# छात्र आंदोलन में जेल गई आकृति चौधरी को राहत, अदालत ने डीएम मेधा रूपम की जेब से हर्जाना भरने का आदेश दिया

> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट के दौरान NSA के तहत हिरासत में रखी गई आकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर 5 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया, वह भी डीएम मेधा रूपम की सैलरी से।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/chhatra-andolana-men-jela-gai-aakriti-chaudhary-ko-rahata-adalata-ne-diema-medha-rupam-ki-jeba-se-harjana-bharane-ka-adesha-diya-29369 · **Language:** Hindi
**Tags:** आकृति चौधरी, NSA मामला, इलाहाबाद हाईकोर्ट, नोएडा प्रदर्शन, मेधा रूपम, मुआवजा आदेश

25 साल की एक छात्रा किसी आंदोलन में उतरती है और कुछ ही दिनों में जेल की सलाखों के पीछे पहुंच जाती है, यह सुनने में जितना असामान्य लगता है, दिल्ली यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट आकृति चौधरी के साथ ठीक ऐसा ही हुआ। अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और बाद में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि उन्हें करीब पांच महीने तक न्यायिक हिरासत में बिताने पड़े। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ उनकी हिरासत को गैरकानूनी करार देकर रद्द किया है, बल्कि उन्हें 5 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश भी दिया है, और सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह रकम सरकारी खजाने से नहीं बल्कि सीधे गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की सैलरी से वसूली जाएगी।

## गिरफ्तारी से पांच महीने की हिरासत तक
आकृति चौधरी की कहानी नोएडा में चल रहे वर्कर्स प्रोटेस्ट से जुड़ी है, जहां वे शामिल हुई थीं। प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया और उसके तुरंत बाद प्रशासन ने उन पर NSA जैसा सख्त कानून लगा दिया, जो आमतौर पर बेहद गंभीर मामलों में इस्तेमाल होता है। इस एक फैसले ने आकृति को करीब पांच महीने तक जेल में रहने पर मजबूर कर दिया। जब मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा तो दो जजों की बेंच ने पूरे मामले की बारीकी से जांच की और पाया कि जिस आधार पर उन्हें हिरासत में रखा गया था, उसमें ही गंभीर खामियां थीं। यही वजह रही कि कोर्ट ने NSA के तहत हुई उनकी हिरासत को पूरी तरह रद्द कर दिया।

## डीएम का आचरण उपहास के योग्य: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखी टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि डीएम मेधा रूपम का आचरण उपहास के योग्य था और ऐसा प्रतीत होता है कि एक शांतिपूर्ण छात्र कार्यकर्ता को जानबूझकर दूसरों के लिए उदाहरण बनाने की कोशिश की गई, ताकि भविष्य में कोई और प्रदर्शन करने की हिम्मत न करे। कोर्ट ने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सत्ता के दुरुपयोग जैसा माना। इसी वजह से अदालत ने आदेश दिया कि डीएम मेधा रूपम और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपनी नाराजगी उनके सेवा रिकॉर्ड में भी दर्ज की जाए, ताकि भविष्य में इसका हिसाब रखा जा सके।

## मुआवजा सरकारी खजाने से नहीं, डीएम की सैलरी से
आमतौर पर ऐसे मामलों में मुआवजे की रकम सरकारी खजाने से चुकाई जाती है, लेकिन इस बार हाईकोर्ट ने अलग रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि आकृति चौधरी को दिया जाने वाला 5 लाख रुपए का मुआवजा डीएम मेधा रूपम की निजी सैलरी से वसूला जाए। इस फैसले को अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि गलत फैसलों की कीमत अब सिर्फ सरकारी खजाना नहीं बल्कि जिम्मेदार अधिकारी को खुद भी चुकानी पड़ सकती है।

## अफसरों की वफादारी संविधान के प्रति, राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति नहीं
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने IAS और IPS अधिकारियों को उनके संवैधानिक दायित्वों की याद भी दिलाई। कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों की निष्ठा राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति नहीं, बल्कि संविधान के प्रति होनी चाहिए। अदालत ने आगे यह भी चेताया कि अगर अधिकारी अपनी इस बुनियादी जिम्मेदारी को भूल गए, तो उत्तर प्रदेश एक 'ऑरवेलियन डिस्टोपिया' में तब्दील होने का जोखिम उठा सकता है। यह टिप्पणी दिखाती है कि कोर्ट ने इस मामले को सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित न रखकर, प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही से जोड़कर देखा।

