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  "title": "गाजियाबाद में फेसबुक फ्रॉड का शिकार हुई महिला को साइबर सेल ने दिलाए 4.83 लाख रुपये",
  "summary": "गाजियाबाद साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फेसबुक पर ऑनलाइन ठगी की शिकार महिला के पूरे 4.83 लाख रुपये सकुशल वापस करा दिए हैं।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साइबर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक महिला को बड़ी वित्तीय चपत से बचा लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अज्ञात लिंक के जरिए ठगी का शिकार हुई पीड़िता के खाते से उड़े पूरे 4 लाख 83 हजार रुपये पुलिस की सतर्कता से वापस मिल गए हैं। वेव सिटी थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में पुलिस ने बैंकों से तालमेल बिठाकर डूबी हुई रकम को सुरक्षित बहाल कराया।\n\nफेसबुक लिंक पर भुगतान करते ही खाते से उड़े थे लाखों\nयह घटना लालकुआं स्थित मानसरोवर पार्क निवासी शशिकला के साथ घटी थी। उन्होंने फेसबुक पर दिखाई दिए किसी विज्ञापन अथवा लिंक पर भरोसा करके ऑनलाइन भुगतान किया था। इसके तत्काल बाद साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते में सेंध लगा दी और कुल 4,83,000 रुपये निकाल लिए। इतनी बड़ी रकम गंवाने के बावजूद पीड़िता ने संयम बनाए रखा और फौरन कानूनी मदद लेने का फैसला किया।\n\nत्वरित शिकायत और पुलिस की सक्रियता से होल्ड हुई राशि\nपीड़िता ने 18 जुलाई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर धोखाधड़ी की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। सूचना मिलते ही वेव सिटी थाने की साइबर सेल सक्रिय हो गई। जांच अधिकारियों ने तत्काल संबंधित बैंकिंग संस्थानों से संपर्क साधा और धोखेबाजों के खातों में स्थानांतरित की गई धनराशि पर रोक (होल्ड) लगवा दी। इसके बाद चली कानूनी प्रक्रिया और पुलिस के निरंतर प्रयासों के चलते 10 अक्टूबर 2026 को पूरी राशि पीड़िता के खाते में सुरक्षित लौट आई। अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाकर पीड़िता ने पुलिसकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।\n\nऑनलाइन भुगतान को लेकर पुलिस ने जारी किया सतर्कता संदेश\nइस प्रकरण के उपरांत गाजियाबाद पुलिस ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहने की हिदायत दी है। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया मंचों पर खरीदारी या कोई भी डिजिटल भुगतान करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध वेब लिंक पर कतई विश्वास न करें। यदि कोई व्यक्ति वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो समय गंवाए बिना एनसीआरपी पोर्टल अथवा नजदीकी थाने के साइबर हेल्पडेस्क पर सूचना दें, ताकि समय रहते बैंक खातों में पैसे रोके जा सकें।\n\nफर्जी बीमा गिरोह पर भी कसा गया था शिकंजा\nउल्लेखनीय है कि गाजियाबाद में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाने की संयुक्त टीम ने फर्जी बीमा पॉलिसी और गूगल विज्ञापनों के नाम पर जालसाजी करने वाले एक गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। उस गिरोह ने विभिन्न लोगों से 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी की थी। पुलिस ने उनके कब्जे से 4 मोबाइल फोन, 2 एटीएम कार्ड, 2 चेकबुक, 1 पासबुक और 3000 रुपये नकद बरामद किए थे।\n\nइसका आप पर असर\nडिजिटल धोखाधड़ी का शिकार होने पर त्वरित शिकायत दर्ज कराने से डूबे हुए पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।\n\n• भारत में: यदि किसी भी नागरिक के साथ ऑनलाइन वित्तीय ठगी होती है, तो वे तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। गोल्डन ऑवर के भीतर शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस बैंकों से संपर्क कर ठगी की रकम को फ्रीज करवा सकती है।\n• गाजियाबाद में: स्थानीय निवासी किसी भी प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड की स्थिति में वेव सिटी थाने या गाजियाबाद साइबर सेल से तुरंत संपर्क साध सकते हैं। पुलिस की सक्रियता से सोशल मीडिया लिंक्स और फर्जी विज्ञापनों से होने वाली ठगी पर लगातार रोक लगाई जा रही है।\n• सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए: फेसबुक या इंस्टाग्राम पर दिखाई देने वाले अनजान विज्ञापनों और लिंक्स के जरिए ऑनलाइन भुगतान करने से हमेशा बचें। किसी भी अनजान स्रोत से आने वाले पेमेंट गेटवे की प्रमाणिकता जांचे बिना अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें।\n• पीड़ितों के लिए कदम: पैसे कटते ही बिना किसी देरी के अपने बैंक को सूचित करें और ट्रांजैक्शन आईडी के साथ आधिकारिक पुलिस पोर्टल पर रिपोर्ट करें। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, अपराधियों के खाते में पैसे ब्लॉक होने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटना सोशल मीडिया पर मौजूद असुरक्षित लिंक के जरिए ऑनलाइन भुगतान करने और साइबर अपराधियों द्वारा बैंक खाते में सेंध लगाने के कारण हुई। हालांकि पीड़िता की तत्परता और पुलिस के त्वरित समन्वय से पूरी रकम वापस सुरक्षित हो गई।\n\n• धोखाधड़ी का कारण: पीड़िता ने फेसबुक पर एक संदिग्ध विज्ञापन या लिंक के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान करने का प्रयास किया था। इसके बाद जालसाजों ने तकनीकी हेरफेर से उनके खाते से 4,83,000 रुपये उड़ा लिए।\n• त्वरित रिकवरी की वजह: पीड़िता ने 18 जुलाई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर समय रहते शिकायत दर्ज करा दी थी। इस त्वरित कदम ने साइबर पुलिस को तत्काल बैंकों से संपर्क करने का मौका दिया।\n• पुलिस और बैंकों का समन्वय: वेव सिटी साइबर सेल ने बिना समय गंवाए संबंधित बैंकों से समन्वय स्थापित किया और संबंधित खातों में धनराशि को तुरंत होल्ड करा दिया। निरंतर कानूनी प्रक्रिया के बाद 10 अक्टूबर 2026 को पूरे पैसे वापस मिल सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गाजियाबाद में महिला के साथ क्या घटना हुई थी?\nलालकुआं की रहने वाली शशिकला के साथ फेसबुक पर एक लिंक के जरिए भुगतान करते समय 4,83,000 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी।\n\n2. पीड़िता ने साइबर ठगी की शिकायत कब और कहां दर्ज कराई?\nपीड़िता ने 18 जुलाई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।\n\n3. पुलिस ने ठगी की रकम वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाया?\nवेव सिटी थाना साइबर सेल ने तुरंत संबंधित बैंकों से संपर्क कर स्थानांतरित राशि को होल्ड करा दिया और 10 अक्टूबर 2026 को पूरे पैसे वापस दिलाए।\n\n4. साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?\nपुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान लिंक या व्यक्ति पर भरोसा न करने और ऑनलाइन भुगतान करते समय पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है।\n\n5. गाजियाबाद पुलिस ने हाल ही में किस गिरोह का पर्दाफाश किया था?\nपुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसी और गूगल विज्ञापनों के जरिए 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने वाले 7 आरोपियों के गिरोह को गिरफ्तार किया था।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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