जाट रेजीमेंट सेंटर के बाहर सेना में चयन का फर्जी झांसा देने वाला गिरोह बेनकाब, पांच धरे गए बरेली में अग्निवीर भर्ती परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों को शारीरिक व मेडिकल परीक्षण पास कराने का लालच देकर ठगने वाले पांच व्यक्तियों को पुलिस और सैन्य खुफिया विभाग ने पकड़ा। उत्तर प्रदेश के बरेली में सैन्य भर्ती अभियान के दौरान बेरोजगार युवकों को झांसा देकर अवैध वसूली करने की एक गंभीर साजिश सामने आई है। कैंट इलाके में स्थित जाट रेजीमेंट सेंटर के निकट सैन्य खुफिया शाखा और स्थानीय पुलिस की साझा टीम ने जाल बिछाकर पांच संदिग्धों को धर दबोचा। पकड़े गए व्यक्तियों पर आरोप है कि वे सेना में जाने के इच्छुक ऐसे नौजवानों को चिन्हित कर रहे थे जिन्हें शारीरिक मापदंडों अथवा चिकित्सीय परीक्षण में बाहर होने का डर सता रहा था। यह गिरोह उम्मीदवारों को झूठा दिलासा देता था कि सेना के बड़े अफसरों और डॉक्टरों से उनके नजदीकी रिश्ते हैं, जिनके माध्यम से वे अयोग्य होने पर भी चयन सुनिश्चित करवा देंगे। खुफिया सूचना के आधार पर यह त्वरित घेराबंदी हरभजन गेट के पास की गई, जिससे किसी अभ्यर्थी के साथ बड़ी आर्थिक ठगी होने से पहले ही नेटवर्क को तोड़ दिया गया। गिरोह के पास से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और नकदी जब्त तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा 9100 रुपये की नकदी, एक मोटरसाइकिल तथा एक स्कूटी भी जब्त की गई है। पुलिस अधिकारियों ने जब जब्त किए गए मोबाइल उपकरणों की प्राथमिक जांच की, तो उनमें कई परीक्षार्थियों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। इनमें प्रवेश पत्र, चिकित्सीय जांच से जुड़े कागजात, बातचीत के स्क्रीनशॉट और डिजिटल माध्यमों से किए गए रुपयों के आदान-प्रदान के रिकॉर्ड शामिल थे। छानबीन में यह बात स्पष्ट हुई कि आरोपी केवल उन्हीं युवाओं से संपर्क साधते थे जो अपनी शारीरिक क्षमता या मेडिकल जांच को लेकर सशंकित रहते थे। अस्पताल और सैन्य प्रतिष्ठानों में पूर्व कार्य अनुभव का उठाया फायदा पूछताछ के दौरान पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान विशाल यादव, प्रदीप शर्मा, राजवीर, धर्मेंद्र सिंह और नूर अहमद के तौर पर हुई है। छानबीन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इनमें से दो आरोपी पहले सेना से जुड़े परिसरों में काम कर चुके हैं। विशाल यादव पूर्व में आर्मी मेडिकल कोर के अंतर्गत सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत था, जबकि नूर अहमद मिलिट्री हॉस्पिटल के भीतर बढ़ई का काम संभाल चुका था। इन्हीं पुराने संपर्कों और कार्य अनुभव की आड़ लेकर दोनों आरोपी खुद को सेना के अधिकारियों तथा चिकित्सकों का बेहद करीबी बताते थे। वे अभ्यर्थियों के मन में यह झूठी धारणा बना देते थे कि भर्ती बोर्ड में उनकी सीधी पैठ है, हालांकि हकीकत में किसी भी चयन अधिकारी या चिकित्सक से उनका कोई वास्ता नहीं था। सफल उम्मीदवारों के चयन का भी खुद लेते थे श्रेय जांच में आरोपियों के तौर-तरीकों को लेकर एक और दिलचस्प पहलू उजागर हुआ है। यदि कोई उम्मीदवार अपनी खुद की मेहनत, योग्यता और शारीरिक क्षमता के बल पर परीक्षणों में उत्तीर्ण हो जाता था, तो गिरोह के सदस्य उसका श्रेय भी अपनी कथित पहुंच को दे देते थे। वे अभ्यर्थी और उसके परिजनों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनकी सिफारिश के बिना यह चयन संभव नहीं था, जिसके बाद वे उनसे तय रकम वसूल कर आपस में बांट लेते थे। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों के विरुद्ध कैंट थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं 319, 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारी अब इस पहलू की पड़ताल में जुटे हैं कि गिरोह के संपर्क में कितने युवक आए थे और इनके नेटवर्क का दायरा कहां तक फैला हुआ है। इसका आप पर असर यह घटना सेना भर्ती की तैयारी में लगे युवाओं और उनके परिवारों को दलालों के झूठे वादों के प्रति सतर्क रहने की सख्त चेतावनी देती है। • भारत में: सशस्त्र बलों की चयन प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता आधारित और त्रिस्तरीय सुरक्षा से संचालित होती है। अभ्यर्थियों को किसी भी तीसरे पक्ष के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने से बचना चाहिए। • बरेली में: जाट रेजीमेंट सेंटर और अन्य छावनी क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा एजेंसियां निगरानी बढ़ा चुकी हैं। यदि किसी अभ्यर्थी से भर्ती में मदद के नाम पर पैसे की मांग की जाती है, तो वह तुरंत पुलिस या सैन्य अधिकारियों को सूचित कर सकता है। • अभ्यर्थियों के लिए: मेडिकल जांच या शारीरिक परीक्षा में किसी भी स्तर पर निजी हस्तक्षेप संभव नहीं होता है। किसी बाहरी व्यक्ति के कहने पर अपने मूल दस्तावेज या प्रवेश पत्र साझा करना कानूनी जोखिम खड़ा कर सकता है। • कानूनी परिणाम: भर्ती में अनुचित साधनों या दलालों का सहारा लेने वाले उम्मीदवारों की उम्मीदवारी स्थायी रूप से रद्द हो सकती है। निष्पक्ष प्रक्रिया पर भरोसा रखकर केवल आधिकारिक पोर्टल और विज्ञप्तियों पर ही ध्यान देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यह मामला बेरोजगार युवकों की घबराहट और सेना परिसरों में पूर्व में काम कर चुके व्यक्तियों के अनुचित लाभ उठाने की प्रवृत्ति के चलते सामने आया। • सीधा कारण: आरोपियों ने अभ्यर्थियों के मन में शारीरिक नाप-तौल और मेडिकल अनफिट होने के डर को भुनाकर अवैध कमाई का जरिया बनाया। वे खुद को सैन्य अधिकारियों का करीबी बताकर पैसे ऐंठने की फिराक में थे। • सहूलियत देने वाली परिस्थितियां: गिरोह के दो सदस्य पहले सैन्य चिकित्सा प्रतिष्ठानों में संविदा या छोटे पदों पर काम कर चुके थे, जिससे उन्हें सेना की शब्दावली और माहौल की समझ थी। इसी अनुभव का दुरुपयोग कर वे उम्मीदवारों का विश्वास जीत लेते थे। • खुफिया कार्रवाई: सैन्य खुफिया इकाई को संदिग्ध गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बैठाकर आरोपियों को रंगे हाथ दबोच लिया गया। सवाल-जवाब 1. बरेली में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है? पुलिस ने विशाल यादव, प्रदीप शर्मा, राजवीर, धर्मेंद्र सिंह और नूर अहमद को गिरफ्तार किया है। 2. आरोपियों पर किस बात का आरोप है? इन पर अग्निवीर भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों को शारीरिक और मेडिकल परीक्षा पास कराने का झूठा भरोसा देकर पैसे ठगने का आरोप है। 3. कार्रवाई के दौरान क्या-क्या सामान बरामद हुआ? सुरक्षा टीमों ने 6 मोबाइल फोन, 9100 रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल, एक स्कूटी और अभ्यर्थियों के दस्तावेज बरामद किए हैं। 4. क्या आरोपियों की सेना के अधिकारियों या डॉक्टरों से कोई वास्तविक पहुंच थी? पुलिस के अनुसार आरोपियों की किसी भी सैन्य अधिकारी या डॉक्टर तक कोई पहुंच नहीं थी और वे केवल झांसा दे रहे थे। https://trendkia.com/uttar-pradesh/jat-regimental-centre-ke-bahara-sena-men-chayana-ka-pharji-jhansa-dene-vala-giroha-benakaba-pancha-dhare-gae-37979 TrendKia — Har trend, sabse pehle.