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  "type": "article",
  "title": "कानपुर में नकली एंटी रैबीज वैक्सीन का भंडाफोड़, तीन कारोबारियों पर दर्ज हुआ केस",
  "summary": "कानपुर के थोक बाजार से दिल्ली, आगरा, हरदोई और उन्नाव तक नकली एंटी रैबीज वैक्सीन सप्लाई करने के मामले में औषधि विभाग की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में जीवनरक्षक दवाओं में मिलावट और फर्जीवाड़े से जुड़ा एक बेहद गंभीर प्रकरण उजागर हुआ है। कुत्ते या किसी अन्य संक्रमित जानवर के काटने पर लगाई जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन के कथित नकली कारोबार की जांच के बाद स्थानीय पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। औषधि प्रशासन विभाग की सघन जांच पड़ताल के उपरांत कलक्टरगंज थाना पुलिस ने बिरहाना रोड और एक्सप्रेस रोड की दो प्रतिष्ठित मानी जाने वाली दवा फर्मों से संबद्ध तीन कारोबारियों के खिलाफ जालसाजी, जीवन के लिए घातक नकली दवाओं का क्रय-विक्रय और फर्जी कागजात तैयार करने के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे साक्ष्यों से यह खुलासा हुआ है कि इस कथित नकली वैक्सीन की खेप केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के आगरा, हरदोई और उन्नाव जनपदों तक भेजी जा चुकी थी।\n\nदिल्ली में पकड़ी गई खेप ने खोला गिरोह का रास्ता\nइस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश तब संभव हुआ जब राजधानी दिल्ली के ड्रग कंट्रोल विभाग ने भागीरथ पैलेस स्थित वीएस फार्मास्यूटिकल्स नामक प्रतिष्ठान पर औचक कार्रवाई की। इस छापेमारी के दौरान टीम ने 'अभयरब' ब्रांड की कथित नकली एंटी रैबीज वैक्सीन की 481 शीशियां यानी वॉयल बरामद कीं। जब बरामद खेप के बैच नंबर, चालान और खरीद स्रोतों की तकनीकी छानबीन की गई, तो इसकी सप्लाई के तार कानपुर के बिरहाना रोड स्थित न्यू आरजे एजेंसीज से जुड़े पाए गए। दिल्ली से मिली इस पुख्ता खुफिया जानकारी के तत्काल बाद कानपुर के ड्रग विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए 23 सितंबर को बिरहाना रोड स्थित आरजे एजेंसीज के ठिकाने पर छापा मारा। हालांकि जांच दल के पहुंचने से पहले ही दुकान बंद कर संचालक मौके से नदारद हो चुके थे, जिसके चलते अधिकारियों ने दुकान को मौके पर ही सील कर दिया। इसके बाद 25 सितंबर को सील खोलकर पुनः तलाशी अभियान चलाया गया, किंतु दुकान के भीतर से वैक्सीन का कोई भौतिक भंडार नहीं मिल सका।\n\nदस्तावेजों की पड़ताल से खुली अंतरराज्यीय सप्लाई चेन\nदुकान के भीतर भौतिक रूप से वैक्सीन का स्टॉक न मिलने के बावजूद ड्रग विभाग के निरीक्षकों ने हार नहीं मानी और फर्म के खरीद-बिक्री संबंधी बही-खातों, लेजर तथा बिलिंग अभिलेखों की गहनता से जांच शुरू की। इन दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ कि कथित अभयरब एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति दिल्ली की थोक मंडी के अतिरिक्त आगरा, हरदोई और उन्नाव के विभिन्न मेडिकल स्टोरों को भी धड़ल्ले से की गई थी। कागजों की कड़ियों को आगे जोड़ने पर पता चला कि आरजे एजेंसीज ने इस विवादास्पद वैक्सीन की खरीद कानपुर के ही एक्सप्रेस रोड स्थित एलिक्सिर क्योर शॉप से की थी। इस सुराग के आधार पर ड्रग विभाग की टीम ने एक्सप्रेस रोड स्थित उक्त दुकान पर भी तत्काल छापा मारा, लेकिन यह प्रतिष्ठान भी पहले से ही बंद पाया गया। 25 सितंबर को दोबारा की गई जांच के दौरान यहां भी वैक्सीन की कोई शीशी हाथ नहीं लगी, जिससे यह अंदेशा गहरा गया कि कार्रवाई की भनक लगते ही स्टॉक ठिकाने लगा दिया गया था।\n\nफर्जी इनवॉइस और अभिलेखों के जरिए चल रहा था खेल\nड्रग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दोनों फर्मों के वित्तीय और व्यावसायिक रिकॉर्ड के परीक्षण में ऐसे कई दस्तावेज हाथ लगे हैं, जो कथित नकली वैक्सीन की खरीद और बिक्री के व्यवस्थित नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब करते हैं। जांच अधिकारी अब फर्मों द्वारा जारी किए गए जाली बिलों, फर्जी चालानों और बोगस परिवहन दस्तावेजों को इस मामले का सबसे अहम साक्ष्य मानकर विस्तृत विवेचना कर रहे हैं। यद्यपि छापेमारी के दौरान भौतिक रूप से वैक्सीन बरामद नहीं की जा सकी, लेकिन कानून के तहत कागजी साक्ष्यों, जीएसटी विवरणों और सप्लाई रिकॉर्ड्स को ठोस आधार बनाते हुए पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।