# कानपुर में आरटीई दाखिलों में सुस्ती पर प्रशासन सख्त, 22 निजी स्कूलों को मिला अल्टीमेटम

> उत्तर प्रदेश के कानपुर में शिक्षा के अधिकार के तहत आवंटित बच्चों के दाखिले पूरे न करने पर 22 निजी स्कूलों को जिला प्रशासन ने तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। आदेश न मानने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/kanpur-men-rte-dakhilon-men-susti-para-prashasana-sakhta-22-niji-skulon-ko-mila-altimetama-50689 · **Language:** Hindi
**Tags:** कानपुर आरटीई, महेंद्र सिंह तंवर, उत्तर प्रदेश शिक्षा, निजी स्कूल कार्रवाई, बेसिक शिक्षा विभाग

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में शिक्षा के अधिकार अधिनियम यानी आरटीई के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को दाखिला न देने वाले संस्थानों पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरटीई के तहत आवंटन पाने वाले हर बच्चे को उसका अधिकार मिले और पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए। शैक्षिक सत्र 2026-27 के दौरान शत-प्रतिशत प्रवेश प्रक्रिया पूरी न करने वाले 22 निजी विद्यालयों को जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर रडार पर लिया गया है। प्रशासन ने इन संस्थानों को साफ चेतावनी दी है कि वे तय समयसीमा के भीतर सभी लंबित प्रवेश पूरे करें, अन्यथा उनके विरुद्ध सख्त विधिक कदम उठाए जाएंगे।

 

## तीन दिन का कड़ा अल्टीमेटम और सीधी निगरानी
 जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने 22 अक्टूबर को बुलाई गई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शैक्षिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत आरटीई के तहत हो रहे प्रवेशों की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। इस बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुल 22 विद्यालयों द्वारा आवंटित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को यह निर्देश जारी किए कि वे इन सभी लंबित दाखिलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराएं। जिला प्रशासन की मंशा है कि पात्र छात्रों को स्कूल आवंटन के पश्चात दाखिले के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। इसके लिए विभाग द्वारा स्कूलों की सतत निगरानी की जा रही है और प्रत्येक विद्यालय में आवंटित बच्चों की कुल संख्या तथा वास्तविक रूप से प्रवेश पाने वाले छात्रों के आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि समय पर स्कूल में दाखिला न मिलने से बच्चों की आरंभिक शिक्षा और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि अभिभावकों को भी दफ्तरों और स्कूलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी प्रशासनिक संवेदनशीलता के तहत सभी संबंधित विद्यालयों को तीन दिन के भीतर सभी पेंडिंग एडमिशन निपटाने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

 

## बड़े निजी स्कूल भी शामिल, प्रबंधन की बढ़ी मुश्किलें
 कानपुर प्रशासन द्वारा जारी इस सूची में कई प्रतिष्ठित निजी स्कूल समूहों की शाखाएं भी शामिल हैं, जिससे स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। हालांकि इस सूची में शामिल होने का मतलब यह कतई नहीं है कि सभी संस्थानों की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने का अंतिम निर्णय हो चुका है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का पालन न करने पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को विशेष तौर पर यह मॉनिटरिंग करने को कहा गया है कि वे हर एक स्कूल के दावों और मैदानी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट करें। हालांकि प्रशासन द्वारा सार्वजनिक की गई शुरुआती जानकारियों में अभी प्रत्येक स्कूल के हिस्से के लंबित दाखिलों की अलग-अलग संख्या का खुलासा नहीं किया गया है, जिससे यह साफ नहीं है कि किस विशेष संस्थान में कितने बच्चों के प्रवेश बाकी हैं। बावजूद इसके, कार्रवाई का एकमात्र आधार शत-प्रतिशत प्रवेश के लक्ष्य को पूरा न करना ही तय किया गया है और सभी को नोटिस की तर्ज पर तीन दिन का वक्त दिया गया है।

 

