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  "type": "article",
  "title": "गोमती की बाढ़ रोकने के लिए फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा नया तटबंध, राहत पैकेट में मिलेंगी 26 वस्तुएं",
  "summary": "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती नदी के किनारे फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर तटबंध निर्माण की मंजूरी दी है। बाढ़ पीड़ितों के लिए 26 जरूरी सामानों के किट, भोजन और मुआवजे का एलान किया गया है।",
  "content": "राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों को गोमती नदी के उफान से स्थाई राहत दिलाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक के विस्तृत दायरे को सुरक्षित रखने के मकसद से ग्रीन कॉरिडोर की रूपरेखा पर एक नया तटबंध तैयार किया जाएगा। यह ढांचा केवल पानी रोकने की दीवार भर नहीं होगा, बल्कि इसके ऊपर सड़क मार्ग भी बनाया जाएगा जिससे स्थानीय नागरिकों को आवागमन की एक वैकल्पिक और सुरक्षित सुविधा मिल सकेगी। इस निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है और चालू मानसून के समाप्त होते ही आवंटित बजट के साथ निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।\n\nजमीनी हालात का जायजा और हवाई मुआयना\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बख्शी का तालाब तहसील के जलभराव वाले गांवों का दौरा करके वास्तविक स्थिति परखी। इस दौरान उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से प्रत्यक्ष बातचीत की, उनकी समस्याएं जानीं और राहत सामग्री का वितरण किया। जमीनी निरीक्षण से पूर्व उन्होंने फैजुल्लागंज से लेकर नैमिषारण्य तक फैले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया, ताकि नुकसान और जलभराव के फैलाव का सटीक अनुमान लगाया जा सके। मौके पर राहत व बचाव अभियान में जुटी विशेष टीमों और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए चिकित्सा शिविरों की कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया गया।\n\nजल निकासी और पंपिंग प्रणाली का खाका\nबाढ़ सुरक्षा बंधे के निर्माण के साथ ही पानी निकासी की समुचित योजना तैयार करने का दायित्व सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपा गया है। पूरे क्षेत्र का विस्तृत तकनीकी सर्वे कर औपचारिक प्रस्ताव जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना इस तरह बनाई जा रही है कि तटबंध बनने के बाद बारिश का स्थानीय पानी आबादी वाले हिस्सों में न जमा हो सके। बस्तियों और रिहायशी कॉलोनियों में भरने वाले पानी को तत्काल नदी में वापस फेंकने के लिए शक्तिशाली पंपिंग सेट लगाए जाएंगे। इससे नदी का जलस्तर ऊंचा होने पर भी जलभराव की समस्या नहीं पनपेगी और बंधे पर बनी पक्की सड़क बारहों महीने यातायात के लिए खुली रहेगी।\n\nपहाड़ों और तराई की बारिश से चढ़ा गोमती का जलस्तर\nमैदानी इलाकों में अचानक बढ़े जलस्तर के कारणों की व्याख्या करते हुए यह रेखांकित किया गया कि बीते 10 दिनों की अवधि में उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक जनपदों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। पड़ोसी देश नेपाल के साथ-साथ तराई के जिलों जैसे पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में अत्यधिक वर्षा हुई। इन ऊपरी जलक्षेत्रों का पानी बहाव के साथ पांच से छह दिनों के भीतर निचले क्षेत्रों में पहुंचा, जिसके फलस्वरूप गोमती नदी खतरे के निशान के पास जा पहुंची। इसी बहाव ने बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक की पट्टी को जलमग्न कर दिया और बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियां उत्पन्न कर दीं। प्रशासन लगातार इस प्रवाह पर नजर बनाए हुए था।