बलिया में दिव्यांग छात्रा रागिनी की पढ़ाई की लगन देख पसीजा प्रशासन, डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने मदद के लिए भेजी टीम उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक पैर से दिव्यांग पहली कक्षा की छात्रा रागिनी का स्कूल जाने के लिए साइकिल मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने त्वरित कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पढ़ाई के प्रति अत्यधिक लगन रखने वाली एक मासूम दिव्यांग बच्ची की पुकार ने जिला प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मनियर शिक्षा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय दिघेडा में कक्षा एक की छात्रा रागिनी एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद प्रतिदिन स्कूल जाती है। कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखने के उसके अटूट जज्बे और जिलाधिकारी से की गई मार्मिक अपील का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई मासूम की मार्मिक पुकार वायरल वीडियो में मासूम छात्रा रागिनी जिला प्रशासन से अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए सहायता की गुहार लगाती दिख रही है। उसने वीडियो में कहा, "डीएम अंकल, मेरा एक पैर खराब हो चुका है, हमें साइकिल दिलवा दीजिए, हम रोज पढ़ने आएंगे।" प्राथमिक विद्यालय दिघेडा की इस छात्रा का पैर बचपन में ही एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाने के कारण गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना के बाद से वह एक पैर के सहारे चलने को मजबूर है और काफी थक-हारकर स्कूल पहुँच पाती है। रागिनी के माता-पिता की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिसके कारण वे उसके लिए साइकिल या ट्राईसाइकिल खरीदने में असमर्थ हैं। पढ़ने का जुनून और आईएएस अधिकारी बनने का सपना शारीरिक अक्षमता और आर्थिक तंगी के बावजूद रागिनी के हौसले बुलंद हैं। उसमें शिक्षा प्राप्त करने की अद्भुत ललक है और वह भविष्य में पढ़-लिखकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली चुनौतियों के बाद भी वह कभी अपनी कक्षाओं से दूर नहीं होना चाहती। एक पैर पर पैदल चलकर स्कूल जाने में होने वाली अत्यधिक थकान को दूर करने के लिए ही उसने जिलाधिकारी से एक साइकिल प्रदान करने की गुहार लगाई, ताकि उसकी शिक्षा में कोई बाधा न आए। जिलाधिकारी का तत्काल संज्ञान और मेडिकल टीम का गठन मासूम रागिनी का यह मार्मिक अनुरोध सामने आते ही बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मामले को बेहद संजीदगी से लिया और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी और एक विशेषज्ञ चिकित्सक की संयुक्त टीम को तुरंत मौके पर प्राथमिक विद्यालय दिघेडा भेजा। इस टीम का मुख्य उद्देश्य बच्ची की शारीरिक स्थिति का सही आंकलन करना और उसकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त सहायक उपकरण तय करना है। सहायक उपकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का आश्वासन जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने स्पष्ट किया कि प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्रा इस स्थिति में नहीं है कि वह सामान्य रूप से पैदल चलकर दूरी तय कर सके। उन्होंने बताया कि जैसे ही डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट आज प्राप्त होगी, रागिनी को तुरंत आवश्यक उपकरण उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रशासन न केवल उसकी पढ़ाई पूरी कराने में पूरी मदद करेगा, बल्कि उसके परिवार को घर में शौचालय निर्माण सहित अन्य प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ेगा। जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि बच्ची को हर संभव प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा ताकि वह सामान्य जीवन जी सके। इसका आप पर असर यह समाचार स्थानीय स्तर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक जवाबदेही की प्रभावशीलता को उजागर करता है। • उत्तर प्रदेश में: राज्य भर के दिव्यांग छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सहायक उपकरण पाने में आसानी होगी। • बलिया जिले में: दिघेडा प्राथमिक विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को बाल कल्याण तथा दिव्यांग सशक्तिकरण योजनाओं की त्वरित जानकारी और लाभ प्राप्त होगा। स्थानीय नागरिक अब ऐसी समस्याओं को सीधे प्रशासन के संज्ञान में लाने के लिए प्रेरित होंगे। • विद्यार्थियों के लिए: रागिनी का संकल्प अन्य ग्रामीण और गरीब बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा प्राप्त की जा सकती है। • अभिभावकों के लिए: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के माता-पिता को यह विश्वास मिलता है कि सरकारी योजनाओं के तहत दिव्यांग बच्चों को उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने के रास्ते खुले हैं। सवाल-जवाब 1. रागिनी कौन है और उसका वीडियो क्यों वायरल हुआ? रागिनी बलिया के मनियर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दिघेडा में कक्षा एक की छात्रा है। उसका एक पैर खराब होने के कारण स्कूल जाने के लिए साइकिल मांगने का वीडियो वायरल हुआ। 2. रागिनी का पैर किस वजह से खराब हुआ था? बचपन में हुई एक सड़क दुर्घटना में रागिनी का पैर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे वह पूरी तरह दिव्यांग हो गई। 3. रागिनी ने जिलाधिकारी से क्या मांग की थी? रागिनी ने जिलाधिकारी से एक साइकिल या ट्राईसाइकिल दिलवाने की मांग की ताकि वह बिना थके रोज स्कूल जा सके। 4. बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने क्या कार्रवाई की? जिलाधिकारी ने तुरंत दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी और एक डॉक्टर की टीम को विद्यालय भेजा ताकि रागिनी की जांच कर उसे तुरंत उपकरण उपलब्ध कराया जा सके। 5. प्रशासन रागिनी के परिवार को क्या अतिरिक्त मदद देगा? प्रशासन उसकी पढ़ाई में मदद के साथ-साथ उसके घर में शौचालय बनवाएगा और परिवार को सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ेगा। 6. पढ़-लिखकर रागिनी क्या बनना चाहती है? रागिनी पढ़-लिखकर भविष्य में एक आईएएस (IAS) अधिकारी बनना चाहती है। प्रेरणा और सबक रागिनी की कहानी यह सिखाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और पढ़ने का जज्बा किसी भी शारीरिक कमजोरी पर विजय प्राप्त कर सकता है। • अतुलनीय दृढ़ संकल्प: एक पैर से चलने में अत्यधिक थकान होने के बाद भी रोज स्कूल जाना दिखाता है कि सपनों को हासिल करने के लिए संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। • बड़ा सपना देखने का साहस: विषम परिस्थितियों और गरीबी में रहने के बावजूद आईएएस अधिकारी बनने की महत्वाकांक्षा रखना उच्च सोच को दर्शाता है। • मदद मांगने की हिम्मत: संकोच छोड़कर अपनी जरूरत को खुलकर शासन-प्रशासन के सामने रखना अधिकार पाने की दिशा में पहला कदम है। • कठिनाइयों के आगे न झुकना: शारीरिक दिव्यांगता और साधनों की कमी को अपनी पढ़ाई के रास्ते की दीवार न बनने देना। https://trendkia.com/uttar-pradesh/ballia-men-divyanga-chhatra-ragini-ki-parhai-ki-lagana-dekha-pasija-prashasana-dm-mangla-prasad-singh-ne-madada-ke-lie-bheji-tima-26356 TrendKia — Har trend, sabse pehle.