गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में बीजेपी की जीत, सपा के आरोपों के बीच ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने मारी बाजी उत्तर प्रदेश विधान परिषद के गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को बेहद करीबी मुकाबले में हरा दिया है। इस पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान 35 घंटे से ज्यादा लंबी मतगणना चली और समाजवादी पार्टी ने गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रक्रिया का बहिष्कार किया। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में खासी हलचल मचा दी है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और तीन बार के विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शानदार जीत हासिल की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को कांटे की टक्कर में केवल 276 मतों के अंतर से शिकस्त दी। हालांकि इस परिणाम की औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन वोटों के आंकड़े साफ तौर पर जीत की तस्दीक कर रहे हैं। इस त्रिकोणीय मुकाबले में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी ने तीसरा स्थान हासिल किया है। मतगणना के आंकड़े और वरीयता वोटों का गणित पहली वरीयता के मतों की गिनती के शुरुआती दौर में तस्वीर काफी दिलचस्प थी। ध्रुव कुमार त्रिपाठी को पहली वरीयता में कुल 11,881 वोट हासिल हुए, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव 11,415 मतों के साथ दूसरे नंबर पर मजबूती से डटे हुए थे। वहीं समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी को 8,301 वोट मिले और वे तीसरे पायदान पर रहे। शुरुआती चरणों में निर्दलीय प्रत्याशी की बढ़त ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया था। हालांकि, जब दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पूरी हुई, तब जाकर ध्रुव कुमार त्रिपाठी की जीत का स्पष्ट रास्ता साफ हो सका और उन्होंने बाजी अपने नाम कर ली। लंबी मतगणना और तीखा विवाद इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए वोटों की गिनती का काम सामान्य नहीं रहा और यह प्रक्रिया 35 घंटे से अधिक समय तक लगातार चलती रही। मतगणना के शुरुआती रुझानों में निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव लगातार अपनी बढ़त बनाए हुए थे। शुरुआती दो चरणों में यादव आगे चल रहे थे, और तीसरे चरण के खत्म होने तक उनकी बढ़त 370 से अधिक वोटों की बताई जा रही थी। लेकिन जैसे ही पहली वरीयता के मतों का चौथा और अंतिम चरण शुरू हुआ, समीकरण बदल गए और ध्रुव त्रिपाठी ने बढ़त बनाते हुए बढ़त हासिल कर ली। इस उतार-चढ़ाव भरी मतगणना के दौरान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए। विपक्ष का बहिष्कार और गड़बड़ी के आरोप मतगणना के दौरान पैदा हुए तनाव के बीच समाजवादी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी ने खुले तौर पर चुनाव पर्यवेक्षक पर सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप मतगणना प्रक्रिया का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। पार्टी के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने किसी भी प्रत्याशी को चरणवार मतगणना का आधिकारिक चार्ट उपलब्ध नहीं कराया। इसके अलावा सपा उम्मीदवार डॉ. संजयन त्रिपाठी ने भी रुझानों में आए अचानक बदलाव पर सवाल उठाए और प्रक्रिया से किनारा कर लिया। निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव ने भी इस पूरी गिनती में गड़बड़ी की आशंका जताई। उम्मीदवार बदलने के फैसले पर चर्चा इस चुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के ध्रुव कुमार त्रिपाठी, सपा के संजयन त्रिपाठी और निर्दलीय राजीव यादव के बीच ही सिमट कर रह गया था। लेकिन समाजवादी पार्टी की रणनीति भी चर्चा का विषय बनी रही क्योंकि पार्टी ने शुरुआत में कमलेश यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था। बाद में 3 अक्टूबर को अचानक फैसला बदलते हुए डॉ. संजयन त्रिपाठी को चुनावी मैदान में उतार दिया गया। संजयन त्रिपाठी का पिछला राजनीतिक जुड़ाव बीजेपी से रहा था। दूसरी ओर, कमलेश यादव के समर्थकों का दावा था कि उन्होंने लंबे समय तक क्षेत्र में अपना मजबूत जनाधार तैयार किया था और राज्य के 17 जिलों में लगातार शिक्षकों