\n\nप्रभावितों के लिए 26 सामग्रियों का राहत किट\nबाढ़ के पानी से घिरे परिवारों के भरण-पोषण के लिए व्यापक राहत किट बांटी जा रही है, जिसमें दैनिक जरूरत की 26 वस्तुएं सम्मिलित की गई हैं। प्रत्येक पात्र परिवार को मिलने वाले इस पैकेज में 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर की दाल और एक लीटर सरसों अथवा रिफाइंड खाद्य तेल शामिल है। इसके अतिरिक्त दैनिक जीवन में काम आने वाले जरूरी सामान जैसे नमक, विभिन्न मिर्च-मसाले, पानी भरने के लिए बाल्टी, खाने के लिए लाई और भुजा, रोशनी के लिए मोमबत्तियां, माचिस तथा बारिश से बचाव हेतु बरसाती और तिरपाल भी इसमें मुहैया कराए जा रहे हैं।\n\nराहत शिविरों में गर्म खाना और पोषण का प्रबंध\nविस्थापित परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहने से रोकने के लिए स्थानीय प्राथमिक स्कूलों और मैरिज हॉलों को राहत शिविरों में परिवर्तित किया गया है। इन आश्रय स्थलों में दोनों वक्त ताजा गर्म भोजन परोसा जा रहा है। छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए उनके लिए नियमित दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त पोषक आहार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बेजुबान मवेशियों के चारे का भी ख्याल रखा जा रहा है, जिसके तहत शिविरों में पशुपालकों को सूखा भूसा और पौष्टिक चोकर उपलब्ध कराया जा रहा है। बिजली गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए शिविरों में पेट्रोमैक्स और सोलर लाइट के प्रबंध किए गए हैं, जबकि खाली पड़े घरों की सुरक्षा के लिए ग्राम चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिस जवान रात भर गश्त कर रहे हैं।\n\nमुआवजा राशि, पक्के आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा\nआपदा के दौरान किसी व्यक्ति की पानी में डूबने अथवा आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मृत्यु होने पर आश्रित परिजनों को फौरन ₹4 लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी। जिन परिवारों के कच्चे या पक्के मकान बारिश और पानी के दबाव से पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया पक्का मकान स्वीकृत किया जाएगा। मवेशियों की हानि पर भी पशुपालकों को वित्तीय भरपाई मिलेगी। जलस्तर कम होने के तुरंत बाद राजस्व और कृषि विभाग खेतों में पहुंचकर नष्ट हुई फसलों का पारदर्शी सर्वे करेंगे, जिसके आधार पर किसानों को मुआवजा राशि बांटी जाएगी। स्वास्थ्य स्तर पर बीमारियों और जहरीले जीवों से बचाव के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम और जानवरों के काटने पर लगने वाले एंटी रेबीज टीकों का पर्याप्त स्टॉक अनिवार्य किया गया है।\n\nकेंद्रीय स्तर से संपर्क और प्रशासनिक उपस्थिति\nराहत कार्यों के दौरान यह भी साझा किया गया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सवेरे दूरभाष पर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने फैजुल्लागंज से नैमिष तक प्रस्तावित तटबंध को जलभराव की पुरानी समस्या का ठोस समाधान करार दिया। शासन ने इस परियोजना के लिए तुरंत बजट आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस राहत वितरण कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, क्षेत्रीय विधायक योगेश शुक्ला, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी तथा सिंचाई व पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे।\n\nइसका आप पर असर\nगोमती नदी के किनारे बनने वाले नए सुरक्षा बंधे और घोषित राहत उपायों से लखनऊ और सीतापुर सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को जलभराव से सुरक्षा और आपातकालीन मदद मिलेगी।\n\n• लखनऊ और सीतापुर में: फैजुल्लागंज, बख्शी का तालाब और नैमिष तक के निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को बार-बार आने वाली गोमती की बाढ़ से स्थाई मुक्ति मिलेगी। इसके साथ ही बंधे पर सड़क बनने से तटीय बस्तियों के लोगों को आवागमन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध होगा।