कानपुर में बवासीर की घरेलू सिकाई पड़ी भारी, शरीर में फंसा डेढ़ किलो का पत्थर डॉक्टरों ने निकाला कानपुर में बवासीर की सिकाई करते समय संतुलन बिगड़ने से 45 वर्षीय मजदूर के शरीर में करीब 1.5 किलो का पत्थर चला गया, जिसे डॉक्टरों ने बिना पेट खोले सुरक्षित बाहर निकाला। उत्तर प्रदेश के कानपुर में बवासीर के असहनीय दर्द से निजात पाने के लिए आजमाया गया एक देसी नुस्खा मरीज की जान पर बन आया। सरसैया घाट के रहने वाले लगभग 45 वर्षीय एक श्रमिक के शरीर में सिकाई के दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से करीब डेढ़ किलो वजनी पत्थर अंदर घुस गया। इस अजीबोगरीब हादसे से सहमे मजदूर ने घबराहट और लोकलाज के चलते दो दिनों तक यह बात अपने परिवार तक से छिपाए रखी। जब पेट और गुदा मार्ग का दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, तब जाकर वह चिकित्सा सहायता लेने अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने जटिल प्रक्रिया अपनाकर उसे नई जिंदगी दी। साल भर से था बवासीर का कष्ट, घरेलू सलाह पर शुरू की सिकाई कानपुर जिले के सरसैया घाट इलाके का निवासी यह व्यक्ति पेशे से मजदूर है और पिछले करीब एक साल से बवासीर की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। लंबे समय तक इलाज कराने के बाद भी जब उसे कोई स्थायी आराम नहीं मिला, तो उसने किसी योग्य मेडिकल विशेषज्ञ को दिखाने के बजाय आसपास के लोगों द्वारा बताए गए घरेलू नुस्खों का सहारा लेना शुरू कर दिया। स्थानीय स्तर पर किसी ने उसे सलाह दी थी कि खौलते पानी में पत्थर को गर्म करके उसकी भाप और गर्माहट से प्रभावित हिस्से की नियमित सिकाई की जाए। इस तरीके को अपनाते हुए वह पिछले करीब 15 दिनों से लगातार गर्म पत्थर से सिकाई कर रहा था। शुरुआती दिनों में थोड़ा दर्द कम होने का अहसास हुआ, जिसके चलते उसने इस खतरनाक प्रक्रिया को जारी रखा। सिकाई के दौरान फिसला संतुलन, 48 घंटे तक असहनीय पीड़ा सहता रहा मजदूर हादसा करीब छह दिन पहले शनिवार के रोज पेश आया। उस दिन भी वह हमेशा की तरह गर्म पत्थर के सहारे सिकाई कर रहा था कि अचानक उसका शारीरिक संतुलन बिगड़ गया और वह पत्थर पर गिर पड़ा। दबाव और असंतुलन की वजह से करीब 1.5 किलो भारी पत्थर सीधे उसके गुदा मार्ग से होते हुए शरीर के अंदर प्रविष्ट हो गया। घटना इतनी अप्रत्याशित और असहज करने वाली थी कि वह बुरी तरह डर गया। सामाजिक शर्मिंदगी और झिझक के कारण उसने अपने परिजनों या पड़ोसियों को इस अनहोनी की भनक तक नहीं लगने दी। उसने सोचा कि शायद तकलीफ अपने आप ठीक हो जाएगी, लेकिन समय बीतने के साथ दर्द बढ़ता चला गया। करीब 48 घंटों तक वह इस जानलेवा दर्द को चुपचाप घूंट पीकर सहता रहा। सोमवार तक स्थिति यह हो गई कि पेट में तेज मरोड़ और असहनीय पीड़ा के चलते उसका उठना-बैठना दूभर हो गया, जिसके बाद मजबूर होकर वह अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचा। एक्स-रे देखकर स्तब्ध रह गए डॉक्टर, आंतों तक पहुंचने का था भारी खतरा अस्पताल पहुंचने पर सीनियर सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने मरीज की गंभीर हालत का जायजा लिया। मरीज की परेशानी और लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल प्रभाव से पेल्विक हिस्से और पेट का एक्स-रे कराया। जब एक्स-रे रिपोर्ट सामने आई, तो जांच दल की आंखें फटी की फटी रह गईं। मरीज के गुदा मार्ग के ठीक ऊपर एक बहुत बड़ा और भारी पत्थर फंसा हुआ साफ दिखाई दे रहा था। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि पत्थर थोड़ा सा भी और ऊपर खिसक जाता, तो वह सीधे आंतों को फाड़ सकता था या आंतों में गंभीर रुकावट पैदा कर सकता था। ऐसी विषम परिस्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए पेट पर बड़ा चीरा लगाकर जटिल सर्जरी करनी पड़ती, जिससे जान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता। सर्जिकल टीम ने बिना पेट खोले निकाला पत्थर, खतरे से बाहर हुआ मरीज मामले की गंभीरता और आपात स्थिति को भांपते हुए सीनियर सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा और उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने बिना एक पल गंवाए ऑपरेशन करने का फैसला लिया। डॉक्टरों ने बेहद कुशलता और सतर्कता बरतते हुए पेट में कोई बड़ा चीरा लगाए बिना ही नीचे के रास्ते से लगभग डेढ़ किलो वजनी पत्थर को सुरक्षित खींचकर बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। इस सफल प्रक्रिया के बाद मरीज को गहन चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि मरीज की हालत अब पूरी तरह