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  "type": "article",
  "title": "ग्रेटर नोएडा की पंजाब नेशनल बैंक शाखा में 10.24 करोड़ रुपये का गबन, सीबीआई के हत्थे चढ़े दो आरोपी",
  "summary": "ग्रेटर नोएडा स्थित पीएनबी की पाई शाखा में ग्राहकों के खातों और एफडी से 10.24 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में सीबीआई ने एक महिला कर्मचारी समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है।",
  "content": "ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक की पाई शाखा में खाताधारकों के पैसों में सेंधमारी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने ग्राहकों की जमा पूंजी और फिक्स्ड डिपॉजिट से 10 करोड़ 24 लाख रुपये निकालने के आरोप में एक महिला बैंक कर्मी समेत दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में बैंक की पाई शाखा में तैनात महिला ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी और एक अन्य निजी व्यक्ति शामिल है। इस नेटवर्क में कुछ अज्ञात लोगों की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है।\n\nसीबीएस यूजर आईडी का दुरुपयोग कर की गई अवैध निकासी\nशुरुआती पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी महिला कर्मचारी दीपांशी ने बीते तीन सालों के दौरान बैंक के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) यूजर आईडी का अनधिकृत उपयोग किया। इसी गुप्त प्रणाली का गलत फायदा उठाकर ग्राहकों के नियमित बचत खातों के अलावा उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) योजनाओं से भी भारी रकम बिना किसी वैध अनुमति के निकाली जाती रही। यह पूरी अवैध गतिविधि निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात सहयोगियों के साथ मिलकर अंजाम दी जा रही थी।\n\nखाताधारक की शिकायत के बाद हरकत में आई जांच एजेंसी\nइस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 16 सितंबर 2026 को एक ग्राहक ने अपने खाते से हुए संदिग्ध डेबिट लेन-देन को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। बैंक में जमा अपनी रकम में असामान्य कटौती देखकर ग्राहक ने आपत्ति जताई, जिसके बाद आंतरिक पड़ताल में करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आई।\n\nगाजियाबाद में दर्ज हुई एफआईआर, पुणे अदालत से मिली ट्रांजिट रिमांड\nमामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (गाजियाबाद) ने 29 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज करके जांच अपने हाथ में ली। जांच के सिलसिले में पुणे की विशेष सीबीआई अदालत से निजी आरोपी की ट्रांजिट रिमांड भी मंजूर कराई गई है। जांच अधिकारी अब इस पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने और निकाली गई कुल 10.24 करोड़ रुपये की धनराशि के अंतिम ठिकाने का पता लगाने में जुटे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nबैंक के अंदरूनी कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी खाताधारकों के लिए नियमित अलर्ट और स्टेटमेंट जांचने की अहमियत को रेखांकित करती है।\n\n• भारत में: बैंक ग्राहकों को अपने बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में होने वाले किसी भी अनपेक्षित लेन-देन पर फौरन नजर रखनी चाहिए। एसएमएस और ईमेल नोटिफिकेशन सक्रिय रखकर किसी भी संदिग्ध निकासी की सूचना तत्काल अपनी शाखा को दें।\n• ग्रेटर नोएडा में: पीएनबी पाई शाखा से जुड़े खाताधारकों को अपने पिछले वित्तीय लेन-देन और फिक्स्ड डिपॉजिट स्टेटमेंट की दोबारा पुष्टि कर लेनी चाहिए। यदि आपके खाते में कोई संदिग्ध डेबिट दिखता है, तो तुरंत बैंक प्रबंधन या जांच अधिकारियों से संपर्क करें।\n• अभिगम्यता और सुरक्षा: बैंक अपने कर्मचारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल और सीबीएस आईडी सत्यापन को लेकर आंतरिक सुरक्षा ऑडिट कड़े कर सकते हैं। इससे सामान्य ग्राहकों के शाखा स्तर पर होने वाले सत्यापन प्रक्रियाओं में अस्थायी सतर्कता देखने को मिल सकती है।\n• एफडी सुरक्षा: फिक्स्ड डिपॉजिट रखने वाले ग्राहकों को समय-समय पर अपने रिन्यूअल और ब्याज जमा होने के रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए। समय पूर्व निकासी या किसी भी छेड़छाड़ का पता चलते ही लिखित शिकायत दर्ज कराएं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह धोखाधड़ी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने और सहकर्मियों के लॉगिन क्रेडेंशियल का अनाधिकृत लाभ उठाने के कारण संभव हुई।\n\n• सीबीएस आईडी का अनाधिकृत इस्तेमाल: आरोपी बैंक कर्मी ने पिछले तीन वर्षों के दौरान शाखा के अन्य अधिकारियों के सीबीएस क्रेडेंशियल का गलत उपयोग किया। इस डिजिटल पहुंच ने उसे बिना संबंधित अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी के अवैध निकासी करने में मदद की।\n• निजी व्यक्तियों की मिलीभगत: इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए बैंक कर्मी ने बाहरी निजी व्यक्तियों और अन्य अज्ञात साथियों के साथ मिलकर वित्तीय चैनल तैयार किए। इन बाहरी संपर्कों का उपयोग गबन की गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया गया।\n• विलंबित पहचान: अनाधिकृत लेन-देन को लंबे समय तक छिपाए रखा गया क्योंकि निकासी कई खातों और एफडी में बिखरी हुई थी। 16 सितंबर 2026 को जब एक पीड़ित ग्राहक ने स्वयं विसंगति पकड़ी, तब जाकर मामले की आंतरिक परतें खुलीं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पीएनबी की किस शाखा में यह धोखाधड़ी हुई?\nयह वित्तीय धोखाधड़ी ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक की पाई शाखा में हुई।\n\n2. इस मामले में कुल कितने रुपये के गबन का आरोप है?\nआरोपियों पर ग्राहकों के खातों से 10 करोड़ 24 लाख रुपये की अवैध निकासी का आरोप है।\n\n3. सीबीआई ने किन लोगों को गिरफ्तार किया है?\nसीबीआई ने बैंक की पाई शाखा की ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।\n\n4. यह घोटाला पहली बार कब प्रकाश में आया था?\nयह घोटाला 16 सितंबर 2026 को सामने आया जब एक खाताधारक ने संदिग्ध डेबिट लेन-देन की शिकायत की।\n\n5. सीबीआई ने इस संबंध में एफआईआर कब दर्ज की?\nसीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (गाजियाबाद) ने 29 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की।\n\n6. धोखाधड़ी करने के लिए किस तकनीक या तरीके का इस्तेमाल किया गया?\nआरोपी महिला ने अन्य बैंक अधिकारियों की सीबीएस यूजर आईडी का अनधिकृत इस्तेमाल करके बचत खातों और एफडी से पैसे निकाले।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-11-03",
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    "पीएनबी धोखाधड़ी",
    "ग्रेटर नोएडा",
    "सीबीआई गिरफ्तारी",
    "बैंक गबन",
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    "वित्तीय अपराध"
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