# गाजियाबाद अदालत ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर जारी किया गैर जमानती वारंट, हाजिर न होने पर संपत्ति कुर्की की चेतावनी

> साल 2018 के मारपीट मामले में लगातार गैरहाजिर रहने पर गाजियाबाद की MP-MLA अदालत ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/ghaziabad-adalata-ne-nagina-sansada-chandrashekhar-azad-para-jari-kiya-gaira-jamanati-varnta-hajira-na-hone-para-snpatti-kurki-ki--41842 · **Language:** Hindi
**Tags:** चंद्रशेखर आजाद, गाजियाबाद कोर्ट, नगीना सांसद, आजाद समाज पार्टी, गैर जमानती वारंट, धर्मेंद्र कुमार, साहिबाबाद

उत्तर प्रदेश के नगीना संसदीय क्षेत्र से सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की विशेष MP-MLA अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए सांसद के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद अदालत में उपस्थित न होने की वजह से न्यायिक प्रक्रिया के तहत यह सख्त कदम उठाया गया है। यदि वह आगे भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं होते हैं, तो उनकी संपत्ति की कुर्की की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।

## शादी समारोह में मारपीट से जुड़ा है 2018 का विवाद
यह पूरा मामला साहिबाबाद थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 के दौरान घटी एक घटना से संबंधित है। आरोप के मुताबिक, करीब आठ वर्ष पहले एक विवाह समारोह के दौरान चंद्रशेखर आजाद और उनके साथ मौजूद लोगों की धर्मेंद्र कुमार नामक युवक के साथ तीखी बहस हो गई थी। पीड़ित धर्मेंद्र कुमार ने पुलिस को दी गई अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि समारोह के बीच उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई, थप्पड़ मारा गया और बाद में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां भी दी गईं।

धर्मेंद्र कुमार की इस शिकायत के आधार पर साहिबाबाद थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और धारा 305 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले की पैरवी कर रहे शिकायतकर्ता के वकील के अनुसार, पुलिस प्रशासन इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच पहले ही पूरी कर चुका है। जांच पूरी होने के उपरांत संबंधित अदालत में आरोप पत्र यानी चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, जिसके बाद अब मामले की नियमित अदालती सुनवाई चल रही है।

## लगातार गैरहाजिरी के बाद अदालत का सख्त रुख
न्यायालय ने इस आपराधिक मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को पूर्व में कई बार अदालती समन जारी किए थे। तमाम कानूनी सूचनाओं और समन के बाद भी वह अदालत की कार्यवाहियों में शामिल नहीं हुए और लगातार अनुपस्थित बने रहे। गुरुवार को नियत सुनवाई के दिन भी जब वह अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए, तो MP-MLA कोर्ट ने उनकी निरंतर गैरहाजिरी को बेहद गंभीरता से लिया। इसके परिणामस्वरूप अदालत ने सीधे गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ-साथ कुर्की की कार्रवाई से जुड़ा कड़ा निर्देश भी सुना दिया।

## राजनीतिक अभियानों पर पड़ सकता है असर
यह अदालती आदेश ऐसे महत्वपूर्ण दौर में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचलें तेज हो रही हैं। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख के रूप में चंद्रशेखर आजाद अपने दल के संगठनात्मक विस्तार में जुटे हुए हैं और विभिन्न इलाकों में लगातार रैलियां और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस स्तर पर गैर जमानती वारंट जारी होना और कुर्की की चेतावनी सामने आना उनके मौजूदा राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों की गति को प्रभावित कर सकता है।

