# फतेहपुर में बाढ़ के पानी में पलटी नाव, बच्चों समेत 12 लोगों को पुलिस और ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाला

> उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कटी सड़क पर रात के अंधेरे में नाव पलट गई, जिसके बाद पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी 12 सवारों को सुरक्षित बचा लिया।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/fatehpur-men-barha-ke-pani-men-palati-nava-bachchon-sameta-12-logon-ko-pulisa-aura-graminon-ne-surakshita-nikala-42263 · **Language:** Hindi
**Tags:** फतेहपुर, उत्तर प्रदेश, बाढ़, नाव हादसा, रेस्क्यू ऑपरेशन, बिंदकी तहसील

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील अंतर्गत बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीण क्षेत्र में 2 अक्टूबर की रात एक गंभीर जल हादसा टल गया। गलाथा गांव में आयोजित दंगल का मुकाबला देखकर छोटी डोंगी से अपने घर लौट रहे 12 ग्रामीण अचानक गहरे पानी में समा गए। नाव का संतुलन बिगड़ने के कारण यह दुर्घटना उस रास्ते पर हुई, जो गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाने से पूरी तरह बह चुका था। जलधारा के बीच मची चीख-पुकार सुनते ही आसपास के लोग और पुलिसकर्मी तुरंत हरकत में आए और कमर तक पानी में उतरकर बच्चों सहित सभी सवारों को सकुशल बाहर खींच निकाला।

## गंगा के उफान से कटा संपर्क मार्ग और डोंगी का सहारा
अवसेरी खेड़ा और जाड़े का पुरवा गांव के रहने वाले लोग रोजमर्रा की जरूरतों और आवागमन के लिए भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बहने के चलते जाड़े का पुरवा-अवसेरी खेड़ा मार्ग का एक बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया था। इसके चलते दोनों बस्तियों का मुख्य संपर्क टूट गया और लोग पानी के रास्ते आने-जाने के लिए पूरी तरह छोटी नावों पर निर्भर हो गए। 2 अक्टूबर की रात लगभग 9 बजे अवसेरी खेड़ा और जाड़े का पुरवा निवासी हरेलाल, बालकृष्ण, अमर, कुंदन समेत कुल 12 लोग गलाथा गांव से दंगल देखकर एक छोटी डोंगी में सवार होकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान बीच रास्ते में डोंगी का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई, जिससे सभी लोग गहरे पानी में गिर गए।

## टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में चला देर रात बचाव कार्य
हादसा होते ही पानी में गिरे लोगों की चीखों से सन्नाटा टूट गया। आवाज सुनकर तट पर मौजूद ग्रामीण और गश्त कर रहे पुलिसकर्मी बिना समय गंवाए मौके की ओर दौड़े। रात का वक्त होने और चारों तरफ घुप्प अंधेरा पसरा होने के कारण बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों और पुलिस जवानों ने टॉर्च और मोबाइल फोन की रोशनी के सहारे पानी में डूबे लोगों की तलाश शुरू की। एक पुलिसकर्मी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए खुद कमर भर गहरे पानी में छलांग लगाई और एक मासूम बच्चे को अपनी गोद में उठाकर सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। ग्रामीणों और पुलिस के साझा प्रयासों से एक-एक कर सभी 12 लोगों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी तरह की जनहानि न होना एक बड़ा संबल बनकर सामने आया।

## प्रशासनिक इंतजामों पर सवाल और स्थायी सड़क की मांग
इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन की अधूरी तैयारियों को लेकर रोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने और सड़क कटने के बावजूद मौके पर न तो पर्याप्त संख्या में सुरक्षित नावें लगाई गई हैं और न ही प्रशिक्षित नाविकों की नियमित तैनाती की गई है। रोजमर्रा का राशन और जरूरी सामान खरीदने के लिए स्थानीय निवासियों को जान जोखिम में डालकर छोटी व असुरक्षित डोंगियों का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हर साल बाढ़ के दिनों में बनने वाली इस समस्या से निजात दिलाने के लिए यहां स्थायी ऊंचे पुल या पक्की ऊंची सड़क का निर्माण कराया जाए।

