# कुशीनगर में मांसाहारी भोजन के बाद तीन बच्चे गंभीर, अस्पताल ले जाते समय 7 वर्षीय बालक ने तोड़ा दम

> उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में रात के भोजन में चिकन खाने के बाद एक ही परिवार के तीन मासूमों की हालत बिगड़ गई, जिसमें सात साल के बच्चे की मौत हो गई।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/kushinagar-men-mansahari-bhojana-ke-bada-tina-bachche-gnbhira-aspatala-le-jate-samaya-7-varshiya-balaka-ne-tora-dama-53963 · **Language:** Hindi
**Tags:** कुशीनगर, उत्तर प्रदेश, फूड प्वाइजनिंग, रामकोला, स्वास्थ्य विभाग, मासूम की मौत

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां रामकोला थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले बरवा बाजार गांव के भरपट्टी टोले में एक ही घर के तीन मासूम बच्चों का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। परिजनों के अनुसार, रात को चिकन खाने के बाद यह समस्या शुरू हुई थी। सुबह होते-होते स्थिति इतनी नाजुक हो गई कि अस्पताल ले जाने के दौरान सात साल के एक बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस अनहोनी के बाद से पीड़ित परिवार में मातम पसरा हुआ है, जबकि बाकी बच्चों के उपचार और मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य महकमे ने गांव में डेरा डाल दिया है।

## सुबह अचानक बिगड़ने लगी मासूमों की तबीयत
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने पूरी घटना का विवरण देते हुए बताया कि रात के समय परिवार में चिकन बनाया गया था। भोजन कुल 8 सदस्यों ने किया था, जिनमें ये तीनों बच्चे भी शामिल थे। भोजन करने के बाद सभी लोग सामान्य रूप से सोने चले गए थे। किसी को भी रात में किसी तरह की असहजता महसूस नहीं हुई। अगली सुबह जब बच्चे जागे, तो एक-एक करके तीनों की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। बच्चों को पेट में तेज दर्द, असहजता और अन्य परेशानियां होने लगीं। बच्चों की लगातार बिगड़ती हालत देख घरवाले घबरा गए और बिना कोई देर किए तीनों को लेकर पास के रामकोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचे।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने फौरन बच्चों की स्थिति को देखते हुए प्राथमिक चिकित्सा शुरू की। जांच के दौरान आकाश नामक बच्चे की शारीरिक स्थिति काफी ज्यादा नाजुक पाई गई, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके साथ ही अन्य बच्चों को भी उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए ले जाया जाने लगा। लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में 7 साल के मासूम अखिलेश की सांसें थम गईं। चिकित्सकों द्वारा बच्चे को मृत घोषित करते ही परिजनों की चीख-पुकार से अस्पताल परिसर गूंज उठा। मासूम की असमय मौत से पूरे परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।

## स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा, लिए गए नमूने
एक बच्चे की दुखद मौत और अन्य मासूमों की हालत बिगड़ने की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोटवा सीएचसी के प्रभारी रजनीश श्रीवास्तव और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज राय की अगुवाई में चिकित्सकों का एक दल तुरंत बरवा बाजार के भरपट्टी टोले पहुंचा। मेडिकल टीम ने गांव में पहुंचकर बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की गहन पड़ताल की और घर के अन्य सदस्यों का भी शारीरिक परीक्षण किया, जिन्होंने उस रात वही भोजन ग्रहण किया था।

इस पूरे मामले पर कोटवा सीएचसी के प्रभारी रजनीश श्रीवास्तव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे परिवार और प्रभावित बच्चों की लगातार निगरानी कर रही हैं। चिकित्सा दल ने चिकित्सीय जांच और परीक्षण के लिए जरूरी नमूने एकत्र कर लिए हैं। उन्होंने आगे बताया कि भोजन विषाक्तता (फूड प्वाइजनिंग) की सटीक वैज्ञानिक पुष्टि के लिए बच्चे के स्टूल और उस समय तैयार किए गए भोजन के नमूने की आवश्यकता होती है। हालांकि, मौके पर भोजन का अवशेष उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बावजूद विभाग ने उपलब्ध मेडिकल सैंपल हासिल कर उन्हें आगे की जांच के लिए सेंटिनल लैब भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी। इधर, घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
इस घटना से भोजन स्वच्छता और बच्चों में फूड पॉइजनिंग के शुरुआती लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की सख्त जरूरत सामने आई है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य विषाक्तता की घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। परिजनों को सलाह दी जा रही है कि किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद लक्षण दिखने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें।
- **कुशीनगर में:** रामकोला और आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य टीमें ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ा रही हैं और हालात पर नजर रखे हुए हैं। स्थानीय निवासियों को मांस पकाने और सुरक्षित रखने के बुनियादी नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
- **आम परिवारों के लिए:** बासी, अधपके या दूषित मांस के सेवन से पेट में गंभीर संक्रमण और निर्जलीकरण का खतरा बच्चों में बहुत तेजी से बढ़ता है। बच्चों में उल्टी, दस्त या पेट दर्द के लक्षण दिखने पर बिना समय गंवाए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
- **चिकित्सीय जांच को लेकर:** ऐसे मामलों में भोजन और जैविक नमूनों की जांच से बीमारी के सटीक जीवाणु का पता चलता है। परिजनों को संदिग्ध भोजन के अवशेष सुरक्षित रखने चाहिए ताकि लैब जांच में सही कारण सामने आ सके।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना परिवार द्वारा रात के भोजन में तैयार चिकन खाने के बाद अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने और संभावित खाद्य संक्रमण के चलते हुई।

- **संभावित खाद्य विषाक्तता:** भोजन में किसी जीवाणु संदूषण अथवा खराब मांस के इस्तेमाल के चलते विषाक्तता फैलने का संदेह है। रात को 8 लोगों द्वारा भोजन करने के बाद सुबह बच्चों में इसके तीव्र लक्षण दिखाई दिए।
- **बच्चों की संवेदनशीलता:** वयस्कों की तुलना में छोटे बच्चों का पाचन और प्रतिरक्षा तंत्र संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। यही कारण रहा कि उसी भोजन को खाने के बावजूद बच्चों की स्थिति जानलेवा स्तर तक पहुंच गई।
- **नमूनों की जांच प्रक्रिया:** बीमारी के सटीक कारण की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए आवश्यक स्टूल और मेडिकल नमूने एकत्र कर सेंटिनल लैब भेजे गए हैं। घटना स्थल पर भोजन के अवशेष उपलब्ध न होने के कारण लैब रिपोर्ट आने तक आधिकारिक कारण की प्रतीक्षा की जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना उत्तर प्रदेश के किस जिले और गांव की है?
यह दुखद घटना उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में रामकोला थाना क्षेत्र अंतर्गत बरवा बाजार गांव के भरपट्टी टोले में हुई।

### 2. भोजन के बाद कितने लोग बीमार पड़े और किसकी जान गई?
चिकन कुल 8 लोगों ने खाया था, जिसमें से तीन बच्चों की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ी और 7 वर्षीय अखिलेश की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।

### 3. पीड़ित बच्चों को सबसे पहले किस अस्पताल में ले जाया गया?
परिजनों ने तीनों बच्चों को सबसे पहले रामकोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया था।

### 4. स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए क्या कदम उठाए हैं?
कोटवा सीएचसी प्रभारी और वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर जांच की और आवश्यक मेडिकल नमूने सेंटिनल लैब भेजे हैं।

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