गोरखपुर के प्राणी उद्यान में वन्यजीवों की अनोखी अठखेलियां बन रहीं पर्यटकों का मुख्य आकर्षण गोरखपुर चिड़ियाघर में हिप्पो, चीतल, सांभर, हिमालयी गिद्ध और रीसस बंदरों की चंचल गतिविधियां पर्यटकों और बच्चों को खूब लुभा रही हैं। प्राकृतिक माहौल और वन्यजीवों की विविधता को समेटे गोरखपुर चिड़ियाघर इन दिनों आने वाले पर्यटकों के लिए खास अनुभव का केंद्र बना हुआ है। चिड़ियाघर परिसर में पहुंचने वाले लोगों का ध्यान सिर्फ पिंजरों या बाड़ों में मौजूद जानवरों को देखने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इन जीवों की सहज और चंचल गतिविधियां लोगों को घंटों बांधे रखती हैं। कभी कोई वन्यजीव पानी के भीतर ठंडक तलाशते हुए जलक्रीड़ा करता नजर आता है, तो कभी कोई शाकाहारी जीव अपनी फुर्तीली छलांगों से दर्शकों का मन मोह लेता है। विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं की दैनिक हरकतों को इतने करीब से निहारने का अवसर मिलने के कारण यहां आने वाले हर उम्र के लोग काफी समय बिता रहे हैं। पानी में हिप्पो की अठखेलियां और दर्शकों का कौतूहल चिड़ियाघर परिसर के प्रमुख आकर्षणों में हिप्पोपोटामस यानी हिप्पो का बाड़ा सबसे आगे नजर आता है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में हिप्पो का अधिकांश समय पानी के अंदर ही बीतता है, जहां वह डुबकी लगाकर नहाता हुआ दिखाई देता है। अपने भारी-भरकम और विशाल शरीर के साथ जब यह जलीय जीव तालाब के पानी में उतरता है, तो यह दृश्य पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचक बन जाता है। इस नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उसके बाड़े के किनारे देर तक खड़े रहते हैं। परिवार के साथ आने वाले बच्चों के लिए इतने विशालकाय जीव को पानी में अठखेलियां करते देखना एक अद्भुत और यादगार अनुभव साबित हो रहा है। चीतल और सांभर: हिरणों की अलग-अलग प्रजातियों का सम्मोहन चिड़ियाघर के विशाल परिक्षेत्र में हिरणों की कई प्रजातियों को प्राकृतिक परिवेश में विचरण करते देखा जा सकता है। इनमें चीतल अपनी अनुपम सुंदरता के चलते हर किसी का ध्यान तुरंत खींच लेता है। उसके शरीर पर प्राकृतिक रूप से बने सफेद धब्बे उसे अन्य जानवरों के मुकाबले बिल्कुल अलग और आकर्षक रूप प्रदान करते हैं। चीतल कभी एक साथ पूरे झुंड के रूप में टहलते हुए शांति से घास चरते हैं, तो कभी पलक झपकते ही तेज रफ्तार से दौड़ने लगते हैं। उनकी यह बिजली जैसी तेजी और नजाकत भरा अंदाज चिड़ियाघर पहुंचे दर्शकों, खासकर छोटे बच्चों को खूब भाता है। चीतल के साथ-साथ सांभर भी अपनी एक विशिष्ट पहचान के साथ दर्शकों को आकर्षित करता है। कद-काठी और शारीरिक बनावट के लिहाज से सांभर आम हिरणों की तुलना में काफी बड़ा दिखाई पड़ता है। इसका शांत और गंभीर व्यक्तित्व बाड़े में अलग से नजर आता है। दर्शक सांभर को अपने निर्धारित बाड़े में बेहद सधे कदमों से चहलकदमी करते अथवा छायादार स्थान पर आराम फरमाते हुए देख सकते हैं। एक ही परिसर के भीतर हिरणों के इन अलग-अलग रूपों और व्यवहार को आमने-सामने देखना वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक समृद्ध अनुभव बन जाता है। विशालकाय हिमालयी गिद्ध और चंचल रीसस बंदर पक्षी वर्ग के बाड़ों की बात करें तो हिमालयी गिद्ध यहां आने वाले हर पर्यटक को अचंभित करता है। शारीरिक आकार में यह पक्षी काफी बड़ा और भारी दिखाई देता है। जब यह अपने बड़े पंखों को फैलाकर एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर बढ़ता है, तो इसकी विशालता साफ झलकती है। इसके विशालकाय शरीर और पंखों के फैलाव को देखकर लोग कदम रोककर इसे निहारने लगते हैं। पक्षी प्रेमियों और बच्चों के लिए इस दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध को इतने नजदीक से देखना किसी खास रोमांच से कम नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, रीसस बंदरों का बाड़ा चिड़ियाघर में सबसे ज्यादा हलचल और ठहाकों वाला स्थान बना रहता है। बंदरों का यह समूह लगातार एक डाल से दूसरी डाल पर कूदता और एक कोने से दूसरे कोने तक तेजी से भागता दिखाई देता है। इन बंदरों की नटखट और चंचल गतिविधियां दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती हैं। यही कारण है कि बंदरों के बाड़े के सामने दर्शकों की खासी भीड़ जमा रहती है और लोग उनकी हरकतों को बड़ी दिलचस्पी से देखते रहते हैं। एमू की बनावट, अजगर का रोमांच और मांसाहारी जीवों की गुफाएं बाड़ों के क्रम में थोड़ा आगे बढ़ने पर पर्यटकों को एमू देखने को मिलता है। अपने लंबे कद, अनोखी शारीरिक बनावट और सामान्य