# गाजियाबाद की लोनी सीट पर 2027 में तीसरी जीत के लिए बीजेपी की परीक्षा, जानिए तीन चुनावों का पूरा चुनावी इतिहास

> गाजियाबाद जिले की लोनी विधानसभा सीट के 2012 से 2022 तक के चुनावी आंकड़े और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बनते नए सियासी समीकरणों का विस्तृत विश्लेषण।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
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**Tags:** लोनी विधानसभा, गाजियाबाद चुनाव, उत्तर प्रदेश राजनीति, नंदकिशोर गुर्जर, यूपी चुनाव 2027, बीजेपी उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और रणनीतिक मंथन शुरू हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाजियाबाद जिले की लोनी विधानसभा सीट प्रदेश की प्रमुख हॉट सीटों में गिनी जाती है। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक कुल तीन विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। लोनी का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, जहां मतदाताओं ने बहुजन समाज पार्टी की शुरुआती जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी को लगातार दो बार मौका दिया है। अब 2027 के चुनाव में जहां बीजेपी के सामने जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी इस सीट पर पहली बार अपना खाता खोलने के सपने देख रही है।

## लोनी विधानसभा सीट का गठन और शुरुआती राजनीतिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2008 में नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोनी विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था। इससे पहले यह इलाका अन्य विधानसभा सीमाओं का हिस्सा था, लेकिन स्वतंत्र सीट बनने के बाद यहां स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। इस नवगठित सीट पर पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 2012 में कराया गया था।

लोनी के पहले चुनाव से ही यहां की राजनीति में कुछ प्रमुख स्थानीय चेहरे मुख्य भूमिका में आ गए थे। जाकिर अली, मदन भैया और नंदकिशोर गुर्जर ऐसे नाम रहे, जिन्होंने पिछले एक दशक में लोनी की सियासत को दिशा दी है। परिसीमन के बाद से ही इस शहरी और अर्द्ध-शहरी आबादी वाले क्षेत्र में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की अहमियत बढ़ गई।

## 2012 का पहला चुनाव: बसपा के जाकिर अली की दर्ज हुई ऐतिहासिक जीत
लोनी विधानसभा सीट पर 2012 में पहली बार वोट डाले गए। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार जाकिर अली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। जाकिर अली को कुल 89,603 वोट प्राप्त हुए थे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी मदन भैया को पराजित किया था, जिन्हें 64,355 वोट मिले थे। जाकिर अली ने 25,248 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर लोनी के पहले विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया।

वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन था, जिसके कारण कांग्रेस ने लोनी में अपना अलग प्रत्याशी नहीं उतारा था। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी। बीजेपी के उम्मीदवार डॉ. विनोद सिंह बंसल को 48,319 वोट मिले थे।

इस चुनाव की सबसे रोचक बात यह रही कि 2012 में पूरे प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने वाली समाजवादी पार्टी लोनी सीट पर चौथे स्थान पर पिछड़ गई थी। सपा प्रत्याशी औलाद अली को केवल 6,666 वोट मिले थे। इस नतीजे ने साफ कर दिया था कि लोनी का स्थानीय समीकरण प्रदेश की लहर से अलग हो सकता है।

## 2017 का विधानसभा चुनाव: बीजेपी के नंदकिशोर गुर्जर का दबदबा और रिकॉर्ड जीत
पाँच साल बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में लोनी की राजनीति में बड़ा मोड़ देखने को मिला। 2012 में तीसरे स्थान पर रहने वाली बीजेपी ने इस बार नंदकिशोर गुर्जर पर भरोसा जताया और उन्हें मैदान में उतारा। बीजेपी का यह दांव पूरी तरह सटीक साबित हुआ और नंदकिशोर गुर्जर ने रिकॉर्ड वोट हासिल करते हुए बड़ी जीत दर्ज की।