## इसका आप पर असर
इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल होते हैं, साथ ही उन प्रशासनिक अधिकारियों पर भी जो शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने के लिए सख्त कानूनों का सहारा लेते हैं।

- **भारत में:** यह फैसला देशभर के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक नजीर बन सकता है। अब अगर किसी अफसर ने किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी पर गलत तरीके से सख्त कानून लगाया, तो उसे अपनी जेब से मुआवजा भरना पड़ सकता है।
- **नोएडा और उत्तर प्रदेश में:** गौतम बुद्ध नगर के प्रशासन की साख पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय अफसरों के सेवा रिकॉर्ड में अब यह नाराजगी दर्ज हो जाएगी, जो उनके भविष्य के करियर और तबादलों को प्रभावित कर सकती है।
- **छात्रों और कार्यकर्ताओं के लिए:** अदालत के इस रुख से उन युवाओं को राहत मिलती है जो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हैं। गलत तरीके से हिरासत में लिए जाने पर उन्हें कानूनी रास्ते से रिहाई और मुआवजा दोनों मिल सकते हैं।
- **सरकारी अफसरों के लिए:** IAS और IPS अधिकारियों के लिए यह साफ चेतावनी है कि राजनीतिक दबाव में लिए गए फैसलों की व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ सकती है। सेवा रिकॉर्ड में दर्ज नाराजगी पदोन्नति और पोस्टिंग को प्रभावित कर सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में चल रहे मजदूरों के प्रदर्शन से शुरू हुआ, जिसमें आकृति चौधरी शामिल हुई थीं। प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार करने के बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगा दिया, जो आमतौर पर बेहद असाधारण और गंभीर मामलों में इस्तेमाल होता है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** डीएम मेधा रूपम के आदेश पर आकृति चौधरी के खिलाफ NSA लगाया गया, जिसके आधार पर उन्हें पांच महीने तक हिरासत में रखा गया।
- **अदालत की राय:** हाईकोर्ट ने पाया कि जिस आधार पर हिरासत का आदेश दिया गया था, उसमें ही गंभीर खामियां थीं, इसलिए पूरी कार्रवाई को रद्द कर दिया गया।
- **मंशा पर सवाल:** कोर्ट के मुताबिक ऐसा लगता है कि एक शांतिपूर्ण छात्र कार्यकर्ता को जानबूझकर उदाहरण बनाया गया, ताकि भविष्य में कोई और प्रदर्शन करने की हिम्मत न करे।
- **आगे क्या:** कोर्ट के आदेश के बाद डीएम और पुलिस अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड में नाराजगी दर्ज की जाएगी, वहीं मुआवजे की रकम डीएम की सैलरी से वसूली जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. आकृति चौधरी कौन हैं?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट, जिन्हें अप्रैल 2026 में नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

### 2. उन्हें किस कानून के तहत हिरासत में रखा गया था?
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत।

### 3. उन्हें कितने समय तक हिरासत में रहना पड़ा?
करीब पांच महीने तक न्यायिक हिरासत में।

### 4. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत उनकी हिरासत रद्द कर दी और 5 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया।

### 5. मुआवजे की रकम कहां से वसूली जाएगी?
सरकारी खजाने से नहीं बल्कि गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम की सैलरी से।

### 6. कोर्ट ने डीएम के आचरण को कैसा बताया?
कोर्ट ने डीएम के आचरण को 'उपहास के योग्य' बताया।

### 7. कोर्ट ने और क्या निर्देश दिया?
डीएम और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया।

### 8. कोर्ट ने अधिकारियों को क्या चेतावनी दी?
कहा कि अगर अफसर संविधान के प्रति अपनी निष्ठा भूल गए तो उत्तर प्रदेश 'ऑरवेलियन डिस्टोपिया' में बदल सकता है।

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