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  "type": "article",
  "title": "गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी पर आर्म्स एक्ट में केस दर्ज, IS-191 गैंग की जांच में राइफल और फाइल गायब मिली",
  "summary": "समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्तार अंसारी के आईएस-191 गैंग के हथियारों की जांच के दौरान एक राइफल और लाइसेंस की मूल पत्रावली गायब मिलने पर उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी और दो पूर्व सरकारी लिपिकों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से हथियारों के लाइसेंस की मूल पत्रावलियों और एक राइफल के रहस्यमय तरीके से गायब होने के बाद की गई है। पुलिस की यह सख्त कार्रवाई दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी के नेतृत्व वाले आईएस-191 गिरोह के सदस्यों और उनके सहयोगियों के शस्त्र लाइसेंसों की गहन जांच अभियान का सीधा परिणाम है।\n\n \n\nचार राज्यों में चला हथियारों का सत्यापन अभियान\n\nसांसद के खिलाफ दर्ज किया गया यह मुकदमा पुलिस के एक बड़े सत्यापन अभियान के दौरान सामने आई गड़बड़ियों का नतीजा है। वाराणसी रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) ने हाल ही में संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में संबंधित क्षेत्राधिकारियों और स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ) की विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों को मुख्य रूप से मुख्तार अंसारी, उनके परिवार के सदस्यों और उनके करीबी सहयोगियों को जारी किए गए सभी हथियारों की मौजूदा स्थिति की भौतिक जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।\n\nइस जांच का दायरा काफी बड़ा था, जिसमें आईएस-191 गिरोह से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंसों पर खरीदे या बेचे गए कुल 145 हथियारों का पूरा विवरण खंगाला गया। पुलिस टीमों ने पूरी सघनता से जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश तक जाकर इन हथियारों का सत्यापन किया। कई राज्यों में चले इस व्यापक अभियान के दौरान ही शस्त्र लाइसेंस जारी करने और उनके रिकॉर्ड के रखरखाव में भारी अनियमितताओं का पर्दाफाश होना शुरू हुआ।\n\n \n\nलापता राइफल और गायब पत्रावलियां\n\nजैसे-जैसे जांचकर्ताओं ने गाजीपुर के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के रिकॉर्ड को खंगालना शुरू किया, उन्हें वहां से कई अहम पत्रावलियां गायब मिलीं। पुलिस के अनुसार, खरीदे और बेचे गए कई हथियारों के मूल दस्तावेज सरकारी अभिलेखों में मौजूद ही नहीं थे। गायब हुए इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों में शस्त्र लाइसेंस संख्या 1188 P2 की पत्रावली भी शामिल थी, जो सांसद अफजाल अंसारी के नाम पर जारी किया गया था।\n\nकेवल लाइसेंस की फाइल गायब होना ही एकमात्र समस्या नहीं थी। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि इसी लाइसेंस पर एक राइफल खरीदी गई थी, जिसका सीरियल नंबर 830405 है। पुलिस की तमाम कोशिशों और पूछताछ के बावजूद, इस विशिष्ट राइफल की वर्तमान स्थिति और भौतिक स्थान का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। एक मौजूदा सांसद के नाम पर पंजीकृत हथियार का इस तरह लापता होना बेहद गंभीर मामला है, जिसके चलते अधिकारियों को तुरंत कानूनी कदम उठाना पड़ा।\n\n \n\nमिलीभगत और गंभीर आपराधिक धाराएं\n\nगाजीपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. इरज राजा ने जानकारी दी कि जांच के दौरान हथियार धारकों और सरकारी कार्यालय में रिकॉर्ड रखने वाले तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की गहरी मिलीभगत सामने आई है। इस मामले में गाजीपुर शहर की सदर कोतवाली में जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें तीन मुख्य आरोपी बनाए गए हैं। पुलिस ने सांसद अफजाल अंसारी के साथ-साथ तत्कालीन प्रथम शस्त्र लिपिक अशफाक अहमद और द्वितीय शस्त्र लिपिक गौरी शंकर राम को सरकारी दस्तावेज गायब करने का जिम्मेदार मानते हुए नामजद किया है।\n\nइन सभी आरोपियों के खिलाफ कानून की बेहद सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात (धारा 409) और आपराधिक साजिश रचने (धारा 120-बी) से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 21, 25 और 30 के तहत भी कार्रवाई की गई है। एसपी डॉ. इरज राजा ने स्पष्ट किया है कि हथियारों के भौतिक सत्यापन के दौरान मिले पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर यह मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई तेजी से की जा रही है।\n\n \n\nलगातार जांच और विवादों से पुराना नाता\n\nआर्म्स एक्ट का यह नया मुकदमा गाजीपुर के सांसद की कानूनी परेशानियों को और बढ़ाने वाला है। उनका परिवार और उनके करीबी सहयोगी पिछले काफी समय से पुलिस और प्रशासन की रडार पर हैं। प्रशासन लगातार आईएस-191 गिरोह के उस तंत्र को तोड़ने का प्रयास कर रहा है, जिसके तहत लाइसेंसी हथियारों का कथित तौर पर क्षेत्र में दबदबा बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।\n\nअफजाल अंसारी का स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ टकराव का पुराना इतिहास रहा है। इसी साल जनवरी के महीने में भी एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब नेशनल हाईवे पर उनका वाहन रोके जाने के बाद सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। अब आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज हुए इस नए मामले ने उन पर कानूनी शिकंजा और कस दिया है, और गायब हुई राइफल को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह घटना दर्शाती है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां संगठित अपराध के प्रभाव को रोकने के लिए दशकों पुराने हथियार लाइसेंसों का सख्त ऑडिट कर रही हैं।\n• गाजीपुर में: स्थानीय निवासियों को पुलिस की बढ़ी हुई सतर्कता और प्रशासनिक सख्ती देखने को मिलेगी, क्योंकि अधिकारी राजनेताओं से जुड़े गायब हथियारों की तलाश कर रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अफजाल अंसारी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई है?\nपुलिस के सत्यापन अभियान के दौरान उनके शस्त्र लाइसेंस की मूल फाइल और उस पर खरीदी गई राइफल गायब मिलने के कारण उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।\n\n2. सांसद के खिलाफ किस थाने में मामला दर्ज किया गया है?\nगाजीपुर के सदर कोतवाली थाने में यह मुकदमा दर्ज किया गया है।\n\n3. डीआईजी की विशेष जांच टीमों का मुख्य उद्देश्य क्या था?\nविशेष टीमों का काम दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी, उनके परिवार और आईएस-191 गैंग से जुड़े लोगों के हथियारों का भौतिक सत्यापन करना था।\n\n4. एफआईआर में और किन लोगों को आरोपी बनाया गया है?\nअफजाल अंसारी के अलावा तत्कालीन प्रथम शस्त्र लिपिक अशफाक अहमद और द्वितीय शस्त्र लिपिक गौरी शंकर राम को मिलीभगत के आरोप में नामजद किया गया है।\n\n5. यह मामला किन धाराओं के तहत दर्ज किया गया है?\nआरोपियों पर आईपीसी और बीएनएस की धारा 409 और 120-बी, तथा आर्म्स एक्ट की धारा 21, 25 और 30 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-22",
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