2017 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी नंदकिशोर गुर्जर को 1,13,088 वोट मिले। वहीं, पिछले चुनाव के विजेता और बसपा उम्मीदवार जाकिर अली दूसरे स्थान पर खिसक गए, जिन्हें 70,275 वोट ही मिल सके। नंदकिशोर गुर्जर ने जाकिर अली को 42,813 वोटों के भारी-भरकम अंतर से हराया। लोनी सीट के इतिहास में वोटों के लिहाज से यह अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की गई है।

इस चुनाव में 2012 के उपविजेता और आरएलडी उम्मीदवार मदन भैया तीसरे नंबर पर चले गए और उन्हें 42,539 वोट मिले। वहीं सपा और कांग्रेस के गठबंधन के बावजूद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राशिद मलिक चौथे स्थान पर रहे, जिन्हें 42,302 वोट प्राप्त हुए थे।

## 2022 का कड़ा मुकाबला: बीजेपी की जीत बरकरार, मगर घटा वोटों का अंतर
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लोनी सीट पर बेहद रोमांचक और नजदीकी मुकाबला देखने को मिला। बीजेपी ने एक बार फिर अपने निवर्तमान विधायक नंदकिशोर गुर्जर को टिकट दिया। दूसरी तरफ इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन था, जिसके तहत आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर मदन भैया मैदान में उतरे।

कड़े मुकाबले के बावजूद नंदकिशोर गुर्जर अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। उन्हें कुल 1,27,410 वोट मिले। हालांकि आरएलडी-सपा गठबंधन के प्रत्याशी मदन भैया ने उन्हें जबरदस्त टक्कर दी और 1,18,734 वोट हासिल किए। इस कड़े संघर्ष के कारण नंदकिशोर गुर्जर की जीत का अंतर 2017 के 42,813 वोटों से घटकर महज 8,676 वोट रह गया।

2022 के इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रंजीता धामा ने भी अपना असर दिखाया और 27,289 वोट हासिल किए। वहीं, कभी इस सीट पर राज करने वाली बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन काफी गिर गया। बसपा प्रत्याशी अकील 25,717 वोटों के साथ चौथे नंबर पर सिमट गए।

## लोनी सीट पर तीनों चुनावों के परिणामों का सांख्यिकी विवरण
लोनी विधानसभा सीट पर 2012 से 2022 के बीच हुए तीनों चुनावों के आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है

- **2012 का चुनाव:** विजेता जाकिर अली (बसपा) को 89,603 वोट मिले; उपविजेता मदन भैया (आरएलडी) को 64,355 वोट मिले। जीत का अंतर 25,248 वोट रहा। तीसरे नंबर पर बीजेपी के डॉ. विनोद सिंह बंसल (48,319 वोट) और चौथे नंबर पर सपा के औलाद अली (6,666 वोट) रहे।
- **2017 का चुनाव:** विजेता नंदकिशोर गुर्जर (बीजेपी) को 1,13,088 वोट मिले; उपविजेता जाकिर अली (बसपा) को 70,275 वोट मिले। जीत का अंतर 42,813 वोट रहा। तीसरे स्थान पर आरएलडी के मदन भैया (42,539 वोट) और चौथे स्थान पर सपा के राशिद मलिक (42,302 वोट) रहे।
- **2022 का चुनाव:** विजेता नंदकिशोर गुर्जर (बीजेपी) को 1,27,410 वोट मिले; उपविजेता मदन भैया (आरएलडी) को 1,18,734 वोट मिले। जीत का अंतर 8,676 वोट रहा। तीसरे स्थान पर निर्दलीय रंजीता धामा (27,289 वोट) और चौथे स्थान पर बसपा के अकील (25,717 वोट) रहे।

## 2027 के चुनाव समीकरण: बीजेपी-आरएलडी और सपा-कांग्रेस गठबंधन की भावी चुनौती
लोनी विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि बीजेपी यहां सबसे सफल दल के रूप में उभरी है। लगातार दो बार से विधायक नंदकिशोर गुर्जर अपने तीखे बयानों और सक्रियता के कारण अक्सर पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा में बने रहते हैं। हालांकि, 2027 के आगामी चुनाव में लोनी का सियासी गणित नया रूप ले सकता है।