## इसका आप पर असर
किसी निर्वाचित सांसद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने से कानूनी प्रक्रिया की समानता और क्षेत्रीय राजनीति पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** यह घटनाक्रम दिखाता है कि आपराधिक मामलों में निर्वाचित सांसदों और जनप्रतिनिधियों को भी अदालती समन की अवहेलना पर कड़े कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ता है। आम नागरिकों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि कानून के समक्ष किसी भी पद या प्रभाव के बावजूद प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
- **उत्तर प्रदेश में:** नगीना लोकसभा क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के लिए उनके सांसद के दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कानूनी रुकावटें आ सकती हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी आजाद समाज पार्टी के अभियानों पर अदालती कार्रवाई का सीधा प्रभाव देखा जा सकता है।
- **शिकायतकर्ताओं के लिए:** यह आदेश दर्शाता है कि वर्षों पुराने मामलों में भी कानूनी पैरवी जारी रहने पर अदालतें पीड़ितों की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाती हैं। आम वादी के लिए अदालती प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने के लिहाज से यह अहम कदम है।
- **कानूनी अनुपालन पर:** न्यायालय के समन की अनदेखी करने पर किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध गैर जमानती वारंट और संपत्ति जब्ती तक की नौबत आ सकती है। न्यायिक प्रक्रिया में समय पर उपस्थित होना और कानूनी सम्मनों का विधिवत जवाब देना हर नागरिक के लिए आवश्यक है।

## ऐसा क्यों हुआ
गाजियाबाद की विशेष MP-MLA अदालत द्वारा यह सख्त आदेश एक पुराने मारपीट मामले में बार-बार सम्मन भेजे जाने के बावजूद पेश न होने के कारण जारी किया गया है।

- **समन की निरंतर अवहेलना:** इस आदेश का तात्कालिक कारण सांसद चंद्रशेखर आजाद का गुरुवार की तय सुनवाई के दौरान अदालत में हाजिर न होना रहा। अदालत ने उन्हें पहले भी कई बार उपस्थित होने के निर्देश दिए थे, जिनकी लगातार अनदेखी की गई।
- **2018 का आपराधिक मामला:** यह पूरा प्रकरण साल 2018 में साहिबाबाद थाना अंतर्गत एक शादी समारोह में धर्मेंद्र कुमार नामक युवक के साथ हुई कथित मारपीट और धमकी देने की घटना से उपजा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 323 और 305 में मामला दर्ज किया था।
- **चार्जशीट और अदालती प्रक्रिया:** पुलिस द्वारा मामले की जांच पूरी कर अदालत में औपचारिक आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद मामले की सुनवाई चल रही है। अदालत के समक्ष गवाही और न्यायिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आरोपी की उपस्थिति अनिवार्य मानी गई है।
- **आगे की संभावित कार्रवाई:** कानूनी नियमों के अनुसार जब कोई आरोपी गैर जमानती वारंट के बाद भी अदालत में हाजिर नहीं होता, तो अदालत संपत्ति कुर्क करने जैसी सख्त कार्रवाई का आदेश देती है। न्यायालय ने सुनवाई सुनिश्चित कराने के लिए यह कदम उठाया है।

## सवाल-जवाब

### 1. गाजियाबाद की अदालत ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ क्या आदेश दिया है?
अदालत ने वर्ष 2018 के एक मामले में लगातार गैरहाजिर रहने पर चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है और संपत्ति कुर्की की चेतावनी दी है।

### 2. यह मामला किस वर्ष और किस घटना से जुड़ा है?
यह विवाद वर्ष 2018 का है, जब साहिबाबाद में एक शादी समारोह के दौरान धर्मेंद्र कुमार नामक युवक के साथ कथित रूप से मारपीट और धमकी देने की घटना हुई थी।

### 3. पुलिस ने इस मामले में किन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी?
पुलिस ने पीड़ित धर्मेंद्र कुमार की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 305 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

### 4. अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी करने का कड़ा कदम क्यों उठाया?
अदालत की तरफ से बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जब सांसद गुरुवार को भी सुनवाई में पेश नहीं हुए, तो अदालत ने यह सख्त कदम उठाया।

### 5. यदि चंद्रशेखर आजाद अदालत में पेश नहीं होते हैं तो आगे क्या हो सकता है?
अदालत के निर्देशों के अनुसार, यदि वह अदालत में पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

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