# ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक में 10.24 करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने संभाली पड़ताल

> ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा में ग्राहकों की जमा पूंजी में भारी हेराफेरी का खुलासा होने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। महिला कर्मी पर साथी अफसरों के लॉगिन क्रेडेंशियल चुराकर रकम हड़पने और फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने का संगीन आरोप है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/greater-noida-ke-punjab-national-bank-men-10-24-karora-rupaye-ki-vittiya-herapheri-cbi-ne-snbhali-paratala-53498 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीएनबी बैंक घोटाला, ग्रेटर नोएडा, सीबीआई जांच, बैंक धोखाधड़ी, कोर बैंकिंग फ्रॉड, पंजाब नेशनल बैंक

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थित ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई इलाके की पंजाब नेशनल बैंक शाखा एक बड़े आर्थिक अपराध के केंद्र में आ गई है। बैंक उपभोक्ताओं के बचत खातों और सावधि जमा (एफडी) से बिना किसी प्राधिकार के करोड़ों रुपये निकाले जाने की शिकायत मिलने के उपरांत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आंतरिक लेखापरीक्षा और प्राथमिक पड़ताल के दौरान सामने आया कि लगभग तीन साल की लंबी अवधि तक यह अवैध वित्तीय खेल बेरोकटोक चलता रहा, जिसमें अब तक 10.24 करोड़ रुपये की अनाधिकृत निकासी का हिसाब मिल चुका है।

## पासबुक एंट्री कराने पहुंची खाताधारक ने पकड़ा संदिग्ध लेनदेन
इस पूरे घोटाले की परतें उस वक्त खुलीं जब संगीता नाम की एक नियमित ग्राहक अपने परिजनों के साथ सेक्टर पाई शाखा में अपनी पासबुक को अद्यतन करवाने पहुंची थीं। उनके साथ उनके पति तथा बेटी भी बैंक परिसर में उपस्थित थीं। जब प्रविष्टियां दर्ज हुईं, तो उन्होंने देखा कि 16 सितंबर 2026 की तारीख में उनके खाते से तीन ऐसे बड़े लेन-देन किए गए थे, जिनकी उन्हें लेशमात्र भी भनक नहीं थी। जब उन्होंने इस अनपेक्षित कटौती पर आपत्ति दर्ज कराई और उच्चाधिकारियों से मिलने का प्रयास किया, तब शाखा प्रबंधक अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थीं।

इसी बीच शाखा में कार्यरत महिला कर्मी दीपांशी ने मामले में हस्तक्षेप किया और पीड़ित महिला को यह समझाने की चेष्टा की कि यह निकासी वैध प्रक्रिया का हिस्सा है। बाद में जब घटना की जानकारी शाखा प्रबंधक तक पहुंची, तो उन्होंने उक्त महिला कर्मी से कड़ी पूछताछ की। दीपांशी ने अधिकारियों के समक्ष यह दलील दी कि संबंधित महिला ग्राहक ने अपने जीवनसाथी से दूरभाष पर परामर्श करने के बाद किसी अचल संपत्ति में पूंजी निवेश करने के इरादे से आशुतोष पाठक नामक शख्स के बैंक खाते में राशि अंतरित करने की बात कही थी। हालांकि, बैंक प्रशासन ने जब इस अंतरण से जुड़े आवश्यक वाउचर, चेक या अधिकृत प्रपत्रों की पड़ताल की, तो शाखा के भौतिक रिकॉर्ड से वे दस्तावेज पूरी तरह नदारद पाए गए। किसी भी प्रकार का दस्तावेजी साक्ष्य न मिलने पर अधिकारियों का संदेह गहरा गया।

## पूछताछ में सामने आया आंतरिक प्रणाली के दुरुपयोग का सच
प्रबंधन की तरफ से हुई गहन आंतरिक पूछताछ के दौरान दीपांशी ने अंततः स्वीकार किया कि उसने आशुतोष पाठक के निर्देश पर खाताधारकों की सहमति के बिना ही ये वित्तीय अंतरण किए थे। उसने यह भी उजागर किया कि उसने अपनी इस गतिविधि को अंजाम देने के लिए शाखा के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बैंकिंग क्रेडेंशियल हासिल किए थे। पकड़े जाने के भय से और अधिकारियों व ग्राहकों की वैध अनुमति न होने के कारण उसने अंतरण से संबंधित लेन-देन वाउचरों को नष्ट कर दिया था ताकि कोई कागजी प्रमाण शेष न रहे।

