कानपुर के सीसामऊ में तीन दशक का सियासी सफरनामा और अगले चुनावी घमासान की बिसात कानपुर की सीसामऊ सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और सपा के दौर के बाद अब 2027 में नए चुनावी समीकरणों के बीच कड़े मुकाबले की जमीन तैयार हो रही है। परिसीमन और जातिगत बनावट ने इस हलके की पूरी तस्वीर बदल दी है। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट सूबे के राजनीतिक परिदृश्य में हमेशा से एक अहम चर्चा का केंद्र रही है। कानपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 213 नंबर के इस विधानसभा क्षेत्र में साल 1991 से 2024 के दरम्यान 8 आम चुनाव और 1 उपचुनाव संपन्न हुए हैं। इन तीन दशकों के चुनावी सफर में इस सीट पर पहले भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीन दफा परचम लहराया, जिसके बाद कांग्रेस ने दो बार इस पर कब्जा जमाया। इसके उपरांत समाजवादी पार्टी ने जीत की शानदार हैट्रिक लगाई और फिर 2024 के उपचुनाव में भी अपना वर्चस्व कायम रखा। साल 2008 तक यह हलका अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित था, मगर परिसीमन प्रक्रिया के बाद इसे सामान्य श्रेणी में शामिल कर दिया गया। साल 2012 के बाद से ही यहां समाजवादी पार्टी और हाजी इरफान सोलंकी के खानदान का राजनीतिक दबदबा निरंतर देखने को मिल रहा है। अयोध्या घटनाक्रम के बाद 1991 में बीजेपी का खाता खुला साल 1991 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अयोध्या में हुए गोलीकांड की पृष्ठभूमि में माहौल बेहद गरमाया हुआ था। इस दौर में सीसामऊ सीट पर बीजेपी के राकेश सोनकर ने जोरदार जीत दर्ज करते हुए 36,576 वोट जुटाए थे। उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी दीनदयाल को 21,756 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। उस मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार दीनदयाल 14,820 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर सिमट गए थे, जबकि जनता पार्टी के उम्मीदवार तुलसी राम 8,191 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस तरह इस सुरक्षित सीट पर भारतीय जनता पार्टी का विजय अभियान मजबूती के साथ शुरू हुआ। 1993 में सपा और बीएसपी के साझा मोर्चे के बावजूद बीजेपी का दबदबा साल 1993 के सियासी रण में बीजेपी ने एक बार फिर राकेश सोनकर पर भरोसा जताया और उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया। उस दौर में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन राज्य भर में बेहद ताकतवर माना जा रहा था, लेकिन वह सीसामऊ में बीजेपी का रास्ता नहीं रोक सका। राकेश सोनकर ने 51,949 वोट प्राप्त किए और सपा प्रत्याशी संजय सोनकर को 21,975 वोटों पर ही सीमित कर दिया। इस चुनाव में बीजेपी की जीत का अंतर और भी बड़ा होकर 29,974 वोटों तक पहुंच गया। वामपंथी दल माकपा के उम्मीदवार दौलतराम 11,415 मत पाकर तीसरे पायदान पर रहे थे। 1996 में राकेश सोनकर ने बनाई जीत की ऐतिहासिक हैट्रिक साल 1996 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राकेश सोनकर ने सीसामऊ सीट जीतकर लगातार तीसरी बार सफलता हासिल की और जीत की हैट्रिक पूरी की। इस मुकाबले में राकेश सोनकर को कुल 43,201 वोट मिले। उन्होंने मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे माकपा के दौलतराम को 17,100 वोटों के अंतर से पराजित किया। दौलतराम के खाते में 26,101 मत आए थे। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का आपस में चुनावी तालमेल था। गठबंधन की उम्मीदवार कमला दरियाबादी को 20,996 वोटों के साथ तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा था। 