एक बीघा खेत कब्जामुक्त कराने की आस में 55 किमी बिना चप्पल चले बुजुर्ग उषा देवी और विनोद, 7वीं दफा पहुंचे डीएम के द्वार उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ढखिनिया गांव के बुजुर्ग दंपति उषा देवी और विनोद ने दबंगों द्वारा एक बीघा जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है। किराए के पैसे न होने पर वे न्याय के लिए 7वीं बार 55 किलोमीटर नंगे पैर चलकर डीएम दफ्तर पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में प्रशासनिक लापरवाही और दबंगई की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। धौरहरा तहसील के ढखिनिया गांव के रहने वाले बुजुर्ग दंपति उषा देवी और विनोद अपनी एक बीघा जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। पैसों की किल्लत के कारण यह बुजुर्ग जोड़ा 55 किलोमीटर की दूरी नंगे पैर तय करके करीब सातवीं बार जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा है। भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के सरकारी दावों के बीच इस दंपति को न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। खेत की मेड़ तोड़कर खड़ी फसल पर कब्जा करने का आरोप पीड़ित बुजुर्ग विनोद के अनुसार उनके पड़ोस में रहने वाले दिलीप कुमार और कमलाकांत ने दबंगई दिखाते हुए उनकी जमीन हड़प ली है। आरोपियों ने दोनों खेतों के बीच स्थित मेड़ को तोड़ दिया और खेत में खड़ी पूरी फसल को जबरन अपने खेत में मिला लिया। अपनी जमीन और फसल गंवाने के बाद बुजुर्ग दंपत्ति ने तहसील स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संसाधनों के अभाव में बस या किसी अन्य वाहन का किराया चुकाने के पैसे न होने की वजह से उन्हें इतनी लंबी दूरी पैदल चलकर ही तय करनी पड़ रही है। तड़के तीन बजे से शुरू होता है नंगे पैर 55 किलोमीटर का सफर अपने हक की लड़ाई लड़ रही उषा देवी बताती हैं कि पैरों में चप्पल न होने के बावजूद उन्हें सुबह तड़के 3:00 बजे अपने घर से पैदल निकलना पड़ता है। लगातार आठ घंटे तक चलने के बाद सुबह करीब 11:00 बजे वे लखीमपुर स्थित जिलाधिकारी दफ्तर पहुंचते हैं। यह सातवां मौका है जब वे न्याय मांगने के लिए इस तरह पैदल चलकर अधिकारियों के पास पहुंचे हैं। बुजुर्ग महिला का आरोप है कि क्षेत्रीय कानूनगो द्वारा जानबूझकर खेत की पैमाइश नहीं की जा रही है, जिससे दबंगों का कब्जा बरकरार है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत मामले में ढिलाई का आलम यह है कि पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन वहां से भी अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि अवैध कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, खीरी जिले में ये प्रशासनिक निर्देश सिर्फ फाइलों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि तहसील से लेकर डीएम दफ्तर तक बार-बार चक्कर काटने के बाद भी इस बेबस बुजुर्ग दंपत्ति की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना प्रशासनिक शिकायतों और राजस्व विभाग द्वारा भूमि पैमाइश में होने वाली देरी पर आम नागरिकों के अधिकारों की स्थिति को रेखांकित करती है। उत्तर प्रदेश (लखीमपुर खीरी) में: लखीमपुर खीरी और धौरहरा तहसील क्षेत्र के निवासियों के लिए यह मामला भूमि विवादों और मुख्यमंत्री पोर्टल शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सवाल-जवाब 1. उषा देवी और विनोद किस गांव और तहसील के रहने वाले हैं? यह बुजुर्ग दंपति उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा तहसील स्थित ढखिनिया गांव के निवासी हैं। 2. बुजुर्ग दंपति ने पड़ोसियों पर क्या आरोप लगाया है? उन्होंने आरोप लगाया है कि पड़ोसी दिलीप कुमार और कमलाकांत ने खेत की मेड़ तोड़कर उनकी एक बीघा जमीन और खड़ी फसल पर जबरन कब्जा कर लिया है। 3. बुजुर्ग जोड़े को डीएम दफ्तर पहुंचने के लिए कितना पैदल चलना पड़ता है? किराये के पैसे न होने के कारण वे तड़के 3:00 बजे घर से निकलते हैं और 55 किलोमीटर नंगे पैर चलकर सुबह 11:00 बजे डीएम दफ्तर पहुंचते हैं। 4. प्रशासनिक स्तर पर क्या लापरवाही सामने आई है? पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत करने और मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराने के बावजूद कानूनगो द्वारा खेत की पैमाइश नहीं की जा रही है। 5. बुजुर्ग दंपति अब तक कितनी बार डीएम दफ्तर जा चुके हैं? अपनी जमीन कब्जामुक्त कराने और न्याय पाने की गुहार लेकर वे सातवीं बार 55 किलोमीटर पैदल चलकर डीएम कार्यालय पहुंचे हैं। https://trendkia.com/uttar-pradesh/eka-bigha-kheta-kabjamukta-karane-ki-asa-men-55-kimi-bina-chappala-chale-bujurga-usha-devi-aura-vinod-7vin-dapha-pahunche-diema-ke-19609 TrendKia — Har trend, sabse pehle.