कानपुर में टेंट हाउस संचालकों से लाखों की ठगी, शादी और भंडारे के नाम पर सामान उठाकर कबाड़ में बेचा कानपुर में चाचा-भतीजे ने वैवाहिक कार्यक्रमों और भंडारों का झांसा देकर टेंट संचालकों से करीब 9 लाख रुपये का सामान किराए पर लिया और उसे कबाड़ में बेच दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में किराये पर टेंट और कैटरिंग सामग्री देने वाले व्यवसायियों को निशाना बनाकर की गई एक अनोखी जालसाजी सामने आई है। यहां पारिवारिक उत्सवों और धार्मिक भोज यानी भंडारे के आयोजन का झूठा बहाना बनाकर टेंट का कीमती सामान उठाया गया और बाद में उसे स्क्रैप कारोबारियों के पास बेच दिया गया। इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम देने के आरोप में पुलिस ने सुमित और अमित नाम के दो व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया है, जो रिश्ते में चाचा और भतीजे बताए गए हैं। शुरुआती पड़ताल के अनुसार, लगभग पांच किलोमीटर के इलाके में सक्रिय रहकर आरोपियों ने अनेक दुकानों से तकरीबन 9 लाख रुपये की संपत्ति हड़प ली। शादी और भंडारे का बहाना बनाकर जीता भरोसा कानपुर के संबंधित इलाकों में संचालित टेंट प्रतिष्ठानों पर दोनों आरोपी सुनियोजित ढंग से पहुंचते थे। वे दुकानदारों को अपने घर या परिवार में वैवाहिक समारोह अथवा बड़े स्तर पर धार्मिक भंडारे का आयोजन होने की जानकारी देते थे। बातचीत के दौरान उनका व्यवहार इतना सहज और आश्वस्त करने वाला होता था कि दुकानदार उनके कहे पर बिना किसी गहन छानबीन के यकीन कर लेते थे। बुकिंग के नाम पर वे बड़े-बड़े धातु के भगोने, भारी कढ़ाइयां, परात, भोजन परोसने के बर्तन, बैठने की दरियां और शामियाने से जुड़ा अन्य महत्वपूर्ण साजो-सामान चुनते थे। पेशगी रकम देकर तैयार किया विश्वास का जाल जालसाजी की इस कार्यप्रणाली में दुकानदारों का भरोसा पूरी तरह हासिल करने के लिए आरोपी कुछ अग्रिम राशि यानी टोकन मनी तुरंत जमा कर देते थे। थोड़ी पेशगी हाथ में आते ही टेंट कारोबारियों को यह तसल्ली हो जाती थी कि ग्राहक वास्तविक है और कार्यक्रम संपन्न होने के बाद बाकी किराया चुकाकर सारा सामान लौटा देगा। इसी भरोसे की आड़ में आरोपी अलग-अलग दुकानों से भारी मात्रा में कैटरिंग सामग्री और टेंट का सामान गाड़ियों में लदवाकर ले जाते रहे। समारोह स्थल के बजाय सीधे कबाड़ मंडी पहुंचा सामान जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस सामान को मांगलिक कार्यों और भंडारे में इस्तेमाल करने के लिए लिया गया था, वह किसी भी कार्यक्रम स्थल पर कभी पहुंचा ही नहीं। इसके विपरीत, आरोपियों ने उस पूरे सामान को सीधे कबाड़ के रूप में औने-पौने दामों में ठिकाने लगा दिया। टेंट व्यापारी अपने अनुबंध की समयसीमा समाप्त होने के बाद सामान की वापसी की राह देखते रहे, जबकि आरोपी कथित तौर पर कई टन वजनी बर्तनों और धातु सामग्री को कबाड़ियों को बेचकर नकदी समेट रहे थे। वापसी की मियाद बीतने पर फूटा भांडा इस फर्जीवाड़े की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद एक टेंट व्यवसायी का सामान वापस नहीं आया। जब पीड़ित ने अपने स्तर पर संपर्क साधने और खोजबीन करने का प्रयास किया, तो सामने आया कि आसपास के अन्य व्यापारी भी ऐसी ही स्थिति से जूझ रहे हैं। लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई टेंट संचालकों ने पुष्टि की कि उन्हीं लोगों ने भंडारे और शादी का हवाला देकर भारी बर्तन और दरियां उठाई थीं और अब उनका कोई अता-पता नहीं है। जब सभी पीड़ितों ने मिलकर अपने नुकसान का आकलन किया, तो ठगी का यह आंकड़ा करीब 9 लाख रुपये तक पहुंच गया। पुलिस ने दर्ज किया मामला, दोनों आरोपी गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित कारोबारियों ने एकजुट होकर स्थानीय थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया और साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी कर सुमित और अमित को धर दबोचा। पुलिस हिरासत में दोनों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि गायब किए गए सामान की बरामदगी की दिशा में प्रगति हो सके। नेटवर्क और पुराने आपराधिक इतिहास की पड़ताल कानपुर पुलिस अब इस मामले के सभी पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि पांच किलोमीटर के