीचा
उनके घर के आसपास बने गार्डन में अनेक औषधीय और दुर्लभ पौधे लगे हैं। इनमें सिंदूर का पेड़, सीताफल, लाल चंदन, सेब का पेड़, सुदर्शन और अंगूर जैसे पौधे शामिल हैं। प्रमोद का कहना है कि अगर कोई शोधकर्ता यहां आए तो इस एक जगह पर ही पूरी किताब लिखी जा सकती है। उनका यह भी दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस सिंदूर के पेड़ का जिक्र किया था, वही पेड़ उनके गार्डन में भी मौजूद है।

## 125 परिवारों की आजीविका का आधार
इस गौशाला की देखभाल में 3 लोग पूरे 365 दिन और 24 घंटे लगे रहते हैं। कुल मिलाकर प्रमोद सर्राफ ने 125 लोगों को रोजगार दिया है, और आज यह व्यवस्था सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार बन चुकी है। गाय, वृक्ष और पशु-पक्षियों के बीच रहना उन्हें बेहद भाता है। खास बात यह है कि वे गौशाला की किसी भी गाय का दूध बेचते नहीं हैं — परिवार की जरूरत से अधिक दूध को स्टाफ पीता है, और पूजा के लिए वे इसे निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं।

## इतिहासकार भी रह गए आश्चर्यचकित
इस स्थान पर पहली बार पहुंचे प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय इसे देखकर अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा कि बलिया जनपद में पशु-पक्षियों और पर्यावरण के प्रति इतना अद्भुत प्रेम रखने वाला व्यक्ति है, यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ। गौशाला में पाली जा रही अलग-अलग नस्लों की गायों को देखकर वे हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण वास्तव में अत्यंत सात्विक और शांतिमय है, और ऐसे माहौल में रहने वाले व्यक्ति को स्वतः ही सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

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