# चुनावी गठजोड़ में सीटों की संख्या नहीं, सिर्फ जीत मायने रखती है: अखिलेश यादव

> समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सहयोगियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य सीटों की संख्या तय करने के बजाय चुनाव जीतना होना चाहिए।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/chunavi-gathajora-men-siton-ki-snkhya-nahin-sirpha-jita-mayane-rakhati-hai-akhilesh-yadav-42631 · **Language:** Hindi
**Tags:** अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, उत्तर प्रदेश चुनाव, अराधना मिश्रा, अजय राय, इमरान मसूद

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगामी चुनावी रणनीति को लेकर अपने गठबंधन के सहयोगी दलों को एक सीधा और स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने साफ किया कि गठबंधन में किसको कितनी या कौन सी सीटें मिलती हैं, इससे कहीं अधिक अहम यह सुनिश्चित करना है कि गठबंधन को जीत हासिल हो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि चुनावी समर में सीटों की दावेदारी से ज्यादा जीत का परिणाम मायने रखता है।

## सीटों के बंटवारे से बड़ा सवाल साझा जीत का
अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब राजनीतिक मकसद पूरी तरह साफ होता है, तो साथ चलना और मिलकर काम करना बेहद आसान हो जाता है। उनके अनुसार, अगर सभी दलों की निगाहें अपनी मंजिल पर टिकी रहें तो आगे का चुनावी सफर भी सुगम बन जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि गठबंधन के भीतर किस दल के हिस्से में कौन सी सीट जा रही है, यह कोई बड़ा विषय नहीं है। असल प्राथमिक जिम्मेदारी यह तय करना है कि पूरी ताकत झोंककर चुनावी विजय गठबंधन के पक्ष में लाई जाए।

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सपा प्रमुख ने अपने रुख को दोबारा दोहराते हुए कहा कि पूरी चर्चा सीटों की गिनती की नहीं, बल्कि अंतिम जीत की होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संभावित जीत सिर्फ गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह उन सभी ताकतों की संयुक्त कोशिशों की सफलता होगी जो लगातार संघर्ष कर रही हैं। उनके मुताबिक, यह लड़ाई इसलिए लड़ी जा रही है ताकि साम्प्रदायिकता दोबारा सिर न उठा सके और लोकतंत्र, संविधान तथा आरक्षण पर भाजपाई आंच न आने पाए, जिससे देश में आपसी सौहार्द और खुशहाली लौट सके।

## उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सहयोगियों में खींचतान
उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसे देखते हुए सपा और उसके संभावित साझीदारों के बीच सीटों को लेकर अंदरूनी खींचतान शुरू हो चुकी है। दोनों पक्षों की ओर से पिछले कुछ समय से लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही थी। इसी चुनावी हलचल के बीच कांग्रेस संगठन में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। पार्टी ने प्रदेश संगठन की कमान में बदलाव करते हुए अजय राय के स्थान पर अराधना मिश्रा को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा रही है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सपा के साथ चुनाव पूर्व समझौते को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं थे। इसके विपरीत, नई प्रदेश अध्यक्ष अराधना मिश्रा के समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ बेहतर राजनीतिक संबंध माने जाते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस ने इमरान मसूद को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिन्होंने हालिया दिनों में गठबंधन की रूपरेखा और शर्तों को लेकर काफी तीखे बयान दिए थे।

## नेताओं की बयानबाजी से उपजी असहजता
गठबंधन को लेकर केवल एक तरफ से ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आई थीं। सपा नेता इकरा हसन की ओर से भी गठबंधन के संदर्भ में सार्वजनिक टिप्पणियां की गई थीं, जिससे दोनों प्रमुख दलों के बीच आपसी असहजता का माहौल बनता दिख रहा था। लगातार हो रही इस बयानबाजी और सीटों के बंटवारे पर उठ रहे सवालों के बीच अखिलेश यादव का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीटों के वितरण को लेकर किस तरह की सहमति बनती है।

## इसका आप पर असर
अखिलेश यादव के इस बयान से उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य और जमीनी राजनीति पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच राज्यवार सीट बंटवारे को लेकर बनने वाले फॉर्मूले को नई दिशा मिल सकती है। इससे अन्य राज्यों में भी सहयोगी दलों पर अपनी मांगों को संतुलित रखने और मुख्य मुकाबले पर ध्यान लगाने का राजनीतिक दबाव बनेगा।
- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सीट दावेदारी को लेकर चल रही खींचतान में कमी आ सकती है। आने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच टिकट वितरण की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ सकती है।
- **मतदाताओं के लिए:** चुनावी गठबंधन की स्थिति स्पष्ट होने से मतदाताओं को विपक्षी एजेंडे को समझने में मदद मिलेगी। इससे मतदाता भ्रमित हुए बिना भाजपा और विपक्षी गठबंधन के बीच अपने विकल्पों का सही मूल्यांकन कर सकेंगे।
- **कार्यकर्ताओं के लिए:** दोनों दलों के जमीनी कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक बयानबाजी रोकने और संयुक्त प्रचार पर ध्यान लगाने का स्पष्ट निर्देश मिला है। इससे बूथ स्तर पर चुनावी समन्वय बेहतर होने की संभावना है।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों की दावेदारी और नेतृत्व बदलावों के चलते सार्वजनिक असहजता बढ़ रही थी, जिसे दूर करने के लिए अखिलेश यादव ने यह बयान दिया।

- **सीटों पर अंदरूनी तनातनी:** दोनों राजनीतिक दलों के अंदर चुनाव से पहले सीटों की हिस्सेदारी को लेकर काफी समय से खींचतान चल रही थी। विभिन्न स्थानीय नेता अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए सार्वजनिक बयान दे रहे थे जिससे गठबंधन की छवि पर असर पड़ रहा था।
- **कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन:** कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अजय राय को हटाकर अराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया, क्योंकि अजय राय सपा से गठबंधन को लेकर संकोच में थे। इस संगठनात्मक फेरबदल के साथ नए समीकरण साधने की जरूरत महसूस हुई।
- **नेताओं की तीखी बयानबाजी:** कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और सपा नेता इकरा हसन की ओर से गठबंधन को लेकर तीखे बयान आए थे। इन बयानों के बाद दोनों दलों के शीर्ष स्तर पर असहजता को थामने के लिए सपा प्रमुख का हस्तक्षेप जरूरी हो गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. अखिलेश यादव ने गठबंधन सहयोगियों को क्या संदेश दिया है?
अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन में किसे कितनी सीटें मिलती हैं यह अहम नहीं है, बल्कि सबसे जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि गठबंधन की जीत हो।

### 2. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कब होने वाले हैं?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने प्रस्तावित हैं।

### 3. उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में क्या बदलाव किया गया है?
कांग्रेस ने अजय राय की जगह अराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया है और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है।

### 4. सपा और कांग्रेस के बीच हाल में असहजता क्यों पैदा हुई थी?
कांग्रेस के इमरान मसूद और सपा की इकरा हसन द्वारा गठबंधन को लेकर दिए गए बयानों के चलते दोनों दलों के बीच असहजता की स्थिति बन रही थी।

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