# फतेहपुर विकास भवन में युवक ने पेट्रोल छिड़ककर की खुदकुशी की कोशिश, डीपीआरओ दफ्तर पर रिश्वतखोरी का संगीन आरोप

> फतेहपुर के विकास भवन में ग्राम पंचायत की दुकानों में धांधली की शिकायत पर कार्रवाई न होने से खफा व्यक्ति ने पेट्रोल डालकर जान देने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने जिला पंचायती राज अधिकारी पर पांच लाख रुपये रिश्वत लेकर मामले को दबाने का आरोप लगाया है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/fatehpur-vikas-bhawan-men-yuvaka-ne-petrola-chhirakakara-ki-khudakushi-ki-koshisha-dpro-daphtara-para-rishvatakhori-ka-sngina-arop-47930 · **Language:** Hindi
**Tags:** फतेहपुर, विकास भवन, डीपीआरओ, आत्मदाह प्रयास, ग्राम प्रधान, भ्रष्टाचार आरोप, गाजीपुर ब्लॉक

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में 15 अक्टूबर को उस वक्त अफरातफरी मच गई जब विकास भवन स्थित जिला पंचायती राज अधिकारी कार्यालय परिसर में एक शिकायतकर्ता ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद सतर्क कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे आग लगाने से पहले ही रोक लिया और बड़ा हादसा टल गया। इस सनसनीखेज घटना के बाद शिकायतकर्ता ने खुले तौर पर डीपीआरओ पर पांच लाख रुपये रिश्वत लेकर भ्रष्ट ग्राम प्रधान को बचाने और कार्रवाई दबाने का आरोप जड़ दिया, जबकि डीपीआरओ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

## ग्राम सभा की जमीन पर अवैध दुकान निर्माण और बिक्री का विवाद
पूरा मामला फतेहपुर के गाजीपुर ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता अजय प्रताप सिंह उर्फ जब्बार सिंह का कहना है कि ग्राम सभा की कलेक्टर दर्ज जमीन पर ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी यानी सचिव ने मिलीभगत करके अवैध रूप से दुकानों का निर्माण करवाया था। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर तैयार की गई इन दुकानों को सात-सात और दस-दस लाख रुपये में बेचकर भारी वित्तीय अनियमितता की गई।

आरटीआई के जरिए मांगी गई सूचना में भी यह तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत की इन दुकानों की कोई आधिकारिक या खुली नीलामी नहीं कराई गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूर्व में बैठाई गई कई विभागीय जांचों में ग्राम प्रधान को दोषी पाया गया था, लेकिन इसके बावजूद उस पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

## जांच, नोटिस और पांच लाख रुपये की रिश्वत का आरोप
शिकायतकर्ता अजय प्रताप सिंह का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने डीपीआरओ दफ्तर में पांच लाख रुपये की घूस देकर कार्रवाई की फाइल को अटका दिया। उनका कहना था कि पिछले तीन वर्षों से जांच और आश्वासन के नाम पर उन्हें लगातार दौड़ाया जा रहा है, और यदि यही सुस्त रवैया रहा तो न्याय मिलने से पहले ही उनकी जान चली जाएगी। इस घटना के बाद वहां पहुंचे अधिवक्ता गुप्ता और अन्य स्थानीय लोगों ने भी पंचायती राज कार्यालय में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर गंभीर सवाल उठाए।

## प्रशासनिक पक्ष और डीपीआरओ की सफाई
दूसरी ओर, डीपीआरओ ने रिश्वत लेने के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि दुकानों के निर्माण की शिकायत पर एक जांच समिति गठित की गई थी। इस समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने 25 सितंबर को ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था।

डीपीआरओ के मुताबिक यह नोटिस 7 अक्टूबर को ग्राम प्रधान को आधिकारिक रूप से तामील करा दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायती राज व्यवस्था के नियमों के तहत अंतिम कार्रवाई का अधिकार जिलाधिकारी स्तर पर सुरक्षित है, इसलिए डीपीआरओ स्तर से किसी भी तरह की फाइल रोकने अथवा मिलीभगत करने की बात बिल्कुल गलत है।

## इसका आप पर असर
इस घटना ने स्थानीय सरकारी तंत्र में शिकायतों के वर्षों तक लंबित रहने और आम नागरिकों की लाचारी के मुद्दे को गंभीर रूप से उजागर किया है।

