कानपुर में जाम से मुक्ति के लिए 14 व्यस्त रास्तों पर उतरेंगे ट्रैफिक मार्शल, पुलिस ने तैयार किया बड़ा एक्शन प्लान कानपुर ट्रैफिक पुलिस ने शहर के 14 सबसे भीड़भाड़ वाले रास्तों पर ट्रैफिक मार्शल तैनात करने और मुख्य चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाने का फैसला किया है। कानपुर शहर के लोगों को आए दिन लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने एक नया और व्यापक एक्शन प्लान धरातल पर उतारा है। कानपुर की सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या और संकरे रास्तों के कारण उत्पन्न होने वाली यातायात की समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों ने कमर कस ली है। इस योजना के अंतर्गत शहर के 14 सबसे अधिक व्यस्त और जाम की समस्या से प्रभावित रूटों पर विशेष रूप से ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही, शहर के प्रमुख चौराहों पर सामान्य दिनों की तुलना में अतिरिक्त पुलिस बल को भी तैनात किया गया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहनों की आवाजाही बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलती रहे और स्थानीय नागरिकों को सड़क पर घंटों तक फंसे रहकर अपना कीमती समय बर्बाद न करना पड़े। मुख्य रूटों की निगरानी और अधिकारियों का दौरा डीसीपी ट्रैफिक रविंद्र कुमार ने इस पूरी कार्ययोजना के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि इस नई व्यवस्था की लगातार कड़ी निगरानी की जा रही है और जहां भी व्यावहारिक मुश्किलें सामने आएंगी, वहां जरूरत के अनुसार बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए वे खुद सप्ताह में कम से कम तीन दिन शहर के विभिन्न चौराहों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान यदि किसी भी चौराहे या रूट पर यातायात प्रबंधन में कोई कमी या ढिलाई पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा। कानपुर के जिन मार्गों और चौराहों पर वाहनों का सबसे अधिक दबाव देखा जाता है, उनमें रामादेवी, बड़ा चौराहा, घंटाघर, जरीब चौकी, नौबस्ता और टाटमिल जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनका ध्येय केवल सड़कों से जाम हटाना नहीं है, बल्कि लोगों के दैनिक सफर को पहले से कहीं अधिक सुगम, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाना है। टाटमिल चौराहे की चुनौती और बसों पर कड़ा एक्शन शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार टाटमिल चौराहा काफी समय से ट्रैफिक पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि झकरकटी बस अड्डे के पास बने पुल पर रोडवेज और निजी बसें अक्सर बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं। इन बसों के पुल पर ही खड़े रहने के कारण पीछे से आने वाले वाहनों के लिए रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है और पूरा यातायात ठप हो जाता है। इसका सबसे बुरा असर उन यात्रियों पर पड़ता है जिन्हें समय पर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पहुंचकर अपनी ट्रेन या बस पकड़नी होती है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए ट्रैफिक विभाग ने सख्त दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है। डीसीपी ट्रैफिक रविंद्र कुमार ने बताया कि पिछले एक महीने की अवधि में सड़क पर अवैध रूप से खड़े होकर यातायात को बाधित करने वाली लगभग आठ हजार बसों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस संबंध में उन्होंने रोडवेज के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित पत्र भेजे हैं और उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराया है, लेकिन इसके बावजूद अब तक अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। वहीं, दूसरी ओर रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार ने एक अलग सुझाव देते हुए कहा है कि यदि टाटमिल चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नलों की समय-सीमा को थोड़ा घटा दिया जाए, तो चौराहे पर वाहनों का जमावड़ा कम हो सकता है और जाम की स्थिति में काफी सुधार आ सकता है। अतिक्रमण हटाओ अभियान और नए रूट डायवर्जन शहर के अंदरूनी हिस्सों में सड़कों को चौड़ा और साफ रखने के लिए पुलिस ने कई व्यावहारिक कदम उठाए हैं। जरीब चौकी और घंटाघर जैसे घने व्यापारिक क्षेत्रों में दुकानों के सामने रस्सियां बांधी गई हैं, ताकि दुकानदार या ग्राहक सड़क की सीमा का अतिक्रमण न कर सकें। इसके अतिरिक्त, रावतपुर, गोल चौराहा और कल्याणपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में ई-रिक्शा और ऑटो-रिक्शा के कारण लगने वाले जाम को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इन वाहनों के लिए मुख्य चौराहों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर अलग से स्टैंड निर्धारित किए गए हैं ताकि वे चौराहे के मुहाने पर खड़े होकर रास्ता न रोकें। इसके अलावा, अत्यधिक व्यस्त चौराहों के आसपास से ठेला और रेहड़ी लगाने वाले दुकानदारों को हटाया गया है ताकि सड़क का पूरा हिस्सा वाहनों के चलने के लिए खाली रहे। कई जगहों पर वाहनों के दबाव को बांटने के लिए नए मोड़ बनाए गए हैं और जरूरत के हिसाब से रूट डायवर्जन लागू किया गया है। ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एक बार झकरकटी बस अड्डे का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न हो जाने और सिग्नेचर सिटी बस अड्डे से बसों का सुचारु संचालन शुरू होने के बाद शहर के मध्य हिस्से में बसों की आवाजाही काफी कम हो जाएगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इन समन्वित प्रयासों के जरिए आने वाले समय में कानपुर वासियों को जाम की इस बड़ी समस्या से पूरी तरह निजात मिल सकेगी। इसका आप पर असर • भारत भर में: यह दर्शाता है कि कैसे बढ़ते शहरों में यातायात सुचारु करने के लिए प्रशासन और पुलिस बल कड़े प्रशासनिक और जमीनी फैसले ले रहे हैं। • कानपुर में: शहर के 14 व्यस्ततम मार्गों पर यात्रा करने वाले नागरिकों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी, हालांकि ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को नए निर्धारित स्टैंड नियमों का पालन करना होगा। सवाल-जवाब 1. कानपुर में यातायात सुधारने के लिए क्या नई व्यवस्था शुरू की गई है? कानपुर में जाम से राहत दिलाने के लिए 14 सबसे व्यस्त और संवेदनशील रूटों पर ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती की गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। 2. टाटमिल चौराहे पर जाम की मुख्य वजह क्या है? टाटमिल चौराहे पर झकरकटी बस अड्डे के पास बने पुल पर अक्सर रोडवेज और निजी बसों के खड़े रहने से यातायात बाधित होता है। 3. अवैध रूप से खड़ी होने वाली बसों के खिलाफ पुलिस ने क्या कार्रवाई की है? यातायात पुलिस ने सड़क पर अवैध रूप से बसें खड़ी करने और ट्रैफिक रोकने के आरोप में पिछले एक महीने में लगभग आठ हजार बसों का चालान किया है। 4. ई-रिक्शा और ऑटो के लिए क्या नए नियम लागू किए गए हैं? कल्याणपुर, रावतपुर और गोल चौराहा जैसे क्षेत्रों में ई-रिक्शा और ऑटो के लिए चौराहों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर स्टैंड तय किए गए हैं। 5. व्यापारिक क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने के लिए क्या किया गया है? जरीब चौकी और घंटाघर जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों के सामने रस्सियां बांधकर अतिक्रमण रोकने का प्रयास किया गया है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/kanpur-men-jama-se-mukti-ke-lie-14-vyasta-raston-para-utarenge-traffic-marshal-pulisa-ne-taiyara-kiya-bara-ekshana-plana-10344 TrendKia — Har trend, sabse pehle.