गाजियाबाद हादसे के बाद अस्पताल के बिल ने तोड़ी कमर, बेटे को बचाने के लिए पिता को गिरवी रखनी पड़ी जमीन गाजियाबाद में सड़क हादसे के शिकार हुए 24 वर्षीय तुषार कुमार की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के पिता ने यशोदा मेडिसिटी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इलाज का भारी-भरकम बिल चुकाने के लिए उन्हें जमीन गिरवी रखनी पड़ी और ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़े। गाजियाबाद के साहिबाबाद रैपिड मेट्रो स्टेशन के पास 19 सितंबर की रात हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 24 वर्षीय युवक की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने गाजियाबाद के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि बेटे की जान बचाने और अस्पताल का बिल चुकाने के लिए उन्हें अपनी जमीन तक गिरवी रखनी पड़ गई। जानकारी के मुताबिक 24 वर्षीय तुषार कुमार को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उसे इंदिरापुरम स्थित यशोदा मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हादसे की रात और अस्पताल पहुंचने का घटनाक्रम प्राप्त जानकारी के अनुसार तुषार कुमार अपने दफ्तर से काम खत्म करके घर लौट रहा था। इसी दौरान 19 सितंबर की सुबह करीब 2:30 बजे रैपिड रेल नमो भारत के साहिबाबाद स्टेशन से महज 100 मीटर की दूरी पर किसी अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे के बाद मौके से गुजर रहे एक राहगीर रोहित शर्मा ने तुरंत पुलिस को इस दुर्घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को उपचार के लिए वसुंधरा स्थित अटलांटा अस्पताल ले गई। हालांकि वहां डॉक्टरों ने सर्जन उपलब्ध न होने की बात कहकर घायल को भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस उसे इंदिरापुरम के यशोदा मेडिसिटी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। भर्ती होने के कुछ ही मिनटों में थमा दिया गया भारी बिल मृतक के पिता शिव कुमार ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बेटे को अस्पताल में भर्ती कराए हुए अभी बमुश्किल 30 से 35 मिनट ही बीते थे कि उन्हें लगभग 47,800 रुपये का बिल थमा दिया गया। पिता ने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अस्पताल के कर्मचारियों से अनुरोध किया था कि उनके बेटे को किसी सरकारी अस्पताल जैसे कि एमएमजी अस्पताल या दिल्ली के किसी बड़े सरकारी संस्थान में रेफर कर दिया जाए। उन्होंने अस्पताल से यह भी स्पष्ट किया था कि वे कैसे भी करके पैसों का पूरा इंतजाम कर लेंगे और उनकी पत्नी अस्पताल में ही बैठी रहेगी, लेकिन उनकी एक बात नहीं सुनी गई। शिव कुमार के शब्दों में कहें तो उनके पास उस वक्त इतने पैसे नहीं थे और उन्होंने बार-बार गुहार लगाई कि बच्चे को दूसरे अस्पताल भेज दें, मगर उनकी किसी ने नहीं सुनी। साहूकार से ब्याज पर लिए पैसे और एंबुलेंस का खर्च पिता शिव कुमार ने बताया कि अस्पताल का बिल चुकाने और बेटे को बचाने के लिए उन्हें चार से पांच घंटे तक भारी मशक्कत करनी पड़ी। अंत में उन्होंने मजबूर होकर एक साहूकार से ऊंचे ब्याज पर 70 हजार रुपये उधार लिए। इन रुपयों में से लगभग 45 हजार रुपये अस्पताल में जमा कराए गए। इसके बाद करीब छह हजार रुपये एंबुलेंस का किराया चुकाने में खर्च हुए, जिसके जरिए वे अपने बेटे को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गए। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद 20 सितंबर की शाम करीब चार बजे इलाज के दौरान तुषार कुमार ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन ने दी अपनी सफाई दूसरी ओर यशोदा मेडिसिटी अस्पताल की तरफ से इन सभी आरोपों पर अपना अलग पक्ष रखा गया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज को जैसे ही लाया गया, तुरंत मेडिकल टीम ने उसकी जांच की और उसकी शारीरिक स्थिति के अनुसार फौरन इलाज शुरू कर दिया गया। अस्पताल के बयान के मुताबिक मरीज को हर संभव आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और नियमों के तहत आर्थिक रियायत भी दी गई थी। अस्पताल का यह भी दावा है कि आगे के उपचार और बेहतर देखभाल को लेकर परिजनों को स्पष्ट चिकित्सकीय सलाह दी गई थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों की बार-बार की