2002 में कांग्रेस के संजीव दरियाबादी ने तोड़ा बीजेपी का विजय रथ साल 2002 के चुनावी दंगल में सीसामऊ के मतदाताओं ने बदलाव का फैसला सुनाया और बीजेपी के लगातार चले आ रहे विजयी सिलसिले पर विराम लगा दिया। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार संजीव दरियाबादी ने 29,482 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार कपूर चंद्र सोनकर को 5,549 वोटों के अंतर से परास्त किया। कपूर चंद्र सोनकर 23,933 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। समाजवादी पार्टी इस मुकाबले में तीसरे पायदान पर खिसक गई थी, जहां उसके प्रत्याशी दुर्गेश वाल्मिकी को केवल 16,878 मत मिले थे। 2007 में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत और बेहद करीबी मुकाबला साल 2007 के आम चुनाव में कांग्रेस के संजीव दरियाबादी ने सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में लगातार दूसरी बार बाजी मारी। इस चुनाव में बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। संजीव दरियाबादी को कुल 25,775 वोट प्राप्त हुए, जबकि बीजेपी की ओर से फिर मैदान में उतरे राकेश सोनकर 24,411 वोट ही हासिल कर सके। संजीव दरियाबादी ने यह कड़ा मुकाबला मात्र 1,364 वोटों के सूक्ष्म अंतर से अपने नाम कर लिया। बहुजन समाज पार्टी इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रही और उसके उम्मीदवार अनिल कुमार उर्फ अनिल सोनकर वारसी को 13,986 वोट हासिल हुए, जबकि सपा प्रत्याशी चंद्रपाल दिवाकर 10,250 मतों के साथ चौथे क्रम पर रहे। 2012 में परिसीमन के बाद सामान्य सीट बनी और इरफान सोलंकी की एंट्री साल 2008 के परिसीमन के बाद सीसामऊ सीट की सामाजिक और भौगोलिक संरचना में बड़ा बदलाव हुआ और यह हलका अनुसूचित जाति के आरक्षण से मुक्त होकर सामान्य सीट बन गया। साल 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने रणनीति बदलते हुए मुस्लिम चेहरे के रूप में हाजी इरफान सोलंकी को मैदान में उतारा। हाजी इरफान सोलंकी ने 56,496 वोट पाकर एकतरफा मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी हनुमान स्वरूप मिश्र को 19,663 मतों के अंतर से पराजित कर दिया। हनुमान स्वरूप मिश्र 36,833 वोटों तक ही पहुंच पाए थे। पिछले दो चुनावों के विजेता और तत्कालीन विधायक कांग्रेस के संजीव दरियाबादी इस बार 22,024 वोट लेकर तीसरे नंबर पर लुढ़क गए, जबकि बीएसपी के उम्मीदवार मोहम्मद वसीक को 15,846 वोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे। 2017 की जबरदस्त मोदी लहर में भी सपा ने बचाया अपना दुर्ग साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूरे राज्य में भारतीय जनता पार्टी की जबर्दस्त लहर देखने को मिली थी, लेकिन सीसामऊ की जमीन पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी ने अपना असर पूरी तरह कायम रखा। इरफान सोलंकी ने 73,030 वोट जुटाकर जीत दर्ज की। बीजेपी के प्रत्याशी सुरेश अवस्थी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी और 67,204 मत हासिल किए, मगर इरफान सोलंकी 5,826 वोटों के फासले से यह चुनावी जंग जीतने में कामयाब रहे। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी तीसरे स्थान पर रही और उसके प्रत्याशी नंद लाल कोरी को 11,949 वोट प्राप्त हुए। 2022 में इरफान सोलंकी की हैट्रिक और विपक्षी दलों का बिखराव साल 2022 के विधानसभा चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी ने सीसामऊ हलके में अपनी जीत की हैट्रिक पूरी कर ली। उन्होंने रिकॉर्ड 79,163 वोट हासिल किए और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सलिल विश्नोई को 12,266 मतों के अंतर से मात दी। सलिल विश्नोई 66,897 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जिसके उम्मीदवार हाजी सुहेल अहमद को केवल 5,616 वोट हासिल हो सके। बहुजन समाज पार्टी की स्थिति और भी कमजोर नजर आई और उसके प्रत्याशी रजनीश तिवारी महज 2,937 वोट जुटा पाए। 