इसके तुरंत बाद आशुतोष पाठक के नाम से संचालित खाते का इतिहास खंगाला गया। बैंक रिकॉर्ड से यह तथ्य भी सामने आया कि उक्त खाता भी स्वयं दीपांशी के माध्यम से ही खोला गया था। खातों के विस्तृत विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि कई जमाकर्ताओं के खातों से उड़ाई गई धनराशि को सीधे आशुतोष पाठक के खाते में भेजा जाता था। इसके अतिरिक्त, रकम को विभिन्न रास्तों से घुमाने के लिए प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी तथा सरोज देवी के खातों का इस्तेमाल बिचौलिए खातों के रूप में किया गया, जहां से बाद में भारी नकदी भी आहरित की गई।

## छह बैंक अधिकारियों के लॉगिन आईडी का अनाधिकृत इस्तेमाल
शाखा की कोर बैंकिंग प्रणाली (सीबीएस) के तकनीकी विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ कि दीपांशी ने संस्थान के छह अलग-अलग अधिकारियों के यूजर आईडी तथा पासवर्ड का अनैतिक प्रयोग किया था। इनमें वरिष्ठ शाखा प्रबंधक निशा तिर्की, वरिष्ठ ग्राहक सेवा सहयोगी संदीप प्रकाश शर्मा, ग्राहक सेवा सहयोगी मीनाक्षी, सतीश कुमार, संबंध प्रबंधक शैलेंद्र कुमार और अधिकारी लवली जैन के आधिकारिक लॉगिन क्रेडेंशियल शामिल पाए गए। सिस्टम ऑडिट लॉग्स से विभिन्न अंतरालों पर इन अधिकारियों की आईडी से कई अनाधिकृत लेन-देन संसाधित होने के पुख्ता संकेत मिले हैं। हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल में जुटी है कि इन अधिकारियों को अपने क्रेडेंशियल के इस दुरुपयोग की पूर्व सूचना थी अथवा उनके क्रेडेंशियल को उनकी अनभिज्ञता में गुप्त रूप से हासिल किया गया था।

## एसएमएस अलर्ट बंद कर एफडी पर लगाया गया चूना
ठगी के इस सुनियोजित तंत्र को लंबे समय तक छिपाए रखने के लिए आरोपी पक्ष ने अत्यंत शातिराना हथकंडे अपनाए। ग्राहकों के पंजीकृत बैंक खातों में लेन-देन से संबंधित जो स्वचालित मोबाइल अलर्ट संदेश जाते हैं, उन्हें या तो निष्क्रिय कर दिया गया अथवा मोबाइल नंबरों में बदलाव कर दिया गया। इस तकनीकी छेड़छाड़ के चलते जब भी खातों से रकम निकाली जाती, खाताधारकों को उसका कोई तात्कालिक संदेश प्राप्त नहीं होता था, जिससे धोखाधड़ी महीनों तक दबी रही।

इसके साथ ही ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट को भी निशाना बनाया गया। प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ कि कई निर्दोष ग्राहकों की सावधि जमा रसीदों में आशुतोष पाठक तथा अन्य संदिग्ध व्यक्तियों को अवैध तरीके से संयुक्त खाताधारक के रूप में पंजीकृत कर दिया गया। इसके पश्चात एफडी की परिपक्वता या ब्याज से जुड़ी क्रेडिट प्राथमिकताओं को बदलकर इन सावधि जमाओं को समय से पहले ही तुड़वा दिया गया। इस प्रकार समयपूर्व बंद की गई एफडी से प्राप्त समूची धनराशि को संदिग्धों से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

## 10.24 करोड़ की अनधिकृत निकासी और संदिग्ध 49 एफडी
बैंक द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि अब तक हुई जांच में विभिन्न ग्राहकों के खातों से तकरीबन 10.24 करोड़ रुपये की गैर-कानूनी निकासी प्रमाणित हुई है। प्रबंधन के अनुसार, यह पूरी साजिश दीपांशी, आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और कुछ अन्य अज्ञात सहयोगियों द्वारा रची गई थी, जो विगत तीन वर्षों से निरंतर सक्रिय थी। चूंकि अभी भी खातों का पूर्ण समाधान और ऑडिट जारी है, इसलिए प्रभावित खाताधारकों और लाभार्थियों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है, जिससे गबन का यह आंकड़ा आगे बढ़ सकता है।