\n\nदंपति समेत तीन मुख्य संचालकों पर शिकंजा\nऔषधि निरीक्षक देवयानी दुबे की ओर से दी गई लिखित तहरीर के आधार पर कलक्टरगंज पुलिस ने तीन नामजद अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। नामजद आरोपियों में बिरहाना रोड स्थित आरजे एजेंसीज के संचालक दंपति बलजीत कौर और राजिन्दर सिंह शामिल हैं, जबकि तीसरा आरोपी एक्सप्रेस रोड-कैनाल पटरी, हरबंशमोहाल स्थित एलिक्सिर क्योर शॉप का संचालक तरनदीप सिंह है। डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने प्रकरण की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, मानव जीवन के लिए संकटापन्न मिलावटी औषधियों के विक्रय और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़ी विभिन्न सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि विवेचना तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और साक्ष्य संकलन के आधार पर जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।\n\nकुत्तों के हमलों के बीच थोक बाजार में बढ़ी मांग का उठाया फायदा\nऔषधि विभाग के अधिकारियों द्वारा जुटाए गए बाजार आंकड़ों से यह भी तथ्य प्रकाश में आया है कि कानपुर के बिरहाना रोड स्थित थोक दवा बाजार में हर महीने तकरीबन 5 से 6 हजार एंटी रैबीज इंजेक्शन की सामान्य खपत होती है। पिछले कुछ महीनों में आवारा और आक्रामक कुत्तों के काटने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है, जिसके चलते अस्पतालों और खुदरा दुकानों में इस टीके की मांग में भारी उछाल आया था। जांच एजेंसियां इस गंभीर पहलू की भी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि क्या दवा माफिया ने बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर अथवा संभावित कृत्रिम कमी का अनुचित लाभ उठाने के लिए यह नकली नेटवर्क सक्रिय किया था। इसके साथ ही इस बात की भी सटीक गणना की जा रही है कि नकली टीके की कितनी कुल खेप बाजार में खपाई गई और यह किन-किन सुदूर ग्रामीण व शहरी प्राथमिक केंद्रों तक पहुंची।\n\nबिरहाना रोड के दवा कारोबार पर पहले भी लग चुके हैं दाग\nकानपुर के दवा बाजार में नकली या संदिग्ध औषधियों के अवैध धंधे का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी ड्रग विभाग यहां कई बड़ी कार्रवाइयां कर चुका है। बीते वर्ष अक्टूबर माह में इसी बिरहाना रोड की एक अन्य दवा फर्म पर मारे गए छापे के दौरान करीब पांच लाख रुपये मूल्य की संदिग्ध नकली दवाएं जब्त की गई थीं। उस समय की गई फोरेंसिक जांच में यह सामने आया था कि गिरोह दवाओं पर हूबहू असली जैसी एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित कर बाजार में उतार रहा था। केवल इतना ही नहीं, नशीले कफ सिरप के तौर पर इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित कोडीन सिरप की अवैध तस्करी के मामले में भी कानपुर से देश के विभिन्न राज्यों तक फैले विशाल नेटवर्क की जांच हुई थी। अब इंसानी जान बचाने वाली एंटी रैबीज जैसी अति संवेदनशील वैक्सीन में इस तरह के गोरखधंधे के उजागर होने से दवा व्यापार की समग्र निगरानी व्यवस्था, ऑडिट तंत्र और ड्रग इंस्पेक्टरों की फील्ड चेकिंग पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nनकली एंटी रैबीज वैक्सीन का बाजार में पहुंचना मरीज के जीवन के लिए जानलेवा जोखिम पैदा करता है क्योंकि कुत्ता काटने पर अप्रभावी टीका लगने से रेबीज संक्रमण को रोका नहीं जा सकता।\n\n• उत्तर प्रदेश में: कानपुर, आगरा, हरदोई और उन्नाव के मरीजों व तीमारदारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने द्वारा लगवाए गए 'अभयरब' इंजेक्शन के बिल और बैच नंबर की नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से जांच कराएं। किसी अनधिकृत या संदिग्ध मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की बजाय केवल प्रमाणित व अधिकृत फार्मेसी से ही इंजेक्शन लें।