## मामले की जांच के आदेश
बिंदकी के एसडीएम निशांत तिवारी ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि प्रभावित रास्ते पर सुरक्षित नावों और नाविकों की तैनाती के निर्देश पहले ही दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी विस्तृत और गहन जांच कराई जाएगी ताकि खामियों की जवाबदेही तय की जा सके। वहीं, इस विषय पर जिले के जिलाधिकारी से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

## इसका आप पर असर
बाढ़ के दौरान टूटे रास्तों और जलभराव वाले क्षेत्रों में असुरक्षित नावों का इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है।

- **उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में:** जलमग्न सड़कों और नदियों के किनारे आवाजाही करते समय बिना लाइफ जैकेट या अधिक भार वाली छोटी डोंगी में सफर करने से बचें। केवल प्रशासन द्वारा अधिकृत नावों और प्रशिक्षित नाविकों की मौजूदगी में ही पानी पार करें।
- **फतेहपुर के स्थानीय निवासियों के लिए:** जाड़े का पुरवा और अवसेरी खेड़ा मार्ग पर जलस्तर कम होने तक रात के समय जलमार्ग से अनावश्यक आवागमन टालें। आपात स्थिति में स्थानीय तहसील प्रशासन या पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क कर सुरक्षित नाव की मांग करें।
- **आपातकालीन सुरक्षा के लिए:** जलभराव वाले रास्तों पर यात्रा करते समय फोन, टॉर्च और आपात नंबर हमेशा तैयार रखें। किसी भी अनहोनी की स्थिति में किनारे पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों या पुलिस बल को तुरंत आवाज देकर सूचित करें।
- **ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए:** इस घटना के बाद स्थानीय पंचायत और प्रशासन पर कट चुके संपर्क मार्गों की मरम्मत और स्थायी पुल निर्माण का दबाव बढ़ेगा। प्रभावित ग्रामीण मिलकर तहसील स्तर पर ठोस सड़क संपर्क की मांग उठा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
गंगा नदी में आए उफान के कारण जाड़े का पुरवा-अवसेरी खेड़ा संपर्क मार्ग बह गया था, जिससे लोगों को मजबूरी में छोटी डोंगी का सहारा लेना पड़ा।

- **बाढ़ और मार्ग का कटना:** गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाने से सड़क का बड़ा हिस्सा तेज बहाव में बह गया था। इसके चलते दोनों गांवों का जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट गया।
- **सरकारी नावों की कमी:** स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन द्वारा मौके पर पर्याप्त सरकारी नावें और प्रशिक्षित नाविक तैनात नहीं किए गए थे। राशन और जरूरी काम के लिए लोगों को छोटी और असुरक्षित डोंगी में बैठकर जाना पड़ रहा था।
- **रात में संतुलन बिगड़ना:** रात करीब 9 बजे दंगल देखकर लौट रहे 12 लोग एक ही छोटी डोंगी में सवार थे। अंधेरे और पानी के बहाव के बीच संतुलन बिगड़ने से डोंगी पलट गई।
- **प्रशासनिक जांच लंबित:** बिंदकी के एसडीएम ने कहा है कि नाव और नाविक तैनात करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन हादसा क्यों हुआ इसकी गहन जांच कराई जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. फतेहपुर में नाव पलटने का यह हादसा कब और कहां हुआ?
यह हादसा 2 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे फतेहपुर की बिंदकी तहसील के जाड़े का पुरवा-अवसेरी खेड़ा मार्ग पर हुआ।

### 2. नाव में कुल कितने लोग सवार थे और वे कहां से लौट रहे थे?
नाव में बच्चों सहित कुल 12 लोग सवार थे और वे सभी गलाथा गांव में आयोजित दंगल देखकर लौट रहे थे।

### 3. हादसे के शिकार लोगों को किसने और कैसे बचाया?
चीख-पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने टॉर्च व मोबाइल की रोशनी में कमर तक पानी में उतरकर सभी 12 लोगों को सकुशल बाहर निकाला।

### 4. सड़क के रास्ते पर नाव चलाने की नौबत क्यों आई थी?
गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया था, जिससे आवागमन के लिए केवल नाव ही बची थी।

### 5. हादसे के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
बिंदकी के एसडीएम निशांत तिवारी ने मामले की गहनता से जांच के आदेश दिए हैं और सुरक्षित नावें तैनात करने की बात कही है।

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