के बीच संपर्क अभियान चलाया था। ऐसे में मतदान से ठीक पहले प्रत्याशी बदलने के इस फैसले को सपा के समग्र प्रदर्शन और चुनाव परिणाम से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के गढ़ में राजनीतिक मायने गोरखपुर क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृहक्षेत्र होने के नाते भारतीय जनता पार्टी का सबसे प्रमुख राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में इस शिक्षक एमएलसी सीट पर हुई कांटे की टक्कर और तनावपूर्ण माहौल ने इसे राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उत्तर प्रदेश की कुल 11 विधान परिषद सीटों के लिए हुए इन चुनावों में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने कुल 6 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की है, जबकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के खाते में 4 सीटें आई हैं। इसका आप पर असर यह चुनाव परिणाम उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के राजनीतिक समीकरणों और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के प्रभाव को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। • भारत में: राज्य की 11 एमएलसी सीटों में से बीजेपी के पास 6 और सपा के पास 4 सीटें जाने से आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर असर पड़ेगा। यह परिणाम स्थानीय स्तर पर शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ को भी रेखांकित करता है। • गोरखपुर में: मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र में इस तरह का कांटे का मुकाबला और 35 घंटे तक चली लंबी मतगणना स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक सरगर्मी को चर्चा के केंद्र में रखती है। क्षेत्र के शिक्षकों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह परिणाम सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते संघर्ष का संकेत है। ऐसा क्यों हुआ यह चुनाव गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत शिक्षकों के प्रतिनिधित्व के लिए कराया गया था, जिसमें मतगणना के दौरान राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर मतभेद पैदा हुए। • वरीयता वोटों का प्रभाव: पहली वरीयता के मतों में कोई स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण परिणाम दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पर निर्भर हो गया, जिससे जीत का अंतर बेहद कम रहा। • प्रशासनिक विवाद: मतगणना प्रक्रिया 35 घंटे से अधिक लंबी खिंचने और चरणवार चार्ट समय पर उपलब्ध न कराए जाने के कारण विपक्षी दलों ने धांधली के आरोप लगाए और बहिष्कार किया। • रणनीतिक बदलाव: समाजवादी पार्टी द्वारा मतदान से ठीक पहले अपना उम्मीदवार बदलने और पूर्व में बीजेपी से जुड़े रहे प्रत्याशी को मैदान में उतारने से स्थानीय स्तर पर वोटिंग समीकरणों पर असर पड़ा। सवाल-जवाब 1. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से किसने जीत दर्ज की है? बीजेपी प्रत्याशी और तीन बार के एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने इस सीट पर जीत दर्ज की है। 2. ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कितने मतों के अंतर से चुनाव जीता? उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को 276 मतों के अंतर से हराया। 3. मतगणना कितने समय तक चली थी? गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर वोटों की गिनती 35 घंटे से अधिक समय तक चली। 4. समाजवादी पार्टी ने मतगणना का बहिष्कार क्यों किया? सपा ने चुनाव पर्यवेक्षक पर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा चरणवार चार्ट न दिए जाने पर प्रक्रिया का बहिष्कार किया। 5. सपा ने किस उम्मीदवार को मैदान में उतारा था? सपा ने पहले कमलेश यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में 3 अक्टूबर को डॉ. संजयन त्रिपाठी को टिकट दिया। 6. उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों में बीजेपी और सपा को कितनी सीटें मिलीं? बीजेपी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी को 4 सीटें हासिल हुईं। https://trendkia.com/uttar-pradesh/bjp-wins-gorakhpur-faizabad-teachers-mlc-election-as-sp-alleges-irregularities-52629 TrendKia — Har trend, sabse pehle.