# हरदोई में सांप के डसने के बाद बेहोश हो रहे युवक को भाइयों ने थप्पड़ मारकर जगाए रखा, 20 एंटी वेनम के बाद बची जान

> उत्तर प्रदेश के हरदोई में सांप के काटने से अचेत हो रहे युवक को बचाने के लिए भाइयों ने अस्पताल में करीब 150 थप्पड़ मारे। कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन लगने और डॉक्टरों की निगरानी के बाद युवक खतरे से बाहर आ सका।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/hardoi-men-sanpa-ke-dasane-ke-bada-behosha-ho-rahe-yuvaka-ko-bhaiyon-ne-thappara-marakara-jagae-rakha-20-anti-venom-ke-bada-bachi--40400 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरदोई, सर्पदंश, एंटी वेनम, उत्तर प्रदेश, अस्पताल, चिकित्सा

उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद अंतर्गत अरवल थाना क्षेत्र में जहरीले सांप के डसने के बाद एक युवक की जान बचाने के लिए परिजनों को बेहद अनोखा तरीका अपनाना पड़ा। टिकार गांव में एक दुकान संचालक जब काम समेट रहा था, तभी काउंटर के नीचे छिपे सांप ने उसके पैर में डस लिया। अस्पताल पहुंचने पर जब जहर के प्रभाव से मरीज पर गहरी बेहोशी छाने लगी, तब डॉक्टरों की सलाह पर छोटे भाइयों ने उसे होश में बनाए रखने के लिए एक घंटे के भीतर 150 से अधिक थप्पड़ मारे। कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन देने और गहन निगरानी के बाद युवक की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

## दुकान बंद करते समय काउंटर के नीचे हुआ हमला
टिकार गांव के निवासी 35 वर्षीय अभय सिंह उर्फ रामू गांव में ही रामू मोबाइल एंड जनरल स्टोर के नाम से प्रतिष्ठान चलाते हैं। मंगलवार 29 सितंबर की रात करीब 8 बजे अभय अपनी दुकान बंद करने की तैयारी में जुटे हुए थे। उसी समय काउंटर के निचले हिस्से में छिपकर बैठे एक विषैले सांप ने अचानक उनके पैर पर डस लिया। डंक का अहसास होते ही जब अभय ने नीचे झुककर देखा तो उन्हें वहां सांप नजर आया। अभय ने तत्परता दिखाते हुए फौरन अपने पिता रविंद्र प्रताप को इस अप्रिय घटना से अवगत कराया, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर अस्पताल की तरफ दौड़े।

## दो अस्पतालों में दिए गए कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन
परिजन आनन-फानन में अभय को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरपालपुर ले गए। वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए फौरन उपचार शुरू किया और मरीज को 10 एंटी वेनम इंजेक्शन लगाए। इसके बावजूद अभय की शारीरिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा, जिसके चलते रात करीब 10:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज हरदोई रेफर कर दिया।

मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शाबान अहमद और उनकी टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। मरीज की स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में 10 और एंटी वेनम इंजेक्शन चढ़ाए गए। इस प्रकार सीएचसी और मेडिकल कॉलेज मिलाकर अभय को कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन दिए गए। उपचार के इस नाजुक दौर में सर्पदंश के जहर के असर से अभय को बहुत तेज नींद आने लगी और वह लगातार अचेत होने लगे। डॉक्टर शाबान अहमद और उनकी टीम ने परिजनों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मरीज का किसी भी सूरत में सोना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए उसे लगातार जगाए रखना बेहद जरूरी है।

## होश में रखने के लिए भाइयों ने मारे 150 से अधिक थप्पड़
चिकित्सकों की सख्त हिदायत मिलते ही अभय के दो छोटे भाई, रमन और अनिरुद्ध, अपने बड़े भाई को नींद के आगोश में जाने से रोकने के प्रयास में जुट गए। दोनों भाइयों ने करीब एक घंटे तक लगातार अभय को थपथपाया, झकझोरा और लगभग 150 से ज्यादा थप्पड़ रसीद किए ताकि वह अपनी आंखें खुली रखें। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम लगातार तीन घंटे तक अभय के स्वास्थ्य मानकों पर नजर बनाए रही। निरंतर प्रयासों और दवाओं के असर से आखिरकार अभय की स्थिति स्थिर हुई और उन्हें पूरी तरह से होश आ गया।

