ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस अग्निकांड में नौ यात्रियों की जान गई, चालक दल पर गंभीर लापरवाही के आरोप यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई। एफआईआर के अनुसार आग लगने से पहले जलने की गंध और चालक दल द्वारा सिगरेट पीने पर यात्रियों की चेतावनी को अनसुना कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जहां आग की चपेट में आने से एक निजी स्लीपर टूरिस्ट बस पूरी तरह खाक हो गई। इस भयावह हादसे में नौ यात्रियों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। यह स्लीपर बस दिल्ली से उत्तर प्रदेश के महोबा की ओर जा रही थी और घटना के वक्त इसमें 35 से अधिक यात्री सवार थे। पुलिस प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में दर्ज बयानों के आधार पर इस भीषण अग्निकांड को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो बस चालक दल के बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करते हैं। सफर के दौरान सिगरेट पीने पर विवाद और यात्रियों की अनदेखी एफआईआर के अनुसार, यात्रा के दौरान बस चालक और कंडक्टर लगातार केबिन में सिगरेट पी रहे थे। बस में सवार मुसाफिरों ने चलती गाड़ी के अंदर धुआं उड़ाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद चालक दल ने यात्रियों की आपत्ति को गंभीरता से लेने के बजाय उनका मजाक उड़ाया और उन पर हंसते हुए चुपचाप अपनी सीट पर बैठने की धमकी दी। यात्रियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन चालक और परिचालक अपनी मनमानी पर अड़े रहे। जलने की बदबू को बताया आम बात, गाड़ी रोकने से किया मना कुछ ही देर बाद तेज गति से दौड़ रही बस के भीतर कुछ जलने की तीखी गंध फैलने लगी। परेशान यात्रियों ने तुरंत आगे जाकर ड्राइवर को आगाह किया कि वाहन में कुछ गड़बड़ी हो सकती है और गाड़ी को फौरन सड़क किनारे रोककर जांच की जाए। चालक और कंडक्टर ने इस चेतावनी को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने यात्रियों से कहा कि इस तरह की गंध बस के अंदर अक्सर आती रहती है और इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। बार-बार गुहार लगाने पर भी चालक ने न तो वाहन रोका और न ही इंजन या केबिन का कोई मुआयना किया, बल्कि वह लगातार सिगरेट पीता रहा। केबिन से लपटें उठने पर चालक का अमानवीय जवाब सवारियों की आशंका कुछ ही मिनटों में सच साबित हो गई जब बस के अगले हिस्से से अचानक आग की तेज लपटें निकलने लगीं। सामने आग भड़कते देख बस के अंदर चीख-पुकार मच गई और यात्री जान बचाने के लिए चिल्लाने लगे। एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, जब यात्रियों ने दहशत में आकर बस रोकने की मिन्नतें कीं, तो चालक ने बेहद क्रूरता से जवाब दिया, "मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम मरो या जियो, मैं बस नहीं रोकूँगा।" इस अमानवीय प्रतिक्रिया के बाद आग ने देखते ही देखते पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। एसी सिस्टम में धमाके और लुब्रिकेटिंग ऑयल से फैली विकराल आग शुरुआती तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि आग की शुरुआत बस के एयर कंडीशनिंग (एसी) सिस्टम में हुए एक जोरदार धमाके से हुई। इस धमाके के फौरन बाद इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल ने आग पकड़ ली, जिसने लपटों को अत्यंत भीषण बना दिया। देखते ही देखते जहरीले और घने काले धुएं ने पूरी स्लीपर बस को ढक लिया, जिसके चलते अंदर फंसे यात्रियों के लिए खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। इस घुटन और आग की चपेट में आने से नौ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सुरक्षा उपकरणों का अभाव और पुराने नियमों के उल्लंघन जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह टूरिस्ट बस मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पंजीकृत है। इस वाहन का पुराना रिकॉर्ड भी बेहद खराब रहा है और इस पर विभिन्न उल्लंघनों के चलते कुल 1 लाख 55 हजार रुपये का चालान बकाया था। इन चालानों में अत्यधिक तेज रफ्तार (ओवरस्पीडिंग), बस परमिट के नियमों का उल्लंघन, खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाना, बस की छत पर भारी सामान लादना तथा चालक और परिचालक द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म न पहनना शामिल है। सबसे घातक पहलू यह रहा कि वाहन के भीतर आग बुझाने के प्राथमिक उपकरण (फायर सेफ्टी इक्विपमेंट) तक मौजूद नहीं थे, जिसके कारण शुरुआती पलों में आग पर काबू पाने का कोई साधन