झांसी में दरबार चलाने वाला हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला 31 साल बाद हरदोई में धरा गया झांसी में पहचान बदलकर काली सरकार के नाम से दरबार लगाने वाले 31 साल पुराने मुकदमों के स्थायी वारंटी प्रदीप शुक्ला को हरदोई पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उत्तर प्रदेश के झांसी में अपनी पहचान छिपाकर दरबार चलाने और खुद को काली सरकार बताने वाला स्थायी वारंटी प्रदीप शुक्ला आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। करीब 31 साल पुराने आपराधिक मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे इस आरोपी को हरदोई जिले की कोतवाली शहर पुलिस ने धर दबोचा। आरोपी लंबे समय से पुलिस और अदालती प्रक्रिया से बचता फिर रहा था, लेकिन जिले में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान पुलिस टीम ने उसे दबोचने में कामयाबी हासिल की। कई नामों से सक्रिय रहा आरोपी पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड में प्रदीप शुक्ला के कई उपनाम दर्ज हैं। दस्तावेजों के मुताबिक वह नटरोज और काली पंडित के नाम से भी जाना जाता था। वहीं झांसी में उसने अपनी पुरानी पहचान पूरी तरह छिपा ली थी और वहां वह सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से सक्रिय था। झांसी में वह बाकायदा धार्मिक दरबार लगाता था और लोगों के बीच इसी छद्म रूप में अपनी पैठ बना चुका था। हरदोई पुलिस की इस गिरफ्तारी को एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि वह तीन दशकों से कानून की नजरों से बच रहा था। कोतवाली शहर क्षेत्र का है हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार किए गए अभियुक्त की पहचान प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज उर्फ काली पंडित के रूप में हुई है, जो माया राम का पुत्र है। वह हरदोई के कोतवाली शहर अंतर्गत चौहान थोक (चौहाणथोक) का मूल निवासी है। पुलिस के अनुसार वह कोतवाली शहर थाने का चिन्हित हिस्ट्रीशीटर है। उसके विरुद्ध अदालत से गैर-जमानती स्थायी वारंट जारी किए गए थे, लेकिन वह लगातार अपने ठिकाने और पहचान बदलकर गिरफ्तारी से बचता आ रहा था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर वांछित और वारंटी अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई पूरी की गई। अदालत में पेशी के बाद भेजा गया जेल सीओ सिटी अजीत चौहान के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत कोतवाली शहर पुलिस ने यह सफलता हासिल की। उन्होंने बताया कि हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला के मामलों में अदालत में प्रभावी पैरवी की गई, जिसके आधार पर उसके विरुद्ध स्थायी वारंट हासिल किया गया था। वारंट जारी होने के बाद उपनिरीक्षक देवेश शर्मा और हेड कांस्टेबल अर्पित तोमर की टीम ने उसे गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से अदालत के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले में सभी आवश्यक विधिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इसका आप पर असर तीन दशक पुराने मुकदमों में फरार हिस्ट्रीशीटर की गिरफ्तारी से यह संदेश स्पष्ट हुआ है कि पहचान बदलकर छिपने वाले अपराधी अंततः कानून की गिरफ्त में आ ही जाते हैं। • भारत में: लंबे समय से लंबित मुकदमों में पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि पुराने स्थायी वारंटियों की फाइलों पर लगातार काम हो रहा है। नागरिकों के लिए यह एक संकेत है कि धार्मिक या सामाजिक चोला ओढ़कर पहचान छिपाने वाले तत्वों की प्रामाणिकता की जांच जरूरी है। • हरदोई और झांसी में: हरदोई के स्थानीय निवासी हिस्ट्रीशीटर के पकड़े जाने से राहत महसूस करेंगे, जबकि झांसी में उसके दरबार से जुड़े लोग अब उसकी असली पहचान से अवगत हो सकेंगे। स्थानीय अदालतों में तीन दशक पुराने मामलों की सुनवाई अब दोबारा आगे बढ़ सकेगी। ऐसा क्यों हुआ यह गिरफ्तारी जिला पुलिस द्वारा वांछित अपराधियों और स्थायी वारंटियों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के तहत प्रभावी कानूनी पैरवी के बाद संभव हुई। • अभियान और प्रभावी पैरवी: पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर वांछित और वारंटी अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत कोतवाली शहर पुलिस ने अदालत में मामले की ठोस पैरवी की। इसके परिणामस्वरूप अदालत से स्थायी वारंट जारी हुए और पुलिस टीम ने सटीक कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया। • पहचान और ठिकाना बदलना: आरोपी प्रदीप शुक्ला के खिलाफ करीब 31 साल पुराने मामले दर्ज थे, लेकिन वह नटरोज, काली पंडित और सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार जैसे अलग-अलग नामों का सहारा लेकर लगातार जगह बदल रहा था। झांसी में दरबार लगाकर खुद को स्थापित कर लेने के कारण वह लंबे समय तक पुलिस पकड़ से दूर रहा। • अदालती प्रक्रिया का पुनः आरंभ: स्थायी वारंट के आधार पर गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जिससे दशकों से अटकी कानूनी प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकेगी। सवाल-जवाब 1. प्रदीप शुक्ला को किस जिले की पुलिस ने गिरफ्तार किया है? प्रदीप शुक्ला को उत्तर प्रदेश की हरदोई जिले की कोतवाली शहर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 2. आरोपी कितने वर्षों से मुकदमों में फरार चल रहा था? आरोपी करीब 31 साल पुराने मुकदमों में लंबे समय से पुलिस और अदालती प्रक्रिया से फरार चल रहा था। 3. झांसी में आरोपी किस नाम से सक्रिय था और क्या करता था? झांसी में वह सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से जाना जाता था और वहां दरबार लगाता था। 4. पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी के कौन-कौन से उपनाम दर्ज हैं? पुलिस रिकॉर्ड में प्रदीप शुक्ला के नाम के साथ नटरोज और काली पंडित उपनाम दर्ज हैं। 5. आरोपी को गिरफ्तार करने वाली टीम में कौन-कौन शामिल थे? गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक देवेश शर्मा और हेड कांस्टेबल अर्पित तोमर शामिल थे। 6. गिरफ्तारी के बाद अदालत ने आरोपी के खिलाफ क्या फैसला दिया? पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए जाने के बाद अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। https://trendkia.com/uttar-pradesh/jhansi-men-darabara-chalane-vala-histrishitara-pradeep-shukla-31-sala-bada-hardoi-men-dhara-gaya-56295 TrendKia — Har trend, sabse pehle.