## आरटीई योजना का उद्देश्य और प्रक्रिया की रूपरेखा
 शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी आरटीई देश के कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण संबल है, जिसके तहत पात्र छात्रों को नियमानुसार निजी और गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा का अवसर मिलता है। इस पूरी व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह है कि आर्थिक तंगी की वजह से कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रह जाए। प्रक्रिया के नियम के अनुसार, जब ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से किसी बच्चे को कोई विशेष विद्यालय आवंटित हो जाता है, तो उस स्कूल की यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वह बच्चे का दाखिला अपने यहां सुनिश्चित करे। यदि आवंटन मिलने के बाद भी स्कूल प्रबंधन आनाकानी करता है या प्रवेश देने से मना करता है, तो गरीब परिवारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। कानपुर में इस बार जिला प्रशासन ने इसी लापरवाही पर नकेल कसने के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित की है, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

 

## समयसीमा समाप्त होने के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
 प्रशासन द्वारा दी गई तीन दिन की मोहलत की अवधि पूरी होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर से स्कूलवार आंकड़ों की समीक्षा करेगा और देखेगा कि किस विद्यालय ने अपने यहाँ लंबित पड़े दाखिलों को पूरा किया है और किसने आदेश की अनदेखी की है। यदि कोई स्कूल इस तय समय सीमा के भीतर भी आरटीई के तहत आवंटित बच्चों को प्रवेश देने में नाकाम रहता है, तो उसके खिलाफ मान्यता प्रत्यारोपण या निरस्तीकरण की नियमानुसार वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कानपुर जिला प्रशासन का संदेश इस मामले में बेहद कड़ा और स्पष्ट है कि शिक्षा के अधिकार जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या ये 22 विद्यालय समय रहते अपनी गलती सुधारते हैं या प्रशासन को सचमुच किसी बड़ी कार्रवाई का कदम उठाना पड़ता है।

## इसका आप पर असर
कानपुर में आरटीई दाखिलों को लेकर जिला प्रशासन की इस सख्ती का सीधा असर गरीब परिवारों और निजी स्कूलों पर पड़ेगा।

- **कानपुर में:** जिन बच्चों को आरटीई के तहत स्कूलों में सीटें आवंटित हुई हैं लेकिन दाखिला नहीं मिल रहा था, उन्हें अब तीन दिन के भीतर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अभिभावकों को स्कूलों के अनावश्यक चक्कर काटने से राहत मिल सकती है और उनके बच्चों की पढ़ाई समय पर शुरू हो सकेगी।

- **भारत में:** देश भर के अन्य जिलों के प्रशासनिक अमले भी इस तरह की कार्रवाई से सबक ले सकते हैं, जिससे शिक्षा का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले निजी स्कूलों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
जिला प्रशासन द्वारा कानपुर के 22 निजी स्कूलों के खिलाफ यह सख्त कदम उठाने के पीछे कई प्रशासनिक कारण और जमीनी हालात जिम्मेदार हैं।

- **देरी से प्रभावित पढ़ाई:** आरटीई के तहत चयनित बच्चों को समय पर प्रवेश न मिलने से उनकी शुरुआती पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी, जिस पर प्रशासन ने संज्ञान लिया।

- **समीक्षा बैठक के आंकड़े:** 22 अक्टूबर को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि इन संस्थानों ने शत-प्रतिशत प्रवेश का लक्ष्य पूरा नहीं किया है।

- **अधिकारों का हनन:** गरीब और वंचित वर्ग के पात्र बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित किए जाने की शिकायतों के बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. कानपुर में कितने निजी स्कूलों को अल्टीमेटम दिया गया है?
कानपुर में आरटीई दाखिलों में लापरवाही बरतने वाले 22 निजी स्कूलों को अल्टीमेटम दिया गया है।

### 2. प्रशासन ने स्कूलों को कितना समय दिया है?
जिला प्रशासन ने सभी लंबित दाखिलों को पूरा करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

### 3. यह कार्रवाई किस अधिकारी के निर्देश पर की गई है?
यह कार्रवाई कानपुर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर की गई है।

### 4. निर्देशों का पालन न करने पर क्या सजा मिल सकती है?
समयसीमा के भीतर प्रवेश न पूरा करने पर संबंधित स्कूलों की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।

### 5. यह समीक्षा बैठक कब आयोजित की गई थी?
यह समीक्षा बैठक 22 अक्टूबर को आयोजित की गई थी।

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