दायरे में कुल कितने व्यापारी इस ठगी का शिकार बने और कबाड़ के रूप में बेचे गए सामान से कुल कितनी अवैध कमाई की गई। इसके अतिरिक्त, पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या इस पूरे प्रकरण में केवल चाचा-भतीजे ही शामिल थे या उनके साथ सामान को खपाने वाला कोई संगठित गिरोह अथवा कबाड़ माफिया भी मिला हुआ था। दोनों आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने पूर्व में भी अन्य क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है या नहीं। इसका आप पर असर इस घटना से छोटे व्यापारियों और किराये पर सामान देने वाले कारोबारियों के लिए सुरक्षा और सत्यापन के महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। • उत्तर प्रदेश में: राज्य भर के टेंट और कैटरिंग कारोबारियों को अब अनजान ग्राहकों को बिना ठोस पहचान पत्र के सामान देने से बचना होगा। बुकिंग के समय आधार कार्ड और स्थायी पते का सत्यापन अनिवार्य करना नुकसान से बचा सकता है। • कानपुर में: स्थानीय टेंट और बर्तन व्यापारियों को अपने नेटवर्क में एक-दूसरे के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है ताकि संदिग्ध ग्राहकों की जानकारी तुरंत साझा हो सके। करीब पांच किलोमीटर के दायरे में हुए इस नुकसान से व्यापारियों में अतिरिक्त सतर्कता बढ़ गई है। • समारोह आयोजकों के लिए: वास्तविक ग्राहकों को आने वाले दिनों में टेंट सामग्री किराये पर लेते समय सख्त सत्यापन प्रक्रियाओं और अधिक अग्रिम जमानत राशि का सामना करना पड़ सकता है। इससे सामान्य ग्राहकों के लिए बुकिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक हो सकती है। • कबाड़ कारोबारियों के लिए: स्क्रैप डीलरों को चेतावनी दी गई है कि बिना वैध बिल के भारी व्यावसायिक बर्तनों और कैटरिंग सामग्री की खरीद उन्हें कानूनी मुश्किल में डाल सकती है। चोरी या ठगी का सामान खरीदने पर वे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह धोखाधड़ी विश्वास पर आधारित पारंपरिक व्यापारिक प्रणाली और पहचान सत्यापन की कमी के कारण संभव हो सकी। • पहचान की कमी: टेंट व्यवसाय में अक्सर मौखिक बातचीत और छोटी पेशगी के आधार पर लाखों का सामान सौंप दिया जाता है। आरोपियों ने इसी अनौपचारिक व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाया और बिना किसी पक्के पहचान प्रमाण के सामान हासिल कर लिया। • मांगलिक आयोजनों का बहाना: भारतीय समाज में शादी और भंडारे जैसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों पर लोग आसानी से शक नहीं करते। इस सामाजिक भरोसे की आड़ में आरोपियों ने दुकानदारों की सहानुभूति और व्यावसायिक विश्वास दोनों को जीता। • धातु के बर्तनों का बाजार: बड़े भगोने, कढ़ाइयां और परात वजनदार धातुओं से बनते हैं जिनकी कबाड़ बाजार में तुरंत नकद कीमत मिल जाती है। इसी कारण आरोपियों ने इलेक्ट्रॉनिक सामान के बजाय आसानी से बिकने वाले बर्तनों को निशाना बनाया। सवाल-जवाब 1. कानपुर में टेंट संचालकों के साथ किस प्रकार की ठगी की गई? आरोपियों ने शादी और भंडारे का बहाना बनाकर टेंट का कीमती सामान किराये पर लिया और फिर उसे समारोह में ले जाने के बजाय कबाड़ में बेच दिया। 2. इस मामले में किन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है? पुलिस ने सुमित और अमित नाम के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जो आपस में चाचा और भतीजे हैं। 3. ठगे गए सामान की कुल अनुमानित कीमत कितनी बताई गई है? पुलिस जांच और पीड़ितों की शिकायतों के अनुसार गायब किए गए सामान की कुल कीमत करीब 9 लाख रुपये आंकी गई है। 4. यह ठगी शहर के कितने इलाके में फैली हुई थी? आरोपियों ने लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित अलग-अलग टेंट कारोबारियों को अपना शिकार बनाया था। 5. व्यापारियों को आरोपियों पर शक कैसे हुआ? निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब सामान वापस नहीं लौटा और अन्य कारोबारियों ने भी ऐसी ही शिकायत की, तब ठगी की बात सामने आई। 6. पुलिस अब इस मामले में क्या जांच कर रही है? पुलिस कबाड़ खरीदने वालों की भूमिका, सामान की बरामदगी और आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। 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