# झांसी के मंदिर में दिव्य दरबार चलाने वाला स्वयंभू संत चढ़ा पुलिस के हत्थे, लूट के मामले में था वांछित

> उत्तर प्रदेश के झांसी में आस्था का चोला ओढ़कर दिव्य दरबार सजाने और बीमारियां ठीक करने का दावा करने वाले प्रदीप शुक्ला उर्फ काली सरकार को पुलिस ने दबोच लिया है। हरदोई से फरार चल रहा यह आरोपी लंबे समय से मंदिर में पहचान बदलकर रह रहा था।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/jhansi-ke-mndira-men-divya-darabara-chalane-vala-svaynbhu-snta-charha-pulisa-ke-hatthe-luta-ke-mamale-men-tha-vanchhita-46486 · **Language:** Hindi
**Tags:** झांसी पुलिस, प्रदीप शुक्ला, काली सरकार, मऊरानीपुर, उत्तर प्रदेश अपराध, गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में कानून से बचने के लिए साधु का वेश धरने वाले एक शातिर आरोपी का पर्दाफाश हुआ है। मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के तहत आने वाले कुरैंचा गांव स्थित काली माता मंदिर को सुरक्षित पनाहगाह बनाकर रह रहे प्रदीप शुक्ला उर्फ काली सरकार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वह लंबे समय से धर्म और आस्था की आड़ लेकर न केवल पुलिस को चकमा दे रहा था, बल्कि आसपास के लोगों को भी चमत्कारों के नाम पर भ्रमित कर रहा था।

## काली माता मंदिर को बनाया था छिपने का ठिकाना
कुरैंचा गांव के काली माता मंदिर में यह शख्स पिछले कई वर्षों से अपनी पहचान छिपाकर शरण लिए हुए था। इलाके के लोग उसे सत्यानंद शुक्ला अथवा काली सरकार के नाम से पुकारते थे। मंदिर परिसर में उसने बाकायदा अपना दिव्य दरबार लगाना शुरू कर दिया था, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते थे।

वह दरबार में आने वाले सीधे-सादे लोगों के सामने तरह-तरह के चमत्कारी दावे पेश करता था। गंभीर से गंभीर शारीरिक बीमारियों को ठीक करने और जीवन की सभी दिक्कतों का पलक झपकते समाधान निकालने का ढोंग रचा जाता था। लोग उसके दावों के झांसे में आकर उसकी कथित शक्तियों पर विश्वास करने लगे थे।

## सोशल मीडिया पर रील्स के जरिए फैलाया नेटवर्क
धार्मिक आडंबर के साथ-साथ इस तथाकथित संत ने आधुनिक डिजिटल मंचों का भी पूरा सहारा लिया। इंस्टाग्राम पर उसने एक लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए थे। उसके वीडियो और रील्स देखकर बड़ी संख्या में इंटरनेट यूजर्स उसके प्रभाव में आ रहे थे। इंटरनेट पर अपनी लोकप्रियता बढ़ाकर वह अपनी पुरानी आपराधिक छवि पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश कर रहा था।

## लूट और मारपीट के मामलों में निकला वांछित
आस्था के इस दिखावे के पीछे की सच्चाई सामने आते ही हर कोई स्तब्ध रह गया। यह चमक-दमक केवल कानून की पकड़ से दूर रहने का एक सुनियोजित हथकंडा थी। इस तथाकथित संत का वास्तविक नाम प्रदीप शुक्ला है और वह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का निवासी है।

हरदोई पुलिस को कई वर्षों से उसकी तलाश थी। उसके आपराधिक रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2014 में उसके विरुद्ध लूट का गंभीर मुकदमा दर्ज किया गया था, जबकि साल 2018 में उसके खिलाफ मारपीट का केस दर्ज हुआ था। निरंतर अदालती कार्यवाहियों से नदारद रहने के कारण संबंधित अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी गैर-जमानती वारंट जारी कर रखा था।

## साझा पुलिस कार्रवाई में हुआ गिरफ्तार
हरदोई पुलिस को जब गोपनीय सूचना मिली कि उनका वांछित अपराधी झांसी के एक ग्रामीण मंदिर में संत का चोला पहनकर दिव्य दरबार सजा रहा है, तो तुरंत एक संयुक्त रणनीति तैयार की गई। हरदोई और मऊरानीपुर की पुलिस टीमों ने मिलकर मंदिर परिसर में अचानक घेराबंदी की और आरोपी को धर दबोचा।