\n• भारत में: आपदा प्रबंधन के तहत बुनियादी ढांचे को ग्रीन कॉरिडोर मॉडल से जोड़कर शहरी बाढ़ से निपटने का एक ठोस खाका तैयार हो रहा है। ऐसे दोहरे उपयोग वाले बंधे अन्य नदी तटीय शहरों में भी बाढ़ नियंत्रण और यातायात सुगमता के संयुक्त समाधान के रूप में काम आ सकते हैं।\n• बाढ़ पीड़ितों के लिए: प्रभावित परिवारों को 26 जरूरी दैनिक वस्तुओं के राशन किट और सुरक्षित पक्के आश्रय स्थलों में गर्म भोजन दिया जा रहा है। जिन लोगों के मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं, उन्हें सरकारी आवास योजना के तहत नया पक्का घर और जनहानि पर आश्रितों को ₹4 लाख की तात्कालिक मदद मिलेगी।\n• किसानों और पशुपालकों के लिए: फसलों को पहुंचे नुकसान का जलस्तर घटते ही सरकारी सर्वे किया जाएगा जिसके बाद सीधे बैंक खातों में मुआवजा भेजा जाएगा। पशुओं के लिए सूखा भूसा और चोकर निशुल्क मिल रहा है तथा पशुहानि पर अलग से वित्तीय राहत दी जाएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह जलभराव नेपाल और उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में हुई मूसलाधार बारिश का पानी नदियों के जरिए बहकर मैदानी इलाकों में पहुंचने के कारण उत्पन्न हुआ है।\n\n• ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश: बीते 10 दिनों में राज्य के 50 से अधिक जिलों और नेपाल के पहाड़ी व तराई क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश दर्ज की गई। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर का अतिरिक्त पानी नदियों में उतरकर बहाव के साथ गोमती बेसिन में जमा हो गया।\n• पानी का विलंबित बहाव: ऊपरी तराई क्षेत्रों से लाखों क्यूसेक पानी को नीचे लखनऊ के मैदानी हिस्सों तक पहुंचने में पांच से छह दिन का समय लगा। इस संचित जलप्रवाह के अचानक आ जाने से गोमती का जलस्तर खतरे के स्तर तक बढ़ गया और तटीय बस्तियां डूब गईं।\n• प्राकृतिक तटबंध और निकासी की कमी: फैजुल्लागंज से नैमिष तक नदी के किनारों पर मजबूत पक्के बंधे और शक्तिशाली जल निकासी पंप न होने से नदी का पानी आसानी से आबादी वाले हिस्सों में घुस गया। इसी कमी को दूर करने के लिए अब नए तटबंध और पंपिंग प्रणाली की योजना को मंजूरी दी गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनने वाले तटबंध की मुख्य विशेषता क्या है?\nयह तटबंध ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर बनेगा और इसके ऊपर पक्की सड़क होगी, जिससे यह बाढ़ सुरक्षा के साथ-साथ बारहमासी आवागमन के काम भी आएगा।\n\n2. तटबंध का निर्माण कार्य कब शुरू होगा?\nइस परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है और बजट जारी करके वर्तमान मानसून का मौसम समाप्त होते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।\n\n3. बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत किट में क्या-क्या सामान दिया जा रहा है?\nकिट में 26 वस्तुएं शामिल हैं, जिनमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल, तेल, मसाले, बाल्टी, तिरपाल, माचिस और मोमबत्तियां प्रमुख हैं।\n\n4. बाढ़ में डूबने या आकाशीय बिजली से मृत्यु होने पर कितनी सहायता राशि मिलेगी?\nआपदा में डूबने अथवा आकाशीय बिजली की चपेट में आने से जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को तत्काल ₹4 लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी।\n\n5. मकान क्षतिग्रस्त होने और फसल नुकसान पर प्रशासन क्या कदम उठाएगा?\nमकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर सरकारी आवास योजना से पक्का घर मिलेगा, जबकि फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।\n\n6. राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए क्या विशेष सुविधाएं हैं?\nशिविरों में दोनों समय गर्म खाना, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार, पशुओं को चारा तथा पेट्रोमैक्स और सोलर लाइट की व्यवस्था की गई है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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