वर्तमान राजनीतिक स्थिति में बीजेपी और आरएलडी एक साथ आ चुके हैं। 2022 में आरएलडी ने सपा के साथ मिलकर बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन अब बीजेपी-आरएलडी के साथ होने से सीट बंटवारे का पेंच फंस सकता है। यदि यह सीट बीजेपी के पास रहती है या आरएलडी के खाते में जाती है, तो दोनों स्थितियों में स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं का सामंजस्य महत्वपूर्ण होगा।

दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में सपा और कांग्रेस का गठबंधन देखने को मिल सकता है। समाजवादी पार्टी, जो 2012 और 2017 में अकेले लड़कर चौथे नंबर पर रही थी, इस बार कांग्रेस के साथ मिलकर लोनी में पहली बार कमल का फूल खिलाने से रोकने की कोशिश करेगी। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन भी इस सीट के नतीजे तय करने में बेहद अहम माना जा रहा है।

## इसका आप पर असर
गाजियाबाद की लोनी विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा और राजनीतिक प्राथमिकताओं को प्रभावित करेगा।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली-एनसीआर से सटे इस प्रमुख क्षेत्र के चुनावी रुझानों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को मापते हैं। इससे प्रमुख दलों को अपनी राष्ट्रीय और प्रांतीय रणनीतियों में आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलता है।
- **उत्तर प्रदेश और गाजियाबाद में:** लोनी विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का सीधा असर स्थानीय विकास, बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं की योजनाओं पर पड़ता है। चुनाव नजदीक आते ही स्थानीय प्रशासनिक प्राथमिकताएं और जनहित के मुद्दे तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
लोनी विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक बनावट में 2008 के परिसीमन के बाद से लगातार सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण देखा गया है।

- **परिसीमन का प्रभाव:** वर्ष 2008 में बनी इस नई सीट पर शुरुआत में बहुजन समाज पार्टी का सामाजिक समीकरण मजबूत रहा, जिससे 2012 में उसे जीत मिली।
- **बीजेपी का उभार:** 2017 में पार्टी की राष्ट्रव्यापी लहर और स्थानीय जनाधार के मजबूत एकीकरण के कारण बीजेपी के नंदकिशोर गुर्जर ने रिकॉर्ड अंतर से चुनाव जीता।
- **2022 का कड़ा गठबंधन:** 2022 में सपा और आरएलडी के संयुक्त गठबंधन ने विपक्षी वोटों का एकत्रीकरण किया, जिससे बीजेपी की जीत का अंतर 42,813 से घटकर 8,676 रह गया।

## सवाल-जवाब

### 1. लोनी विधानसभा सीट का गठन कब हुआ?
लोनी विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन प्रक्रिया के बाद अस्तित्व में आई थी और यहाँ पहला चुनाव 2012 में हुआ था।

### 2. लोनी में 2012 का पहला चुनाव किसने जीता था?
2012 के पहले चुनाव में बसपा के उम्मीदवार जाकिर अली ने 89,603 वोट पाकर आरएलडी के मदन भैया को हराया था।

### 3. लोनी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में कौन विधायक हैं?
लोनी विधानसभा से बीजेपी के नंदकिशोर गुर्जर विधायक हैं, जिन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत हासिल की है।

### 4. 2022 के चुनाव में लोनी में जीत का अंतर कितना था?
2022 के चुनाव में बीजेपी के नंदकिशोर गुर्जर ने आरएलडी के मदन भैया को 8,676 वोटों के अंतर से हराया था।

### 5. क्या समाजवादी पार्टी ने कभी लोनी विधानसभा सीट जीती है?
नहीं, समाजवादी पार्टी ने अब तक लोनी विधानसभा सीट पर कभी जीत दर्ज नहीं की है।

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