पक्षियों से एकदम जुदा चाल-ढाल के कारण एमू हर किसी को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। बच्चे इसे देखकर काफी उत्साहित होते हैं और देर तक उसके बाड़े के सामने खड़े होकर उसकी चाल को देखते रहते हैं। इसके अलावा, चिड़ियाघर में मौजूद भारतीय अजगर भी पर्यटकों के बीच कौतूहल जगाता है। इसका लंबा और भारी-भरकम शरीर देखकर लोग एक ओर जहां रोमांच महसूस करते हैं, वहीं मन में हल्का सा डर भी पैदा होता है। थोड़ी और दूरी पर हाथों से गढ़ी गई विशेष गुफानुमा संरचनाएं नजर आती हैं, जिन्हें विशेष रूप से शेर और चीते के रहने के लिए तैयार किया गया है। जब शेर और चीते इन कृत्रिम गुफाओं से बाहर निकलकर बाड़े में कदम रखते हैं, तो दर्शकों को उनकी राजसी झलक देखने को मिलती है। विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों की यह मौजूदगी गोरखपुर चिड़ियाघर के भ्रमण को एक संपूर्ण और जीवंत अनुभव में बदल देती है। इसका आप पर असर गोरखपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों की विविध प्रजातियों और उनके रखरखाव से क्षेत्रीय पर्यटन और प्रकृति शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। • उत्तर प्रदेश में: गोरखपुर और आसपास के जिलों के निवासियों के लिए यह चिड़ियाघर एक सुलभ सप्ताहांत पर्यटन स्थल बन चुका है। परिवार बिना दूर की यात्रा किए सुरक्षित वातावरण में दुर्लभ जीवों को करीब से देख सकते हैं। • भारत में: शहरी आबादी, विशेषकर स्कूली बच्चों में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ रही है। विभिन्न भारतीय प्रजातियों को एक स्थान पर देखना प्रकृति के प्रति व्यावहारिक समझ विकसित करता है। • पर्यटकों के लिए: बाड़ों में जानवरों की प्राकृतिक गतिविधियां देखने के लिए लोगों को सुबह या धूप कम होने वाले समय जाने की सलाह दी जाती है। इससे हिप्पो, हिरण और मांसाहारी जीवों को सक्रिय अवस्था में देखने की संभावना बढ़ जाती है। • स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर: आगंतुकों की बढ़ती संख्या से शहर के परिवहन, खानपान और पर्यटन से जुड़े छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ पहुंचता है। टिकटों से होने वाली आय चिड़ियाघर में जानवरों की बेहतर देखभाल और सुविधाओं के विस्तार में मदद करती है। ऐसा क्यों हुआ चिड़ियाघर में वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों को प्राकृतिक पर्यावास के अनुरूप बाड़े प्रदान किए गए हैं, जिससे वे अपनी सहज प्रवृत्तियों को प्रदर्शित कर पाते हैं। • अनुकूल आवास व्यवस्था: जानवरों के बाड़ों को उनके मूल प्राकृतिक परिवेश के अनुसार तैयार किया गया है, जिसमें पानी के कुंड और छायादार क्षेत्र शामिल हैं। इसी कारण हिप्पो जैसे भारी जीव गर्मी से बचने के लिए पानी में सहजता से स्नान करते हैं। • प्रजाति-विशिष्ट संरचनाएं: शेर और चीते जैसे शिकारी जानवरों के लिए मानव-निर्मित गुफाएं तैयार की गई हैं। यह संरचना उन्हें प्राकृतिक आश्रय जैसा अहसास देती है और पर्यटकों को उनकी स्वाभाविक गतिविधियों को देखने का अवसर मिलता है। • संरक्षण और सार्वजनिक प्रदर्शन: दुर्लभ पक्षियों जैसे हिमालयी गिद्ध और सरीसृपों को सुरक्षित और पर्याप्त जगह दी गई है। यह व्यवस्था जानवरों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए आगंतुकों को उनकी शारीरिक बनावट को करीब से समझने की सुविधा देती है। सवाल-जवाब 1. गोरखपुर चिड़ियाघर में हिप्पो पर्यटकों को क्यों आकर्षित करता है? हिप्पो अपने विशाल शरीर और गर्मी के मौसम में पानी में डुबकी लगाकर नहाने की चंचल हरकतों के कारण दर्शकों का ध्यान खींचता है। 2. चिड़ियाघर में चीतल की मुख्य पहचान क्या है? चीतल के शरीर पर बने सफेद धब्बे उसे अन्य हिरणों से अलग और सुंदर बनाते हैं, और वह झुंड में तेज दौड़ लगाता है। 3. सांभर और सामान्य हिरण में क्या अंतर दिखता है? सांभर सामान्य हिरणों की तुलना में आकार में काफी बड़ा होता है और बाड़े में शांत व सधे कदमों से विचरण करता है। 4. शेर और चीते के लिए चिड़ियाघर में क्या खास व्यवस्था की गई है? शेर और चीते के लिए हाथों से विशेष गुफानुमा संरचनाएं तैयार की गई हैं, जहां से वे बाहर निकलकर विचरण करते हैं। 5. हिमालयी गिद्ध को देखकर दर्शक क्यों रुक जाते हैं? हिमालयी गिद्ध का विशालकाय शरीर और बड़े पंख दर्शकों को बेहद अचंभित और आकर्षित करते हैं। https://trendkia.com/uttar-pradesh/gorakhpur-ke-prani-udyana-men-vanyajivon-ki-anokhi-athakheliyan-bana-rahin-paryatakon-ka-mukhya-akarshana-31427 TrendKia — Har trend, sabse pehle.