ग्रेटर नोएडा में सीवेज टैंक की सफाई के दौरान दो की मौत, अगर इन सुरक्षा नियमों का पालन होता तो बच सकती थी जान ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में सीवेज टैंक साफ करते समय ठेकेदार और गार्ड की जहरीली गैस से मौत हो गई। इस हादसे ने देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़े सख्त कानूनी नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में 25-26 जुलाई 2026 की रात एक भीषण हादसे में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टैंक की सफाई के दौरान दो लोगों की जान चली गई। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर से सीवर और टैंक सफाई के दौरान बरती जाने वाली गंभीर लापरवाहियों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। टैंक के भीतर क्या हुआ था उस रात शशिकांत शर्मा जिनकी उम्र 40 साल थी, एक सफाई ठेकेदार के तौर पर काम कर रहे थे। वे बिना किसी सेफ्टी गियर के 12 फीट गहरे टैंक को साफ करने के लिए सीधे अंदर उतरे थे। टैंक के भीतर पहले से ही खतरनाक और जहरीली गैस जमा थी। उस जहरीली गैस के प्रभाव से वे टैंक के अंदर जाते ही तुरंत बेहोश हो गए। शशिकांत को अचेत हालत में देखकर उन्हें बचाने के लिए सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड आकाश भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक के अंदर कूद पड़े। जहरीली गैस का असर इतना तेज था कि आकाश भी कुछ ही पलों में बेहोश होकर गिर पड़े। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही नॉलेज पार्क थाना पुलिस और फायर सर्विस की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। दोनों को कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू करके बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। आकाश की उम्र महज 22 साल थी और वे फिरोजाबाद के रहने वाले थे, जबकि शशिकांत शर्मा राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले थे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी और लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर ठेकेदार समेत कुल चार लोगों को हिरासत में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सीवेज टैंकों में क्यों फैलती है जानलेवा गैस सीवेज टैंकों के भीतर हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, अमोनिया और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी बेहद जहरीली गैसें पाई जाती हैं। अधिकांश मामलों में मौत किसी एक गैस के कारण नहीं होती, बल्कि ऑक्सीजन की भारी कमी और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसों के संयुक्त घातक प्रभाव की वजह से दम घुट जाता है। ऐसी घटनाओं में अक्सर यह देखा जाता है कि जब पहला व्यक्ति बेहोश होकर गिरता है, तो उसे बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति बिना किसी सुरक्षा उपकरण के अंदर उतर जाता है और वह भी उसी जहरीली गैस की चपेट में आ जाता है। इस प्रकार की लापरवाही के कारण एक ही हादसे में कई लोगों की जान चली जाती है, या कई लोग एक साथ सफाई के लिए नीचे उतरते हैं। मैनुअल सीवेज क्लीनिंग का मूल अर्थ यह होता है कि कोई व्यक्ति स्वयं सीवर, मैनहोल या सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए सीधे अंदर उतरकर हाथों से या साधारण उपकरणों की मदद से गंदगी निकालता है। यदि यह खतरनाक काम बिना आवश्यक सुरक्षा गियर, गैस परीक्षण, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य अनिवार्य सुरक्षा मानकों के कराया जाता है, तो इसे कानून का सीधा उल्लंघन माना जाता है। आज के आधुनिक दौर में इस तरह के जोखिम भरे काम की जगह मशीनों और आधुनिक उपकरणों को लेनी चाहिए। भारत में क्या कहता है कानून भारत में इस गंभीर विषय से निपटने के लिए प्रमुख कानून Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 यानी PEMSR Act, 2013 लागू है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगाना और इस कार्य से जुड़े लोगों का समुचित पुनर्वास करना है। इस कानून के सख्त प्रावधानों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को हाथ से मानव मल साफ करने या बिना पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के किसी भी सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। यदि कोई संस्था, ठेकेदार या स्थानीय निकाय इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है। मैनुअल सीवेज क्लीनिंग को लेकर बेहद सख्त कानून और नियम बनाए गए हैं। सामान्य परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर या सेप्टिक टैंक में उतरकर सफाई करने के लिए नियुक्त करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। कानून और नियमों के मुख्य बिंदु देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर सफाई को लेकर दो प्रमुख विधिक व्यवस्थाएं प्रभावी हैं • Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013: यह कानून देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मानव मल की सफाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। • बिना सुरक्षा उपाय: यह बिना उचित सुरक्षा उपायों के किसी भी व्यक्ति से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई कराने को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। • पुनर्वास प्रावधान: यह ऐसे कार्यों में पहले से लगे लोगों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास का भी प्रावधान करता है। • 2023 के संशोधित नियम: इन संशोधनों के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को प्राथमिकता के आधार पर पूरी तरह मशीनी तरीके से करने पर विशेष जोर दिया गया है। • विशेष परिस्थिति में नियम: यदि किसी खास परिस्थिति में किसी व्यक्ति का सीवर में प्रवेश जरूरी हो, तो गैस की जांच, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, ऑक्सीजन सपोर्ट, हार्नेस, प्रशिक्षित निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को पूरी तरह अनिवार्य बनाया गया है। • सजा के प्रावधान: पहली बार अपराध साबित होने पर दो साल तक की कैद या भारी जुर्माना, या दोनों एक साथ हो सकते हैं। • दोबारा अपराध: दोबारा ऐसा अपराध करने पर पांच साल तक की कैद और और भी अधिक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। मानवाधिकार का उल्लंघन और जिम्मेदारी सीवर की सफाई के दौरान होने वाली इस तरह की मौतें गंभीर मानवाधिकार का खुला उल्लंघन हैं। सभी सरकारों और स्थानीय निकायों की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे हर हाल में मशीनी सफाई सुनिश्चित करें। इसके अलावा, यदि दुर्भाग्यवश किसी सीवर या सेप्टिक टैंक में सफाई के दौरान किसी की मौत हो जाती है, तो पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का प्राथमिक तरीका हमेशा मशीनें, सक्शन-टैंकर, जेटिंग मशीन और रोबोटिक उपकरण होना चाहिए। किसी भी इंसान को बिना कानूनी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किए सीवर में उतारना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन माना जाता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाता है। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कड़े प्रशासनिक और कानूनी निरीक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ग्रेटर नोएडा में: स्थानीय आवासीय सोसाइटियों और ठेकेदारों पर सीवर रखरखाव के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने का दबाव बढ़ेगा ताकि ऐसी दुर्घटनाएं दोबारा न हों। सवाल-जवाब 1. ग्रेटर नोएडा में यह हादसा कहां हुआ? यह हादसा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में हुआ। 2. हादसे में जान गंवाने वाले दोनों लोग कौन थे? मृतकों में 40 वर्षीय सफाई ठेकेदार शशिकांत शर्मा और 22 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड आकाश शामिल थे। 3. टैंक के अंदर मौत का मुख्य कारण क्या था? टैंक के भीतर जमा जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण दोनों बेहोश हो गए थे। 4. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है? पुलिस ने मामला दर्ज कर ठेकेदार समेत चार लोगों को हिरासत में ले लिया है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। 5. भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़ा मुख्य कानून कौन सा है? भारत में इसके लिए Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 लागू है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/gretara-noeda-men-siveja-tainka-ki-saphai-ke-daurana-do-ki-mauta-agara-ina-suraksha-niyamon-ka-palana-hota-to-bacha-sakati-thi-jan-10756 TrendKia — Har trend, sabse pehle.