# गोरखपुर नगर निगम की जनसुनवाई में उमड़ी फरियादियों की भीड़, साल भर से सड़क और नाली के सुधार का इंतजार

> गोरखपुर नगर निगम में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे नागरिकों ने बुनियादी सुविधाओं और हाउस टैक्स से जुड़ी गंभीर विसंगतियों को लेकर अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/gorakhpur-nagara-nigama-ki-janasunavai-men-umari-phariyadiyon-ki-bhira-sala-bhara-se-saraka-aura-nali-ke-sudhara-ka-intajara-44694 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोरखपुर नगर निगम, जनसुनवाई, सड़क समस्या, नाली निर्माण, हाउस टैक्स, नगर आयुक्त, बिलंदपुर

गोरखपुर शहर में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विकास और रखरखाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रगति के दावे किए जाते रहे हैं। आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को सीधे तौर पर सुनने और उनके त्वरित निस्तारण के मकसद से नगर निगम परिसर में प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है। इस साप्ताहिक मंच पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नगर आयुक्त के साथ अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहते हैं। वे नागरिकों के प्रार्थना पत्रों की समीक्षा करते हैं और संबंधित विभाग के कर्मचारियों को मौके पर ही कार्रवाई के दिशा-निर्देश जारी करते हैं।

## साप्ताहिक मंच पर उमड़ी शहरवासियों की भीड़
इस साप्ताहिक समाधान शिविर में शहर के अलग-अलग वार्डों और मोहल्लों से कई नागरिक अपनी निजी व सार्वजनिक समस्याएं लेकर पहुंचे। सभागार में एकत्र हुए लोगों में से कुछ को विभागीय अधिकारियों की ओर से त्वरित निस्तारण का आश्वासन प्राप्त हुआ, जबकि कई ऐसे नागरिक भी उपस्थित थे जो कई महीनों से लगातार नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। प्रशासनिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच का यह अंतर लोगों की बातचीत में साफ तौर पर सामने आया।

## बांसगांव कॉलोनी में साल भर से सड़क व नाली का संकट
बिलंदपुर स्थित बांसगांव कॉलोनी की निवासी ज्योत्सना मिश्रा अपनी क्षेत्रीय समस्या को लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब एक साल से अपनी बस्ती की टूटी सड़क और जल निकासी के लिए जरूरी नाली के निर्माण को लेकर लगातार नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रही हैं। ज्योत्सना मिश्रा के अनुसार, उन्होंने पूर्व में भी कई बार अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं और हर बार उन्हें निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने का मौखिक भरोसा दिया गया, किंतु धरातल पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

सड़क और नाली की यह बदहाली पूरी बांसगांव कॉलोनी के निवासियों के लिए रोजमर्रा की भारी असुविधा का कारण बनी हुई है। बारिश और सामान्य दिनों में भी जलजमाव तथा गड्ढों से आवागमन प्रभावित रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम से बार-बार आश्वासन की औपचारिकता तो पूरी कर दी जाती है, मगर जमीनी स्तर पर विकास कार्य शुरू होने का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

## हाउस टैक्स भुगतान के बावजूद लगातार आ रहे नोटिस
जनसुनवाई में केवल निर्माण संबंधी कार्य ही नहीं, बल्कि राजस्व और कर प्रणाली से जुड़ी प्रशासनिक गलतियों के मामले भी सामने आए। जितेंद्र नामक एक स्थानीय नागरिक नगर निगम के कर विभाग की लापरवाही को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे। उन्होंने बताया कि अपने आवासीय भवन का हाउस टैक्स पूरी तरह जमा कर देने के बावजूद उन्हें लगातार टैक्स जमा करने के अनुस्मारक यानी रिमाइंडर नोटिस भेजे जा रहे हैं।

जितेंद्र ने स्पष्ट किया कि इस परेशानी को लेकर यह उनकी नगर निगम कार्यालय में पहली उपस्थिति थी। वह मुख्य रूप से यह समझने आए थे कि जब बैंक अथवा निगम के रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज हो चुका है, तो फिर से बकाया दर्शाते हुए रिमाइंडर क्यों जारी किया जा रहा है। बार-बार आ रहे इन नोटिसों के कारण उन्हें बेवजह मानसिक परेशानी और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है।

## शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर उठते सवाल
नगर निगम द्वारा प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली यह जनसुनवाई स्थानीय नागरिकों को अपनी बात सीधे उच्चाधिकारियों के समक्ष रखने का एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराती है। नगर आयुक्त की मौजूदगी में शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लिया जाता है और संबंधित पटल को निस्तारण का आदेश दिया जाता है। इसके बावजूद, महीनों से अटके हुए मामलों की मौजूदगी इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जब नागरिक एक साल तक लगातार चक्कर काटने के बाद भी बुनियादी समस्याओं के हल के लिए कतार में खड़े दिखते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि शिकायतों के निस्तारण की वास्तविक निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। केवल निर्देश जारी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय समयसीमा के भीतर कितने प्रार्थना पत्रों का वास्तविक समाधान जमीनी स्तर पर हो पाया, इसकी निरंतर समीक्षा ही इस व्यवस्था को सफल बना सकती है।

