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  "title": "दलहन उत्पादन बढ़ाने को ICAR का बड़ा कदम, 20 संस्थानों के लिए 82 करोड़ मंजूर, कानपुर IIPR को मिले 6 करोड़ रुपये",
  "summary": "भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने दलहनी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता सुधारने के लिए 82 करोड़ रुपये के बजट के साथ 5 वर्षीय राष्ट्रीय शोध योजना शुरू की है, जिसमें कानपुर IIPR को 6 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं।",
  "content": "भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश में दलहनी फसलों की पैदावार बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक वृहद 5 वर्षीय शोध योजना की घोषणा की है। इस दूरगामी अभियान के संचालन के लिए देश भर के 20 शीर्ष कृषि अनुसंधान संस्थानों का चयन किया गया है, जिन्हें अगले पांच वर्षों तक उन्नत किस्मों के विकास पर कार्य करने का दायित्व दिया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 82 करोड़ रुपये का कुल बजट स्वीकृत किया गया है। स्वीकृत राशि में से 72 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष शोध कार्यों और वैज्ञानिक अनुसंधानों पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 10 करोड़ रुपये की राशि प्रयोगशालाओं में तैयार नई बीजों की किस्मों के त्वरित उत्पादन एवं वितरण व्यवस्था पर व्यय होगी। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित प्रतिष्ठित भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) को इस राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत अनुसंधान गतिविधियों को गति देने के लिए 6 करोड़ रुपये की विशेष धनराशि प्राप्त हुई है।\n\nउच्च उपज देने वाली किस्मों के विकास पर केंद्रित मिशन\nICAR के 'मिशन ऑन हाई यील्डिंग सीड्स' के तहत देश की मुख्य दलहनी फसलों जैसे अरहर, चना, मूंग, उड़द और मसूर पर व्यापक शोध किया जाएगा। वैज्ञानिकों का प्राथमिक ध्यान ऐसी नई फसल किस्में विकसित करने पर होगा जो प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों, अचानक बदलते मौसम, विभिन्न कीटों और संक्रामक रोगों के प्रति उच्च सहनशीलता प्रदर्शित कर सकें। इसके अतिरिक्त, ऐसी किस्मों के निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है जो कम समय में पककर तैयार हो जाएं, ताकि किसान कम समय और कम लागत में अधिक फसल ले सकें। इस पहल से किसानों की प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आने और शुद्ध आय बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।\n\nICAR के उपमहानिदेशक डॉ. डीके यादव ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी मिशन का मूल ध्येय देश के अन्नदाताओं को ऐसे श्रेष्ठ और प्रामाणिक बीज उपलब्ध कराना है, जिनसे उनके खेतों की पैदावार सीधे तौर पर बढ़े और उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा नई प्रजातियों के सफल परीक्षण के तुरंत बाद उन बीजों को बिना किसी विलंब के किसानों तक पहुँचाने की सुनियोजित कार्ययोजना तैयार की गई है।\n\nबायो-फोर्टिफिकेशन: दालों में बढ़ेगी प्रोटीन के साथ खनिजों की मात्रा\nकानपुर स्थित भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) में दलहनी फसलों को पोषण के दृष्टिकोण से और अधिक समृद्ध बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संस्थान के वैज्ञानिक अरहर, मूंग, उड़द और चने की किस्मों में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे अनिवार्य खनिजों की मात्रा बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक बायो-फोर्टिफिकेशन तकनीक पर कार्य करेंगे। इस जैव-संवर्धित शोध का सीधा लाभ देश की विशाल आबादी को मिलेगा, क्योंकि इसके बाद दालें केवल पारंपरिक प्रोटीन का जरिया न रहकर शरीर के लिए आवश्यक अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी सशक्त माध्यम बन सकेंगी।\n\nIIPR के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने संस्थान की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अगले 5 वर्षों के भीतर संस्थान का मुख्य लक्ष्य ऐसी बहु-गुणी प्रजातियाँ तैयार करना है जो अधिक उपज देने के साथ-साथ रोगों और मौसमी विषमताओं को सहन करने में सक्षम हों। उन्होंने आश्वस्त किया कि नए बीजों के वैज्ञानिक परीक्षण चरणबद्ध तरीके से पूरे होते ही बड़े पैमाने पर बीज संवर्धन और वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी।\n\nवैज्ञानिकों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन और अनुसंधान ढाँचे का सुदृढ़ीकरण\nशोध की गति को तीव्र करने तथा वैज्ञानिकों एवं कृषि संस्थानों को नवाचार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है। ICAR के उपमहानिदेशक डॉ. डीके यादव के अनुसार, नए ब्रीडर बीज सफलतापूर्वक तैयार करने वाले संस्थान को 2.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, जबकि उच्च पैदावार वाली हाइब्रिड वैरायटी विकसित करने वाले संस्थानों को 5 लाख रुपये के विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।\n\nअनुसंधान के स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए देश के 2 से 3 प्रमुख केंद्रों पर 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों में मौजूद पुराने शोध आंकड़ों और अभिलेखों को आधुनिक तकनीकों से अपडेट कराया जाएगा, ताकि नए अनुसंधान में पिछले आंकड़ों और अनुभवों का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।\n\nदेश में दलहन उत्पादन के बदलते आंकड़े और भावी परिदृश्य\nभारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में दलहन उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव से गुजरा है। वर्ष 2021-22 में देश का कुल दलहन उत्पादन 273.02 लाख टन दर्ज किया गया था, जो अगले वर्ष 2022-23 में घटकर 260.58 लाख टन पर आ गया। इसके पश्चात् वर्ष 2023-24 में उत्पादन में और गिरावट देखी गई और यह 242.26 लाख टन के स्तर तक नीचे चला गया।\n\nहालांकि, इसके बाद कृषि नीतियों और अनुकूल परिस्थितियों के चलते उत्पादन में पुनः सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया। वर्ष 2024-25 में दलहन उत्पादन बढ़कर 256.83 लाख टन तक पहुँचा, वहीं वर्ष 2025-26 में यह उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 274.09 लाख टन के स्तर पर दर्ज किया गया। अब ICAR की इस 82 करोड़ रुपये की व्यापक शोध रणनीति और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के माध्यम से देश में दलहन उत्पादन को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की तैयारी है, जिसका सीधा और दीर्घकालिक लाभ भारतीय किसानों को मिलना तय है।\n\nइसका आप पर असर\nICAR का यह 82 करोड़ रुपये का शोध अभियान भारत के दलहन किसानों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा।\n\n• भारत में: नई और कीट-रोधी किस्मों से किसानों की प्रति एकड़ पैदावार बढ़ेगी और फसल चक्र छोटा होने से खेती की लागत में गिरावट आएगी। आम उपभोक्ताओं को दालों में प्रोटीन के साथ प्राकृतिक रूप से कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे आवश्यक पोषक तत्व अधिक मात्रा में मिल सकेंगे।\n• उत्तर प्रदेश और कानपुर में: कानपुर स्थित IIPR को 6 करोड़ रुपये मिलने से स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों को शोध के नए संसाधन मिलेंगे। उत्तर प्रदेश के दलहन उत्पादकों को इन उन्नत और जलवायु-अनुकूल बीजों का लाभ सबसे पहले मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय कृषि आय में वृद्धि होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ICAR दलहन शोध पर कुल कितना बजट खर्च कर रहा है?\nICAR दलहन शोध पर कुल 82 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, जिसमें 72 करोड़ रुपये शोध कार्यों और 10 करोड़ रुपये बीज तैयार करने के लिए रखे गए हैं।\n\n2. कानपुर स्थित IIPR को इस मिशन के तहत कितना फंड मिला है?\nकानपुर स्थित भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) को इस पांच वर्षीय मिशन के लिए 6 करोड़ रुपये का बजट मिला है।\n\n3. इस मिशन के तहत किन प्रमुख दलहनी फसलों पर शोध किया जाएगा?\nइस मिशन के तहत अरहर, चना, मूंग, उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दलहनी फसलों पर शोध किया जाएगा।\n\n4. बीजों के विकास पर वैज्ञानिकों और संस्थानों को क्या वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा?\nब्रीडर बीज तैयार करने वाले संस्थान को 2.5 लाख रुपये और हाइब्रिड किस्म विकसित करने वाले संस्थान को 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।\n\n5. भारत में हाल के वर्षों में दलहन उत्पादन के क्या आंकड़े रहे हैं?\n2021-22 में उत्पादन 273.02 लाख टन था, जो 2023-24 में घटकर 242.26 लाख टन हुआ, लेकिन 2024-25 में 256.83 लाख टन और 2025-26 में 274.09 लाख टन तक पहुँच गया।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-03",
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