इसके अतिरिक्त, बैंक ने केंद्रीय एजेंसी को 49 ऐसी संदिग्ध एफडी की सूची भी सौंपी है, जिन्हें समय से पूर्व बंद करके धनराशि को अन्यत्र भेजा गया था। इस विशिष्ट सूची में कुल 7023.77 लाख रुपये की राशि का उल्लेख है। यह रकम शिकायत में दर्शाए गए 10.24 करोड़ रुपये के मूल आंकड़े से भिन्न है। दोनों आंकड़ों के बीच का सटीक वित्तीय संबंध और वास्तविक वित्तीय नुकसान का आकलन अब जांच एजेंसी के समक्ष मुख्य विषय है।

## पुरानी जान-पहचान और कर्ज के चक्रव्यूह का दावा
सक्षम प्राधिकारी के अनुमति आदेश में दीपांशी द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को दिए गए औपचारिक बयान का विवरण भी दर्ज है। इसके अनुसार, आशुतोष पाठक और दीपांशी के बीच पूर्व परिचय था। दीपांशी का आरोप है कि आशुतोष ने पूर्व में उसके पिता के साथ करीब 15 से 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। तदुपरांत, उस डूबी हुई पूंजी को वापस कराने का झांसा देकर आशुतोष ने दीपांशी को अतिरिक्त निवेश करने के लिए राजी किया। इस झांसे में आकर दीपांशी ने स्वयं व्यक्तिगत ऋण लेकर लगभग 4 से 5 लाख रुपये का और निवेश कर दिया था।

आरोपों के मुताबिक, इसके बाद वह ग्राहकों के खातों में हेराफेरी के इस खतरनाक दलदल में उतरती चली गई और साथी कर्मचारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल कर अवैध अंतरण करने लगी। बहरहाल, इस पूरे प्रकरण में संलिप्त प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जवाबदेही, वास्तविक मंशा और वित्तीय संलिप्तता का पूरा सच डिजिटल फोरेंसिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

## सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने शुरू की जांच
पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडेय द्वारा 23 अक्टूबर 2026 को गाजियाबाद स्थित सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच में इस संबंध में विस्तृत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। बैंक प्रबंधन ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान 17ए के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति भी प्राप्त की थी। इसके उपरांत, 29 अक्टूबर 2026 को सीबीआई ने नियमित मामला (एफआईआर संख्या RC1202026A0013) पंजीकृत किया।

इस मामले में नामजद आरोपी दीपांशी, आशुतोष पाठक सहित अन्य निजी व्यक्तियों और अज्ञात लोक सेवकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 316, 318 और 344 के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 43 व 66 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) व 13(2) के तहत गंभीर आरोप तय किए गए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस विस्तृत जांच की कमान पुलिस उपाधीक्षक डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी है। बैंक ने सभी तकनीकी लॉग्स, कंप्यूटर दस्तावेज और भौतिक रिकॉर्ड जांचकर्ताओं को सुपुर्द करने की प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि आंतरिक स्तर पर भी कर्मचारियों की विभागीय जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

## इसका आप पर असर
इस बड़े बैंकिंग घोटाले के उजागर होने के बाद सामान्य खाताधारकों के लिए अपनी जमा पूंजी की नियमित निगरानी करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