सलाह के बावजूद परिजनों ने अपनी मर्जी से मरीज को LAMA यानी लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस के तहत अस्पताल से ले जाने का निर्णय लिया। अस्पताल ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा चिकित्सा प्रोटोकॉल और उपलब्ध मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर हर मरीज को उचित उपचार प्रदान करना रहा है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस में भीषण आग का हादसा इसी बीच गाजियाबाद की इस घटना के अलावा उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक अन्य भीषण सड़क हादसा भी सामने आया है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक स्लीपर बस में अचानक आग लगने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के वक्त बस में कुल 35 लोग सवार थे, जिनमें से कई यात्री आग की चपेट में आने से बुरी तरह से झुलस गए। इस हादसे और इलाज के दौरान वित्तीय संकट से जुड़े मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और आपातकालीन सहायता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां एक तरफ परिवार अपने बेटे को बचाने के लिए संघर्ष करता रहा, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और चिकित्सीय व्यवस्थाओं के बीच अपनों को खोने का दर्द परिजनों को सहना पड़ा। इसका आप पर असर यह घटना देश में निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों और आपातकालीन चिकित्सा के दौरान आने वाले आर्थिक संकट की गंभीर तस्वीर पेश करती है। • भारत में: आम नागरिकों के लिए निजी स्वास्थ्य सेवाओं का भारी खर्च उठाना कई बार जमीन या गहने गिरवी रखने जैसे कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर देता है। • गाजियाबाद में: स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों को आपातकालीन स्थिति में निजी अस्पतालों के शुल्कों और प्रशासनिक औपचारिकताओं के चलते भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ यह दुखद घटना सड़क सुरक्षा की कमी, शुरुआती चिकित्सा मिलने में देरी और निजी चिकित्सा संस्थानों में भारी भरकम खर्च के बीच संतुलन न होने के कारण घटी। • दुर्घटना और प्रारंभिक देरी: तड़के हुए सड़क हादसे के बाद शुरुआती अस्पताल द्वारा सर्जन उपलब्ध न होने का हवाला देकर भर्ती न करना मरीज के लिए समय गंवाने का मुख्य कारण बना। • आर्थिक संकट और उधारी: यशोदा मेडिसिटी अस्पताल द्वारा भर्ती के तुरंत बाद भारी बिल थमाए जाने से परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया, जिसके चलते उन्हें साहूकार से ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा। • चिकित्सा हस्तांतरण और मौत: परिवार द्वारा सरकारी अस्पताल में भेजने की गुहार अनसुनी किए जाने के बाद LAMA के तहत मरीज को सफदरजंग ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सवाल-जवाब 1. तुषार कुमार के साथ यह दुर्घटना कहां और कब हुई? यह सड़क हादसा 19 सितंबर की रात गाजियाबाद के साहिबाबाद रैपिड मेट्रो स्टेशन के पास हुआ। 2. घायल युवक को सबसे पहले किस अस्पताल ले जाया गया था? पुलिस घायल तुषार को पहले वसुंधरा के अटलांटा अस्पताल ले गई थी, जहां सर्जन न होने के कारण उसे भर्ती नहीं किया गया। 3. अस्पताल द्वारा परिवार को कितने रुपये का बिल थमाया गया था? परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती कराने के 30-35 मिनट बाद ही लगभग 47,800 रुपये का बिल बता दिया गया था। 4. इलाज के लिए पैसे जुटाने के वास्ते पिता ने क्या किया? पिता शिव कुमार ने चार-पांच घंटे की मशक्कत के बाद एक साहूकार से ब्याज पर 70 हजार रुपये उधार लिए थे। 5. तुषार कुमार की मृत्यु कहां और कब हुई? तुषार कुमार की मौत 20 सितंबर की शाम करीब चार बजे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। 6. यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ने इस मामले में क्या सफाई दी है? अस्पताल ने कहा कि मरीज का तुरंत इलाज शुरू किया गया था और परिजनों ने अपनी मर्जी से LAMA के तहत मरीज को डिस्चार्ज कराया था। https://trendkia.com/uttar-pradesh/ghaziabad-hadase-ke-bada-aspatala-ke-bila-ne-tori-kamara-bete-ko-bachane-ke-lie-pita-ko-giravi-rakhani-pari-jamina-38495 TrendKia — Har trend, sabse pehle.