- **भारत में:** पंचायती राज संस्थाओं में सरकारी जमीनों के दुरुपयोग और शिकायत निवारण में होने वाली लंबी देरी प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। नागरिकों को यह समझना आवश्यक है कि ग्राम पंचायत के निर्माण और नीलामी संबंधी दस्तावेजों की जांच आरटीआई के जरिए सत्यापित की जानी चाहिए।
- **फतेहपुर में:** विकास भवन में हुई इस घटना के बाद गाजीपुर ब्लॉक में ग्राम पंचायत की संपत्तियों और दुकानों की जांच प्रक्रिया में सख्ती आ सकती है। जिन लोगों ने बिना आधिकारिक नीलामी के अनधिकृत दुकानें खरीदी हैं, उनके निवेश और आवंटन पर कानूनी संकट पैदा हो सकता है।
- **शिकायतकर्ताओं के लिए:** स्थानीय अधिकारियों द्वारा सुनवाई न किए जाने पर जिलाधिकारी या राज्य सतर्कता आयोग के पास सीधे अपील की जा सकती है। अपने आवेदन और जांच रिपोर्टों की प्रतिलिपि सुरक्षित रखना कानूनी पैरवी में मददगार साबित होता है।
- **प्रशासनिक निगरानी:** सरकारी परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था और आगंतुकों की जांच और कड़ी किए जाने की संभावना है। जिला स्तरीय दफ्तरों में लंबित जांचों की समयसीमा तय करने के लिए समीक्षा बैठकें शुरू हो सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण, दुकानों की अनाधिकृत बिक्री और तीन वर्षों तक चली सुस्त जांच प्रक्रिया के कारण उपजे आक्रोश का सीधा परिणाम है।

- **अवैध निर्माण और अवैध बिक्री:** गाजीपुर ब्लॉक में ग्राम प्रधान और सचिव पर कलेक्टर श्रेणी की भूमि पर दुकानें बनाकर उन्हें बिना नीलामी के 7 से 10 लाख रुपये में निजी तौर पर बेचने का आरोप है। आरटीआई खुलासे में जब यह साबित हुआ कि दुकानें कभी नीलाम नहीं हुईं, तो ग्रामीणों का असंतोष बढ़ गया।
- **तीन साल की प्रशासनिक देरी:** शिकायतकर्ता अजय प्रताप सिंह पिछले तीन वर्षों से जांच और कार्रवाई की मांग लेकर लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। कई जांच रिपोर्टों में प्रधान के दोषी साबित होने के बावजूद कोई अंतिम दंडात्मक कदम न उठाए जाने से वह अत्यंत निराश हो गए।
- **रिश्वतखोरी का संदेह:** शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने डीपीआरओ दफ्तर में पांच लाख रुपये घूस देकर कानूनी कार्रवाई रुकवा दी थी। इसी बात से आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया।
- **प्रशासनिक नोटिस की प्रक्रिया:** हालांकि डीपीआरओ का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने 25 सितंबर को प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जो 7 अक्टूबर को तामील हुआ, लेकिन इस प्रक्रियात्मक देरी ने शिकायतकर्ता के सब्र का बांध तोड़ दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. फतेहपुर विकास भवन में 15 अक्टूबर को क्या घटना घटी?
एक शिकायतकर्ता ने डीपीआरओ कार्यालय में कार्रवाई न होने से दुखी होकर खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, जिसे कर्मचारियों ने बचा लिया।

### 2. शिकायतकर्ता का नाम क्या है और उनका क्या आरोप है?
शिकायतकर्ता का नाम अजय प्रताप सिंह उर्फ जब्बार सिंह है, जिन्होंने डीपीआरओ पर कार्रवाई रोकने के बदले 5 लाख रुपये घूस लेने का आरोप लगाया है।

### 3. मामला किस ब्लॉक और किस तरह के विवाद से संबंधित है?
यह मामला गाजीपुर ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत में कलेक्टर की जमीन पर अवैध दुकानें बनाकर 7 से 10 लाख रुपये में बेचने से जुड़ा है।

### 4. दुकानों के संबंध में आरटीआई से क्या खुलासा हुआ था?
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह बात सामने आई कि ग्राम पंचायत द्वारा बनाई गई दुकानों की कोई वैध नीलामी नहीं कराई गई थी।

### 5. डीपीआरओ ने रिश्वत के आरोपों पर क्या सफाई दी?
डीपीआरओ ने घूस के आरोपों को गलत बताया और कहा कि जिलाधिकारी ने 25 सितंबर को नोटिस दिया था जो 7 अक्टूबर को प्रधान को दिया गया, और नियमानुसार कार्रवाई डीएम स्तर से होनी है।

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