## इसका आप पर असर
गोरखपुर नगर निगम की जनसुनवाई व्यवस्था से आम नागरिकों को अपनी नागरिक समस्याओं और कर विसंगतियों को सीधे अधिकारियों के समक्ष रखने का स्पष्ट अवसर मिलता है।

- **भारत में:** स्थानीय नगर निकायों की कार्यप्रणाली अन्य शहरों के निवासियों को यह सिखाती है कि बुनियादी नागरिक अधिकारों के लिए आधिकारिक जनसुनवाई मंचों का उपयोग कैसे किया जाए। यदि तय समयसीमा में कार्रवाई नहीं होती है, तो नागरिक उच्च अधिकारियों के समक्ष निगरानी प्रणाली की मांग उठा सकते हैं।
- **गोरखपुर में:** स्थानीय निवासी प्रत्येक मंगलवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। सड़क, जलभराव और हाउस टैक्स के गलत बिलों के निस्तारण के लिए अपने सभी पुराने भुगतान रसीद और आवेदन पत्र साथ लेकर जाना सुनिश्चित करें।
- **करदाताओं के लिए:** यदि हाउस टैक्स जमा करने के बाद भी गलत मांग पत्र या रिमाइंडर प्राप्त हो रहे हैं, तो तुरंत राजस्व विभाग में संपर्क करें। अपनी भुगतान रसीद दिखाकर रिकॉर्ड को अपडेट करवाना आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का दंड या भ्रम न रहे।
- **वार्ड निवासियों के लिए:** सड़क और नाली जैसी बुनियादी दिक्कतों के समाधान हेतु केवल मौखिक आश्वासन पर निर्भर न रहें। अपने प्रार्थना पत्र की लिखित पावती सुरक्षित रखें ताकि जनसुनवाई के बाद भी कार्य की प्रगति पर निरंतर नजर रखी जा सके।

## ऐसा क्यों हुआ
गोरखपुर नगर निगम की जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों का मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर बुनियादी विकास कार्यों में देरी और राजस्व सॉफ्टवेयर के डेटा मिलान में तकनीकी या प्रशासनिक कमियां हैं।

- **सीधे कारण:** बांसगांव कॉलोनी में नाली और सड़क निर्माण का काम पिछले एक वर्ष से लंबित रहने के कारण स्थानीय लोग सीधे नगर आयुक्त की जनसुनवाई में पहुंचे। वहीं कर विभाग के रिकॉर्ड में अद्यतन न होने के कारण पहले से भुगतान किए जा चुके मकानों पर भी बार-बार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं।
- **प्रशासनिक परिस्थितियां:** नगर निगम द्वारा हर मंगलवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक विशेष जनसुनवाई आयोजित की जाती है ताकि लोग सीधे अधिकारियों से मिल सकें। निचले स्तर पर शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और विभागीय निगरानी की कमी के चलते कई नागरिकों को बार-बार मुख्यालय आना पड़ता है।
- **पूर्व उदाहरण और परिणाम:** फरियादियों को बैठकों में अधिकारियों द्वारा बार-बार समाधान का आश्वासन दिया जाता रहा है, किंतु जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होने में लंबा समय लग रहा है। इससे नागरिकों में व्यवस्था के प्रति असंतोष बढ़ता है और लंबित मामलों की संख्या में इजाफा होता है।
- **आगे क्या होने की संभावना है:** नगर आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद संबंधित विभागों से तय समय में कार्य पूरा करने और टैक्स रिकॉर्ड को सही करने की अपेक्षा की जाती है। यदि नियमित निगरानी नहीं की गई, तो ऐसे मामलों का दोबारा जनसुनवाई में पहुंचना स्वाभाविक है।

## सवाल-जवाब

### 1. गोरखपुर नगर निगम में जनसुनवाई किस दिन और किस समय आयोजित होती है?
नगर निगम में जनसुनवाई प्रत्येक मंगलवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित की जाती है।

### 2. जनसुनवाई में नागरिकों की शिकायतें कौन सुनता है?
जनसुनवाई में नगर आयुक्त के साथ नगर निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं।

### 3. बांसगांव कॉलोनी की ज्योत्सना मिश्रा की क्या समस्या है?
वह पिछले करीब एक साल से अपनी कॉलोनी में टूटी सड़क और नाली के निर्माण की समस्या को लेकर नगर निगम के चक्कर काट रही हैं।

### 4. जितेंद्र ने जनसुनवाई में किस बात की शिकायत दर्ज कराई?
जितेंद्र ने शिकायत की कि हाउस टैक्स जमा करने के बावजूद उन्हें बार-बार टैक्स जमा करने के रिमाइंडर नोटिस भेजे जा रहे हैं।

### 5. क्या जनसुनवाई में पहुंचने वाले सभी लोगों की समस्याओं का समाधान तुरंत हो रहा है?
कुछ लोगों को जल्द समाधान का आश्वासन मिलता है, जबकि कई नागरिक लंबे समय से अपनी लंबित समस्याओं के हल का इंतजार कर रहे हैं।

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