सामान्य है और वह खतरे से बाहर आ चुका है। बिना सलाह घरेलू नुस्खे अपनाने से बचें, झिझक छोड़कर समय पर कराएं इलाज इस अप्रत्याशित मामले के सफल समाधान के बाद डॉ. प्रशांत मिश्रा ने आम जनता को गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी शारीरिक व्याधि का खुद से इलाज करने या बिना योग्य डॉक्टरों के मार्गदर्शन के नीम-हकीमी अथवा खतरनाक घरेलू टोटके अपनाने से बचना चाहिए। बवासीर जैसी संवेदनशील बीमारियों में लोग अक्सर शर्म और संकोच के चलते अपनी समस्या डॉक्टरों से छिपाते हैं और झोलाछाप या देसी तरीकों में उलझ जाते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित हो सकते हैं। सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करने पर साधारण दवाओं या सुरक्षित प्रक्रियाओं से बीमारी का सटीक निदान संभव है, जबकि देरी और लापरवाही जान को भारी जोखिम में डाल देती है। इसका आप पर असर असुरक्षित घरेलू नुस्खों से जानलेवा शारीरिक चोट का खतरा पैदा हो सकता है। • भारत में: बिना डॉक्टरी सलाह के किए जाने वाले घरेलू प्रयोग गंभीर आपातकालीन सर्जरी की नौबत ला सकते हैं। बवासीर जैसी सामान्य बीमारियों में झिझक छोड़कर तुरंत पंजीकृत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। • कानपुर में: सरसैया घाट और आसपास के निवासियों को नीम-हकीमी सलाह के बजाय नजदीकी सरकारी या निजी अस्पतालों की शरण लेनी चाहिए। किसी भी अप्रत्याशित हादसे की स्थिति में शर्म के कारण इलाज में देरी करने से बचें। • मरीजों के लिए: असहज या संवेदनशील बीमारियों के लक्षणों को परिजनों और चिकित्सकों से कतई न छिपाएं। समय पर अस्पताल पहुंचने से पेट की जटिल चीरा सर्जरी और जानलेवा संक्रमण से बचा जा सकता है। • जागरूकता के लिए: उबलते पानी या अत्यधिक गर्म वस्तुओं से सिकाई करने के टोटके अंगों को गंभीर रूप से जला या क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। चिकित्सा विज्ञान में प्रमाणित तकनीकों का ही सदैव उपयोग करें। ऐसा क्यों हुआ यह घटना बीमारी से लंबे समय तक आराम न मिलने और अवैज्ञानिक देसी तरीकों पर अत्यधिक विश्वास के कारण घटित हुई। सामाजिक झिझक ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया। • अनपेक्षित शारीरिक असंतुलन: मजदूर उबलते पानी में गर्म किए गए लगभग 1.5 किलो के पत्थर के ऊपर बैठकर भाप और गर्माहट ले रहा था। संतुलन बिगड़ने के कारण वह सीधे पत्थर पर जा गिरा और वह गुदा मार्ग के अंदर घुस गया। • अवैज्ञानिक सलाह पर भरोसा: बवासीर के एक साल पुराने दर्द से राहत पाने के लिए उसने किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करने के बजाय स्थानीय सलाह पर 15 दिनों से यह असुरक्षित तरीका अपना रखा था। • सामाजिक शर्म और झिझक: हादसे के बाद अत्यधिक संकोच और भय की वजह से उसने 48 घंटे तक परिजनों से बात छिपाई, जिससे अंदरूनी सूजन और पेट का दर्द बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। • सर्जिकल आपातकाल का दबाव: पत्थर के और ऊपर खिसक कर आंतों में फंसने या उन्हें फाड़ने की आशंका बन गई थी, जिसकी वजह से सर्जिकल टीम को बिना देरी किए तत्काल ऑपरेशन करना पड़ा। सवाल-जवाब 1. कानपुर में मजदूर के शरीर में पत्थर कैसे घुस गया? मजदूर बवासीर के दर्द से राहत पाने के लिए गर्म पत्थर से सिकाई कर रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से करीब 1.5 किलो का पत्थर उसके शरीर के अंदर चला गया। 2. मरीज ने अस्पताल जाने में 48 घंटे की देरी क्यों की? घटना के बाद मरीज अत्यधिक डर और सामाजिक शर्मिंदगी के कारण चुप रहा और दो दिनों तक परिजनों से भी यह बात छिपाए रखी। 3. डॉक्टरों ने शरीर से पत्थर को कैसे निकाला? सीनियर सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा और उनकी टीम ने बिना पेट में चीरा लगाए नीचे के रास्ते से बेहद सावधानीपूर्वक पत्थर को बाहर निकाल लिया। 4. ऑपरेशन के बाद मरीज की वर्तमान स्थिति कैसी है? ऑपरेशन के बाद मरीज को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत अब सामान्य और खतरे से बाहर है। 5. डॉक्टरों ने बवासीर के मरीजों को क्या सावधानी बरतने की सलाह दी है? डॉक्टरों ने लोगों को खुद से इलाज करने या खतरनाक घरेलू टोटके आजमाने से बचने और किसी भी बीमारी में समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराने की सलाह दी है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/kanpur-men-bavasira-ki-gharelu-sikai-pari-bhari-sharira-men-phnsa-derha-kilo-ka-patthara-doktaron-ne-nikala-45013 TrendKia — Har trend, sabse pehle.