# दीपावली से पहले सहारनपुर में दिव्यांगों को फैंसी मोमबत्ती बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण देकर बनाया जा रहा सशक्त

> सहारनपुर के शेखपुरा कदीम में दिव्यांग महिला और पुरुषों को डिजाइनर मोमबत्तियां बनाने और उनकी ऑनलाइन बिक्री का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/dipavali-se-pahale-saharanpur-men-divyangon-ko-phainsi-momabatti-banane-ka-nishulka-prashikshana-dekara-banaya-ja-raha-sashakta-45082 · **Language:** Hindi
**Tags:** सहारनपुर, दिव्यांग सशक्तिकरण, मोमबत्ती निर्माण, स्वरोजगार, दीपावली, पंजाब नेशनल बैंक, इनेबल इंडिया

त्योहारी सीजन में रोशनी और सजावट के सामान की मांग कई गुना बढ़ जाती है, और इसी समय को हुनरमंद हाथों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दिव्यांग महिला और पुरुष मिलकर सैकड़ों अलग-अलग डिजाइनों में बेहद खूबसूरत मोमबत्तियां तैयार कर रहे हैं। आम तौर पर मोमबत्ती को एक बहुत छोटा और सीमित उत्पाद समझा जाता है, जिसके बाजार में केवल एक या दो साधारण रूप ही दिखाई देते हैं। इस सोच को बदलते हुए यहां प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागी नई तकनीकों के दम पर आकर्षक और आधुनिक मोमबत्तियां गढ़ रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ अपनी आजीविका चला सकें।

## दीपावली के पर्व पर डिजाइनर कैंडल्स की बढ़ती मांग
दीपावली का त्योहार करीब आते ही घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों पर मोमबत्तियों और दीपकों की आवश्यकता बड़े पैमाने पर महसूस होती है। इस अवसर को ध्यान में रखते हुए इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को कपल्स, फ्लावर्स, बॉल्स और कई अन्य नए और आधुनिक आकारों की कैंडल्स तैयार करना सिखाया जा रहा है। यह कला न केवल स्थानीय दुकानों पर बिक्री के लिए उपयुक्त है, बल्कि इसे इंटरनेट के माध्यम से भी काफी अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है। कलात्मक रूप से तैयार इन मोमबत्तियों से होने वाली आय दिव्यांगजनों को आर्थिक संबल देगी और समाज में एक मजबूत स्तम्भ के रूप में स्थापित होने में मदद करेगी।

## सस्ते उत्पाद से बड़े मुनाफे का नया नजरिया
कार्यशाला में सीख रहे प्रतिभागियों के लिए यह अनुभव कई भ्रांतियों को दूर करने वाला साबित हुआ है। प्रशिक्षण ले रही प्रतिभागी रहमानी ने इस अनुभव को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि पहले वे समझती थीं कि मोमबत्ती केवल एक ही तरह की होती है, लेकिन यहां अपने हाथों से ढेरों डिजाइनों में इसे बनता देखकर उनका नजरिया बदल गया है। उन्हें यह भी लगता था कि मोमबत्ती बेहद सस्ती चीज है, परंतु अब समझ में आ रहा है कि इस काम में बचत और लाभ की बहुत बड़ी संभावनाएं छिपी हुई हैं।

## मोम और जेल के जरिए होटल और रेस्तरां के लिए खास उत्पाद
कैंडल निर्माण की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए ट्रेनर कुसुम कश्यप ने बताया कि विभिन्न प्रकार के वैक्स और जेल का उपयोग करके कई तरह के डिजाइन तैयार करने का अभ्यास कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इस हुनर को सीखकर कोई भी व्यक्ति अपना स्वतंत्र कारोबार शुरू कर सकता है। ऐसी फैंसी मोमबत्तियों की मांग बड़े गिरजाघरों, होटलों और रेस्टोरेंट में बहुत ज्यादा रहती है, जहां वे काफी ऊंची कीमतों पर बिकती हैं। इस उत्पाद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक रखे रहने पर भी खराब नहीं होता और व्यापारी को किसी भी तरह के नुकसान का जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

## शेखपुरा कदीम में स्वरोजगार और ऑनलाइन बिक्री का पाठ
इस पूरे प्रशिक्षण अभियान की व्यवस्था सहारनपुर के शेखपुरा कदीम गांव में की गई है। कार्यक्रम से जुड़े अमित कुमार चौबे ने जानकारी दी कि यह विशेष प्रशिक्षण इनेबल इंडिया के सहयोग से पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य दिव्यांगजनों को स्वरोजगार से जोड़ना है ताकि वे स्वयं को कभी बेसहारा न महसूस करें। भारत की समृद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक संस्कृति के चलते पूजा-पाठ और उत्सवों में दीपकों और मोमबत्तियों की मांग हमेशा बनी रहती है। कार्यशाला में आए प्रतिभागी अपने घर पर बैठकर ही इन वस्तुओं का निर्माण कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि इन उत्पादों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन कैसे बेचा जाए, ताकि उनका बाजार स्थानीय सीमाओं से बाहर निकल सके।

