{
  "type": "article",
  "title": "लखीमपुर खीरी में शारदा नदी निगल रही घर और खेत, राजेश्वरी ने कहा जल्द डूब सकता है उनका मकान",
  "summary": "लखीमपुर खीरी के ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का कटान फिर तेज हो गया है, जिसमें खेत और मकान लगातार नदी में समा रहे हैं। गांव की महिला राजेश्वरी का कहना है कि उनका घर कभी भी नदी में डूब सकता है, जबकि प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से नदी का जलस्तर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है और हर बार पानी घटते ही किनारे के गांवों में कटान तेज हो जाता है। देखते ही देखते खेत और घर नदी की धारा में समा रहे हैं, जिससे तराई इलाके के लोगों की रातों की नींद उड़ गई है।\n\nपहाड़ों की बारिश ने बढ़ाई तराई की मुसीबत\nपहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का सीधा असर मैदानी इलाकों की नदियों पर पड़ रहा है। बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और इसी उतार-चढ़ाव के बीच शारदा नदी का कटान और तेज हो जाता है। जैसे ही पानी उतरता है, किनारे की मिट्टी कमजोर पड़ जाती है और कृषि योग्य जमीन का बड़ा हिस्सा चंद घंटों में नदी में विलीन हो जाता है। इलाके में कई मकान भी नदी की धारा में बहते नजर आए, जिसका वीडियो भी सामने आया। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता नहीं दिख रहा, जिससे ग्रामीणों की नाराजगी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।\n\nग्रंट नंबर 12 गांव में सैकड़ों घर उजड़े\nनिघासन तहसील क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव की तस्वीर इस तबाही को सबसे साफ ढंग से बयां करती है। इस गांव की कुल आबादी करीब 2200 है, लेकिन पिछले साल आई बाढ़ में यहां के करीब 200 मकान नदी में समा चुके हैं। अब एक बार फिर शारदा नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कटान धीरे-धीरे बढ़ते हुए गांव की सीमा के और करीब आता जा रहा है, और लगातार मकान नदी की धारा में गिर रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही।\n\nकभी भी नदी में समा सकता है मकान\nगांव की महिला राजेश्वरी ने बताया कि शारदा नदी का कटान पिछले साल से लगातार जारी है और इस साल पिछले 15 दिन से रुक-रुक कर कटान हो रहा है। उन्होंने बताया कि एक मकान पहले ही नदी में समा चुका है, जबकि किसानों की हजारों एकड़ जमीन भी शारदा की धारा में कट चुकी है, जिससे लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।\n\nराजेश्वरी ने आगे कहा, \"मेरा मकान बिल्कुल नदी के किनारे आ गया है, किसी दिन भी यह नदी में समा सकता है।\" उनका कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में उनके घर का वजूद भी पूरी तरह मिट सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। जिन परिवारों के मकान पिछले साल नदी में समा गए थे, वे लोग आज भी बंधे पर झोपड़ी डालकर किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे हैं।\n\nक्या 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा गुस्सा?\nसाल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, और इस बढ़ते आक्रोश का असर चुनाव पर भी पड़ सकता है। राजेश्वरी बताती हैं कि क्षेत्रीय विधायक इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे, इसलिए इस बार गांव के लोग भी वोट देते समय ध्यान नहीं देंगे। उनका कहना है कि जो कोई भी असल में उनकी मदद करेगा, गांव वाले अपना भरोसा उसी पर जताएंगे। लगातार हो रहे कटान के चलते ग्रामीणों में कहीं ना कहीं गहरी नाराजगी साफ देखी जा रही है, और आने वाले दिनों में यह मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: नदी किनारे बसे इलाकों में कटान और बाढ़ से जमीन व मकान खोने का खतरा लगातार बना रहता है, ऐसे में प्रशासन से राहत और पुनर्वास योजनाओं की मांग तेज हो सकती है।\n• लखीमपुर खीरी में: ग्रंट नंबर 12 जैसे गांवों के लोगों को अपने घर और खेत खोने का सीधा खतरा है, कई परिवार पहले ही बंधे पर झोपड़ी डालकर रहने को मजबूर हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शारदा नदी का कटान कहां हो रहा है?\nउत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की निघासन तहसील के ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का कटान लगातार जारी है।\n\n2. गांव की आबादी और नुकसान कितना है?\nगांव की कुल आबादी करीब 2200 है और पिछले साल आई बाढ़ में करीब 200 मकान नदी में समा चुके हैं।\n\n3. राजेश्वरी ने अपने मकान को लेकर क्या बताया?\nराजेश्वरी ने बताया कि उनका मकान बिल्कुल नदी किनारे आ गया है और यह कभी भी नदी में समा सकता है, जबकि प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।\n\n4. कटान की समस्या का मुख्य कारण क्या है?\nपहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ता है और पानी घटने पर शारदा नदी का कटान तेज हो जाता है।\n\n5. क्या इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा?\nराजेश्वरी के मुताबिक 2027 के विधानसभा चुनाव में ग्रामीण उसी को वोट देंगे जो असल में उनकी मदद करेगा, क्योंकि मौजूदा विधायक इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे।\n\n6. पिछले साल बेघर हुए लोग अभी कहां रह रहे हैं?\nपिछले साल जिनके मकान नदी में समा गए थे, वे लोग आज भी बंधे पर झोपड़ी डालकर जीवन यापन कर रहे हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/uttar-pradesh/lakhimpur-kheri-men-sharda-nadi-nigala-rahi-ghara-aura-kheta-rajeshwari-ne-kaha-jalda-duba-sakata-hai-unaka-makana-9505",
  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-21",
  "tags": [
    "शारदा नदी कटान",
    "लखीमपुर खीरी बाढ़",
    "निघासन तहसील",
    "ग्रंट नंबर 12",
    "तराई क्षेत्र बाढ़",
    "उत्तर प्रदेश नदी कटान"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}