# मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले- नेपाल या बांग्लादेश नहीं बन सकता भारत, योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की सराहना

> ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बयान दिया है कि भारत कभी नेपाल या बांग्लादेश की तरह नहीं बन सकता। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तारीफ करते हुए विदेशी नागरिकों द्वारा विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने की जांच की मांग उठाई है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/india-can-never-become-like-nepal-or-bangladesh-says-maulana-shahabuddin-razvi-while-praising-yogi-adityanath-govt-48255 · **Language:** Hindi
**Tags:** मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, उत्तर प्रदेश, योगी आदित्यनाथ, कानून व्यवस्था, जंतर-मंतर प्रदर्शन

**बरेली: **ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक बयान में स्पष्ट किया है कि भारत कभी भी नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका की श्रेणी में नहीं आ सकता है। उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से अपील की है कि उन बाहरी लोगों की गहन जांच कराई जाए जो अन्य देशों से आकर भारत के भीतर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। मौलाना रजवी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में यह बात कही। उन्होंने दो टूक शब्दों में दोहराया कि भारत की स्थिति पूरी तरह अलग है और बाहर से आकर यहां धरने या प्रदर्शन करने वालों के मामलों में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।

 

## उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पिछली सरकारों पर राय

उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करते हुए मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य में सुरक्षा तंत्र मजबूत रहा है और नागरिकों की हिफाजत सुनिश्चित की गई है। रजवी ने यह भी रेखांकित किया कि बहराइच और संभल की इक्का-दुक्का वारदातों को यदि छोड़ दिया जाए, तो मौजूदा सरकार के दौर में उत्तर प्रदेश की धरती पर हिंसा की अन्य कोई बड़ी घटना देखने को नहीं मिली है। इसके विपरीत, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हुआ करती थी।

 

## जंतर-मंतर के प्रदर्शन और मुस्लिम युवाओं से अपील

मौलाना रजवी की यह टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 10 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले की गई उनकी अपील के संदर्भ में आई है। उस दौरान उन्होंने देश के मुस्लिम युवाओं से साफ तौर पर इस प्रदर्शन से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया था। यह पूरा विरोध-प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफे की मांग के इर्द-गिर्द बुना गया था। प्रदर्शन के आयोजकों का मुख्य तर्क मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमिताएं और खामियां होने का था, जिसके आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही थी।

 

## लोकतांत्रिक अधिकार और विरोध के संभावित खतरे

अपनी पिछली सार्वजनिक अपील में मौलाना रजवी ने यह स्वीकार किया था कि किसी भी मुद्दे पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का कानूनी और लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह गंभीर चेतावनी भी दी थी कि यदि ऐसे प्रदर्शन हिंसक रूप अख्तियार कर लेते हैं, तो उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के आसपास के इलाकों में जीवनयापन करने वाले तथा काम करने वाले मुस्लिम युवाओं से अपील की थी कि वे इस तरह के प्रस्तावित आयोजनों से खुद को दूर रखें। रजवी का तर्क था कि धरने-प्रदर्शनों के दौरान उपद्रव होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त होता है और आम आदमियों की परेशानियां काफी बढ़ जाती हैं। इस बीच, नेहा बोरा ने बांग्लादेश की घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वहां के हालात ने जेन-जी को नई राह दिखाई है, जबकि प्रशांत भूषण ने भी 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर एक ऐसा ही बयान दिया था जिस पर राजनीतिक गलियारों में खासी हलचल देखने को मिली थी।

## इसका आप पर असर
यह बयान देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले प्रदर्शनों, राजनीतिक गतिशीलता और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।

- **भारत में:** नागरिकों को सार्वजनिक आयोजनों और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा प्रबंधों और संभावित यातायात बदलावों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन ऐसे मौकों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतता है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के निवासियों और युवाओं के लिए यह प्रशासनिक संदेश स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर सरकार सख्त नजर रखेगी। स्थानीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल अधिक मुस्तैद रहते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बयान मुख्य रूप से हाल ही में पड़ोसी देशों में हुई राजनीतिक उठापटक और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में सामने आया है।

- **पड़ोसी देशों के हालात:** नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में हालिया राजनीतिक परिवर्तनों को लेकर देश के विभिन्न हलकों में हो रही चर्चाओं ने धार्मिक और राजनीतिक गुरुओं को अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया है।

- **प्रस्तावित प्रदर्शन:** कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए प्रदर्शन ने मुस्लिम संगठनों और नेताओं की ओर से सावधानी बरतने वाली प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी किस संगठन के अध्यक्ष हैं?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

### 2. मौलाना रजवी ने किस देश की तुलना भारत से करने पर आपत्ति जताई है?
उन्होंने कहा है कि भारत कभी भी नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसा नहीं बन सकता है।

### 3. उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने क्या कहा?
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही है और हिंसा की घटनाएं काफी नियंत्रित रही हैं।

### 4. 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर किस मांग को लेकर प्रदर्शन प्रस्तावित था?
यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._