नहीं बचा। इसका आप पर असर यह घटना एक्सप्रेसवे पर चलने वाली अनियंत्रित निजी बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और यात्रियों के जीवन पर मंडराते खतरों को उजागर करती है। • दैनिक यात्रियों पर प्रभाव: लंबी दूरी की निजी स्लीपर बसों में यात्रा करने वाले मुसाफिरों को अब टिकट बुक करने से पहले वाहन के सुरक्षा मानकों की जांच करनी होगी। आपातकालीन निकास और चालू अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सीधे तौर पर यात्रियों के जीवन से जुड़ा मामला बन गया है। • परिवहन नियमों की सख्ती: अंतरराज्यीय रूटों पर चलने वाली निजी टूरिस्ट बसों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा उपकरणों की औचक जांच बढ़ाई जा सकती है। जिन गाड़ियों पर भारी चालान लंबित हैं या जो आवश्यक सुरक्षा नियम तोड़ रही हैं, उन पर जब्ती की कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। • ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे पर असर: इस एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से गुजरने वाले वाहनों के लिए रात्रि गश्त और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल की निगरानी कड़ी होने की उम्मीद है। नियमित यात्रियों को बस चालकों द्वारा स्पीड लिमिट और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जानकारी तुरंत हेल्पलाइन पर दर्ज करानी चाहिए। • उपभोक्ता अधिकार: सफर के दौरान चालक दल द्वारा सिगरेट पीने या सुरक्षा चेतावनियों को अनसुना किए जाने पर यात्री तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष या हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं। समय रहते हस्तक्षेप से इस तरह के जानलेवा हादसों को टाला जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह अग्निकांड बस के यांत्रिक घटकों में तकनीकी विफलता और चालक दल द्वारा शुरुआती संकेतों की आपराधिक अनदेखी के संयुक्त परिणाम के कारण हुआ। • सीधा तकनीकी कारण: प्राथमिक पड़ताल के अनुसार बस के एयर कंडीशनिंग (एसी) सिस्टम में अचानक हुए आंतरिक धमाके से आग भड़की। इस धमाके के बाद इंजन के ज्वलनशील लुब्रिकेटिंग ऑयल ने तुरंत आग पकड़ ली, जिसने कुछ ही सेकंडों में लपटों को प्रचंड रूप दे दिया। • मानवीय लापरवाही और चेतावनी की अनदेखी: यात्रियों द्वारा केबिन में जलने की बदबू की सूचना दिए जाने के बावजूद चालक और कंडक्टर ने गाड़ी रोकने से साफ मना कर दिया। समय रहते बस रोककर जांच न करने और सिगरेट पीते रहने की आदत ने यात्रियों को समय पर सुरक्षित बाहर निकलने का मौका नहीं दिया। • सुरक्षा उपकरणों की अनुपस्थिति: बस में अनिवार्य अग्निशामक उपकरण (फायर सेफ्टी इक्विपमेंट) मौजूद नहीं थे, जिससे शुरुआती स्तर पर लपटों पर काबू पाना असंभव हो गया। इसके अलावा गाड़ी पर पहले से ओवरस्पीडिंग, खतरनाक ड्राइविंग और नियम उल्लंघन के 1 लाख 55 हजार रुपये के चालान लंबित थे, जो इसके खराब रखरखाव और सुरक्षा की निरंतर अनदेखी को दर्शाते हैं। सवाल-जवाब 1. यमुना एक्सप्रेसवे पर बस अग्निकांड में कितने लोगों की जान गई? इस भीषण हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। 2. यह स्लीपर बस कहां से कहां जा रही थी और इसमें कितने यात्री थे? यह बस दिल्ली से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी और घटना के वक्त इसमें 35 से अधिक यात्री सवार थे। 3. शुरुआती जांच के अनुसार बस में आग लगने का मुख्य कारण क्या था? शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि आग बस के एयर कंडीशनिंग (एसी) सिस्टम में हुए धमाके और इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल में आग लगने से फैली। 4. एफआईआर के अनुसार यात्रियों ने आग लगने से पहले क्या शिकायत की थी? यात्रियों ने चालक और कंडक्टर के सिगरेट पीने पर आपत्ति जताई थी और जलने की गंध आने पर बस रोकने को कहा था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। 5. हादसाग्रस्त बस पर पहले से कितने रुपये का चालान बकाया था? मध्य प्रदेश के छतरपुर में पंजीकृत इस बस पर ओवरस्पीडिंग और नियम उल्लंघनों के कारण कुल 1 लाख 55 हजार रुपये का चालान था। 6. क्या बस में आग बुझाने के सुरक्षा उपकरण मौजूद थे? नहीं, बस में अनिवार्य फायर सेफ्टी उपकरण नहीं थे, जिसके चलते आग लगने पर उसे बुझाया नहीं जा सका। https://trendkia.com/uttar-pradesh/greater-noida-men-yamuna-expressway-para-slipara-basa-agnikanda-men-nau-yatriyon-ki-jana-gai-chalaka-dala-para-gnbhira-laparavahi--37772 TrendKia — Har trend, sabse pehle.