2024 के उपचुनाव में नसीम सोलंकी की जीत और सीट का बचाव एक आपराधिक मामले में न्यायालय से सजा सुनाए जाने के कारण हाजी इरफान सोलंकी की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई, जिसके चलते साल 2024 में सीसामऊ सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा। इस नाजुक घड़ी में समाजवादी पार्टी ने इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा। नसीम सोलंकी ने जनता का समर्थन जुटाते हुए 69,714 वोट हासिल किए और भारतीय जनता पार्टी के सुरेश अवस्थी को 8,564 वोटों के अंतर से शिकस्त देकर सीट बचा ली। बीजेपी प्रत्याशी सुरेश अवस्थी को इस उपचुनाव में 61,150 वोट प्राप्त हुए थे। सामाजिक संरचना और 2027 के चुनाव में संभावित सियासी घमासान सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र की सामाजिक बनावट की पड़ताल करें तो यह मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल आबादी वाला इलाका है। इसके साथ ही सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के मतदाता भी यहां चुनावी परिणाम तय करने में बेहद निर्णायक भूमिका निभाते हैं। बीते तीन दशकों में संपन्न हुए 8 आम चुनावों और 1 उपचुनाव के आंकड़े बताते हैं कि समाजवादी पार्टी ने 4 बार, भारतीय जनता पार्टी ने 3 बार और कांग्रेस ने 2 बार यहां फतह हासिल की है। बहुजन समाज पार्टी को इस सीट पर अब तक एक बार भी जीत का स्वाद चखने को नहीं मिला है। साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में नसीम सोलंकी और समाजवादी पार्टी के सामने अपने इस मजबूत गढ़ को बरकरार रखने की सबसे बड़ी चुनौती होगी, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी इस खोई हुई सीट को दोबारा अपने पाले में लाने के लिए पूरा जोर लगाएगी। 2027 के महासमर में एक तरफ बीजेपी और दूसरी तरफ सपा तथा कांग्रेस के संभावित गठबंधन के बीच सीधा और कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है। इसका आप पर असर कानपुर के सीसामऊ हलके का चुनावी मिजाज शहर की स्थानीय समस्याओं, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। • उत्तर प्रदेश के स्तर पर: सीसामऊ सीट पर होने वाली राजनीतिक रस्साकशी राज्य में सत्ताधारी और विपक्षी गठबंधनों की जमीनी पकड़ का वास्तविक पैमाना बनेगी। इससे तय होगा कि शहरी मुस्लिम बहुल सीटों पर विपक्षी गोलबंदी कायम रहती है या सत्ता पक्ष सेंध लगाने में सफल होता है। • कानपुर के स्थानीय निवासियों पर: इस क्षेत्र में लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक टकराव नागरिक विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के आवंटन की गति को निर्धारित करता है। यहां के मतदाताओं के सामने अपने इलाके की सीवरेज, सड़क और कारोबारी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने का अवसर रहता है। • सीसामऊ के आम वोटरों के लिए: 2027 के चुनाव में दोनों प्रमुख खेमों के बीच कांटे की टक्कर होने से स्थानीय मुद्दों पर नेताओं की सक्रियता बढ़ेगी। मतदाताओं को अपनी समस्याओं के निवारण के लिए चुनावी वादों और उम्मीदवारों के पुराने रिकॉर्ड का आकलन करने का सीधा मौका मिलेगा। • व्यापारियों और कारीगरों के संदर्भ में: औद्योगिक शहर का हिस्सा होने के नाते यहां के सुरक्षा माहौल और सरकारी नीतियों का स्थानीय कारोबार पर गहरा असर पड़ता है। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और व्यावसायिक सहूलियतों को लेकर राजनीतिक दलों की योजनाएं अहम रहेंगी। ऐसा क्यों हुआ सीसामऊ विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास परिसीमन, जनसांख्यिकीय बदलाव और स्थानीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती परिस्थितियों से तय हुआ है। • परिसीमन से उपजा सामाजिक बदलाव: साल 2008 में सीट के सामान्य श्रेणी में आने के बाद मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक तादाद ने नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दिया। इसके बाद से ही समाजवादी पार्टी ने इस सामाजिक बनावट का लाभ उठाते हुए अपना आधार मजबूत किया। • सोलंकी परिवार की व्यक्तिगत पकड़: हाजी इरफान सोलंकी ने 2012 से लगातार तीन चुनाव जीतकर जमीनी स्तर पर एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया। इरफान की अयोग्यता के बाद 2024 के उपचुनाव में उनकी पत्नी नसीम सोलंकी की जीत ने यह साबित किया कि इस परिवार का व्यक्तिगत रसूख अब भी बरकरार है। • बीजेपी और कांग्रेस के ऐतिहासिक दौर: 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन की लहर के चलते बीजेपी ने लगातार तीन जीत हासिल की थीं, जबकि 2000 के दशक में कांग्रेस ने गैर-सपा वोटों को जोड़कर दो बार कब्जा जमाया था। समय के साथ कांग्रेस का वोट बैंक खिसकने से मुकाबला सपा और बीजेपी के बीच सिमट गया। • ध्रुवीकरण और चुनावी विकल्प: बहुजन समाज पार्टी के कमजोर पड़ने और कांग्रेस के सपा के साथ संभावित तालमेल के कारण सीसामऊ का चुनावी परिदृश्य दो-ध्रुवीय हो चुका है। यही वजह है कि 2027 में भी यहां सीधी और तीखी टक्कर बनने की परिस्थितियां तैयार हो रही हैं। सवाल-जवाब 1. सीसामऊ विधानसभा सीट किस जिले और लोकसभा क्षेत्र में आती है? सीसामऊ विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित है और यह कानपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है, जिसकी विधानसभा संख्या 213 है। 2. सीसामऊ सीट सामान्य श्रेणी में कब परिवर्तित हुई थी? साल 2008 तक सीसामऊ विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित थी, जिसके बाद परिसीमन प्रक्रिया में इसे सामान्य सीट बना दिया गया। 3. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत की हैट्रिक कब लगाई थी? बीजेपी के उम्मीदवार राकेश सोनकर ने 1991, 1993 और 1996 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार जीत दर्ज करके हैट्रिक बनाई थी। 4. कांग्रेस पार्टी ने सीसामऊ सीट पर कब-कब जीत दर्ज की? कांग्रेस के प्रत्याशी संजीव दरियाबादी ने साल 2002 और साल 2007 के विधानसभा चुनावों में लगातार दो बार जीत हासिल की थी। 5. हाजी इरफान सोलंकी ने सीसामऊ में अपनी जीत की शुरुआत कब की थी? हाजी इरफान सोलंकी ने परिसीमन के बाद साल 2012 के चुनाव में पहली बार जीत दर्ज की और इसके बाद 2017 तथा 2022 में भी लगातार विजयी रहे। 6. साल 2024 में सीसामऊ सीट पर उपचुनाव क्यों कराया गया था? एक आपराधिक मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद विधायक इरफान सोलंकी की सदस्यता रद्द हो गई थी, जिसके कारण 2024 में उपचुनाव हुआ। 7. 2024 के उपचुनाव में किसने जीत हासिल की और जीत का अंतर क्या था? उपचुनाव में सपा प्रत्याशी नसीम सोलंकी ने 69,714 वोट प्राप्त कर बीजेपी के सुरेश अवस्थी को 8,564 वोटों के अंतर से हराया था। 8. पिछले तीन दशकों में सीसामऊ में विभिन्न दलों का जीत का रिकॉर्ड क्या रहा है? 1991 से 2024 के दौरान हुए 8 आम चुनावों और 1 उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने 4, बीजेपी ने 3 और कांग्रेस ने 2 बार जीत दर्ज की है, जबकि बीएसपी को एक भी जीत नहीं मिली। https://trendkia.com/uttar-pradesh/kanpur-ke-sisamau-men-tina-dashaka-ka-siyasi-sapharanama-aura-agale-chunavi-ghamasana-ki-bisata-53099 TrendKia — Har trend, sabse pehle.