- **भारत में खाताधारकों के लिए:** यह मामला दर्शाता है कि केवल बैंक में पैसा जमा कर निश्चिंत हो जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित रूप से खातों का मिलान जरूरी है। सभी नागरिकों को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाले एसएमएस अलर्ट की समय-समय पर जांच करनी चाहिए और बिना सूचना संदेश बंद होने पर तत्काल शाखा से संपर्क करना चाहिए।
- **ग्रेटर नोएडा में उपभोक्ताओं के लिए:** सेक्टर पाई शाखा और आसपास के पीएनबी ग्राहकों को अपनी पासबुक और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों का तुरंत शाखा जाकर भौतिक मिलान करा लेना चाहिए। यदि पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी के खाते से कोई अनधिकृत लेन-देन हुआ है, तो वे तुरंत लिखित शिकायत दर्ज कराकर अपनी राशि की पुनर्प्राप्ति का दावा कर सकते हैं।
- **एफडी धारकों के लिए:** वरिष्ठ नागरिकों और लंबी अवधि के जमाकर्ताओं को अपनी सावधि जमाओं के नॉमिनेशन और संयुक्त खाता विवरणी की नियमित पुष्टि करते रहनी चाहिए। किसी भी अनधिकृत संयुक्त नाम या समयपूर्व परिपक्वता परिवर्तन का पता चलते ही बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय को सूचित करना चाहिए।
- **डिजिटल सुरक्षा के लिए:** ग्राहकों को अपनी नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से मासिक स्टेटमेंट डाउनलोड कर संदिग्ध कटौतियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। किसी भी गैर-पहचाने गए लाभार्थी के जुड़ने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराकर खाता ब्लॉक कराना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह धोखाधड़ी आंतरिक सुरक्षा खामियों, लॉगिन क्रेडेंशियल के अनुचित साझाकरण और ग्राहक सतर्कता की कमी के चलते घटित हुई। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर इसके प्रमुख कारण सामने आए हैं।

- **सीबीएस क्रेडेंशियल का दुरुपयोग:** बैंक शाखा की महिला कर्मी ने अन्य छह वरिष्ठ अधिकारियों के कोर बैंकिंग यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल कर बिना किसी बाधा के लेन-देन को अधिकृत किया। आंतरिक स्तर पर लॉगिन क्रेडेंशियल की गोपनीयता बनाए रखने में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे एक ही कर्मी विभिन्न स्तरों की स्वीकृतियां स्वयं देती रही।
- **कागजी वाउचरों का विलोपन:** लेन-देन के समर्थन में लगने वाले आधिकारिक भौतिक वाउचर और अनुमति पत्रों को सिस्टम में दर्ज करने के बाद नष्ट कर दिया गया। शाखा के दैनिक वाउचर मिलान और ऑडिटिंग प्रक्रिया में समय रहते इस विसंगति को न पकड़ पाना भी एक बड़ी प्रशासनिक विफलता रहा।
- **अलर्ट सिस्टम में छेड़छाड़:** खाताधारकों के बैंक रिकॉर्ड से मोबाइल नंबर बदलकर या अलर्ट बंद कर उनके खातों से पैसे निकाले गए, जिससे पीड़ितों को निकासी की भनक तक नहीं लगी। इस तकनीकी हेरफेर ने अवैध अंतरणों को लगभग तीन वर्षों तक पूरी तरह गुप्त बनाए रखा।
- **कथित निजी दबाव और जालसाजी:** आरोपी कर्मी के अनुसार, मुख्य आरोपी आशुतोष पाठक ने उसके परिवार के साथ पहले हुई ठगी की रकम वापस दिलाने का झांसा देकर उसे इस वित्तीय चक्रव्यूह में धकेला। हालांकि, इन दावों की सत्यता और पूरे षड्यंत्र के वास्तविक कारणों की पुष्टि सीबीआई की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. ग्रेटर नोएडा के किस बैंक में यह धोखाधड़ी सामने आई है?
यह मामला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में सामने आया है, जहां ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।

### 2. इस घोटाले में कितनी धनराशि के गबन का आरोप है?
प्रारंभिक जांच के अनुसार लगभग 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी का मामला दर्ज किया गया है, जबकि 49 संदिग्ध एफडी से जुड़े 7023.77 लाख रुपये के रिकॉर्ड की भी जांच चल रही है।

### 3. इस धोखाधड़ी का खुलासा कैसे हुआ?
संगीता नाम की एक महिला ग्राहक जब अपने परिवार के साथ पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं, तो उन्हें अपने खाते से हुए तीन अज्ञात लेन-देन का पता चला जिससे मामला उजागर हुआ।

### 4. आरोपी महिला कर्मचारी का क्या नाम है और उस पर क्या आरोप हैं?
बैंक की कर्मचारी दीपांशी पर आरोप है कि उसने अन्य अधिकारियों के यूजर आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर ग्राहकों के पैसे अवैध रूप से अन्य खातों में ट्रांसफर किए।

### 5. किन-किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है?
सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 316, 318, 344, आईटी एक्ट की धारा 43 व 66 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) व 13(2) के तहत केस दर्ज किया है।

### 6. मामले की जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है?
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, गाजियाबाद ने इस मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी है।

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