## इसका आप पर असर
यह प्रशिक्षण दिव्यांग व्यक्तियों को घर बैठे नियमित आमदनी और स्वरोजगार स्थापित करने का सीधा साधन प्रदान करता है।

- **सहारनपुर में:** शेखपुरा कदीम और आसपास के क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को बिना किसी शुल्क के व्यावहारिक हुनर सीखने का अवसर मिला है। इससे वे आगामी त्योहारी सीजन में स्थानीय बाजारों और होटलों में सीधे अपने उत्पाद बेचकर कमाई शुरू कर सकते हैं।
- **भारत में:** देश भर के स्वरोजगार केंद्रों के लिए यह पहल एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करती है। पारंपरिक शिल्प को ऑनलाइन बाजार से जोड़कर दिव्यांग समुदाय अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।
- **उत्पाद की सुरक्षा:** मोमबत्तियां खराब न होने वाली वस्तुएं हैं जिन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। निर्माताओं को माल सड़ने या तत्काल न बिकने पर भारी वित्तीय घाटे का जोखिम नहीं उठाना पड़ता।
- **डिजिटल बाजार की पहुंच:** कारीगरों को ई-कॉमर्स और ऑनलाइन बिक्री के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं। इससे वे स्थानीय बिचौलियों पर निर्भर रहे बिना देश भर के ग्राहकों तक सीधे अपनी पहुंच बना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
दीपावली के आगमन पर मोमबत्तियों की बढ़ती खपत और दिव्यांगजनों के बीच स्वरोजगार की आवश्यकता के समन्वय से यह कार्यशाला संभव हुई।

- **त्योहारी मांग का अवसर:** दीपोत्सव के दौरान घरों, व्यावसायिक परिसरों और धार्मिक स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर मोमबत्तियों की जरूरत होती है। इस समय उत्पाद तैयार करने से शुरुआती दौर में ही तुरंत ग्राहक और बाजार मिल जाते हैं।
- **स्वरोजगार और संस्थागत साझेदारी:** ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान और इनेबल इंडिया ने दिव्यांग महिला व पुरुषों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह साझा कदम उठाया। उनका उद्देश्य जरूरतमंदों को कौशल देकर पराधीनता की भावना से बाहर निकालना है।
- **डिजाइनर और फैंसी उत्पादों का उभरता बाजार:** पारंपरिक मोमबत्तियों के मुकाबले आधुनिक कैफे, होटल और ऑनलाइन मंचों पर डिजाइनर मोमबत्तियों की भारी मांग रहती है। इसी बदलते रुझान को ध्यान में रखकर आधुनिक आकृतियों और जेल वैक्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. सहारनपुर में यह प्रशिक्षण किस स्थान पर आयोजित किया गया है?
यह विशेष प्रशिक्षण सहारनपुर जिले के गांव शेखपुरा कदीम में आयोजित किया गया है।

### 2. इस कार्यशाला का आयोजन किन संस्थाओं के सहयोग से हुआ है?
यह कार्यक्रम इनेबल इंडिया के सहयोग से पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा चलाया जा रहा है।

### 3. प्रशिक्षण में किस तरह की मोमबत्तियां बनाना सिखाया जा रहा है?
प्रतिभागियों को मोम और जेल का इस्तेमाल करके कपल्स, फ्लावर्स, बॉल्स सहित सैकड़ों आधुनिक डिजाइनों की फैंसी मोमबत्तियां तैयार करना सिखाया जा रहा है।

### 4. इन फैंसी मोमबत्तियों की बिक्री के लिए कौन से बाजार प्रमुख हैं?
यह मोमबत्तियां स्थानीय बाजारों के साथ-साथ गिरजाघरों, होटलों, रेस्टोरेंट और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर महंगे दामों में बिकती हैं।

### 5. कैंडल निर्माण व्यवसाय का सबसे बड़ा फायदा क्या बताया गया है?
मोमबत्तियां लंबे समय तक रखे रहने पर भी खराब नहीं होती हैं, जिससे उत्पादक को किसी तरह के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता।

## प्रेरणा और सबक
शारीरिक सीमाओं को पीछे छोड़कर नया हुनर सीखना और स्वावलंबन की राह चुनना हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।

- **कौशल से आत्मनिर्भरता:** जब व्यक्ति किसी व्यावहारिक कला में पारंगत हो जाता है, तो वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आजीविका खुद बना सकता है।
- **सोच का विस्तार:** पारंपरिक और साधारण समझे जाने वाले काम को भी रचनात्मकता और नए डिजाइनों के जरिए बड़े व्यवसाय का रूप दिया जा सकता है।
- **आधुनिक तकनीक का मेल:** हस्तनिर्मित उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री के साधनों से जोड़कर कोई भी व्यक्ति घर बैठे विस्तृत बाजार तक पहुंच बना सकता है।

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