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  "type": "article",
  "title": "गाजियाबाद में पुराने फ्लेक्स से बन रहे मजबूत बैग, महिलाओं को मिला काम और पर्यावरण को नई सुरक्षा",
  "summary": "गाजियाबाद में बेकार फ्लेक्स बोर्ड से उपयोगी बैग बनाने का अनूठा अभियान चल रहा है। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।",
  "content": "गाजियाबाद के शहरी इलाकों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे बैनर और फ्लेक्स बोर्ड अक्सर कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कचरे में फेंक दिए जाते हैं। ये सामग्री शहर के विभिन्न कोनों, खाली पड़े भूखंडों या सीधे कचरा घरों तक पहुंचती है, जहां यह लंबे समय तक प्रदूषण का कारण बनती है। इस समस्या से निपटने के लिए अब एक अनूठी शुरुआत की गई है। नगर निगम के सहयोग से साथी फाउंडेशन इन बेकार समझे जाने वाले फ्लेक्स को नया जीवन दे रहा है। संस्था की प्रमुख काजल छिब्बर के मार्गदर्शन में इन अनुपयोगी विज्ञापनों को संग्रहित कर इनसे मजबूत और टिकाऊ थैले बनाए जा रहे हैं। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि तैयार होने वाले इन थैलों को आम नागरिकों को पूरी तरह मुफ्त में बांटा जा रहा है, जिससे प्लास्टिक थैलियों के विकल्प की तलाश पूरी हो रही है। साथ ही, इन वस्तुओं के निर्माण की जिम्मेदारी स्थानीय महिलाओं को सौंपी गई है, जिससे उन्हें आय का एक स्थिर साधन मिल रहा है। इस प्रकार जो फ्लेक्स कभी शहर के सौंदर्यीकरण में बाधा बनकर कचरा बनते थे, वे अब प्रकृति की रक्षा करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का जरिया बन चुके हैं।\n\nसाल 2022 से शुरू हुई थी इस अनूठी पहल की यात्रा\nइस रचनात्मक योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए संस्थापक काजल छिब्बर ने एक आयोजन के तुरंत बाद बड़ी मात्रा में बेकार पड़े विज्ञापनों को देखा। उस दृश्य ने उनके मन में एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया कि यदि केवल एक आयोजन के बाद इतना कचरा इकट्ठा हो सकता है, तो पूरे महानगर में प्रतिदिन कितनी मात्रा में यह सामग्री बर्बाद होती होगी। इसी विचार ने उन्हें इस कचरे के पुनर्चक्रण और दोबारा इस्तेमाल के रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में संस्था ने पुराने विज्ञापनों से थैले तैयार करने का एक छोटा परीक्षण किया। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे पहले फ्लेक्स सामग्री को पूरी तरह साफ किया जाता है और उसके बाद आवश्यकतानुसार उसके माप के अनुसार कटाई की जाती है। इसके पश्चात सिलाई मशीनों की मदद से इन्हें मजबूत थैलों का रूप दिया जाता है और इनमें मजबूत पट्टियां जोड़ी जाती हैं। इस विधि से तैयार होने वाले उत्पाद बेहद मजबूत होते हैं और उनमें काफी अधिक वजन आसानी से उठाया जा सकता है। सामान्य आकार के एक फ्लेक्स बोर्ड से लगभग छह हैंडबैग आसानी से तैयार किए जा सकते हैं।\n\nनगर निगम और स्थानीय नागरिकों का मिल रहा है भरपूर साथ\nइस पूरे अभियान को सुचारू रूप से चलाने में स्थानीय प्रशासन यानी गाजियाबाद नगर निगम का भरपूर सहयोग मिल रहा है। निगम की तरफ से विभिन्न आयोजनों में इस्तेमाल हो चुके विज्ञापनों को सीधे संस्था तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा शहर के जागरूक नागरिक भी अपने इस्तेमाल किए हुए पुराने विज्ञापनों को स्वेच्छा से संस्था को सौंप देते हैं। जब ये उत्पाद बनकर तैयार हो जाते हैं, तब शहर के विभिन्न हिस्सों में विशेष शिविर लगाकर इन्हें आम जनता को मुफ्त में वितरित किया जाता है। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य लोगों को पॉलिथीन और प्लास्टिक के इस्तेमाल से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है। इस पूरी व्यवस्था का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इससे केवल पर्यावरण को लाभ नहीं पहुंच रहा, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है। साथी फाउंडेशन के साथ मिलकर काम कर रही लगभग 35 महिलाएं इन वस्तुओं के निर्माण से जुड़ी हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि संस्था द्वारा प्रतिदिन औसतन लगभग 50 बैगों का निर्माण किया जा रहा है।\n\nपर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश\nइस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर संस्थापक काजल छिब्बर का यह संदेश है कि लोग पुराने विज्ञापनों और प्लास्टिक कचरे को यूं ही खुले में न फेंकें। इसके बजाय वे इस तरह की सामग्री को संबंधित संस्थाओं को सौंप दें ताकि उनका सही तरीके से पुनर्चक्रण करके उपयोगी वस्तुएं बनाई जा सकें। जिस सामग्री को लोग एक बार उपयोग करके बेकार समझकर कूड़ेदान में डाल देते हैं, वह अब एक तरफ प्रकृति को बचाने में अहम भूमिका निभा रही है, तो दूसरी तरफ महिलाओं के हाथों में रोजगार देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह पहल दिखाती है कि किस तरह छोटी सी सोच और सही प्रबंधन के जरिए कचरे को भी एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है, जिससे समाज और प्रकृति दोनों को एक साथ लाभ मिल सके।\n\nइसका आप पर असर\nइस पहल से स्थानीय स्तर पर पर्यावरण सुधार और महिलाओं की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ती है, जिससे अन्य शहरों को भी प्रेरणा मिलती है।\n• गाजियाबाद में: शहर की करीब 35 महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है और स्थानीय लोगों को मुफ्त में उपयोगी थैले मिल रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गाजियाबाद में बेकार फ्लेक्स से बैग बनाने की पहल किसने शुरू की है?\nयह पहल साथी फाउंडेशन की संस्थापक काजल छिब्बर द्वारा शुरू की गई है।\n\n2. इस योजना की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?\nसाथी फाउंडेशन की यह पहल वर्ष 2022 में शुरू हुई थी।\n\n3. इस काम में कौन सा निकाय सहयोग कर रहा है?\nगाजियाबाद नगर निगम इस काम में संस्था का सहयोग कर रहा है।\n\n4. इस परियोजना से कितनी महिलाओं को रोजगार मिला है?\nसाथी फाउंडेशन से जुड़ी लगभग 35 महिलाएं इस काम में रोजगार पा रही हैं।\n\n5. तैयार होने वाले बैगों को लोगों को किस प्रकार दिया जाता है?\nइन बैगों को अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाकर लोगों को निशुल्क वितरित किया जाता है।\n\n6. एक सामान्य आकार के फ्लेक्स से कितने हैंडबैग बन जाते हैं?\nएक सामान्य आकार के फ्लेक्स से करीब छह हैंडबैग तैयार हो जाते हैं।\n\n7. संस्था द्वारा रोजाना कितने बैग तैयार किए जा रहे हैं?\nसंस्था रोजाना करीब 50 बैग तैयार कर रही है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसाथी फाउंडेशन की यह पहल कड़े कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने और जरूरतमंदों को आजीविका देने का बेहतरीन उदाहरण है।\n\n• सकारात्मक सोच: कचरे को समस्या मानने के बजाय उसे पुनः उपयोग में लाने का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।\n• सामुदायिक सहयोग: स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को साथ लेकर किसी भी बड़े सामाजिक लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।\n• महिला स्वावलंबन: हुनर के जरिए महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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    "गाजियाबाद",
    "पर्यावरण संरक्षण",
    "महिला सशक्तिकरण",
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    "साथी फाउंडेशन"
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