# कानपुर के पनकी में कूड़े के ढेरों से घुटन, 18 गांवों के लोग बीमारियों की चपेट में

> कानपुर के पनकी इलाके में भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट के आसपास बसे करीब 18 गांवों के हजारों लोग बरसों से कूड़े के ढेरों से उठते धुएं और बदबू से जूझ रहे हैं, नगर आयुक्त ने लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-07-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/kanpur-ke-panki-men-kure-ke-dheron-se-ghutana-18-ganvon-ke-loga-bimariyon-ki-chapeta-men-5126 · **Language:** Hindi
**Tags:** कानपुर प्रदूषण, पनकी कूड़ा प्लांट, भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट, स्मार्ट सिटी कानपुर, वायु प्रदूषण, कचरा निस्तारण

कानपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद शहर की तरक्की के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन पनकी इलाके में भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट के आसपास बसे हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी आज भी बदबू, धुएं और कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेरों के साये में गुजर रही है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही पूरा इलाका धुएं की मोटी चादर में लिपट जाता है, बदबू कई किलोमीटर दूर तक फैल जाती है और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि यह हालात बीते कई सालों से बने हुए हैं, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी हल नहीं निकल सका है।

## धुएं और घुटन के बीच गुजरती जिंदगी
दोपहर के समय भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट परिसर में कूड़ा लेकर पहुंचने वाले ट्रकों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। प्लांट के भीतर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं, जिनमें से कई जगहों से धुआं उठता साफ दिखाई देता है। कुछ देर वहां रुकते ही बदबू और घुटन का एहसास होने लगता है। प्लांट के पास दुकान चलाने वाले स्थानीय निवासी राजेश पाल बताते हैं कि अब गले में खराश और खांसी रहना रोज की बात हो गई है। घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बावजूद बदबू अंदर तक आ जाती है, यहां तक कि कई बार रिश्तेदार भी इस इलाके में आने से बचते हैं। एक अन्य निवासी धर्मेंद्र निषाद के मुताबिक शाम के समय हालात सबसे ज्यादा बिगड़ जाते हैं। उनका कहना है कि धुएं की वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा तकलीफ होती है, कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत रहती है और रात के वक्त घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है।

## 18 गांवों पर मंडराता खतरा, बीमारियों का डर
भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट के आसपास सरायमीता, बदुआपुर, जमुई, पनका, छीतेपुर, कलकपुरवा, सुंदर नगर, पनकी पड़ाव, बहादुर नगर, सरसई, गंगागंज और पतरसा समेत करीब 18 गांव और बस्तियां बसी हैं। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि कूड़े के ढेरों से उठने वाला धुआं और दुर्गंध अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। कई परिवारों के मुताबिक घर में किसी न किसी सदस्य को खांसी, एलर्जी, सांस लेने में तकलीफ या त्वचा से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहती है। लोगों को डर सता रहा है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

## 2009 से चल रहा प्लांट, विरोध के बावजूद नहीं बदले हालात
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह प्लांट साल 2009 से लगातार संचालित हो रहा है। इन बरसों के दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और विशेषज्ञों की रिपोर्टें भी सामने आईं, लेकिन कूड़े के ढेर घटने की बजाय लगातार बढ़ते ही गए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, जमीनी स्तर पर कोई ठोस राहत नहीं मिली।

## प्रशासन का दावा, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने इस पर कहा, "प्लांट संचालकों को सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करने के निर्देश कई बार दिए जा चुके हैं। यदि कहीं लापरवाही मिलती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निर्देशों के बावजूद पनकी के गांवों में धुआं और बदबू अब भी बरकरार है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कानपुर खुद को स्मार्ट सिटी बताता है, तब क्या पनकी के इन 18 गांवों को भी साफ हवा और स्वस्थ माहौल में जीने का हक मिल पाएगा, या फिर यहां रहने वाले हजारों लोग यूं ही धुएं और बदबू के बीच अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर रहेंगे।

## इसका आप पर असर
यह खबर पनकी के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए सीधे सेहत और रोजमर्रा जिंदगी से जुड़ी है।

- **भारत में:** यह मामला दिखाता है कि शहरों के कूड़ा निस्तारण प्लांट अगर सही तरीके से न चलाए जाएं तो आसपास बसी बस्तियों की सेहत पर सीधा असर पड़ सकता है।
- **कानपुर/पनकी में:** यहां के करीब 18 गांवों में रहने वाले हजारों लोगों को रोज खांसी, एलर्जी, सांस और त्वचा से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर शाम के बाद हालात और बिगड़ जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट कहां स्थित है?
यह कानपुर के पनकी इलाके में स्थित है।

### 2. यह प्लांट कब से चल रहा है?
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह प्लांट साल 2009 से संचालित हो रहा है।

### 3. इस प्लांट से कितने गांव प्रभावित हैं?
सरायमीता, बदुआपुर, जमुई, पनका, छीतेपुर, कलकपुरवा, सुंदर नगर, पनकी पड़ाव, बहादुर नगर, सरसई, गंगागंज और पतरसा समेत करीब 18 गांव और बस्तियां प्रभावित हैं।

### 4. स्थानीय लोगों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
लोगों को खांसी, गले में खराश, एलर्जी, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा से जुड़ी परेशानियां हो रही हैं।

### 5. नगर आयुक्त ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा कि प्लांट संचालकों को पर्यावरणीय मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं और लापरवाही मिलने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

### 6. क्या पहले भी इस समस्या को लेकर विरोध हुआ है?
हां, पिछले वर्षों में कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और विशेषज्ञों की रिपोर्टें भी सामने आईं, लेकिन कूड़े के ढेर लगातार बढ़ते गए।

### 7. दिन के किस समय हालात सबसे ज्यादा खराब होते हैं?
स्थानीय निवासियों के मुताबिक शाम के समय धुएं और बदबू की स्थिति सबसे ज्यादा बिगड़ जाती है।

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