मऊरानीपुर के क्षेत्राधिकारी रत्नेश्वर सिंह ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। आस्था की ओट में अपराध छिपाने की यह कोशिश पुलिस की सतर्कता से नाकाम हो गई।

## इसका आप पर असर
यह घटना दर्शाती है कि आस्था की आड़ में आपराधिक अतीत छिपाने वाले धोखेबाजों से आम जनता को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य भर में किसी भी मंदिर या आश्रम में बिना सत्यापन शरण लेने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर पुलिस निगरानी बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबंधन को किसी भी नए बाबा की पहचान परखने के प्रति जागरूक रहना होगा।
- **झांसी में:** मऊरानीपुर और आसपास के क्षेत्रों में अंधविश्वास या झांसे में आने वाले नागरिकों को ऐसे फर्जी दरबारों से बचने की स्पष्ट चेतावनी मिली है। मंदिर परिसरों में आने वाले बाहरी व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की जांच अब और सख्त हो सकती है।
- **सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए:** इंटरनेट पर वायरल रील्स और बड़ी संख्या में फॉलोअर्स देखकर किसी भी स्वयंभू संत पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। स्वास्थ्य समस्याओं के लिए हमेशा योग्य डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह लें।
- **कानूनी व्यवस्था के लिए:** अदालत से जारी स्थायी वारंट वाले पुराने भगोड़ों को पकड़ने के लिए अंतर-जिला पुलिस समन्वय की प्रभावशीलता सामने आई है। इससे फरार अपराधियों पर कानूनी शिकंजा और कड़ा होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह गिरफ्तारी तब संभव हुई जब एक वांछित अपराधी की पहचान का सुराग हरदोई पुलिस को झांसी के एक दूरदराज मंदिर में मिला।

- **आपराधिक पृष्ठभूमि और अदालती वारंट:** प्रदीप शुक्ला पर हरदोई में साल 2014 में लूट तथा 2018 में मारपीट का मुकदमा दर्ज था। बार-बार अदालत में हाजिर न होने के कारण उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका था।
- **पहचान बदलकर छिपने की रणनीति:** गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने साधु का वेश बनाया और मऊरानीपुर के कुरैंचा गांव स्थित काली माता मंदिर को अपना ठिकाना बनाकर खुद को काली सरकार के रूप में स्थापित कर लिया।
- **गोपनीय सूचना और संयुक्त अभियान:** हरदोई पुलिस को आरोपी की सटीक लोकेशन का इनपुट मिलने के बाद मऊरानीपुर पुलिस के साथ तालमेल बैठाया गया और मंदिर में दबिश देकर उसे पकड़ लिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रदीप शुक्ला उर्फ काली सरकार को कहां से गिरफ्तार किया गया?
उसे उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के कुरैंचा गांव स्थित काली माता मंदिर से पकड़ा गया।

### 2. काली सरकार पर कौन से पुराने आपराधिक मामले दर्ज हैं?
उसके खिलाफ हरदोई में साल 2014 में लूट और साल 2018 में मारपीट का मुकदमा दर्ज है।

### 3. अदालत ने आरोपी के खिलाफ क्या आदेश जारी किया था?
अदालत में बार-बार पेश न होने के कारण उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया गया था।

### 4. वह मंदिर में लोगों को किस तरह गुमराह कर रहा था?
वह दिव्य दरबार लगाकर गंभीर बीमारियां ठीक करने और समस्याओं का तुरंत समाधान करने के झूठे दावे करता था।

### 5. सोशल मीडिया पर उसकी उपस्थिति कैसी थी?
इंस्टाग्राम पर उसके एक लाख से अधिक फॉलोअर्स थे, जहां वह रील्स और वीडियो साझा करता था।

### 6. इस गिरफ्तारी अभियान में कौन-सी पुलिस टीमें शामिल थीं?
यह कार्रवाई हरदोई पुलिस और झांसी की मऊरानीपुर पुलिस के साझा ऑपरेशन के तहत की गई।

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