बलिया में गंगा का कहर: शहर के कई मोहल्ले पानी में डूबे, छतों पर जीवन गुजारने को मजबूर लोग बलिया शहर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। लोग अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं और जिला प्रशासन के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा नदी का पानी अब केवल खेतों या ग्रामीण तटवर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने शहर की घनी बस्तियों में भी अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। खतरे के निशान को पार कर चुकी गंगा का पानी अब रिहायशी मकानों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई मोहल्लों में स्थिति यह है कि मकानों का पूरा निचला हिस्सा पानी में पूरी तरह डूब चुका है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों ने अपना जरूरी सामान समेट लिया है और अब छतों को ही अपना नया आशियाना बना लिया है। सड़कों पर पानी और आवाजाही में भारी परेशानी नदी का जलस्तर बढ़ने से इलाके के सभी आने-जाने वाले रास्ते जलमग्न हो चुके हैं। जरूरी काम या रोजमर्रा की चीजों को लाने के लिए भी लोगों को घुटने से लेकर कमर तक भरे गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा गंभीर समस्या स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के सामने आ रही है, जिन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर इसी जलभराव के बीच से आवागमन करना पड़ रहा है। इसके अलावा बाढ़ के पानी के साथ फैली भारी गंदगी और जहरीले जीव-जंतुओं के लगातार सामने आने से लोगों का डर और ज्यादा बढ़ गया है, जिससे स्थानीय परिवारों में हर वक्त दहशत का माहौल बना हुआ है. प्रशासन के दावों की खुली पोल स्थानीय निवासी धनंजय चौहान ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में सरकार और अधिकारियों को आगे आकर लोगों का दर्द कम करना चाहिए, क्योंकि अब मदद करने का असली वक्त आ गया है। उन्होंने बताया कि इलाके में बमुश्किल एक नाव नजर आ रही है, जो शायद चलने की स्थिति में भी नहीं है, और लोग मजबूरन पैदल ही पानी पार करने को विवश हैं। चारों तरफ फैली गंदगी के बीच अगर किसी का पैर फिसल जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। एक अन्य स्थानीय निवासी पंकज कुमार प्रजापति ने कहा कि घरों के निचले हिस्से के डूब जाने से जो भावनात्मक तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे जिला प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोल रही हैं। पानी लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जरूरी सामान जुटाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है. बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का संकट धर्मेंद्र कुमार ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि बाढ़ के पानी से स्कूली बच्चों की ड्रेस भीग जाती है और हमेशा बहने या डूबने का खतरा बना रहता है। साथ ही जहरीले जीव-जंतुओं का डर लोगों को मानसिक रूप से सहमा रहा है, जिन्हें अक्सर पानी के पास देखा जाता है। आपदा के इस समय में समाजसेवियों और स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई ठोस मदद नहीं मिल पा रही है, जिससे लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं। धरातल पर प्रशासन के दावे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं और जनता हर रोज नई मुसीबतों का सामना कर रही है. इसका आप पर असर उत्तर प्रदेश में: लगातार बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को आवाजाही और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बलिया में: शहर के जलमग्न मोहल्लों के निवासियों को छतों पर शरण लेनी पड़ रही है और बच्चों तथा बुजुर्गों को दूषित पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सवाल-जवाब 1. बलिया में बाढ़ के हालात क्यों पैदा हुए हैं? गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके कारण पानी शहर की बस्तियों और रिहायशी इलाकों के अंदर तक घुस गया है। 2. स्थानीय लोगों को किन प्रमुख समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? घरों के निचले हिस्से पूरी तरह डूब चुके हैं, रास्ते पानी में विलीन हो गए हैं और लोगों को घुटने से कमर तक पानी में चलकर जरूरी काम करने पड़ रहे हैं। 3. स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर इस आपदा का क्या असर है? बच्चों के स्कूल के कपड़े भीग जाते हैं और उन्हें बहने या डूबने के खतरे के बीच आना-जाना पड़ता है, जबकि जहरीले जीव-जंतुओं का डर भी लगातार बना हुआ है। 4. प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की क्या शिकायत है? निवासियों का आरोप है कि जिला प्रशासन के दावे धरातल पर पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं और संकट के इस समय में कोई पर्याप्त मदद या नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/baliya-men-ganga-ka-kahara-shahara-ke-kai-mohalle-pani-men-dube-chhaton-para-jivana-gujarane-ko-majabura-loga-20509 TrendKia — Har trend, sabse pehle.