\n• भारत में: दिल्ली के भागीरथ पैलेस समेत अंतरराज्यीय बाजारों में दवा खरीदने वाले थोक व खुदरा विक्रेता अपने स्टॉक के इनवॉइस का मिलान सीधे अधिकृत निर्माता के सप्लाई नेटवर्क से करें। किसी भी दवा पर छपे बैच नंबर, एमआरपी या पैकिंग में मामूली अंतर दिखने पर तुरंत स्थानीय औषधि नियंत्रण विभाग को सूचित करें।\n• मरीजों के लिए सलाह: यदि किसी व्यक्ति को हाल ही में जानवर के काटने के बाद टीका लगा है और संदेह हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से मिलकर वैक्सीन के रिकॉर्ड की समीक्षा करवाएं। रेबीज एक शत-प्रतिशत जानलेवा बीमारी है, इसलिए सही और प्रमाणित टीका लगना जीवन रक्षा के लिए अनिवार्य है।\n• दवा दुकानों के लिए नियम: सभी मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए आवश्यक है कि वे जीवनरक्षक टीकों की खरीद केवल अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटरों से पक्के बिल पर ही करें। बिना वैध चालान या संदिग्ध स्रोतों से दवा खरीदना कानूनी अपराध है और इससे लाइसेंस रद्द होने के साथ जेल की सजा हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मामला तब सामने आया जब दिल्ली के थोक बाजार में नकली टीकों की खेप पकड़ी गई और उसके सप्लायरों के संबंध कानपुर के दवा बाजार से जुड़े मिले।\n\n• प्रत्यक्ष कारण: दिल्ली के भागीरथ पैलेस स्थित वीएस फार्मास्यूटिकल्स से 481 शीशियां कथित नकली अभयरब वैक्सीन बरामद की गईं, जिसकी जांच में माल का स्रोत कानपुर का बिरहाना रोड पाया गया। इस इनपुट के आधार पर कानपुर औषधि विभाग ने छापेमारी कर खरीद-बिक्री के फर्जीवाड़े का खुलासा किया।\n• बाजार की परिस्थितियां: हाल के महीनों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में तेजी आने से एंटी रैबीज टीकों की मांग अचानक बढ़ गई थी, जिससे थोक बाजार में हर महीने 5 से 6 हजार टीकों की खपत हो रही थी। मुनाफाखोरों ने बाजार में पैदा हुई इस भारी मांग और संभावित कमी का फायदा उठाकर नकली खेप की सप्लाई शुरू की।\n• पूर्व पृष्ठभूमि: कानपुर का बिरहाना रोड दवा बाजार पहले भी विवादों में रहा है, जहां पिछले साल अक्टूबर में पांच लाख रुपये की नकली दवाएं और पूर्व में अवैध कोडीन कफ सिरप सिंडिकेट पकड़ा जा चुका था। औषधि व्यापार में कागजी निगरानी और औचक भौतिक निरीक्षण की ढिलाई से ऐसे अवैध तत्व बार-बार सक्रिय हो जाते हैं।\n• आगे की संभावित कार्रवाई: औषधि विभाग अब आगरा, उन्नाव और हरदोई के मेडिकल स्टोरों पर पहुंची वैक्सीन की खेप की जब्ती करेगा। साथ ही पुलिस नामजद तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और नकली दवा बनाने वाली मुख्य फैक्ट्री के स्रोत का पता लगाने के लिए रिमांड की प्रक्रिया शुरू करेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कानपुर में किन फर्मों और व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है?\nबिरहाना रोड की आरजे एजेंसीज के संचालक दंपति बलजीत कौर व राजिन्दर सिंह और एक्सप्रेस रोड स्थित एलिक्सिर क्योर शॉप के संचालक तरनदीप सिंह पर मुकदमा दर्ज हुआ है।\n\n2. कथित नकली एंटी रैबीज वैक्सीन किस ब्रांड के नाम से बेची जा रही थी?\nयह कथित नकली वैक्सीन 'अभयरब' (Abhayrab) ब्रांड के नाम से बाजार में सप्लाई की जा रही थी।\n\n3. इस फर्जीवाड़े की शुरुआत में दिल्ली से कितनी वैक्सीन बरामद हुई थी?\nदिल्ली के भागीरथ पैलेस स्थित वीएस फार्मास्यूटिकल्स से औषधि विभाग ने कथित नकली वैक्सीन की 481 वॉयल जब्त की थीं।\n\n4. कानपुर से किन-किन शहरों में इस वैक्सीन की खेप भेजी गई थी?\nजांच दस्तावेजों के अनुसार यह कथित नकली वैक्सीन दिल्ली के अलावा आगरा, हरदोई और उन्नाव के मेडिकल स्टोरों तक भेजी गई थी।\n\n5. कानपुर के थोक बाजार में हर महीने एंटी रैबीज टीकों की कितनी मांग रहती है?\nऔषधि विभाग के अनुसार बिरहाना रोड थोक दवा बाजार में हर महीने औसतन 5 से 6 हजार एंटी रैबीज इंजेक्शन बिकते हैं।\n\n6. आरोपियों के खिलाफ किस पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है?\nऔषधि निरीक्षक देवयानी दुबे की तहरीर पर कानपुर के कलक्टरगंज थाने में भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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