डॉक्टरों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि अभय अब खतरे से बाहर हैं और उनकी सेहत में निरंतर सुधार हो रहा है। यदि स्थिति और बिगड़ती तो मरीज को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ले जाने की तैयारी थी, परंतु हरदोई मेडिकल कॉलेज में ही स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव दिखने के बाद उन्हें वहीं भर्ती रखकर उपचार आगे बढ़ाया गया।

## इसका आप पर असर
सर्पदंश की आपातकालीन स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना और उसे लगातार सचेत रखना जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।

- **भारत में:** ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध एंटी वेनम का सहारा लेना चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को सोने या पूरी तरह अचेत होने से बचाना प्राथमिक उपचार के दौरान बेहद मददगार होता है।
- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने पर नजदीकी सीएचसी या जिला मेडिकल कॉलेज में तुरंत संपर्क करने से समय पर एंटी वेनम की खुराक मिल सकती है। समय रहते हरदोई या लखनऊ जैसे केंद्रों पर रेफरल की सुविधा गंभीर रोगियों के लिए जीवनरक्षक बनती है।
- **दुकानदारों और कामगारों के लिए:** रात के समय गोदामों या दुकानों के निचले हिस्सों की सफाई और रख-रखाव करते समय सतर्कता बरतें। बंद और अंधेरे कोनों में हाथ या पैर डालने से पहले रोशनी जलाकर जांचना अनिवार्य होना चाहिए।
- **परिजनों की भूमिका:** विषैले दंश के प्रभाव में आने वाले मरीज के साथ लगातार बातचीत करते रहें और उसे जगाए रखें। डॉक्टरों द्वारा दिए गए आपात निर्देशों का सख्ती से पालन करने से मरीज को कोमा या बेहोशी में जाने से रोका जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना एक ग्रामीण बाजार में काउंटर के नीचे अंधेरी जगह पर सांप के छिपे होने और अचानक पैर पर डसने के कारण हुई। जहर के न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव और अत्यधिक दबाव के चलते मरीज की चेतना तेजी से कम होने लगी थी।

- **छिपे हुए सांप का हमला:** रात के समय दुकान बंद करते वक्त काउंटर के नीचे बैठे सांप को अंधेरे की वजह से देखा नहीं जा सका, जिससे अनजाने में पैर पास जाने पर उसने काट लिया। ग्रामीण इलाकों में नमी और ठंडक की तलाश में सांप अक्सर ऐसी जगहों पर शरण ले लेते हैं।
- **जहर का शारीरिक असर:** विषैले सर्प के डंक के कारण तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ा, जिससे मरीज को बहुत तेज नींद और सुस्ती आने लगी। इस तरह के लक्षणों में मरीज को कोमा में जाने से रोकने के लिए डॉक्टरों ने उसे किसी भी हाल में जगाए रखने का निर्देश दिया।
- **अत्यधिक खुराक की जरूरत:** प्राथमिक केंद्र पर 10 इंजेक्शन देने के बाद भी जहर का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। इसके चलते जिला मेडिकल कॉलेज में 10 और एंटी वेनम इंजेक्शन देने पड़े ताकि विष को पूरी तरह निष्प्रभावी किया जा सके।

## सवाल-जवाब

### 1. अभय सिंह को सांप ने कहां और किस समय काटा था?
अभय सिंह को हरदोई के टिकार गांव में 29 सितंबर की रात करीब 8 बजे उनकी दुकान का काउंटर बंद करते समय सांप ने पैर में काटा था।

### 2. अभय के भाइयों ने उन्हें 150 से ज्यादा थप्पड़ क्यों मारे?
जहर के असर से अभय को बहुत तेज नींद और बेहोशी आ रही थी, इसलिए डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें होश में जगाए रखने के लिए भाइयों ने ऐसा किया।

### 3. इलाज के दौरान अभय को कुल कितने एंटी वेनम इंजेक्शन लगाए गए?
अभय को सीएचसी हरपालपुर में 10 और हरदोई मेडिकल कॉलेज में 10 इंजेक्शन मिलाकर कुल 20 एंटी वेनम दिए गए।

### 4. क्या मरीज को लखनऊ के केजीएमयू रेफर करने की जरूरत पड़ी?
शुरुआत में हालत बिगड़ने पर केजीएमयू लखनऊ भेजने का विचार था, लेकिन हरदोई मेडिकल कॉलेज में हालत सुधर जाने के बाद उन्हें वहीं भर्ती रखा गया।

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